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बदलते भारत की तस्वीर को बयां करता टोक्यो ओलंपिक

बदलते भारत की तस्वीर को बयां करता टोक्यो ओलंपिक

बदलते भारत की तस्वीर कों बयां करता टोक्यो ओलंपिक ‘पढ़ोगे लिखोगे, बनोगे नवाब, खेलोगे कूदोगे, होगे खराब’ अक्सर घर में बड़े बुजुर्गो से इस वाक्य को आपने कई बार सुना होगा, क्योंकि पुराने समय में एक धारणा थी कि सिर्फ पढ़ाई करने से बच्चे का भविष्य सुधरता है। इसी कारण माता-पिता अपने बच्चों को खेल कूद से दूर रखते थे। लेकिन, अब जमाना बदल चुका है। अब खेलोगे कूदोगे बनोंगे नवाब का जमाना आ चुका है। आज खेलो के क्षेत्र में हमारे एथलीट- ओलंपिक, विश्व चैपियनशिप और तमाम विश्व स्तरीय टूर्नामेंट में नए-नए कीर्तिमान स्थापित करते हुए देश का झंडा बुलंद कर रहे है। फिर चाहे ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू हो या फिर नीरज चोपड़ा जिन्होंने टोक्यो ओलंपिक भाला फेंक में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। खिलाडिय़ों ने यह दर्शाया है कि अगर कुशल मार्गदर्शन हो और मजबूत मन हो, तो क्या कुछ नही किया जा सकता। इस का ही नतीजा है कि भारतीय समाज की सोच में आता बदलाव वह सकारात्मक संकेत है जो पी. वी. सिंधु, साक्षी मलिक, दीपा कर्माकर, सुशील कुमार, मेरी कॉम, योगश्वर दत्त, अभिनव बिंद्रा, नीरज चोपड़ा, मीराबाई चानू, दीपक पुनिया जैसे हजारों खेल प्रतिभाओं कों उभारने में मदद करेगा।

टोक्यो ओलंपिक में पुरूष हॉकी टीम के सेमीफाइनल में बेल्जियम से हारने के बाद, प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने टीम के लिए अपना समर्थन ट्वीट किया, जिसने उसे कांस्य पदक के लिए कड़ी मेहनत करने के लिए प्रोत्साहित किया। यहां तक कि जब उन्होंने टोक्यो जाने की पूर्व संध्या पर एथलीटों के साथ बातचीत की, तो उन्होंने उनसे कहा कि वे पदक के बारे में चिंता न करें बल्कि अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दें। यह केवल प्रतीकात्मकता नही हैं बल्कि इसे हमने मोदी सरकार के कार्यों में भी देखा है। उन्होंने सभी स्पार्धाओं के एथलीटों की तैयारी को सुविधाजनक बनाया है। हॉकी टीमें पिछले चार दशकों में अपने पूर्ववर्तियों प्रदर्शन की तुलना में ओलंपिक प्रतियोगिता में आगे बढी है, तो यह केंद्र सरकार द्वारा की गई उत्कृष्ट तैयारी के कारण है। मसलन केंद्रीय बजट आवंटन 2011-12 में खेल बजट 1121 करोड़ अपर्याप्त था, जिसे मोदी सरकार ने बढाकर 2019-20 में बढ़ाकर 2826 करोड़ किया है, बजट का एक बडा हिस्सा प्रतिभाशाली एथलीटों के पोषण के लिए आरक्षित है। पीएम मोदी के निर्देश ने सुनिश्चित किया कि एथलीटों को सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षण और समर्थन मिले ताकि भारत विभिन्न खेलों में विश्व स्तरीय प्रदर्शन करें। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि एथलीटों का समर्थन करने पर ध्यान केंद्रित करने के अलावा, पारिस्थितिकी तंत्र को जमीनी स्तर पर भी काम करने के लिए प्रोत्साहित करना महत्वपूर्ण है। मोदी सरकार द्वारा खेलों को प्रोत्साहित करने के लिए उठाए गए कुछ महत्वपूर्ण कदम जिनमे शामिल है! राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों की पुरस्कार राशि में वृद्धि मोदी सरकार ने 29 अगस्त 2020 को राष्ट्रीय खेल की सात श्रेणियों में से चार में पुरस्कार राशि बढ़ा दी। इस दौरान मेजर ध्यानचंद खेलरत्न पुरस्कार की राशि को 7.5 लाख रूपये से बढ़ाकर 25 लाख रूपये, अर्जुन अर्वाड को पांच लाख से बढाकर 15 लाख रूपये, ध्यानचंद पुरस्कार विजेताओं की पुरस्कार विजेताओं की पुरस्कार राशि को 5 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रूपये किया। इन पुरस्कार राशियों को बढ़ाने का मुख्य उद्देश्य खिलाडिय़ो के मनोबल को बढाना और नागरिकों में खेल के प्रति सकारात्मक माहौल बनाना है। ब्रिक्स देशों के बीच संस्कृति और खेल के क्षेत्र में सहयोग पर एमओयू को मंजूरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संस्कृति और खेल के क्षेत्र में सहयोग पर एक एमओयू की मंजूरी दी गई थी। इस एमओयू पर 25 नवंबर 2020 को ब्रिक्स देशों ने हस्ताक्षर किए थे। पांच देशों के बीच खेल के क्षेत्र में सहयोग से खेल विज्ञान, खेल चिकित्सा, कोचिंग तकनीक आदि के क्षेत्र में ज्ञान और विशेषज्ञता का विस्तार करना इस एमओयू का प्रमुख लक्ष्य था, जिससे अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट में हमारे खिलाडिय़ों के प्रदर्शन में सुधार हो और ब्रिक्स सदस्य देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में मदद मिले। फिट इंडिया मूवमेंट की शुरुआत फिट इंडिया अभियान, लोगों को स्वस्थ रहने और शारीरिक गतिविधियों और अपने दैनिक जीवन में खेल को शामिल करके फिट रहने के लिए प्रोत्साहित करता है। इसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 29 अगस्त 2019 को राष्ट्रीय खेल दिवस के मौके पर इंदिरा गांधी स्टेडियम, नई दिल्ली में शुरू की गई थी। फिट इंडिया मूवमेंट के तहत कई नई पहल की शुरुआत की गई, जिसमें फिट इंडिया साइक्लोथॉन, फिट इंडिया वॉकथॉन, फिट इंडिया स्कूल सप्ताह, फिट इंडिया फ्रीडम रन, फिट इंडिया वार्ता और फिट इंडिया योग दिवस शामिल हैं। लक्ष्य ओलंपिक पोडियम योजना खेल मंत्रालय ने 2016 और 2020 के ओलंपिक खेलों के लिए संभावित पदक संभावनाओं में मदद करने के लिए राष्ट्रीय खेल विकास कोष (NSDF) के तहत मई 2015 में ‘टारगेट ओलंपिक पोडियम (TOP)’ योजना जारी की। प्रमुखता केंद्र एथलेटिक्स, बैडमिंटन, बॉक्सिंग, तीरंदाजी, कुश्ती और निशानेबाजी के खेल को दी गई है।

टोक्यो ओलंपिक में शामिल होने जा रहे एथलीटों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते 13 जुलाई को संवाद किया था। इस दौरान उनका प्रमुख लक्ष्य खिलाडिय़ों को तनावरहित रखना और एथलीटों को भरोसा दिलाना था कि मेडल आये या न आये, एथलीट तनावरहित होकर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दें। यह उसी संवाद का नतीजा है कि टोक्यो ओलंपिक में भारतीय खिलाडिय़ों ने अच्छा प्रदर्शन करते हुए 7 मेडल अपने नाम किए। नीरज चोपड़ा ने ओलंपिक में इतिहास रचते हुए देश को पहला गोल्ड मेडल दिलाया। भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जर्मनी को हराकर ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। भारत ने 41 साल बाद ओलंपिक में हॉकी का मेडल जीता है। भारत ने 1 स्वर्ण, 2 रजत और 4 कांस्य पदकों के साथ ओलंपिक का समापन किया है। अब तक ओलंपिक खेलों में यह भारतीय खिलाडिय़ों का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। मोदी सरकार ने भारत में खेलों को बढ़ावा देने और प्रोत्साहित करने के लिए अपना उचित योगदान दिया है। पीएम मोदी खुद फिटनेस के प्रतीक हैं और ऐसे व्यक्ति हैं जो उदाहरण के साथ आगे बढ़ते हैं और साथी नागरिकों को स्वस्थ जीवन शैली अपनाने का सुझाव देते हैं। खेलों में नागरिकों की अधिकतम भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार की ओर से और क्या किया जा सकता था, इस पर कोई बहस नहीं है। शायद ऐसी बहस का ना होना विपक्ष की नाकामयाबी और खेलों के प्रति वर्तमान सरकार की योजना और एक मजबूत भारत की ओर बढ़ते भारत के लिए किये जा रहे निस्वार्थ कार्यों को माना जा सकता है।

 

डॉ. प्रीति

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