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जब आपकी हॉबी और पैशन ही बन जाए आपका प्रोफेशन

जब आपकी हॉबी और पैशन ही बन जाए आपका प्रोफेशन

गरिमा अपने कॉलेज के दिनों से अच्छा खाना खाने और बनाने की शौकीन थी। लेटेस्ट रेसिपी के अनुसार नए डिश तैयार करना और उसके जायके में एक नयापन लाना उसके शौक में शामिल था। कॉलेज के दिनों में उसने कई प्रकार के डिश प्रिपरेशन तथा रेसिपी प्रिस्क्रिप्शन की प्रतियोगिताएं भी जीती थीं। बल्कि कई मैगजीन्स तथा न्यूजपेपर्स में कुकरी कॉलम के अंतर्गत उसके विभिन्न प्रकार के डिश के रेसिपी पर आलेख भी छप चुके थे। स्कूल के दिनों से ही वह अच्छा खाने- खिलाने की हॉबी में अपना करियर बनाना चाहती थी। किन्तु पिता के असामयिक निधन के तुरन्त बाद उसकी शादी हो गयी और एक बार जब वह अपने घर-गृहस्थी की जिम्मेदारियों में मसरूफ हुई तो फिर कभी  वह अपने इस शौक को पूरा करने के बारे में सोच भी नहीं  पाई।

ससुराल में पति के ड्यूटी पर जाने के बाद उसके लिए खाली समय बिताना बहुत कठिन हो जाता था। फिर एक दिन अचानक उसे ध्यान आया कि फुर्सत के इस वक्त का इस्तेमाल अपनी पुरानी हॉबी को पूरा करने के लिए क्यों न किया जाए। गरिमा ने अपने घर के ही एक कमरे में कुकरी की क्लास शुरू कर दी। शुरू में तो उसे बड़ी परेशानी हुई, क्योंकि क्लास स्टार्ट करने के लिए जितने धन का उसने निवेश किया था, उस हिसाब से उतने स्टूडेंट्स नहीं आये। लेकिन कुछ महीनों में ही हाउसवाइव्स से लेकर स्कूल-कॉलेज की छात्राएं भी इस क्लास को ज्वाइन करने लगी। धीरे-धीरे उसकी कोचिंग क्लास में इतने स्टूडेंट्स हो गये कि गरिमा के लिए यह सब खुद मैनेज करना मुश्किल-सा हो गया। उसने अपनी सहायता के लिए दो असिस्टेंट्स भी रख ली। आज उसे खुद हैरानी हो रही है कि उसका कभी का भूला-बिसरा शौक उसके लिए कैसे एक अच्छी आय का एक आसान -सा साधन बन गया।

इस प्रकार से देखें तो हम पाएंगे कि इस दुनिया में हर इन्सान में ऐसा कोई न कोई हुनर अवश्य होता है जिसकी बराबरी दूसरा कोई नहीं कर सकता है। समय रहते इस प्रकार की विलक्षण प्रतिभा का यदि सदुपयोग किया जाये तो इससे खुद को संतुष्टि तो मिलती ही है साथ ही वह हमारे लिए एक अच्छे आय का जरिया भी बन जाता है। जिन्दगी दुबारा नहीं मिलती और गुजरा वक्त और अवसर कभी लौट कर नहीं आता। लेकिन यदि कोई व्यक्ति अपने जीवन के सपनों को साकार करने के लिए दृढ प्रतिज्ञ हो तो उसकी राह में कोई भी परिस्थितियां बाधा बनकर खड़ी नहीं हो सकती है।

ड्यूटी के दौरान लंच टाइम में घर का बना खाना खाने का हर एक व्यक्ति का सपना होता है। हर कोई यही चाहता है कि हमें बाहर से खाना खरीदने की बजाय यदि घर की बनी दो चपातियां और थोड़ी सब्जी मिल जाए तो उससे बेहतर और कुछ नहीं हो सकता है। परन्तु इस देश में लाखों व्यक्तियों के लिए यह सोच महज सपना रह जाती है। मुंबई में डिब्बेवाला (टिफिन कैरियर) के नाम से जिस छोटी योजना के तहत ऑफिस में काम कर रहे कर्मचारियों को उनके घर वालों के द्वारा बनाये गये खाने को लंच के समय डिस्ट्रीब्यूट किया जाता है उसने अब एक उद्योग का रूप अख्तियार कर लिया है। यह अत्यंत लाभकारी तथा रोजगारपरक योजना विकसित देशों के रिसर्च का विषय बना हुआ है।

सच पूछें तो इस प्रकार की योजना आप अपने शहर में भी शुरू कर सकते हैं बशर्ते आप खाना बनाने में रूचि लेते हैं और कुछ स्टाफ को मैनेज करने में आपको मजा आता है। शुरू में ये सभी बातें बहुत छोटी और नाटकीय लगती हैं, लेकिन यकीन मानिये वक्त के साथ धीरे-धीरे यही छोटा उद्यम एक बहुत बड़ा बिजनस एम्पायर बन जाता है, आने वाली पीढ़ी के लिए मील का पत्थर बन जाता है। लेकिन इस तरह की सफलता पाने के लिए धैर्य की नितांत जरुरत होती है और लोगों की आलोचनाओं के बावजूद हिम्मत बनाये रखने की बड़ी आवश्यकता होती है।

यदि आपको पौधों को संवारने, उनकी पत्तियों तथा टहनियों को प्रूनिंग करना अच्छा लगता है तथा सैप्लिंग्स के नरचरिंग में इंटरेस्ट लेते हैं और कभी आपने खुद का ऐसा कोई गार्डन तैयार करने का सपना देखा हो तो कोई शक नहीं कि आप विभिन्न प्रकार के फूलों और पौधों की नर्सरी एस्टेब्लिश कर सकते हैं। फिर अपने साथ पौधों को बढ़ता देखने की एक अलग आत्मसंतुष्टि के साथ आप एक अच्छी खासी आय भी अर्जित कर सकते हैं।

नर्सरी की स्थापना के साथ फूलों के बिजनस में बुके का एवरग्रीन फैशन और बिजनस पारिवारिक आय को कई गुणा बढ़ा सकता है। 1990 के आर्थिक सुधार के कारण ग्लोबलाइजेशन तथा वेस्टर्न कल्चर के बढ़ते लाइफ स्टाइल में भारत में आयातित वैलेंटाइन डे के अवसर पर गुलाब के फूलों की कीमतों तथा मांग में बेतहाशा वृद्धि ने इस क्षेत्र में रोजगार के साथ-साथ वार्षिक आय तथा टर्नओवर में आशातीत सफलता हासिल की

टेलरिंग का शौक एक बड़ी आय अर्जित करने वाले शौक के रूप में आज एक बड़े उद्योग के रूप में स्थापित हो चुका है। एक टेलर महज कपड़ों को सिलकर उसे उपयोगी ही नहीं बनाता है बल्कि वह आपके पर्सनेलिटी को भी संवारता है। सोच कर देखिये कि यदि आपके पास टेलरिंग का कोई शौक है तो आप कितनी आसानी से उसे एक छोटे-से बिजनस का रूप दे सकते हैं और आप एक उद्यमी बनकर घर-परिवार की आय में अपना बहुत बड़ा योगदान दे सकते हैं। खासकर इस प्रकार के बिजनस के साथ सबसे बड़ी बात यह है कि इसकी स्थापना में बहुत अधिक धन निवेश की आवश्यकता नहीं होती है। इसकी शुरुआत अपने घर के एक छोटे से कमरे से की जा सकती है और निवेश के रूप में एक सिलाई मशीन और कुछ आवश्यक सामान के अतिरिक्त और किसी चीज की जरुरत नहीं पड़ती है।

इसके अतिरिक्त यदि आप अपने स्कूल- कॉलेज के दिनों में एक टैलेंटेड स्टूडेंट रहे हैं और टीचिंग आपको आत्मसंतुष्टि प्रदान करता है तो निस्संदेह फुर्सत के समय को आप एक लाभकारी उद्यम के रूप में संवार सकते हैं। प्रारम्भ में आप कोचिंग क्लासेज छोटे लेवल पर अपने घर के खाली कमरों तथा डाईनिंग हॉल में शुरू कर सकते हैं और फिर जब आवश्यकता हो तो आप अपने शहर में अपनी जरूरत के हिसाब से कमरे किराये पर ले सकते हैं। जब कभी लगे कि आप इतने बड़े लेवल के इस काम को खुद अकेले नहीं मैनेज कर पा रहे हैं तो प्राइवेट ट्यूटर्स का भी अपॉइंटमेंट कर सकते हैं। यह मानकर चलिए कि लिटरेसी का परसेंटेज बढऩे के बावजूद आज भी गांव से लेकर शहर तक एक अच्छे ट्यूटर का काफी अभाव है। ऐसी परिस्थिति में यदि आप क्वालिटेटिव एजुकेशन देने में सफल हो जाते हैं तो कोई शक नहीं कि आप इस बिजनस में पैसे के साथ प्रेस्टीज भी कमा पाएंगे।

आज के मेटेरियेलिस्टिक जमाने में जहां पति-पत्नी दोनों कामकाजी कपल होते हैं तो ऐसी परिस्थिति में छोटे बच्चों के पालन- पोषण की जिम्मेदारी एक अर्जेंट प्रायोरिटी के रूप में शहरी कल्चर की एक बहुत बड़ी समस्या के रूप में आ खड़ी हुई है। सच पूछिये तो ऐसे कामकाजी माता-पिता के बच्चों के देख-रेख के लिए शहरों में ‘क्रेशÓ या शिशु पालना गृह का प्रबंधन अत्यंत लाभकारी उद्यम का अवसर साबित हो सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस तरह के उद्यम को प्रारम्भ करने के लिए निवेश के मामले में किसी बड़ी राशि की बिल्कुल कोई आवश्यकता नहीं होती है। इस बात में कोई शक नहीं है कि क्रेश के रूप में शिशुओं के देख-भाल के लिए आपके व्यक्तित्व में धैर्य, दया, सहानुभूति, ममत्व, सहनशीलता तथा अन्य मानवीय गुणों की उपस्थिति पूर्व आवश्यक शर्तें हैं।

सजना और संवरना सभ्यता के आदिकाल से ही मानव की प्रकृति रही है। विशेष तौर पर यह महिलाओं का प्रिविलेज्ड एरिया माना जाता है। किन्तु इकॉनमी के लिब्रलाइजेशन और ग्लोबलाइजेशन के साथ आज स्त्री के इस प्रिविलेज्ड एरिया में पुरुषों ने सेंध लगा दी है। मॉडर्न कल्चर के रूप में ब्यूटीफुल और हैंडसम दिखना एक बड़ी इंडस्ट्री का रूप ले लिया है। तभी कहते हैं कि जो दीखता है वही बिकता है।

आशय यह है कि यदि आपमे एस्थेटिक सेंस है तो आप लोगों को सजाने और संवारने के कुदरती शौक को एक उद्यम का रूप दे सकते हैं। आप अपने घर का वह कमरा जो कि बाजार में खुलता हो या फिर मेन रोड में ओपन होता है उसमें फीमेल ब्यूटी पार्लर तथा जेंट्स पार्लर के काम स्टार्ट कर सकते हैं। ब्याह-शादी से लेकर कई सामाजिक-पारिवारिक संस्कारों के अवसर के साथ-साथ पार्टी-फंक्शन के अवसर पर स्त्री-पुरुष खुद को ग्रूम करने के लिए ब्यूटी पार्लर अवश्य जाते हैं और ब्यूटी पार्लर की ब्लीचिंग से लेकर फेसिअल, ऑयब्रो, मसाज, हेअरकट, मैनीक्योर, पेडीक्योर तक की सेवाएं खूब बिकती हैं। इन सेवाओं के बदले ग्राहक कोई भी प्राइस देने को सहज ही तैयार  हो जाते हैं।

ब्यूटी के क्षेत्र में विश्वविख्यात शहनाज हुसैन तथा भारत के फिल्म उद्योग नगरी बॉलीवुड के फेमस हेयर स्टाइलिस्ट जावेद हबीब से लेकर सपना भावनानी किसी परिचय के मुहताज नहीं रहे हैं। इन सभी कलाकारों के पास भी शुरू में एक सपना था और कुछ करने का अदम्य साहस और उन्होंने अपने क्षेत्र में सोहरत के जिन बुलंदियों पर अपने पैर रखे हैं वह आज एक इतिहास बन चुका है।

सच पूछिये तो इस धरती पर जन्म लेने वाला हर एक शिशु खुद में एक चमत्कार होता है और इस लिहाज से हम सभी विलक्षण प्रतिभा के धनी हैं। जरुरत महज उस प्रतिभा को पहचानने की है। जरुरत उस शौक को जीवित रखने की है। आपको अवसर की तलाश में रहना होगा और उस कोशिश में आपके रास्ते में जो भी मुश्किलें आती हैं उनका धैर्यपूर्वक मुकाबला करते हुए प्रगति की राह में धीरे ही सही लेकिन निरंतर आगे बढ़ते रहना होगा।

 

Deepak Kumar Rath


श्रीप्रकाश
शर्मा

(लेखक प्राचार्य, जवाहर नवोदय विद्यालय, मामित, मिजोरम, हैं)

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