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कैबिनेट के बाद भाजपा संगठन में फेरबदल की तैयारी

कैबिनेट के बाद भाजपा संगठन में फेरबदल की तैयारी

हाल में हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल में जिस तरह महत्वपूर्ण और वरिष्ठ भाजपा नेताओं को पदमुक्त किया गया है, उससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह काम में तत्परता, कार्यकुशलता और सतर्कता को प्राथमिकता देते हैं। एक साथ 11 मंत्रियों की मंत्रिमंडल से विदाई ने सबको चौंका दिया। इतने बड़े परिवर्तन के लिए दुनिया के किसी भी प्रधानमंत्री को भारी हिम्मत चाहिए लेकिन मोदी जी तो बड़े-बड़े जोखिम भरे निर्णय लेने से कभी हिचकिचाते नहीं है। धारा 370 की समाप्ति और टी नागरिक संहियता और 3 तलाक  कानून इसका जीता जागता उदाहरण है। उन्होंने तो पाक में घुसकर मारने की हिम्मत भी दिखाई इसलिए उन्हें कठोर प्रशासक समझा जाता है। जिन मंत्रियों की मंत्रिमंडल से छुट्टी की गई है उनमें रविशंकर प्रसाद, प्रकाश जावड़ेकर, डॉ हर्षवर्धन, रमेश पोखरीयाल और सदानंद गोड़ा बड़े चेहरे हैं। इनमें से सभी को कहीं ना कहीं किसी काम पर अवश्य लगाया जाएगा। एक ही बार में इतने मंत्रियों को मुक्त करने का कारण उनके काम में कोई शिकायत हो ऐसा नहीं लगता है।

वास्तव में क्षेत्रीय समीकरण ही मुख्य कारण है। जिन क्षेत्रो की सुधि कभी नहीं की गई, उन क्षेत्रों के चेहरे पहली बार मंत्रिमंडल में दिखाई दे रहे हैं। इसी तरह जाति या वर्ग विशेष जिन्हें पहले कभी अवसर नहीं मिले उनको भी मंत्रिमंडल में स्थान दिया गया है। जनजाति के चेहरे भी विभिन्न क्षेत्रों से दिखाई दे रहे हैं। वही दलितों को साधने का पूरा प्रयास किया गया है। पिछड़े क्षेत्रों को भी प्रतिनिधित्व मिला है। कुल मिलाकर जाति पिछड़े क्षेत्र और सभी वर्गों के साथ-साथ अपने सहयोगी दलों को भी स्थान दिया गया। लंबे समय से प्रतीक्षा में बैठे अपना दल से अनुप्रिया पटेल को मंत्री बनाने से उत्तर प्रदेश में 2022 में होने वाले चुनाव में कुर्मी वोटों को साधा गया है हालांकि उत्तर प्रदेश में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह इसी जाति से हैं, इस तरह कुर्मी वोटों का बंटना अब कतई संभव नहीं है। कुर्मी जाति दल बल धन सभी में समर्थ है, पार्टी संगठन से तीन राष्ट्रीय महामंत्रियों को मोदी सरकार में मंत्री बनाया गया है। इसलिए पार्टी संगठन में भारी बदलाव की संभावना है और यह कभी भी हो सकता है। बंगाल के प्रभारी रहे कैलाश विजयवर्गीय को कोई अन्य जिम्मेदारी दिया जाना निश्चित है। वे बंगाल में अपने काम में काफी हद तक सफल रहे हैं, जिन हालातों मे पार्टी ने बंगाल में चुनाव लड़े हैं पार्टी भले ही सरकार बनाने की स्थिति में न पहुंच पाई हो पर पार्टी का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा है। विजयवर्गीय ने अपना कार्य सफलता से निभाया है उन्हें और बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। उनके अलावा कुछ अन्य प्रदेशों से वरिष्ठ नेताओं को संगठन के काम में लगाया जा सकता है। बंगाल प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष को भी पार्टी मुख्यालय में जगह मिलने के आसार हैं। जिस तरह मंत्री मंडल को नई टीम में नए युवकों को स्थान दिया गया है उसी तरह पार्टी संगठन में एक बड़े बदलाव की तयारी है। वरिष्ठ और नवयुवकों दोनों को स्थान देकर तालमेल बिठाया जाना निश्चित है। 2022 में विधानसभा के चुनाव को ध्यान में रखकर संगठन में बदलाव करते समय विशेष तौर से दो प्रदेशों उत्तर प्रदेश और पंजाब का ख्याल रखा जाना है। संगठन को हर हाल से मजबूत करने के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक प्रभारीजन की संख्या में बढ़ोत्तरी भी अवश्य होगी। भाजपा किसी भी कीमत पर उत्तर प्रदेश में जोखिम लेने को तैयार नहीं है। मोदी और योगी का नाम उत्तर प्रदेश चुनाव में जादू की तरह चलेगा फिर भी संगठन का मजबूत होना आवश्यक है। इधर कई खबरें आती रही कि उत्तर प्रदेश में संगठन में ऊपर से लेकर नीचे तक के कार्यकर्ता और मझोले नेता सरकार से नाराज हैं। वैसे भी जिसमे कोई सच्चाई नजर नहीं आती। भाजपा के कार्यकर्ता तो लगन से काम करते ही हैं। मीडिया की इन खबरों में कोई सच्चाई नहीं है कि मोदी और योगी के बीच कोई भी अनबन है। दोनों ही एक दूसरे के भारी प्रशंसक हैं और योगी तो हमेशा ही मोदी जी को अपना नेता मानते हैं और यह कहने में कभी भी नहीं हिचकिचाते हैं। संगठन में महिलाओं को स्थान देना भी आवश्यक है क्योंकि संगठन से सरकार ने महिलायें भी मंत्री बनाई गई हैं। संगठन का लंबा और गहरा अनुभव होने के कारण रीता बहुगुणा जोशी को भी जगह मिल सकती है। वह कांग्रेस में महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ-साथ कई वर्षों तक उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। उत्तर प्रदेश से सांसद हैं वह महिला भी हैं और ब्राह्मण हैं और उत्तर प्रदेश की पूरी जानकारी है। प्रकोष्ठों  का भी पुनर्गठन हो सकता है, फिलहाल संगठन में फेरबदल के समय उत्तर प्रदेश के चुनाव को विशेष रुप से ध्यान में रखा जाएगा। वर्तमान पदाधिकारियों में से शायद ही कोई एक दो नेताओ को कहीं अनियंत्र काम दिया जाए। इसके अतिरिक्त मीडिया पेनालिस्ट प्रवक्ताओं की संख्या बढ़ाई जा सकती है क्योंकि वर्तमान मैं उनकी संख्या काफी कम है जबकि टीवी चैनल बहुत हैं। नए प्रवक्ताओं के लिए प्रदेश में कार्य कर रहे प्रवक्ताओं में से चयन किया जा सकता है खासतौर पर उनको जिनके पास अनुभव है और राजनीतिक जानकारी भी है। राष्ट्रीय स्तर पर प्रवक्ता होने के लिए शिक्षित एवं राजनीतिक जानकारी और टीवी पर पहले से कार्य करने वाले नेताओं को रखा जा सकता है। उत्तर प्रदेश और पंजाब का चुनाव इस बार काफी घमाशान होगा। उत्तर प्रदेश में पार्टी पहले से अधिक सीटें जीतने पर काम कर रही हैं। इसके लिए प्रभावशाली प्रवक्ताओं और मीडिया प्रभारी की जरूरत होगी।  पंजाब में कृषि बिल का सबसे अधिक विरोध हुआ है और ऊपर से अकाली दल जैसा भाजपा का सहयोगी साथ छोड़ चुका है। ऐसे में पंजाब में भी संगठन में किसी को लाया जा सकता है। कैबिनेट में फेरबदल के बाद अब भाजपा पार्टी के संगठन स्तर पर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

 


डॉ.
विजय खैरा

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