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आत्मा-परमात्मा मिलन का साधन योग

आत्मा-परमात्मा मिलन का साधन योग

हम अपने बाहरी क्रियाकलापों को ही अपना जीवन समझ लेते हैं। वास्तव में हमारा जीवन केवल हमारे अंदर निवास और प्रवास के माध्यम से होने वाली वायु का यातायात है। जब तक हमारे अंदर वायु ठीक से  क्रियाशील होती है, तब तक हम जीवित होते हैं। सामान्य व्यतिक्रम हमको निर्जीव बना देता है। इस निवास और प्रवास को क्रियाशील रखना ही योग है। योग का अभ्यास करने से व्यतिक्रम नहीं होगा। योग का अर्थ जुडऩा है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा आत्मा परमात्मा से जुड़ती है। एक शुद्ध आत्मा ही परमात्मा को प्राप्त कर सकती है। अंत:करण प्राक्रिया के द्वारा आत्मा में शुद्धिकरण होता है जो कि परमात्मा से हमको जोड़ता है। गीता में वर्णन है कि जब हमारी विचलित आत्मा परमात्मा में अचल और स्थिर हो जाएगी तब हमें योग प्राप्त हो जाएगा। परमात्मा को प्राप्त करने का माध्यम योग है। परमात्मा को प्राप्त करने वाले को हम योगी कहते हैं। एक सच्चे योगी के लक्ष्ण उसमें परिलक्षित होने लगते हैं।

योग को हम विभिन्न रूपों में विभाजित करते हैं। कर्म योग, ध्यान योग, समत्व योग, भगवत्प्रभावरण्य योग, भक्ति योग, अष्टांग योग, सांख्य योग। इनमें से अष्टांग योग को ही हम साधारण मानव योग अभ्यास द्वारा परिचालित करते हैं। इसी योग से न केवल हमारा शरीर बल्कि हमारा चित्त, हमारा विश्वास हमारे नियंत्रण  में रहता है। योग अभ्यास से ही हमारा संपूर्ण रूप से मानवीय विकास संभव हो पाता है।

आधुनिक समाज में योग का महत्व कुछ अधिक बढ़ गया है। शारीरिक, मानसिक तथा आध्यात्मिक विकास में योग का अतुलनीय योगदान है। योग न केवल हमें निरोगी रखता है, बल्कि यह हमें फुर्तीला तथा आकर्षक भी बनाता है। योग करने से हमारे अंदर जो प्रसन्नता उत्पन्न होती है वह हमारी सफलता और कामयाबी का कारण बनती है। योग हमारे दिमाग को संतुलित रखता है। हमारे अंदर आने वाले नकारात्मक विचारों से हमें दूर करता है। इसके द्वारा एक साथ शरीर और मन दोनों को लाभ पहुंचता है। छोटा-सा योगासन बड़ी-से-बड़ी बीमारी से हमें छुटकारा दिला सकता है।

पूरे विश्व में भारत एक ऐसा देश है जहां पर जन्म लेने वाले विद्वानों ने सैकड़ों साल पहले ही इस तथ्य को खोज लिया लिया था, जिसका आज पूरे विश्व में डंका बज रहा है। महर्षि पतंजलि ने हजारों वर्ष पहले योग के द्वारा जो चिकित्सा बताई थी वह आज भी आधुनिक चिकित्सा विज्ञान को हरा रहा है। हमारे पूर्वजों ने हमें जो दिशा दिखाई है वह हमेशा के लिए हमारा मार्गदर्शन करेगी। योग भी उसमें से एक महान वरदान है। अगर हम अपने जीवन में नित्य योग की शरण लें तो अपने जीवन का संपूर्ण विकास कर सकते हैं।

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