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बंगाल की राजनीति में आया एक और उफान

बंगाल की राजनीति में आया एक और उफान

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद भी एक बार फिर से राजनीति गर्म हो गई है। प्रदेश की मुख्यमंत्री तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी लगातार केंद्र सरकार और भाजपा को चुनौती दे रहीं हैं। उनके चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस को अखिल भारतीय स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रहे हैं और ममता बनर्जी को प्रधानमंत्री पद का दावेदार बताया जा रहा है। इसी के बीच प्रदेश में भाजपा के साथ सत्तासीन पार्टी तृणमूल कांग्रेस के साथ उठा-पटक भी चल रही है। तृणमूल कांग्रेस के नेता दावा कर रहे हैं कि भाजपा के 30 से ज्यादा विधायक उनके संपर्क में हैं और वे बहुत जल्दी ही भाजपा छोड़ देंगे। इसमें कहां तक सच्चाई है, ये तो अभी तक साफ नहीं हो पाया है, मगर मुकुल रॉय के भाजपा छोडऩे के बाद इन अटकलों को और रफ्तार मिल गई है। कहा जा रहा है कि मुकुल रॉय भाजपा के विधायकों को तोडऩे में लग गए हैं।

हालांकि तृणमूल में शामिल होने का सिलसिला शुरू हो चुका है। बीरभूम जिले के सैंथिया विधानसभा के बोनोग्राम ग्राम पंचायत इलाके में शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने वाले करीब 300 कार्यकर्ताओं को सत्तारूढ़ पार्टी में शामिल करने से पहले उनका शुद्धिकरण किया गया। पंचायत के मार्कोला, दहिरा, पाकुरिया और बोलसुंडा के 66 परिवारों के लगभग 300 सक्रिय भाजपा कार्यकर्ता शुक्रवार (18 जून) को ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गये। शामिल होने से पहले ये सभी सक्रिय भाजपा कार्यकर्ता तृणमूल कांग्रेस के बोनोग्राम क्षेत्रीय कार्यालय के सामने चार घंटे तक बैठे रहे।

चार घंटे बाद उनकी पंचायत के मुखिया पर गंगाजल छिड़ककर उसके तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के पूर्व शुद्ध किया गया। सत्तारूढ़ दल उन सभी निर्वाचन क्षेत्रों में पिछड़ रहा था, जहां हाल के विधानसभा चुनावों में सक्रिय भाजपा कार्यकर्ता और समर्थक तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए थे।

दलबदल करने वाले भाजपा कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे क्षेत्र के विकास के हित में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए हैं। स्थानीय ग्राम पंचायत के प्रधान तुषार कांति मंडल ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता और समर्थक, हमारे पार्टी कार्यालय के सामने धरने पर बैठे थे, वे भाजपा छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने का आग्रह कर रहे थे। यहां बताना प्रासंगिक होगा कि तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच बंगाल में तकरार आम है। कई जिलों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की जनसभा के बाद उस मैदान और रास्ते को गंगाजल से तृणमूल समर्थकों और कार्यकर्ताओं ने पवित्र किया था। कुछ जगहों पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी ममता की रैली के बाद ऐसा ही किया। उधर प्रदेश भाजपा ने मुकुल रॉय पर भी हमला शुरू कर दिया है। चार साल तक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में काम करने वाले तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी के बेहद करीबी नेता रहे मुकुल रॉय की विधानसभा सदस्यता खत्म कराने के लिए भगवा दल ने अपनी पूरी ताकत लगा दी है।

बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी तमाम कागजी कार्रवाई कर रहे हैं। बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि पार्टी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा से मुकुल रॉय को अयोग्य ठहराने की अपनी मांग के समर्थन में कागजी कार्रवाई पूरी कर ली है। बंगाल चुनाव के परिणाम आने और प्रदेश में ममता बनर्जी के नेतृत्व में लगातार तीसरी बार टीएमसी की सरकार बनने के बाद मुकुल रॉय हाल ही में बीजेपी से तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गये थे। शुभेंदु अधिकारी गुरुवार को विधानसभा सचिवालय में दस्तावेज जमा नहीं कर सके थे, क्योंकि संबंधित कार्यालय बंद था। शुक्रवार को उन्होंने तमाम कागजात जमा करवा दिये हैं और बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष से मांग की है कि कृष्णनगर उत्तर विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतने वाले मुकुल रॉय की सदस्यता निरस्त की जाये।

इस पर तृणमूल कांग्रेस ने शुभेंदु अधिकारी से सवाल किया है कि क्या भाजपा नेता ने अपने पिता शिशिर अधिकारी को लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने को कहा है, जो बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी बदलकर बीजेपी में शामिल हो गये थे। मुकुल रॉय हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर कृष्णानगर उत्तर सीट से विजयी हुए थे और 11 जून को वह तृणमूल में लौट गये। मुकुल रॉय ने वर्ष 2017 में ममता बनर्जी की पार्टी छोडऩे के बाद भाजपा का दामन थाम लिया था। सदन में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने संवाददाताओं से कहा कि हमने भाजपा के कमल चिह्न पर चुनाव जीते मुकुल रॉय को विधानसभा से अयोग्य ठहराने की मांग स्पीकर से की है। तृणमूल कांग्रेस की राज्य इकाई के महासचिव कुणाल घोष ने कहा है कि कानून अपना काम करेगा, लेकिन शुभेंदु अधिकारी को इस मुद्दे पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि शुभेंदु को ऐसी मांगें करने से पहले आईना देखना चाहिए। क्या उन्होंने कभी अपने पिता शिशिर अधिकारी को लोकसभा की सदस्यता छोडऩे के लिए कहा है, जो उन्होंने कांथी क्षेत्र से तृणमूल टिकट पर जीता था? आपको बता दूं कि बंगाल चुनाव 2021 के परिणामों की घोषणा के एक महीने बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) छोड़कर अपनी पुरानी पार्टी तृणमूल कांग्रेस में लौटने वाले मुकुल रॉय की सुरक्षा केंद्र सरकार ने वापस ले ली है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के नेता मुकुल रॉय की सुरक्षा वापस ले ली है। इसके आदेश भी जारी कर दिये गये हैं। बताया गया है कि इस आशय का आदेश 16 जून को ही जारी कर दिये गये थे। गृह मंत्रालय का आदेश मिलने के बाद केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने मुकुल रॉय की सुरक्षा में तैनात अपने जवानों को वापस बुलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी । मुकुल रॉय को केंद्र सरकार ने जेड श्रेणी की सुरक्षा उस वक्त दी थी, जब वह भारतीय जनता पार्टी में थे।

भाजपा में मुकुल रॉय को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया था। बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 से पहले उन्हें जेड श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गयी थी। ऐसी उम्मीद थी कि इस बार ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस सरकार को भाजपा सत्ता से बेदखल कर देगी। इसलिए भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने जबर्दस्त प्रचार अभियान चलाया था।चुनाव परिणाम भाजपा की आशा के विपरीत आये। हालांकि पार्टी 3 सीट से 77 सीट पर पहुंच गयी, लेकिन सत्ता से काफी दूर रही। बंगाल में लगातार तीसरी बार ममता बनर्जी की अगुवाई में तृणमूल की सरकार बनने के बाद मुकुल रॉय ने एक बार फिर पलटी मारी और टीएमसी सुप्रीमो की मौजूदगी में घर वापसी की।

मुकुल के पार्टी में लौटते ही ममता बनर्जी की बंगाल सरकार ने उन्हें वाई श्रेणी की सुरक्षा प्रदान करने का एलान कर दिया। वहीं, मुकुल रॉय ने कहा कि आने वाले दिनों में भारतीय जनता पार्टी में कोई नहीं रह जायेगा। खबर है कि भाजपा में शामिल होने के बाद जिस तरह से उन्होंने तृणमूल में तोडफ़ोड़ मचायी थी, अब टीएमसी के लिए बीजेपी में तोडफ़ोड़ मचाने वाले हैं। उल्लेखनीय है कि तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के बाद मुकुल रॉय ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को चि_ी लिखकर कहा था कि उनकी केंद्रीय सुरक्षा वापस ले ली जाये। इसके बाद ही गृह मंत्रालय ने यह कदम उठाया है। चुनाव से पहले उन्हें जेड श्रेणी की सुरक्षा दी गयी थी। बंगाल में जब चुनाव के बाद हिंसा शुरू हुई, तो बीजेपी के सभी विधायकों को केंद्रीय सुरक्षा प्रदान की गयी थी। कहा जा रहा है कि लोकसभा चुनाव 2019 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शानदार प्रदर्शन में अहम भूमिका निभाने वाले मुकुल रॉय अब भगवा दल को बंगाल में तगड़ा झटका देने वाले हैं।

चार साल तक बीजेपी के लिए काम करने वाले मुकुल रॉय ने तृणमूल कांग्रेस में वापसी कर ली है और अब वह भाजपा को कमजोर करने के लिए चक्रव्यूह रचने में व्यस्त हो गये हैं। बताया जा रहा है कि भाजपा में शामिल होने के बाद तृणमूल कांग्रेस के कई बड़े नेताओं को भगवा दल में लाने वाले मुकुल रॉय अब भाजपा में तोडफ़ोड़ करने की तैयारी में जुट गये हैं। भाजपा में काम कर रहे अपने करीबी नेताओं और विधायकों से वह टेलीफोन पर लगातार संपर्क में हैं। बताया जा रहा है कि कम से कम 24 विधायक मुकुल के साथ हैं, जो कभी भी पाला बदल सकते हैं। मुकुल रॉय का दावा तो यहां तक है कि कम-से-कम 30 विधायक और 3 सांसद भारतीय जनता पार्टी का साथ छोड़कर तृणमूल कांग्रेस का दामन थामने के लिए तैयार हैं।

बंगाल चुनाव 2021 से ऐन पहले बड़े पैमाने पर तृणमूल कांग्रेस छोड़कर लोग भाजपा में शामिल हुए थे। चुनाव परिणाम आशा के अनुरूप नहीं आये और ममता बनर्जी एक बार फिर सत्ता में लौटीं। ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस की सत्ता में वापसी के साथ ही भाजपा में भागकर आये टीएमसी के नेता अब अपनी पुरानी पार्टी में लौटने को बेताब हैं। कई लोगों ने बाकायदा लिखित आवेदन तक दिया है। कुछ लोगों ने पाला बदलने के लिए पार्टी सुप्रीमो से माफी मांगी है। वहीं, कुछ ऐसे नेता भी हैं, जो ममता के करीबी नेताओं के जरिये पैरवी लगा रहे हैं। हालांकि, ममता बनर्जी ने मुकुल रॉय की तृणमूल में वापसी के दिन ही कहा था कि वह गद्दारों और मीरजाफरों को पार्टी में वापस नहीं लेंगी। साथ ही यह भी संकेत दिये थे कि तृणमूल के प्रति सहानुभूति रखने वाले नेताओं को पार्टी में लिया जा सकता है। ममता ने खुद कहा था कि हां, अभी कई और लोग भाजपा छोड़कर तृणमूल में शामिल होंगे।

मुकुल रॉय ने कहा है कि फोन पर वह बीजेपी के कई नेताओं के संपर्क में हैं। बंगाल में चुनाव के बाद हो रही हिंसा की शिकायत के लिए जब बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा विधायकों का प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिलने राजभवन पहुंचा, तो 77 में से सिर्फ 51 विधायक ही थे। इसके बाद से ही अटकलें लगने लगीं कि 24 विधायक तृणमूल में शामिल हो सकते हैं। यहां बताना प्रासंगिक होगा कि मुकुल रॉय कभी ममता बनर्जी के बाद तृणमूल कांग्रेस में नंबर दो की हैसियत रखते थे। वर्ष 2017 में ममता से मनमुटाव के बाद वह भगवा दल में शामिल हो गये थे। 10 जून 2021 को जब उन्होंने घर वापसी की, तो ममता ने कहा कि मुकुल की पार्टी में वही हैसियत होगी, जो पहले हुआ करती थी। मुकुल रॉय तृणमूल कांग्रेस में राष्ट्रीय महासचिव हुआ करते थे। बंगाल की राजनीति का उन्हें चाणक्य माना जाता था।

ममता बनर्जी से मतभेदों के चलते फरवरी, 2015 में पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय महासचिव के पद से हटा दिया। काफी दिनों तक पार्टी में अलग-थलग रहने के बाद नवंबर, 2017 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया।बंगाल से ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस की सत्ता को उखाड़ फेंकने के संकल्प के साथ भाजपा में शामिल होने वाले मुकुल रॉय अब उसी बीजेपी को बर्बाद करने में जुट गये हैं। बंगाल चुनाव में 200 से अधिक सीटें जीतकर सरकार बनाने का ख्वाब देखने वाली भाजपा 77 सीटों पर सिमट गयी और मुकुल रॉय अपनी पुरानी पार्टी में लौट गये। कई और विधायक और सांसद तृणमूल में लौटने की जुगत लगा रहे हैं।

उधर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नंदीग्राम चुनाव परिणाम को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी है। नंदीग्राम के चुनाव परिणाम को चुनौती देने वाली तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई 24 जून को होगी। कलकत्ता हाइकोर्ट के जस्टिस कौशिक चंद की एकल पीठ ने शुक्रवार (18 जून) को यह निर्देश दिया। बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 में नंदीग्राम सीट के परिणाम को चुनौती देते हुए ममता बनर्जी की ओर से कलकत्ता हाइकोर्ट में याचिका दायर की गयी है, जिस पर शुक्रवार सुबह 11 बजे न्यायाधीश कौशिक चंद की एकल पीठ ने यह निर्देश दिया। विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी से नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र से हार गयीं थीं। इस हार को चुनौती देते हुए उन्होंने वकील संजय बसु के माध्यम से कलकत्ता हाइकोर्ट में याचिका दायर की है।

नंदीग्राम से शुभेंदु अधिकारी के निर्वाचन को अमान्य घोषित करने संबंधी याचिका पर जस्टिस कौशिक चंद की पीठ ने सुनवाई की। न्यायाधीश ने कहा कि ममता बनर्जी को सुनवाई के पहले दिन पेश होना होगा, क्योंकि यह एक चुनाव याचिका है। ममता बनर्जी के वकील ने कहा कि वह कानून का पालन करेंगी। मामले की सुनवाई को 24 जून तक स्थगित करते हुए जस्टिस चंद ने निर्देश दिया कि इस बीच उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार इस अदालत के सामने एक रिपोर्ट पेश करेंगे कि क्या यह याचिका जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 के अनुरूप दाखिल की गयी है।

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने अपनी याचिका में भाजपा विधायक शुभेंदु अधिकारी पर जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 की धारा 123 के तहत भ्रष्ट तरीका अपनाने का आरोप लगाया है। ममता ने याचिका में यह भी दावा किया है कि मतगणना प्रक्रिया में विसंगतियां थीं। निर्वाचन आयोग ने पिछले महीने कांटे के मुकाबले के बाद शुभेंदु अधिकारी को नंदीग्राम विधानसभा सीट पर विजयी घोषित किया था। विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सबसे महत्वपूर्ण सीट थी, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का मुकाबला शुभेंदु अधिकारी से था। इस सीट पर भाजपा नेता शुभेंदु ने लगभग 1,957 मतों के अंतर से तृणमूल सुप्रीमो को हरा दिया था। शुभेंदु अधिकारी को कुल 1,10,764 वोट मिले थे, वहीं ममता बनर्जी को 1,08808 वोट प्राप्त हुए थे।

मतगणना के दिन (2 मई को) पोल पैनल ने इसकी पुष्टि की थी। दो मई को परिणाम के दिन बड़े पैमाने पर भ्रम था कि वास्तव में बंगाल की सबसे हॉट सीट नंदीग्राम पर किस उम्मीदवार को जीत मिली। एक बार टीवी चैनलों में दिखाया गया कि ममता बनर्जी ने शुभेंदु अधिकारी को हरा दिया है।

हालांकि, थोड़ी ही देर बाद उन्हीं न्यूज चैनलों ने रिपोर्ट दी कि ममता बनर्जी नंदीग्राम सीट हार गयी हैं। यहां शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें पराजित कर दिया। चुनाव आयोग की ओर से ममता की जीत की कभी पुष्टि नहीं की गयी थी। बाद में चुनाव आयोग ने शुभेंदु अधिकारी को विजयी घोषित किया था। तृणमूल कांग्रेस के प्रचंड बहुमत के साथ लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी का जश्न मनाते हुए ममता बनर्जी ने उस दिन अपनी हार स्वीकार कर ली थी। साथ ही संकेत दिया था कि वह बाद में हाइकोर्ट में मतगणना के परिणाम को चुनौती भी दे सकती हैं।

ममता बनर्जी ने चुनाव परिणाम के करीब डेढ़ महीने बाद मतगणना के परिणाम को हाइकोर्ट में चुनौती दी। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने इस चुनावी याचिका को शुक्रवार को एकल पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया था। हाइकोर्ट ने गुरुवार को अपनी वेबसाइट पर जो वाद-सूची जारी की थी, उसके अनुसार, इस मामले को जस्टिस कौशिक चंद की अदालत के समक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से उल्लेखित किये जाने के तौर पर लिया जाना था। यहां बताना प्रासंगिक होगा कि बंगाल चुनाव के बाद मतगना के दिन चुनाव आयोग ने नंदीग्राम निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी को विजेता और तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी को उपविजेता घोषित किया था। ममता बनर्जी ने ईवीएम मशीनों से छेड़छाड़ और चुनाव आयोग के संबंधित अधिकारी द्वारा दोबारा मतगणना की मांग को ठुकराने का आरोप लगाते हुए नतीजों की घोषणा के बाद कहा था कि इस मुद्दे को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया जायेगा। भाजपा विधायक शुभेंदु अधिकारी इस वक्त पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं।

 

 

कोलकाता से संजय सिन्हा

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