ब्रेकिंग न्यूज़ 

मंत्रिमंडल विस्तार के मायने

मंत्रिमंडल विस्तार के मायने

मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में हुआ विस्तार आम आदमी की उम्मीदें जगाता नजर आ रहा है। इस विस्तार में सामंज्यस्यपूर्ण संतुलन बिठाने के साथ-साथ नए चेहरों को शामिल करने से पार्टी के लिए भविष्य का नेतृत्व बनाने के दृढ़ संकल्प का संकेत भी मिलता है। कैबिनेट के इस विस्तार के साथ ही मोदी सरकार में मंत्रियों की संख्या 78 हो गई है। हालांकि, इस कैबिनेट विस्तार ने कई सवाल खड़े किए हैं और कई संदेश भी दिए हैं। लेकिन अगर हम राजनीति के अलावा इस कैबिनेट विस्तार के सकारात्मक पक्ष की बात करें तो यह कैबिनेट शायद स्वतंत्र भारत के इतिहास में सबसे युवा और शिक्षित है। इसलिए, यह कहना अनुचित नहीं होगा कि प्रधानमंत्री मोदी ने उन मंत्रियों को पुरस्कृत किया है, जिन्होंने परफॉरमेंस दी जैसे कि मनसुख मंडाविया, धर्मेंद्र प्रधान, पीयूष गोयल, अनुराग ठाकुर, हरदीप पुरी, आर.के. सिंह और किरेन रिजिजू। प्रधानमंत्री मोदी ने अश्विनी वैष्णव, ज्योतिरादित्य सिंधिया, भूपेंद्र यादव और मीनाक्षी लेखी के रूप में पेशेवरों और अनुभवी लोगों को भी मंत्रिमंडल में जोड़ा। इस मंत्रिपरिषद में अनुसूचित जनजाति के आठ सांसदों को भी जगह मिली है, जिनमें से तीन को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। इसी तरह अनुसूचित जाति समुदाय के 12 मंत्रियों में से दो को कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला है।  खास बात यह है कि आजादी के बाद शायद यह पहला कैबिनेट है, जिसमें रिकॉर्ड 11 महिलाओं को जगह मिली है। इनमें से दो कैबिनेट मंत्री हैं। वर्तमान मंत्रिपरिषद में अल्पसंख्यक समुदाय के पांच मंत्री भी शामिल हैं। इस पृष्ठभूमि में इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि मौजूदा फेरबदल में जाति और धर्म को संतुलित करने के अलावा समाज के सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व प्रदान करने के मामले में अच्छा प्रयास किया गया है।

मंत्रिमंडल का विस्तार वास्तव में दो महत्वपूर्ण और दूरदर्शी संदेशों पर आधारित है। सबसे पहले, चाहे वह अतीत में कितना भी अनुभवी क्यों न रहा हो, यदि कोई मंत्री वर्तमान में जिम्मेदारी से अपना काम करने में विफल रहा है, तो वह अपने मंत्री पद पर बने रहने के योग्य नहीं है। यह पहला संदेश केंद्र सरकार के कामकाज की मजबूती से जुड़ा माना जा सकता है। दूसरी ओर, जिस तरह से दलित समुदाय और अन्य पिछड़े वर्गों के साथ-साथ आदिवासी समुदायों और महिलाओं की भागीदारी को मंत्रिमंडल में बढ़ाया गया है, यह अपने आप में सामाजिक न्याय पर आधारित सरकार के गठन और क्षेत्रीय राजनीति को मजबूत करने से संबंधित संदेश है। इस विस्तार का मतलब यह भी है कि भारी उम्मीदें, जो अब तेजी से बदलाव लाने के लिए मोदी सरकार पर टिकी हैं, अब साकार होती दिख रही हैं। ऐसा होने के लिए मंत्रिपरिषद को माइक्रोस्कोप के नीचे रखा जाएगा। उनकी सफलता अब इस बात पर निर्भर करेगी कि वे कितना प्रभावी प्रदर्शन करते हैं। 26 वर्ष से कम आयु वालों की 135 करोड़ की जनसंख्या के भारत में आधी से अधिक संख्या है, लेकिन उनमें से कुछ ही 1991 के सुधारों के बारे जानते होंगे। अत: भारत का युवाशक्ति एक बहुत बड़ी संपत्ति या दायित्व हो सकती है, जो इस बात पर निर्भर करता है कि सरकार इस मोर्चे पर क्या करती है। क्योंकि, भाजपा ने राजनीतिक लड़ाई तो जीत ली, लेकिन उसे अभी भी आर्थिक लड़ाई लडऩी है। इसलिए, यह निष्कर्ष निकालना उपयुक्त है कि युवाओं, पेशेवरों, अनुभवी और महिला शक्ति के बेहतरीन मिश्रण के साथ, मोदी सरकार देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।

 

Deepak Kumar Rath

दीपक कुमार रथ

(editor@udayindia.in)

Leave a Reply

Your email address will not be published.