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लगे रहो दिग्गी राजा कांग्रेस-मुक्त भारत

लगे रहो दिग्गी राजा कांग्रेस-मुक्त भारत

भारत को कांग्रेस मुक्त करने में एक दो दिग्गी नहीं आधा दर्जन दिग्गी जीजान से जुटे  हुयें  हैं ये सोच रहे हैं कि यदि कांग्रेस गांधी मुक्त हो गयी तो शायद भारत कांग्रेस मुक्त से बच जायेगा और कांग्रेस भी पुनर्वजीवित हो जाएगी। भाजपा ने नारा दिया था कि भारत को कांग्रेस मुक्त करेगी। लोगो को भाजपा का यह नारा एक दिवास्वपन लग रहा था। कांग्रेस जैसे राजनीतिक वटवृक्ष को जड़ से उखाडऩे की कल्पना करना भी अजीब लगता था। भाजपा यह नारा तो दे सकती थी पर कांग्रेस मुक्त भारत कहने का अभिप्राय उसने भी एक मुहावरे के रूप में कहा होगा। यानी कांग्रेस की हालत इतनी पतली हो जाएगी, वह हाशिया में चली जाएगी। लेकिन यह सपना भी पूरा होता दिखाई दे रहा है। इस काम को शुरू भाजपा ने किया था पर अंजाम देने में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह लगे हुए हैं। इतिहास में देखा है कि बड़े-बड़े अजेय दुर्ग भी दिग्गी जैसे लोगों की मदद से दुश्मनों ने हमसे जीत लिये थे।

जब मैं इस प्रश्न का उत्तर खोजने चला तो लगा कि भारत कभी भी कांग्रेस मुक्त नहीं हो सकता। ऐसी महान पार्टी जिसकी जड़ें गांव-गांव में मजबूत हैं उसे मिटाना संभव नहीं है।  जब इतिहास देखा तो राणा प्रताप और रानी लक्ष्मीबाई को भी अपने किले छोडऩे पड़े क्योंकि तब ये काम भी ऐसे ही दिग्गीयो ने किया था। आज दिग्गीयो ने ये काम संभाल लिया है तो कांग्रेश को ध्वस्त होने से कोई बचा नहीं सकता। यहां तो दिग्गियों की भरमार है।

चिदंबरम, मणिशंकर, शशि थरूर, कपिल और मनीष जैसे आधा दर्जन दिग्गी पार्टी को पलीता लगाने में जुटे हैं। और पार्टी के किले की रक्षा का भार सुरजेवाला जैसे कमजोर तोपचियो के हाथ में हैं तो किला तो मिटेगा ही पर इसके लिए कितना समय लग सकता है बताना मुश्किल है। भाजपा का विकल्प न होने के कारण कांग्रेस को अल्पसंख्यक और कम्युनिस्ट समर्थन देकर मिट्टी में नहीं मिलने देंगे।

कांग्रेस पार्टी की  वर्तमान अध्यक्ष सोनिया गांधी ने 1998 में बिना चुनाव लड़े ही अध्यक्ष पद संभाला था। उस समय कांग्रेस कार्यकारिणी ने एक प्रस्ताव पास करके सीताराम केसरी को हटा दिया था। बहाना ये लिया गया कि उनकी अध्यक्षता में पार्टी की करारी हार हुई है तब उस मुहिम के कर्ताधर्ता अर्जुनसिंह थे। तारिक अनवर को छोड़कर सभी सदस्यों ने हस्ताक्षर कर दिए थे। बाद में सोनिया गांधी की अध्यक्षता में उस समय लगभग उतनी ही सीट लोकसभा में पार्टी ने जीती पर उन्हें नहीं हटाया गया। 150 सीटों से कम आने पर नरसिम्हा राव को और फिर सीताराम केसरी को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटाया गया था। लगभग उतने ही सीटें जीत पाने पर सोनिया को हटाने की हिम्मत कार्यकारिणी नहीं जुटा सकी। हद तो तब हो गई जब पार्टी ने राहुल गांधी की अध्यक्षता में 50 से भी कम सीटें जीती। भले ही अध्यक्ष पद से उन्होंने इस्तीफा दे दिया पर पार्टी के सर्वेसर्वा वह आज भी बने हुए हैं। राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी पहले केंद्र में बुरी तरह हारी पार्टी धीरे-धीरे अन्य राज्य में भी सिमटती गई। बंगाल के चुनाव में तो विधानसभा में एक सीट तक नहीं जीत पायी। इन हालातों में भी पार्टी उन्हें ही फिर अध्यक्ष बनाना चाह रही है।

वैसे उनकी मां सोनिया के रहते हुए उनकी हैसियत अध्यक्ष से कम नहीं है। कांग्रेस ने अपनी बर्बादी का इतिहास तो तभी लिख लिया था जब मनमोहन सिंह द्वितीय सरकार में अर्जुन सिंह जी को कैबिनेट तक में नहीं लिया गया था। यही वो अर्जुन सिंह थे जिनसे बिना पूछे सोनिया कभी कोई बड़ा निर्णय नहीं लेती थी। यही अर्जुन सिंह थे जिन्हें राजीव गांधी के 1991 में अचानक मारे जाने पर पार्टी अध्यक्ष बनना था क्योंकि वह पार्टी के केंद्रीय उपाध्यक्ष भी रह चुके थे पर सोनिया ने नरसिम्हा राव को बनाया। उसका कारण अर्जुन सिंह की लोकप्रियता का डर था। हद तब हो गई जब कांग्रेस के वरिष्ठत्तम नेता को मनमोहन सिंह के दूसरे सत्र में मंत्रिमंडल तक में नहीं लिया गया। इस नाटक के खिलाड़ी दिग्विजय सिंह उर्फ दिग्गी राजा और पार्टी के कोषाध्यक्ष मोतीलाल बोरा ने राहुल गांधी को पट्टी पढ़ाकर अर्जुन सिंह को सत्ता से दूर रखा। कहने का मतलब यह है कि दिग्गी ने  तिकड़में लगाकर नौसिखिए राहुल को अर्जुन सिंह से खतरा बताकर अपना उल्लू सीधा किया। खुद वे  मध्यप्रदेश में कांग्रेस के सबसे बड़े नेता बन गए क्योंकि बोरा छत्तीसगढ़ बन जाने से मध्य प्रदेश छोड़ चुके थे। कांग्रेस में 2009 में दिग्गी वायरस प्रवेश कर चुका था। 2009 से इस वायरस ने  धीरे-धीरे अपना प्रभाव बढ़ा कर पार्टी को बीमार कर दिया। राहुल गांधी पर दिग्गीआइटिस का प्रकोप छा गया और उस ला-इलाज बीमारी ने कुछ और दिग्गियो जैसे कि मणिशंकर अय्यर, शशि थरूर कपिल सिब्बल को जन्म दिया।

यहां तक  कि मनमोहन सिंह को भी ये रोग लगा। मणिशंकर ने प्रधानमंत्री को चायवाला कहकर और पाकिस्तान से कांग्रेस की मदद करने की बात कहकर पार्टी का भारी नुकसान किया। शशि थरूर समय-समय पर पार्टी को धीरे से कोसते रहते है। कपिल सिब्बल अयोध्या मंदिर की सुप्रीम कोर्ट में लगातार सुनवाई के पक्ष में नहीं थे इससे पार्टी को लोग श्री राम विरोधी समझने जाने लगा। बची खुची कसर मनमोहन सिंह ने संसाधनों पर पहला अधिकार अल्पसंख्यकों का बताकर हिंदुओं के साथ अन्याय कर दिया। राहुल गांधी पर दिग्गी वायरस का इतना असर हुआ कि वह चौबीसों घंटों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संभ्रात भाषा में गालियां देते रहे। जो बात मोदी को मौत का सौदागर कहकर सोनिया ने गलती की थी। उसे मौत का सौदागर कहने के जन्मदाता भी दिग्गी ही थे। मध्य प्रदेश से ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे नेता को पार्टी छुड़वाना में दिग्गी का ही हाथ था। उनके जाने से कांग्रेस मध्य प्रदेश में सत्ता खो बैठी। अभी पार्टी 370 के विरोध और सीएए के विरोध की चोट खाकर संभल भी नहीं पाई थी। गलतियों का एहसास करके थोड़ी बहुत उसका इलाज तलाश रही थी किऐसी कमजोर हालत में एक नए दिग्गी वायरस ने हमला कर दिया। कश्मीर में 370 के हटने से देश का प्रत्येक नागरिक खुश है यहां तक कि अधिकांश मुस्लिम भी 370 को अब कश्मीर से हटाने के पक्ष में थे। वह भी शांति चाहते हैं। संसद में पार्टी ने 370 हटाने का विरोध किया था पर 370 हटाने के बाद कश्मीर में आज चैन है, लोग खुश हैं। यह मामला अब सीधे राष्ट्र भावना से जुड़ गया है। कांग्रेस पार्टी 370 को हटाने पर पुनर्विचार करेगी बस यही दिग्गी वायरस कांग्रेस पर फिर हमला कर बैठा। दिग्गी वायरस कभी थीटा कभी डेल्टा कभी डेल्टा प्लस के रूप में बदल बदल कर कांग्रेस पार्टी पर हमला करता रहता है। दुबली होती जा रही पार्टी उस वायरस से कभी निजाय पाएगी ऐसा नहीं लगता है। जब तक 370 की आंच कम होगी तब तक अन्य क्रियाशील दिग्गी वायरस हमला कर देंगे।

कांग्रेस मुक्त भारत करने का भारतीय जनता पार्टी का मतलब शायद एक मुहावरा बना रहता। कांग्रेस भले सत्ता में ना रहती पर पार्टी का समाप्त होना संभव नहीं था। यह दिग्गी वायरसो के रूप बदल-बदल कर पार्टी पर कमजोर होते ही हमला करने लगता है इसलिए  पार्टी से भारत मुक्त हो भी सकता है। क्योंकि दिग्गी को 370 को फिर लागू करने की बात कहना कांग्रेस पार्टी की गले की हड्डी बन गयी है। अगर पार्टी दिग्गी से कुछ पूछताछ करती  है तो मुस्लिम नाराज और नहीं पूछती है तो हिंदू नाराज। उत्तर प्रदेश सहित कुछ अन्य राज्यों में विधानसभा के चुनाव आते-आते एकाध हमला और ये वायरस करेगा और यूपी में भी बंगाल जैसा हाल हो जाए जो कोई आश्चर्य नहीं होगा।

 

डॉ. विजय खैरा

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