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पोलियो को हराया है… कोरोना जंग में भी जीतेगा भारत

पोलियो को हराया है… कोरोना जंग में भी जीतेगा भारत

भारत पर जब-जब कोई मुसीबत आई है तब-तब देशवासियों ने मिल कर सामूहिक रूप से उसे पराजित किया है। भारत का पोलियों उन्मूलन कार्यक्रम इसका ज्वलंत उदाहरण है और अब देश टी. बी. उन्मूलन की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। चिकित्सा विशेषज्ञों को विश्वास है कि इस बार कोविड-19 (कोरोना) वैश्विक महामारी की दूसरी जबर्दस्त लहर से पीडि़त भारत अपनी दृढ इच्छाशक्ति और सामूहिक प्रयासों से कोरोना को भी हरायेगा और सदी की इस सबसे बड़ी जंग को जीतेगा।

इन दिनों भारत कोरोना वायरस की दूसरी जबर्दस्त लहर के दंश से पीडि़त है। इस जानलेवा विषाणु के नए नए रूपों के फैलाव के कारण देश में हाहाकार मचा हुआ है। कोरोना के साथ ब्लैक फंगस की नई मुसीबत ने भी परेशान किया हुआ है। शताब्दी के इस बड़े संकट में सभी प्रकार के प्रयास और चिकित्सीय संसाधन कम पड़ रहे है। विश्व भर से सहयोग के हाथ आगे आ रहें है। देश के विभिन्न प्रदेशों में लॉकडाउन लगा स्थिति को नियंत्रण में लाने के प्रयास  किए जा रहे हैं। भारत सरकार के ताजा आंकड़ों के अनुसार अब धीरे धीरे कोविड-19 के सक्रिय मामलों की संख्या कम होती जा रही है तथा रिकवरी दर बढऩे के साथ ही मृत्यु दर भी घट रही है। अब अस्पतालों में बिस्तरों की मांग एवं ऑक्सीजन और दवाइयों के लिए अफरातफरी का माहौल भी कम हुआ है।

एक ओर जहां भारत कोरोना की मार झेल रहा है और तीसरी एवं चौथी लहर की आशंका और बच्चों पर सम्भावित दुष्प्रभाव से आशंकित है, वहीं दूसरी ओर पड़ोसी देशों में आश्चर्यजनक रुप से कोरोना की तीव्रता बहुत कम है। चर्चा तो यह भी है कि कतिपय महाशक्तियां भारत के चहुमुखी विकास की ओर बढ़ते कदमों को रोकने ओर तृतीय विश्व युद्ध की भूमिका तैयार करने के लिए जैविक और केमिकल हथियार के रूप में इस जानलेवा वायरस का उपयोग कर रही हैं। हालांकि इसके कोई प्रामाणिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं लेकिन आंकड़े गवाह है कि भारत के मुकाबले पड़ोसी देशों में कोरोना की मार नगण्य हैं।

वर्ष 2020 कोरोना की भेंट चढ़ गया। उम्मीद थी कि नया वर्ष 2021 में स्थितियां सुधरेंगी। वर्ष  के शुभारम्भ के लगभग पहले तीन माह फरवरी-मार्च माह तक भारत कोरोना महामारी से मुक्त होने की दिशा में तेजी से अग्रसर हो रहा था। देश भर में लॉकडाउन और अन-लॉकडाउन के विभिन्न चरणों के बाद जन-जीवन भी सामान्य हो रहा था और धीरे-धीरे आम दिनों की तरह सभी प्रकार प्रकार की गतिविधियां शुरू होने लगी थी। पूरा विश्व कोविड-19 की वैश्विक महामारी का सुनियोजित ढंग से मुकाबला करने के साथ ही बेहतर रिकवरी दर और कम मृत्यु दर की स्थिति बनाये रखने एवं अन्य देशों को भी सहयोग करने के लिए  भारत की सराहना कर रहा था। साथ ही देश के महान वैज्ञानिकों के दिन-रात किये गए परिश्रम के फलस्वरूप भारत ने रिकार्ड समय एक वर्ष में ही एक नहीं दो-दो स्वदेशी वैक्सीन ‘को-वैक्सीन’ और ‘कोविशील्ड’ बना कर दुनिया भर में अपना डंका बजाया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान का शुभांरभ करवा पहले चरण में चिकित्सकों और सभी फ्रंट लाइन वर्कर्स और दूसरे चरण में 45 वर्ष से ऊपर के सभी नागरिकों को जीवन रक्षक टीके लगाने का अभियान प्रारम्भ कर देशवासियों को एक बड़ा भरोसा बंधाया। कोरोना के बढ़ते वेग को देखते हुए विगत एक मई से 18 वर्ष से ऊपर के लोगों को भी टीका लगाने का काम शुरू किया गया है। देश में अबतक 26 करोड़ से अधिक नागरिकों को टीके लगाए गए है। इस प्रकार कोरोना के टीकें लगाने में भी भारत दुनिया के अग्रणी देशों की पंक्ति में शामिल है। डीआरडीओ की 2 डी जी दवा आने और कतिपय टीकों को और अनुमति मिलने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भारत में टीकों की कोई कमी नहीं रहेगी ऐसी उम्मीद की जा रही है।

कोरोना की दूसरी लहर के फैलने का एक बड़ा कारण इसके नए स्ट्रेन आने के साथ ही लोगों द्वारा लॉकडाउन में मिली छूट के बाद कोविड अनुकूल व्यवहार के प्रति लापरवाह होने को माना जाता है। सरकार द्वारा बार-बार मास्क लगाने, साबुन से हाथ धोने, सेनेटाइजर का उपयोग करने और सोशल डिसटेंसिंग की पालना करने आदि  की अपील के बावजूद लापरवाही का आलम यह रहा कि दिल्ली के सदर बाजार आदि का नजारा वहां एक कदम रखने की जगह बाकी होने जैसा हो गया। कोरोना के कारण एक ओर हमें एक नई संस्कृति में जीने और अपनों की अर्थी को भी कन्धा नहीं दे पाने की मजबूरी जैसी बेबसी में जीने की विवशता बन गया है। वहीं दूसरी ओर उन दिनों बाजारों, रैलियों और अन्य स्थानों पर उमड़ती भीड़ ने हमें अपनी दोहरी मानसिकता पर सोचने पर भी विवश किया और अब सभी को एक के बजाय दो-दो मास्क तथा तीन गज की दूरी के स्थान पर दस मीटर की दूरी रखने और हवा में वायरस होने की संभावना को देखते सुबह-शाम की सैर को भी बंद करने की हिदायतें दी जा रहीं हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राज्यों के मुख्यमंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों, जिला कलेक्टरों और चिकित्सा विषय विशेषज्ञों एवं समाज के अन्य वर्गों तथा केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्रियों, सचिवों आदि से निरन्तर वार्ता कर हालातों का जायजा ले रहें हैं एवं अस्पतालों का मौका मुआयना कर ऑक्सीजन प्लाण्ट और अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धि की समीक्षा भी कर रहे हैं। राज्यों के मुख्यमंत्री भी अपने-अपने राज्यों की स्थिति का नियमित जायजा ले रहें हैं।

दरअसल आज शहरों के साथ-साथ सबसे बड़ी चिन्ता गावों में कोरोना के प्रसार को रोकने की है। इस चुनौती को पार पाना आसान नहीं है। यदि समय रहते गावों में कोविड के प्रसार को नियंत्रित करने में सफलता नहीं मिलेगी तों हालात और भी अधिक गम्भीर हो सकते है। इसलिए समय का तकाजा है कि हम संकट की इस घड़ी में सभी प्रकार की विचारधाराओं और मतभेद भूला और दोषारोपण की प्रवृति छोड़़ कर कोरोना के भीषण संकट को एक जुट होकर समाप्त करने के प्रयासों में जुट जायें और कोविड अनुकूल व्यवहार की सौ प्रतिशत अनुपालना करने के साथ ही  टेस्ट, ट्रेक और ट्रीट के मन्त्र और टीकाकरण को और अधिक व्यापक बनायें।

यह पहली बार नहीं है कि भारत को कोविड-19 जैसी मुसीबत का सामना करना पड़ा है। देश ने इसके पहले काला बुखार, हैजा, प्लेग, बड़ी चेचक, पोलियों, सार्स, चिकनगुनिया, स्पेनिश फ्लू, एचआईवी-एड्स, इबोला, जीका वायरस, निपाह आदि अनेक बीमारियों का बहादुरी से मुकाबला किया है और इन बीमारियों पर नियंत्रण करने के साथ-साथ उन्हें जड़ मूल से समाप्त करने में भी सफलता पाई है। इसी प्रकार प्राकृतिक आपदाओं छप्पनियां अकाल, सूखा, भूकम्प, बाढ़, सूनामी, चक्रवाती और बर्फानी तूफान, हिमस्खलन, ओलावृष्टि, बादल फटना, लू  (ताप लहर), टिड्डियों का आक्रमण, आगजनी और अन्य दुर्घटनाओं आदि का भी भारत के लोगों ने हिम्मत और एकजुटता के साथ  मुकाबला किया हैं।

 

नीति गोपेन्द्र भट्ट

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