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कश्मीर डिप्लोमेसी

कश्मीर  डिप्लोमेसी

यह केवल इत्तेफाक नहीं हो सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक नेताओं के साथ बैठक के चार दिनों के भीतर, जम्मू में वायुसेना स्टेशन पर ड्रोन से हमले हुए। ये हमले प्रमाण है कि दुश्मन देश नहीं चाहता कि भारत में शांति स्थापित रहे, आम-जनता अमन चैन से रहे, लोग गन कल्चर से दूर रहें। सवाल उठता है कि इस प्रकार के आतंकवाद से कैसे निपटा जाए। कार बम, ट्रक बम, मानव बम  और अब ड्रोन से हमला–इन हिंसक एवं अशांत करने वाले षडयंत्रों को कौन मदद दे रहा है? राष्ट्र की सीमा पर इन आतंकवादी घटनाओं को कौन प्रश्रय दे रहा है? एक हाथ में समझौता और दूसरे हाथ में आतंकवाद–यह कैसे संभव है? जैसे ही प्रांत में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के शुरुआत की आहट हुई, वैसे ही यह आतंकी हमला सामने आया है। पाकिस्तान नहीं चाहता कि जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक सरकार बने। धारा 370 और 35 A के निरस्त होने के बाद पाकिस्तान का भारत में घुसपैठ कराना या आतंकवादी हमला करना अब आसान नहीं रहा। इसलिए यह नया तरीका उसने इस्तेमाल किया है। पिछले बाइस महीनों में जिस तरह कश्मीरी अवाम ने अपनी सोच को अभिव्यक्ति दी है, उसके संदेश साफ हैं। अब कश्मीरी लोग भी चाहते हैं कि वहां अमन-चैन हो। जब अमन-चैन होगा तो जाहिर है कि भारत से लेकर दुनियाभर के सैलानी वहां आएंगे। इससे पर्यटक केंद्रित राज्य की अर्थव्यवस्था पटरी पर आ सकेगी।

इस पृष्ठभूमि में यह बताना आवश्यक हैं कि केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में आर्थिक विकास के बढ़ावे के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। और सरकार के इन निर्णयों ने इस क्षेत्र के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सरकार ने जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक का अनुदान आवंटित किया। इसके अतिरिक्त, राज्य में निवेश हेतु निवेशकों को आकर्षित करने के लिए ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट का आयोजन किया गया। विकास की राह में आने वाले रोड़ों को हटाने के लिए कई सारे रिफॉर्म लाये गए। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने आविष्कार, नवाचार और प्रशिक्षण के लिए दो केंद्रों की स्थापना को भी मंजूरी दी है, जो तकनीकी क्षेत्रों में उद्योग और शिक्षाविदों के बीच साझेदारी को मजबूत करेगा। इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य के क्षेत्र में 2 एम्स, 7 मेडिकल कालेज, 5 नए नर्सिंग कालेज और एक कैंसर इंस्टीटयूट बनाने का निर्णय लिया गया हैं। स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए, स्टूडेंट हेल्थ कार्ड भी जारी किया गया हैं। इस परिस्थिति में इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि घोर आपत्तिजनक अनुच्छेद 370 और 35 A को खत्म करने का कारण वे प्रावधान थे जो समानता और धर्मनिरपेक्षता के मूल सिद्धांतों के विपरीत थे। इसके अलावा इस्लामिक स्टेट, तालिबान और पाकिस्तान के गठजोड़ से लडऩे के लिए भी इन अनुच्छेदों को खत्म करने की आवश्यकता थी। इसलिए सरकार ने इन अनुच्छेदों पर किसी भी प्रकार की दोबारा चर्चा होने के सम्बंध में पूर्ण विराम लगाते हुए तथा जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक, ढांचागत, कृषि और शैक्षिक विकास के लिए अवसर का दरवाजा खोलकर एक अच्छा निर्णय लिया है।

 

Deepak Kumar Rath

दीपक कुमार रथ

(editor@udayindia.in)

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