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जनसंख्या विस्फोट पर लगे लगाम

जनसंख्या विस्फोट पर लगे लगाम

सारा विश्व आज बढ़ती हुई जनसंख्या से अत्यधिक चिंतित है। प्रकृति और देश के संसाधन सीमित होते हैं और जनसंख्या वृद्धि से उन पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, उनका अत्यधिक दोहन होता है। पूरे विश्व में भारत जनसंख्या की दृष्टि से दूसरे नंबर पर आता है। पहले नंबर पर चीन है, किंतु कुछ रिपोर्टों से आशंका जताई गई है कि अगले कुछ वर्षों में भारत जनसंख्या की दृष्टि से चीन को भी पछाड़ देगा। यह बहुत ही चिंतनीय विषय है।

जनसंख्या वृद्धि अनेक समस्याओं को जन्म देती है। अधिक जनसंख्या से आवासों की कमी होती है। गांवों और शहरों में लोग छोटे-छोटे घरों में रहने को मजबूर हैं, यहां तक कि झुग्गी झोपडिय़ों में भी रहकर लोगों को अपना जीवन गुजारना पड़ता है। अधिक जनसंख्या के कारण जल और वायु-प्रदूषण भी बढ़ता है। जनसंख्या की वृद्धि के साथ-साथ लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति हेतू उद्योगों की भी बढ़ोत्तरी होती है, जिससे जल और वायु का प्रदूषण फैलता है। आवास की समस्या को हल करने के लिए वनों की कटाई होती है तथा मनुष्यों के रहने के लिए गांवों और शहरों का निर्माण किया जाता है। लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु पेड़ों को काटा जाता है, जिससे लकड़ी प्राप्त होती है और उसे मनुष्य जीवन में उपयोग में लाया जाता है। वनों एवं पेड़ों की कटाई से हमारी प्राकृतिक संपदा का नुकसान होता है एवं प्रकृति पर भी इसका बहुत बुरा असर पड़ता है, जिसके दुष्परिणाम हमें आए दिन देखने को मिलते हैं। बढ़ती जनसंख्या के कारण वाहनों की भी संख्या बढ़ती जा रही है, जिससे ग्रीन हाउस गैसों का ज्यादा से ज्यादा उत्सर्जन हो रहा है और हमारा वायुमंडल इससे बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। पेड़ प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड अंदर सोखते हैं और ऑक्सीजन बाहर निकालते हैं जो जीवधारियों की प्राणवायु है। पेड़ों के कटने से कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा वायुमंडल में अधिक हो जाएगी, जो मनुष्यों के लिए बहुत हानिकारक है। जनसंख्या बढऩे के कारण पृथ्वी का तापमान भी बढ़ता है तथा समुद्र के जल का स्तर भी। समुद्र का जल स्तर बढऩे से समुद्र तटों से घिरे राष्ट्रों एवं समुद्रतटीय इलाकों को भी खतरा है। जनसंख्या वृद्धि से कृषि के लिए उपयुक्त क्षेत्र भी कम हो जाते हैं, जिससे खाद्यान्न की समस्या उत्पन्न होती है।

परिवार जितने छोटे होंगे, उसके सदस्य उतना ही अधिक सुविधा-संपन्न जीवन बिता सकेंगे। बच्चों को अच्छी शिक्षा, अच्छे संस्कार व अच्छा पोषण दिया जा सकेगा। देश की जनसंख्या जितनी कम होगी, नौकरी और सरकारी सुख-सुविधा के उतने ही अधिक अवसर लोगों को प्राप्त होंगे। कम जनसंख्या वाले देशों के नागरिकों को अच्छी शिक्षा, अच्छी जीवन शैली बिताने के अवसर ज्यादा प्राप्त होते हैं। अधिक जनसंख्या होने से देश में अपराधियों की संख्या भी बढ़ जाती है, क्योंकि लोगों के पास जब काम नहीं होगा तो वो गलत मार्ग से धन कमाने की कोशिश करेंगे। इसलिए अच्छी शिक्षा, अच्छे स्वास्थ्य और बेहतर जीवन शैली के लिए किसी देश में जनसंख्या का कम होना ही अच्छा है।

जनसंख्या वृद्धि पर केवल दिवस मना लेने से ही हमारी जिम्मेदारी पूरी नहीं होती, बल्कि इस पर रोक लगाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। लोगों को अधिक से अधिक शिक्षित करके एवं उन्हें अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करके, यह बताने की आवश्यकता है कि आज के समय में छोटे परिवार की कितनी अहमियत है और यह क्यों जरूरी है। पढ़े -लिखे लोग भी बेटे की चाह में कई संताने पैदा करते हैं। उनकी लिंग भेद की मानसिकता को बदलने की आवश्यकता है।

सरकारें भी अपने राजनीतिक फायदे के चलते इस पर कोई ठोस निर्णय लेने से और कानून बनाने से हिचकती हैं। केवल गोष्ठियां और सेमिनार करके ही हम इस विषय को यूं ही छोड़ देते हैं किंतु अब हमें अत्यंत जागरूक बनना पड़ेगा और जनसंख्या वृद्धि को रोकने के लिए उचित कदम उठाने होंगे। सरकार के साथ-साथ देश के प्रत्येक नागरिक को इस पर चिंता करनी होगी और छोटे परिवार की नीति को अमल में लाना होगा। जनसंख्या वृद्धि के कारण ही आज देश में गरीबी, भूखमरी, बेरोजगारी जैसी बड़ी समस्याएं हैं। भारत में एक धर्म विशेष को अपने धर्म के नाम पर अपनी जनसंख्या बढ़ाने की छूट है, जो कि सर्वथा अनुचित है। हमें समान नागरिक संहिता और जनसंख्या नियंत्रण कानून लाकर इस मनमानी पर भी रोक लगानी होगी। देश में यूपी की योगी सरकार ने इस ओर अपने कदम बढ़ा दिए हैं और आशा है कि सभी प्रदेश की सरकारें अपने-अपने राज्यों में ऐसे कानून लाएंगी और भविष्य में देश की उन्नति, विकास तथा खुशहाली की राह प्रशस्त होगी।

 

 

रंजना मिश्रा

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