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ललित के मारे दो बेचारे!

ललित के मारे दो बेचारे!

एक पुरानी कहावत है कि मुसीबत कभी अकेले नहीं आती, बल्कि अपने रिश्तेदारों के साथ आती है। अनचाहे ही सही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अब यह बात समझ आ रही होगी। उनकी विदेश मंत्री सुषमा स्वराज एक विवादित मुद्दे में फंस गयी हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने भारत में वांटेड ललित मोदी को ब्रिटिश सरकार द्वारा वीसा निर्गत करवाने में मदद की। जहां नरेंद्र मोदी सरकार स्वराज के मुद्दे पर बड़ी तेजी से बचाव की मुद्रा में सामने आई, वहीं उतनी ही तेजी से भाजपा की तेज-तर्रार नेता और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे इस विवाद में घिरती गयीं। इस मुद्दे पर घिरती नजर आ रही मोदी सरकार को जल्दी ही इसका निबटारा करना होगा, नहीं तो नरेंद्र मोदी की साफ -सुथरी छवि को काफी धक्का लग सकता है। अगर राजे इस मुद्दे की चपेट में नहीं आतीं तो काफी हद तक सरकार स्वराज पर ध्यान हटाने में सफल हो सकती थी। स्वराज का कहना है कि उन्होंने ब्रिटिश सरकार से ललित मोदी को वीसा निर्गत करने की जो अनुशंसा की थी, वह पूरी तरह से मानवीय संवेदनाओं पर आधारित थी, क्योंकि ललित मोदी की पत्नी कैंसर से पीडि़त थीं।

वसुंधरा इस मुद्दे पर पूरी तरह से घिर गईं हैं। सामने आये एक दस्तावेज के अनुसार 2011 में फाइल किये गए ललित मोदी के वीसा ऐप्लीकेशन में वसुंधरा ने यह शर्त रखते हुए हस्ताक्षर किया था कि उनकी सहभागिता का भारतीय अधिकारियों को कभी पता ना चले। यह एक ऐसा धक्का था जिसने स्वराज का बचाव कर रहे अरुण जेटली और भाजपा को चुप्पी साधने पर मजबूर कर दिया। वैसे तो वसुंधरा ने ऐसे किसी दस्तावेज से किनारा कर लिया है, लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसा हुआ क्यों? जबकि, ललित मोदी और वसुंधरा काफी अच्छे दोस्त माने जाते रहे हैं। एक वरिष्ठ नौकरशाह के अनुसार, एक समय था जब ललित वसुंधरा के कार्यालय में उनके सामने टेबल पर पैर रख कर बैठते थे।

इस दस्तावेज को अपने वकील मुहम्मद अब्दी द्वारा लीक करवाकर कहीं ललित सुषमा पर से ध्यान हटाकर वसुंधरा को बलि का बकरा बनाने की कोशिश तो नहीं कर रहे? ललित खुद को ठगा-सा महसूस कर रहे हैं और करें भी क्यों ना, आखिर वसुंधरा के पहले मुख्यमंत्रित्व काल में ललित की तूती बोला करती थी। इसी दौरान ललित ने आईपीएल की स्थापना की और राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन पर काबिज हुए थे, लेकिन कालांतर में वसुंधरा और ललित की दोस्ती में दरार पड़ गई। लोगों का तो यहां तक कहना है कि वसुंधरा की ललित से नजदीकियां ही 2008 में उनकी सरकार गिरने की वजह बनी और इसीलिए वसुंधरा ने 2013 के चुनाव आते-आते ललित से किनारा कर लिया। वसुंधरा के इस कदम ने ललित मोदी को झकझोर कर रख दिया। वसुंधरा इस मुद्दे पर घिरती चली जा रही हैं। ललित मोदी ने इंडिया टुडे टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में साफ-साफ कहा कि वसुंधरा ने उनके केस में गवाह बनने की हामी भरी थी। उन्होंने यह भी कहा कि वसुंधरा उनकी पत्नी मीनल की 2012 और 2013 में पुर्तगाल में हुयी सर्जरी के दौरान साथ ही थीं।

टीवी चैनलों ने तथाकथित दस्तावेज की सत्यता के प्रमाण का कोई दावा नहीं किया है और साथ ही यह भी कहा है कि इस दस्तावेज पर राजस्थान की मुख्यमंत्री के कोई हस्ताक्षर नहीं हैं।

अगर आधिकारिक सूत्रों की मानें तो वसुंधरा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कोई बातचीत नहीं की, अलबत्ता अमित शाह से की है। अफवाहों के अनुसार, सुषमा ने इस मुद्दे पर अपने इस्तीफे की पेशकश की थी, लेकिन उसे नकार दिया गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेता इस मुद्दे को लेकर काफी चिंतित प्रतीत होते हैं। मुद्दे के सामने आते ही उन्होंने बैठक की और उसके बाद सर संघचालक मोहन भगवत ने प्रधानमंत्री से बात की। अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, संघ का मानना है कि जितने दिन भाजपा सुषमा और वसुंधरा का बचाव करने में लगी है, उतना ही नुकसान सरकार और प्रधानमंत्री की छवि को पहुंचेगा। प्रधानमंत्री के देश-विदेश में दिए गए भ्रष्टाचार के खिलाफ भाषणों से इस मुद्दे पर रस्साकसी और भी बढ़ गयी है।

ललित मोदी अपने पांसे काफी सोच-समझ कर फेंक रहे हैं। कुछ लोगों का मानना है कि इस दस्तावेज का लीक होना भाजपा के खिलाफ एक सोची समझी साजिश का नतीजा है। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि यह एक मानवीय भूल का नतीजा है। ज्यादातर लोगों का यही मानना है कि यह सारा मुद्दा राजग सरकार के लिए एक चेतावनी की तरह है, क्योंकि यह सरकार अपने भ्रष्टाचार मुक्त देश के नारे के अंतर्गत ललित मोदी पर सख्त कार्यवाही कर सकती है। इसे देखते हुए ही ललित कैंप ने इस मुद्दे को उठाया ताकि वह यह बता सके कि वह भाजपा को कितना नुकसान पहुंचा सकता है।

अब यह मुद्दा उन तीन लोगों की धुरी पर टिका है, जो बेहद ताकतवर और संसाधनों से परिपूर्ण हैं। अगर ललित की जीत होती है तो यह नरेंद्र मोदी के लिए बहुत बुरा होगा। सरकार को हमेशा ही ललित मोदी से एक कदम आगे रहना होगा और साथ ही ललित मोदी को भारत वापस लाकर कानून के सामने पेश करना होगा, तभी नरेंद्र मोदी की पारदर्शी और जवाबदेह सरकार देने का वादा पूरा होगा।

नीलाभ कृष्ण

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