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सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय

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पिछले वर्ष दिसम्बर में मोदी सरकार ने विश्व के क्षितिज पर एक धमाका कर दिया जब भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में 21 जून को विश्व योग दिवस मनाये जाने का प्रस्ताव रखा। उससे भी महत्वपूर्ण बात यह रही कि इस प्रस्ताव के सह-प्रस्तुतकार बने 177 से भी अधिक देश, जो अपने आप में ही एक इतिहास है। इस प्रस्ताव के समर्थन में सारा विश्व उमड़ पड़ा और करतल ध्वनि, मेजों की थपथपाहट और सब के मुख पर मुस्कान के बीच सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित हो गया। 21 जून 2015 को प्रथम बार पूरे विश्व में सभी देशों में इसे पूरे गौरव व सम्मान के साथ मनाया जा रहा है और आगे भी प्रति वर्ष मनाया जाता रहेगा।

जब 21 जून को सारा विश्व योग दिवस के रूप में मनायेगा तो वह दिन ऐसा होगा जब वर्ष का सबसे बड़ा दिन होगा और सब से छोटी रात। इस प्रकार उस दिन सारा विश्व योग द्वारा प्रकाशमान होगा और अन्धेरा सबसे कम होगा। मानव के जीवन में भी प्रकाश अन्धेरे पर हावी रहेगा।

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योग की महिमा व महत्व सारे विश्व में पहले से ही सर्वविदित है, पर यह पहली बार हुआ कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इस पर अपनी मुहर लगाकर इसे विधिवत मान्यता प्रदान की। योग विद्या के लिये यह उतना ही गौरवशाली क्षण है, जितना कि भारत के लिये। यह वही भूमि है जहां इस विद्या ने जन्म लिया, पली, पनपी और सारे विश्व को लाभान्वित किया। इस विद्या को मान्यता मिलने का मतलब है कि योग अब देश, काल और धर्म की सभी सीमाओं से ऊपर उठकर सर्वव्यापी, सर्वस्पर्शी और सर्वव्यापक बन चुका है। इसे किसी धर्म का संकीर्ण चश्मा लगाकर देखने का प्रयास सूर्यरूपी सत्य को नकार कर अपने आपको धोखा देने की तरह है।

योग किसी एक का नहीं, सबका है। वह जाति, धर्म, राष्ट्र, व लिंगभेद का ध्यान नहीं रखता। उसकी बाहें सबके लिये सदा फैली रहती हैं। जो भी उसके पास आता है वह उसे खुली बाहों से अपने पाश में बांध लेता है। योग कोई पूजा-पद्धति नहीं है। यह शरीर, मन, बुद्धि व आत्मा का व्यायाम है। यह यौगिक प्रक्रिया द्वारा व्यक्ति के शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा के सभी विकारों को निकाल फेंक कर उन्हें शुद्ध कर देता है। योग ही आधुनिक समाज की सभी समस्याओं, विकृतियों, मानसिक पीड़ाओं और रोगों से निजात दिलाता है। यह व्यक्ति को उसकी आत्मा के दर्शन करवाता है और आत्मा का परमात्मा से मेल कराता है।

इसमें कोई सन्देह नहीं कि योग विश्व को भारत की एक महान व अद्भूत देन है। यह महान ऋषियों-महर्षियों के ज्ञान, खोज व तपस्या का करिश्मा है, पर यह भी सच्च है कि हिन्दू धर्म कोई पंथ या संप्रदाय नहीं है और न ही यह कोई पूजा-पद्धति है। यह तो एक जीवनशैली है, जीवनदर्शन है। आज योग पूरे विश्व में लोकप्रिय बन चुका है। यह केवल इसलिये कि योगियों ने मानवता के कल्याण के लिये इस के प्रसार व शिक्षा में कभी किसी प्रकार का भेदभाव नहीं बरता। यही कारण है कि योग आज विश्व के कोने-कोने में अपनी पहचान बना चुका है, अपनी उपयोगिता का सिक्का जमा चुका है। इसे समूचा विश्व धर्म, जाति, लिंग, राज्य व देश के भेदभाव के बिना सहर्ष अपना रहा है।

दु:ख की बात यह है कि कुछ राजनीतिक व धार्मिक सम्प्रदाय के लोग इसे संकीर्ण राजनीतिक व पंथ द्वेष की दृष्टि से देख रहे हैं। सच्चाई तो यह है कि सामान्य मुस्लिम या अन्य सम्प्रदाय के लोग अपने आपको भारतीय समझते हैं। उनके मन में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं है। लेकिन, कुछ संस्थाएं जान-बूझकर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही हैं। इसी कारण इस समुदाय का बहुत बड़ा हिस्सा निरक्षर रह गया है और वह राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल नहीं हो सका। वह शिक्षा व आर्थिक क्षेत्र में उतनी प्रगति नहीं कर सका, जितनी उसे करनी चाहिये थी। इस संकीर्णता ने उन्हें कई घातक रोगों से बचने की दवाईयां खाने व टीके लगवाने से भी दूर रखा। जिन्होंने उनकी बात नहीं मानी आज वह सुखी और सम्पन्न हैं। कुछ लोग देश के विभिन्न सम्प्रदायों में अलगाव की भावना जागृत रखना चाहते हैं। यही तत्व थे जो आजादी से पूर्व प्रचार करते थे कि हिन्दू और मुसलमान दो अलग धाराएं हैं और वह इक_े नहीं रह सकते। इसी सोच ने देश का विभाजन करवाया था। इसी गलत सोच का परिणाम आज वर्तमान पाकिस्तान भी भुगत रहा है।

PAGE 22-25_Page_2योग कोई धार्मिक प्रक्रिया नहीं है। यह तो शरीर, मन, वाणी, श्वास और मस्तिष्क का एक व्यायाम है। व्यायाम किसी भी धर्म या सम्प्रदाय में वर्जित नहीं है और न हो सकता है। किसी भी धर्म या संप्रदाय का कौन-सा व्यक्ति है जो अपने ईश्वर, अल्लाह, गॉड आदि के आगे नतमस्तक नहीं होता, उसे प्रणाम नहीं करता? जीवन में किसी न किसी समय, किसी न किसी कारण कौन अपनी सांस नहीं रोकता, लम्बी सांस लेता और छोड़ता? हमारे डॉक्टर मरीजों की जांच करते समय तो खुद ही सांस रोकने, लंबे सांस लेने और छोडऩे को कहते हैं। क्या धर्म का बहाना बनाकर हम यह भी बन्द कर दें तो उससे नुक्सान किसका होगा – मरीज का या डाक्टर का?

अनेक मुस्लिम व अन्य विचारक इतना तो मानते हैं कि नमाज और योग दोनों ही शरीर के लिये लाभदायक हैं। इस कारण कुछ गिने-चुने लोगों का विरोध का कोई महत्व नहीं रह जाता। एक तरफ जहां एक मुस्लिम संगठन ने 21 जून को हो रहे योग दिवस समारोह का विरोध किया है, वहीं देवबंद के दारू उलूम ने इसका समर्थन किया है और कहा है कि योग जैसे व्यायाम का धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। यहां तक कि समाजवादी पार्टी के नेता व उत्तर प्रदेश के मंत्री आजम खां ने भी योग दिवस आयोजन व उसे मनाने का समर्थन किया है।

जहां भारत मे कुछ कट्टरपंथी संगठन योग का विरोध कर रहे हैं, वहीं एक समाचार चैनल की रिपोर्ट के अनुसार, योग पाकिस्तान में दिनों-दिन लोकप्रिय होता जा रहा है। वहां के एक प्रशिक्षक के अनुसार, योग का धर्म से कुछ लेना-देना नहीं है। पाकिस्तान में योग का प्रशिक्षण प्राप्त करने के इच्छुक व्यक्तियों की संख्या दिनों-दिन बढ़ती ही जा रही है। उसने तो यहां तक दावा कर दिया कि योग के महान गुरू पतंजलि वर्तमान पाकिस्तान की ही सन्तान हैं और वह तो इस विद्या को अपना ही मानते हैं।

कुछ भी हो, इक्का-दुक्का विरोध के बावजूद सच्चाई तो यही है कि योग धर्म की सीमाओं से बहुत ऊपर है। यह भी याद रखने वाली बात है कि भारत के साथ मिलकर जिन राष्ट्रों ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में योग दिवस मनाये जाने का प्रस्ताव रखा था उनमें से अधिकांश मुस्लिम व ईसाई बहुल राष्ट्र हैं और उनकी अपने धर्म के प्रति निष्ठा किसी से कम नहीं है।rss7072

भारत सरकार ने भी इस महान दिवस को मनाने के लिये पूरे प्रबंध कर लिये हैं, ताकि यह दिन विश्व के लिये यादगार बन जाये। सारे प्रदेशों में इसे बढिय़ा से बढिय़ा तौर से मनाने के लिये जोर-शोर से प्रबन्ध किये जा रहे हैं। केन्द्र में प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रियों से आग्रह किया है कि वह उस दिन जहां भी हों उसमें भाग लें। दिल्ली का कार्यक्रम तो यादगार बनने जा रहा है। आशा है कि इसमें इस बार रिकॉर्ड संख्या में जनता शामिल होगी। सरकार ने अल्पसंख्यकों के मन में किसी प्रकार की शंका न रहे इसलिये उसने कह दिया कि यदि मुस्लिम भाई चाहें तो श्लोकों का उच्चारण न कर वह ‘अल्लाह, अल्लाह’ बोल सकते हैं। वैसे मुस्लिम समुदाय में योग के बारे अब कोई गलतफहमी नहीं रही है। वह बड़े उत्साह के साथ इसमें भाग लेने जा रहे हैं।

योग भारत की समृद्ध संस्कृति का अभिन्न अंग है। भारत ने विश्व को बहुत कुछ दिया है। योग भी उसी कड़ी में एक गौरवशाली भेंट है। योग के द्वारा अब भारत ही नहीं पूरा विश्व स्वास्थ्य की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाएगा। योग के माध्यम से विश्व को मानसिक शान्ति मिलेगी और तनाव से राहत। आध्यात्मिक शक्ति का संचार होगा। व्यक्ति योग के माध्यम से अपनी आत्मा से साक्षात्कार करेगा। यह मानव और मानव के बीच भाईचारे का सृजन करेगा। जब व्यक्ति तनाव रहित होगा तो उसका परिवार भी, उसका गांव भी, उसका पास-पड़ोस भी, उसका प्रांत और उसके देश में भी सुख और शान्ति का साम्राज्य होगा। योग सारे विश्व में स्वास्थ्य और शान्ति का संचार करेगा। इस शांति, सद्भावना और भाईचारे से भारत भी लाभान्वित होगा और सारा विश्व भी।

अम्बा चरण वशिष्ठ

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