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कैबिनेट विस्तार : खुले संभावनाओं के द्वार

कैबिनेट विस्तार : खुले संभावनाओं के द्वार

देश की नरेंद्र मोदी सरकार की कैबिनेट का अभी हाल ही में विस्तार किया गया है। इस दौरान यूथ, एक्सपीरियंस, प्रोफेशनल्स पर भरोसा जताया गया है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 43 नेताओं को मंत्री पद की शपथ दिलाई है, जिसमें 15 कैबिनेट और 28 राज्यमंत्री शामिल हैं। बीजेपी नेता सर्बानंद सोनोवाल, ज्योतिरादित्य सिंधिया और नारायण राणे को मंत्री बनाया गया है, जिनके नामों की सबसे ज्यादा चर्चा रही है।

वहीं, आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद और पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर सहित 12 मंत्रियों ने इस्तीफा राष्ट्रपति को सौंपा। शपथ ग्रहण समारोह से पहले सभी 43 नेताओं को संसद भवन आरटीपीसीआर टेस्ट के लिए भेजा गया। इधर, कैबिनेट विस्तार पर कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खडग़े ने हमला बोला। उन्होंने कहा, ‘कई दलितों, पिछड़ी जातियों को मंत्री बनाया जा रहा है। वे इसे चुनाव के चलते कर रहे हैं। ऐसा लोगों का ध्यान भटकाने के लिए किया जा रहा है। वे समुदायों के कल्याण के लिए नहीं बल्कि अपनी मजबूरी के कारण ऐसा कर रहे हैं।’

मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अधिकांश मंत्री अपना पदभार ग्रहण करके काम में लग गए। दरअसल, नए मंत्रियों में एक संदेश अच्छे से गया है कि जब धुरंधर किस्म के मंत्री खराब परफॉर्मेंस पर निपटा दिए जाते हैं, तो उनकी क्या बिसात? स्वास्थ्य, शिक्षा व रोजगार की अगुवाई करने वाले सभी मंत्रियों को एक ही झटके में बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। उनके सिवाए दूसरे दर्जन भर मंत्रियों को भी उनके औसत परफॉर्मेंस पर छुट्टी दे दी।

फिलहाल नई कैबिनेट में कई पूर्व चिकित्सक, आईएएस, इंजीनियर व उच्च शिक्षा प्राप्त मंत्री बनाए गए हैं। मकसद कुछ खास है जिसका असर अगले कुछ माह बाद दिखाई पड़ेगा। इतना तय है, जो मंत्री काम में कोताही दिखाएगा, उसका रामनाम सत्य कभी भी हो सकता है। मोदी को काम चाहिए, वह सिर्फ काम में विश्वास रखते हैं, नेतागिरी में नहीं, इतना अब सब समझ गए हैं। काम का ही कमाल है जिससे चलते केंद्र सरकार में मोदी मॉडल की चर्चांए हो रही हैं। क्योंकि सरकार के दोनों कार्यकालों की परस्पर संरचनाए अब तक के सभी प्रधानमंत्रियों से अलहदा हैं। क्योंकि उनके काम करने के अंदाज से तो सभी भली भांति परिचित हैं। अनुराग ठाकुर, किरेन रिजिजू जैसे युवा मंत्रियों को प्रमोट करने का मतलब काम में गुणवत्ता लाना है।

मोदी कार्यकाल के सात सालों में पहली मर्तबा मोदी कैबिनेट अब तक की सबसे युवा टीम है, जिसमें महिलाओं का प्रतिनिधित्व भी ठीक-ठाक बढ़ाया गया है। विस्तार से पहले तक मंत्रियों की संख्या 53 मात्र थी, अब 73 हो गई है। कई विभाग बिना मंत्रियों के रिक्त थे, उन्हें भी भरा गया है। अतिरिक्त विभागों को नारायण राणे और पशुपति कुमार पारस के अधीन किया गया है।

पुरूषतम रूपाला, आरके सिंह, वीरेंद्र सिंह मनसुख मंडाविया, जी किशन रेड्डी जैसे मंत्रियों को अच्छे विभाग दिए गए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय पर मोदी की भी पैनी नजर बनीं रहती है जिसकी जिम्मेदारी उन्होंने अपने खासम खास मंत्री मनसुख मंडाविया को दी हैं। क्योंकि कोरोना संकट से हेल्थ विभाग लोगों के निशाने पर है।

बहरहाल, मंत्रीमंडल में फेरबदल का मतलब सियासी जरूरतों का पूरा करना और चुनावों में फायदा उठना ही होता है। लेकिन इस बार ऐसा कुछ दिखाई नहीं पड़ता। कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जिनके हालात कोरोना संकट में खराब हुए हैं। मोदी टीम में विस्तार करने का मुख्य मकसद यही है कि उन क्षेत्रों में टीमवर्क के जरिए कठिन समस्याओं से उभारा जाए। मोदी मंत्रिमंडल विस्तार पर ज्यादा विश्वास नहीं करते। पहला कार्यकाल भी उनका ऐसे ही बीता। उन्होंने हमेशा मंत्रियों के अपने पदों पर बने रहने का उपयुक्त और भरपूर वक्त दिया।

इसका एक कारण यह भी रहा, मंत्रियों को ज्यादा से ज्यादा स्वतंत्रता मिली और उनके कार्य की गुणवत्ता में निखार भी देखने को मिला। इस फॉर्मूले से कई मंत्रियों ने बेहतरीन काम भी करके दिखाया। यही वजह है कुछ विभाग ऐसे हैं जो पिछले कार्यकाल में जिन मंत्रियों के पास थे, वह मौजूदा कार्यकाल में भी यथावत हैं। जबकि, पिछली निवर्तमान हुकूमतों में मंत्रियों के विभाग साल के भीतर ही बदल दिए जाते रहे हैं।

काबिलेगौर इसमें कोई शक नहीं कि इतने कम समय में कोई भी मंत्री अपना परफॉर्मेंस नहीं दे पाएगा और ना दिखा पाएगा। समय और स्वतंत्रता देने के मामले में सभी मंत्री मोदी की तारीफ भी करते हैं। नए मंत्रीमंडल शामिल मंत्रियों को मोदी का सीधा संदेश है कि जिन नए मंत्रियों को जगह दी गई है, वह अपने पदों को रेवडिय़ां ना समझें, बल्कि बड़ी जिम्मेदारी समझकर अपने दायित्वों का निर्वाह करें और जनता की सेवा में पहले दिन से ही तनमन से जुटें।

विस्तार के रूप में युवाओं से सजाई गई मोदी टीम में भूपेंद्र यादव, ज्योतिरादित्य सिंधिया, हिना गावित, अजय भट्ट, सर्वानंद सोनोवाल, अनुप्रिया पटेल, अश्विनी वैष्णव, अजय मिश्रा जैसे उर्जावान मंत्रियों से खुद प्रधानमंत्री बड़ी उम्मीदें हैं। उन्हें उम्मीद ही नहीं, बल्कि पूर्ण विश्वास है कि नए मंत्रियों की जिम्मेदारियां कुछ ही समय में परिणामोन्मुख के रूप में दिखाई देंगी।

महिला सशक्तिकरण

मोदी का मंत्रिमंडल इस बार काफी अलग है। इसमें महिलाओं की भागीदारी सबसे अधिक है। 36 मंत्रियों के साथ 9 महिलाएं भी शामिल हैं। कैबिनेट 2.0 महिला शक्ति के साथ काम करेगा। बता दें कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और केंद्रीय महिला व बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी को मिलाकर अब केंद्रीय मंत्रिपरिषद में महिला मंत्रियों की कुल संख्या नौ हो गई है।

नई कैबिनेट में 15 कैबिनेट मंत्री हैं वहीं 28 राज्य मंत्री हैं। जिन महिला सांसदों ने केंद्रीय मंत्री के रूप में शपथ ली उसमें अपना दल (एस) की अनुप्रिया पटेल, शोभा करांदलाजे, मीनाक्षी लेखी, अन्नपूर्णा देवी, प्रतिमा भौमिक, डॉ। भारती पवार, दर्शना जर्दोश शामिल हैं। पीएम मोदी ने नए चेहरों को दाव पर लगाया है। साथ ही महिला शक्ति पर भी ध्यान दिया है।

सभी महिला मंत्रियों ने शपथ ग्रहण के बाद बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की। इसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इसमें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण समेत अन्य महिला मंत्री नजर आ रही हंै। इस तस्वीर से साफ जाहिर होता है कि कैबिनेट में महिलाओं की चलेगी।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शपथ ग्रहण के बाद की तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की है। जिसमें सभी महिला कैबिनेट मंत्री हैं। तस्वीर में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी नजर आ रहे हैं। सीतारमण के इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया पर महिला सशक्तिकरण को लोग और बढ़ावा दे रहे हैं।

बता दें कि, मीनाक्षी लेखी दिल्ली से लोकसभा सांसद हैं उन्हें विदेश और संस्कृति मंत्रालय में राज्य मंत्री बनाया गया है। वहीं अनुप्रिया पटेल को वाणिज्य मंत्रालय में राज्य मंत्री नियुक्त किया गया है। शोभा करांदजले कर्नाटक के उडुपी से दो बार से सांसद हैं। उन्हें कृषि विभाग मे राज्य मंत्री बनाया गया है। वहीं दर्शना जर्दोश गुजरात से हैं उन्हें कपड़ा और रेल मंत्रालय में राज्य मंत्री बनाया गया है।

अन्नपूर्णा देवी झारखंड की कोडरमा सीट से सांसद हैं उन्हें शिक्षा मंत्रालय में राज्य मंत्री बनाया गया है। प्रतिमा भौमिक त्रिपुरा की हैं और उन्हें सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग का राज्यमंत्री नियुक्त किया गया है। डॉ भारती पवार महाराष्ट्र की डिंडोरी सीट से सांसद हैं। उन्हें महिला बाल विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री नियुक्त किया गया है।

कैबिनेट में महिलाओं की अधिक भागीदारी देखकर भारतीय पहलवान बबीता फोगाट ने भी खुशी जाहिर की है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा, ‘माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने नए मंत्रिमंडल विस्तार में महिला सशक्तिकरण पर विशेष जोर दिया है। 11 महिलाओं को मंत्री पद दिया गया है। नरेंद्र मोदी जी का महिला सशक्तिकरण के लिए उठाया गया यह कदम महिलाओं के लिए राजनीति के क्षेत्र में और नए रास्ते खोलेगा।’

विस्तार और फेरबदल दिखता भी है और देश पर अपना प्रभाव भी छोड़ता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोई भी काम ऐसा नहीं करते जो चौंकाने वाला न हो। प्रधानमंत्री के रूप में अपने दूसरे कार्यकाल के मंत्रिमंडल विस्तार में भी उनकी यह छवि प्रमुखता से उभरकर सामने आई है। यह विस्तार विस्मयकारी तो रहा ही, कई राजनीतिक कयासों को धता बताने वाला भी रहा है। इसमें सामाजिक, राजनीतिक, जातीय समीकरणों को संतुलित रखने का प्रयास है। साथ ही क्षेत्रीय और राष्ट्रीय संतुलन का भी पूरा ध्यान रखा गया है।

मंत्रियों के इस्तीफे की वजह जो भी बताई जाए लेकिन जनता के बीच संदेश यही गया है कि नरेंद्र मोदी सरकार में काम में कोताही की कोई जगह नहीं है। प्रधानमंत्री ने जिस तरह देशभर का राजनीतिक समीकरण साधने की कोशिश की है, वहीं वर्ष 2022 में जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, उनका विशेष ध्यान रखा है। उत्तर प्रदेश से सात नए मंत्रियों का चयन इसी ओर इशारा करता है। इसमें प्रधानमंत्री ने ब्राह्मणों, दलितों, पिछड़ों और महिलाओं को साधने का हरसंभव प्रयास किया है। कांग्रेस से आए नारायण राणे और ज्योतिरादित्य सिंधिया को केंद्रीय मंत्री बनाकर उन्होंने प्रतिपक्ष को संदेश दिया है कि भाजपा हाथ ही नहीं पकड़ती, संबंध निभाना भी जानती है। असम में हिमंत विस्वा सरमा को मुख्यमंत्री बनाकर उसने राज्यों में भी इस बात का संदेश दे भी दिया है। यह सच है कि सर्बानंद सोनोवाल ने असम में भाजपा की जड़ें जमाने का काम किया था, ऐसा करने से उनका मनोबल न गिरे इसलिए उन्हें कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ दिलाकर मोदी सरकार ने बड़ा काम किया है।

मौजूदा मंत्रिमंडल विस्तार के जरिये सरकार ने देश को कई संदेश देने की कोशिश की है और एक तरह से ऐसा कर उसने विपक्ष की रणनीति को झटका भी दिया है। कुछ बड़े मंत्रियों के इस्तीफे पर विपक्ष मोदी सरकार को घेर भी सकता है लेकिन मंत्रिमंडल में फेरबदल और विस्तार की मौजूदा कवायद देश की राजनीति को नई दिशा देगी, इस बात को नकारा नहीं जा सकता।

 

धर्मेंद्र प्रधान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद धर्मेंद्र प्रधान को केंद्रीय शिक्षा मंत्री और कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री का कार्यभार दिया गया है। धर्मेंद्र प्रधान अब देश के नए शिक्षा मंत्री होंगे। प्रधान भारत में सबसे लंबे समय तक पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में सेवारत रहे हैं। उन्हें ‘उज्ज्वला मैन’ के रूप में भी जाना जाता है। कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री के रूप में, प्रधान ने शिक्षित युवाओं और रोजगार योग्य कार्यबल की आवश्यकता के बीच की खाई को पाटने पर केंद्रित कई महत्वपूर्ण पहल की।

धर्मेंद्र प्रधान का जन्म 26 जून, 1969 को ओडिशा के अंगुल के तालचेर जिले में देवेंद्र प्रधान और बसंत मंजरी प्रधान के घर हुआ था। उनके पिता भाजपा के पूर्व सांसद थे। उन्होंने ओडिशा के उत्कल विश्वविद्यालय से मानव विज्ञान में स्नातकोत्तर किया।

 

भूपेंद्र यादव

राजस्थान के अजमेर में पले-बढ़े और गुरुग्राम जिले के गांव जमालपुर के मूल निवासी भूपेंद्र यादव का मंत्री बनना कई मायनों में अहम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूपेंद्र यादव को कैबिनेट मंत्री बनाकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के साधारण कार्यकर्ता से केंद्रीय मंत्री बनने तक का उनका सफरनामा प्रेरक है। उन्हें राजनीति विरासत में नहीं मिली, बल्कि परिश्रम के बल पर आसमान की ऊंची उड़ान भरी है।

राज्यसभा सदस्य भूपेंद्र मोदी सरकार में यादव समुदाय से पहले कैबिनेट मंत्री है। राजनीतिक अर्थों में देखें तो भूपेंद्र की नियुक्ति से दो राज्यों को प्रतिनिधित्व मिला है। राजस्थान से राज्यसभा में पहुंचे यादव का अजमेर में घर है, जबकि गुरुग्राम के जमालपुर गांव में उनकी पैतृक हवेली है। कुछ दिन पूर्व ही इस हवेली में उन्होंने पुस्तकालय की स्थापना की थी और अमित शाह के हाथों इसका उद्घाटन करवाया था।

 

अश्विनी वैष्णव

मोदी सरकार में अश्विनी वैष्णव को देश का नया रेल मंत्री बनाया गया है। इसके साथ ही उनके पास आईटी मंत्रालय का भी जिम्मा होगा। यूं तो अश्विनी वैष्णव के बारे में बहुत सी ऐसी बाते हैं, जो उन्हें खास बनाती हैं। लेकिन सबसे खास उनका 360 डिग्री अनुभव है। क्योंकि अश्विनी वैष्णव ने जो भी काम किया, मन से किया। शुरुआती पढ़ाई में टॉपर रहे और अच्छी पढ़ाई के दम पर आईएएस बने। इसके बाद जब आईएएस की नौकरी से दिल भर गया तो और पढ़ाई करने निकल पड़े। इसके बाद एमबीए किया और फिर जीई ट्रांसपोर्टेशन में मैनेजिंग डायरेक्टर रहे। आईएएस की नौकरी के दौरान वह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के संपर्क में आए और उनका राजनीतिक जीवन शुरू हो गया। उनके इसी अनुभव को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें रेल मंत्री जैसा महत्वपूर्ण पद दिया है। अश्विनी वैष्णव 1994 बैच के आईएएस अधिकारी थे और उसके बाद 2003 तक उन्होंने ओडिशा में ही काम किया। इसके बाद उन्हें पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के ऑफिस में डिप्टी सेक्रेटरी की जिम्मेदारी दी गई थी। यहां उन्होंने इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप का खाका तैयार किया था। इसके बाद जब अटल जी की सरकार चली गई, तब वैष्णव उनके निजी सचिव के तौर पर काम देखने लगे थे। फिर 2006 में उन्हें मोरमुगाओ पोर्ट ट्रस्ट के डिप्टी चेयरमैन के तौर पर काम दिया गया था।

 

किरेन रिजिजू

किरेन रिजिजू का जन्म अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग जिले के नफरा के पास नाखु में श्री रिंचिन खारू और श्रीमती चिरई रिजिजू के घर एक अग्रणी परिवार में हुआ। उनके पिता अरुणाचल के पहले प्रोटेम स्पीकर थे, जिन्होंने पहली राज्य विधानसभा के सदस्यों को शपथ दिलाई थी। किरेन रिजिजू, अपने स्कूल के दिनों से एक सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता रहे हैं और उन्होंने एक सामाजिक कार्यकर्ता और छात्र नेता के रूप में विभिन्न सामाजिक आंदोलनों का नेतृत्व किया है। किरेन रिजिजू दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज से स्नातक हैं और कैंपस लॉ सेंटर, लॉ संकाय, दिल्ली विश्वविद्यालय से लॉ में स्नातक की डिग्री भी प्राप्त की है। वकील से राजनेता बने रिजिजू अरुणाचल प्रदेश के रहने वाले हैं। रिजिजू मौजूदा केंद्रीय कानून मंत्री हैं। एक फायरब्रांड राजनीतिज्ञ, रिजिजू अपने वक्तृत्व कौशल के लिए बेहद प्रसिद्ध हैं और व्यापक रूप से दुनिया भर में यात्रा कर चुके हैं।

 

अनुराग ठाकुर

केन्द्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार में अनुराग ठाकुर का प्रमोशन हुआ है। केंद्रीय वित्त व कार्पोरेट मामलों के राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ दिलाई। बतौर वित्त व कार्पोरेट राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर की परफार्मेंस बेहतर रही, जिसके चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें कैबिनेट मंत्री के रूप में प्रमोट किया।

24 अक्टूबर 1974 को जन्मे हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से चौथी बार सांसद बने अनुराग ठाकुर ने मई 2008 में पहली बार लोकसभा का चुनाव जीता। मोदी सरकार में केंद्रीय राज्य वित्त और कॉरपोरेट कार्य के तौर पर जिम्मेदारी सौंपी गई। अनुराग ने टेरिटोरियल आर्मी में रेगुलर कमीशन आफिसर के तौर पर भी सेवाएं दी। अब कैप्टन के रैंक पर है। उनके पिता प्रेम कुमार धूमल दो बार हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। पूर्व मोदी सरकार ने लोकसभा में मुख्य सचेतक भी रहे है।

 

पीयूष गोयल

पीयूष गोयल एक सफल चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं जिन्होंने भारतीय स्टेट बैंक के बोर्ड में कार्य किया है। भाजपा के सदस्य के रूप में अपने लंबे कार्यकाल में, उन्होंने कई महत्वपूर्ण भूमिकाओं में काम किया और चुनाव के दौरान अपने अभियान का प्रबंधन किया। वे 2010 में राज्यसभा के लिए चुने गए और बाद में 2016 में दूसरे कार्यकाल के लिए फिर से चुने गए। राज्यसभा में अपनी पहली नियुक्ति के बीच अंतरिम रूप से, उन्हें नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में शामिल किया गया और कई मंत्री पद पर रहे।

पीयूष गोयल राज्यसभा में सदन के नेता नियुक्त किए गए हैं। गोयल थावरचंद गहलोत की जगह लेंगे। थावरचंद गहलोत के राज्यपाल बनाए जाने के बाद यह पद खाली हुआ था। बता दें कि राज्यसभा में नेता के लिए भूपेंद्र यादव, निर्मला सीतारमण और मुख्तार अब्बास नकवी का भी नाम आगे चल रहा था। लेकिन अब पीयूष गोयल को यह जिम्मेदारी दी गई है। वह केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्य भी हैं। उनके पास वाणिज्य और उद्योग, खाद्य एवं उपभोक्ता तथा कपड़ा मंत्रालय सहित विभिन्न मंत्रालयों का दायित्व है।

 

मनसुख मंडाविया

सौराष्ट्र के भावनगर जिले के पलिताना तालुका के एक छोटे से गांव हनोल में एक मध्यमवर्गीय किसान परिवार में जन्मे मनसुख मंडाविया 2002 में 28 साल की उम्र में सबसे कम उम्र के विधायक बने थे। जानवरों के प्रति उनके प्यार ने उन्हें गुजरात में पशु चिकित्सा विज्ञान का अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया। बाद में उन्होंने राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। मंडाविया का पोर्टफोलियो ज्यादा महत्व इसलिए रखता है क्योंकि देश में कोरोनो वायरस महामारी के बीच में उन्हें स्वास्थ्य मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

मनसुख मंडाविया ने पहले बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग राज्य मंत्री और रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया है। उन्हें 2016 में केंद्रीय मंत्रिपरिषद में राज्य मंत्री के रूप में शामिल किया गया था। वह 2012 में राज्यसभा के लिए चुने गए और 2018 में फिर से चुने गए। वहीं, 2011 में गुजरात कृषि उद्योग निगम के अध्यक्ष बने थे जब मोदी मुख्यमंत्री थे।

 

ज्योतिरादित्य सिंधिया

ग्वालियर राजघराने के वारिस ज्योतिरादित्य माधवराव सिंधिया एक भारतीय राजनेता हैं। हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट और स्टैनफोर्ड ग्रेजुएट स्कूल से एमबीए, ज्योतिरादित्य कुछ शीर्ष प्राइवेट कंपनियों के लिए काम भी कर चुके हैं। एक दुर्घटना में अपने पिता और पूर्व केंद्रीय मंत्री माधवराव सिंधिया की असमय मृत्यु के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस पार्टी के सदस्य के रूप में की और मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्रीत्व वाली यूपीए-1 में सूचना प्रसारण राज्य मंत्री और यूपीए-2 में वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय में राज्य मंत्री के बाद ऊर्जा मंत्रालय में स्वतंत्र प्रभार के राज्य मंत्री भी रहे। वे अपने परंपरागत गुणा लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र का वर्ष 2019 तक बतौर कांग्रेस सांसद संसद में प्रतिनिधित्व करते रहे लेकिन 2019 के आम चुनाव में वे भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार और एक समय उनके सहयोगी रहे डॉ. कृष्णपाल सिंह से गुणा क्षेत्र से संसदीय चुनाव हार गए। उसके बाद पार्टी हाई-कमान से मतभेद के कारण उन्होने वर्ष 2020 में कांग्रेस को अलविदा कहकर 10 मार्च 2020 को भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन कर लिया।

 

मीनाक्षी लेखी

नई दिल्ली में 30 अप्रैल 1967 को जन्मी मीनाक्षी लेखी दो बार लगातार नई दिल्ली से सांसद बनी। पहली बार 2014 में पहली बार भाजपा के टिकट से चुनाव लड़ी और जीत का परचम लहराया। इसके बाद दोबारा उसी सीट से 2019 में लोकसभा चुनाव लड़ी और लगातार दोबारा जीत हासिल की।

पीएम मोदी के नए मंत्रिमंडल में शामिल विदेश राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी पेशे से वकील हैं और कई ट्रिब्यूनल के अलावा दिल्ली हाई कोर्ट में वकालत की और आज सुप्रीम कोर्ट की जानी-मानी वकील रही। अधिवक्ता के तौर पर महिला मुद्दों खासतौर पर घरेलू हिंसा, पारिवारिक विवाद और आर्म्ड फोर्सेज में महिलाओं के लिए स्थाई कमीशन मुद्दें कोर्ट में उन्होंने प्रमुखता से रखे और लड़ाई लड़ी।

राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों जैसे ट्रिपल तलाक आदि पर संसद की बहस में भाग लेती रही हैं। 2017 में लेखी को बेस्ट डेब्यू वूमेन पार्लियामेंटेरियन के रूप में पार्लियामेंट लोकमत अवार्ड से नवाजा गया था। 2010 में मीनाक्षी लेखी ने अपना राजनीतिक करियर बीजेपी के साथ शुरू किया। बीजेपी महिला मोर्चा की वाइस प्रेसिडेंट की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बाद साल 2013 में इन्हें पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया गया और महज एक साल बाद भाजपा ने टिकट दिया तो लेखी ने 2014 में लेखी ने अपना पहला चुनाव नई दिल्ली लोकसभा सीट से लड़ा और जीत हासिल की। 2019 में दोबारा लेखी ने अपने जीत का परचम लहाराया।

 

नीलाभ कृष्ण

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