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राजस्थान भाजपा का चिन्तन शिविर : 2023 साधने का रोडमेप

राजस्थान भाजपा का चिन्तन शिविर : 2023 साधने का रोडमेप

दक्षिणी राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र में उदयपुर से करीब 85 किमी दूर राजसमंद जिले में कुंभलगढ़ के पास भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) द्वारा आयोजित दो दिवसीय चिंतन शिविर में    दिग्गज नेताओं पूर्व मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव और  गजेन्द्र सिंह शेखावत की अनुपस्थिति सबसे अधिक चर्चा में रही। उनके बैठक में नही आने के अलग अलग कारण बताए गए। हालांकि इस बैठक में 40 से अधिक बड़े नेता मौजूद रहे लेकिन भाजपा की एकता प्रदर्शन की मुराद अधूरी रह गई। शिविर में राजस्थान विधानसभा का लक्ष्य – 2023 साधने का रोडमेप बनाया गया।

चाक-चौबंद व्यवस्था के मध्य आयोजित इस चिंतन शिविर का आयोजन राजसमंद जिले के कुंभलगढ़ अभ्यारण क्षेत्र से जुड़े उदावड़ गांव में किया गया। पहाड़ी क्षेत्र में बने इस इस रिसोर्ट में 8 से 10 किमी. तक मोबाइल नेटवर्क नहीं था। बताया गया कि एकांत में चिंतन शिविर रखने का मुख्य मकसद यह था कि नेता फोन करने या सुनने में व्यस्त नहीं रहें। चिंतन शिविर से मीडिया और आमजन को दूर रखा।

कुंभलगढ़ स्थित एक रिजॉर्ट में हुए प्रदेश भाजपा के इस चिंतन शिविर में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ओम प्रकाश माथुर, अशोक परनामी एवं अरुण चतुर्वेदी, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया, उपनेता राजेंद्र राठौड़, प्रदेश संगठन महामंत्री चंद्रशेखर, केंद्रीय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और कैलाश चौधरी, राष्ट्रीय प्रवक्ता सांसद पूर्व केन्द्रीय मन्त्री राज्यवर्धन राठौड़, पीपी चौधरी और निहालचंद मेघवाल, सांसद सुमेधानंद सरस्वती, सांसद सीपी जोशी, दीया कुमारी, कनकमल कटारा, पूर्व मंत्री प्रभुलाल सैनी, विधायक वासुदेव देवनानी, प्रदेश महामंत्री मदन दिलावर सहित कई बड़े नेता और पदाधिकारी मौजूद रहे।

मेवाड़ से ही फिर आगाज

चिंतन शिविर का आयोजन मेवाड़ क्षेत्र  के कुंभलगढ़ में करने का प्रयोजन इस अंचल के दो विधानसभा क्षेत्रों वल्लभनगर और धरियावद में होने वाले उप चुनाव के लिए उपयुक्त वातावरण बनाना तथा मेवाड़ में अपनी पकड़ को और अधिक मजबूत बनाना की रणनीति बताई जाती है। माना जाता है कि प्रदेश की सत्ता की चाबी मेवाड़-वागड़ क्षेत्र के पास ही रहती है। यह बीजेपी का गढ़ भी माना जाता है। पार्टी यहां हमेशा से मजबूत स्थिति में रही है। वर्तमान में उदयपुर संभाग की 37 सीटों में से 20 सीटें बीजेपी के पास है जबकि कांग्रेस के पास 12 सीटें ही है फिर भी इस बार वह सत्ता में है। ऐसे में इस मिथक को बनाए रखने कि मेवाड़ में जीतने वाली पार्टी ही प्रदेश में शासन करती है ,चिन्तन शिविर में हमेशा की तरह मेवाड़ से ही अगले विधानसभा चुनाव का ब्लू प्रिंट तैयार किया गया है। वसुन्धरा राजे भी हर बार मेवाड़ से ही चुनाव का जयघोष करती रही है। हाल ही आरएसएस के मुख्य सर संघ चालक मोहन भागवत भी मेवाड़ प्रवास पर रहें है।

चिंतन बैठक के दूसरे और अंतिम दिन  विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। बैठक का मुख्य फोकस वर्ष 2023 में प्रस्तावित राज्य विधानसभा चुनाव में पार्टी को मजबूत करने के साथ ही सत्ता में काबिज होने की रणनीति बनाने पर रहा। राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष और प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह ने शिविर में शामिल हुए नेताओं का मार्ग दर्शन किया।

योग के साथ शुरू हुआ दूसरा दिन

चिंतन बैठक के दूसरे दिन की शुरुआत योग कार्यक्रम के साथ हुई। बैठक में शामिल होने पहुंचे सभी नेताओं ने यहां योग के विभिन्न आसन करते हुए ‘निरोगी स्वास्थ्य व स्वस्थ मन’ का संदेश दिया।

पूनिया ने किए महादेव के दर्शन

चिंतन बैठक के दूसरे दिन के सत्र शुरू होने से पहले भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया रिजॉर्ट के नजदीक स्थित परशुराम महादेव मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने मंदिर के दर्शनकर पूजा अर्चना की। बताया जाता है कि भगवान परशुराम ने इस क्षेत्र में द्रोणाचार्य और कर्ण को शिक्षा दी थी। मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना परशु के जरिये पहाड़ काटकर की गई थी।

सत्ता में लौटने की राह आसान नहीं

चिंतन बैठक में भले ही प्रदेश भाजपा राजस्थान में पुन: सत्ता में लौटने को लेकर रणनीति बनाने में जुटी है, लेकिन इस मकसद तक पहुंचना इतना भी आसान नहीं है। पार्टी के सामने कई चुनौतियां बनी हुई हैं और आगे भी इसके बने रहने का अंदेशा है। पार्टी को बाहरी चुनौतियों से निपटने से पहले अपनी अंदरूनी चुनौतियों से निपटना सबसे जरूरी माना जा रहा है।

गुटबाजी दूर करना सबसे बड़ी चिंता

प्रदेश भाजपा में अंदरूनी गुटबाजी कई बार खुलकर सामने आई  है। यहां तक कि राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और अन्य वरिष्ठ नेताओं की नसीहतों के बाद भी गुटबाजी थमने का नाम नहीं ले रही है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया के दो धड़ों को एक जाजम पर लाना आसान नहीं है। ऐसे में इस गुटबाजी के वर्ष 2023 चुनाव आने से पहले और उभरकर सामने आने की आशंका है जो पार्टी के लिए चिंताएं बढ़ा रहा है।

वसुंधरा की टीम से निपटने की चुनौती

प्रदेश भाजपा में चल रही गुटबाजी के मध्य पार्टी के सामने अगला मुख्यमंत्री चेहरा घोषित करने का दबाव बना हुआ है। वसुंधरा राजे के समर्थक विधायकों और जनप्रतिनिधियों ने पूर्व मुख्यमंत्री को ही अगला सीएम चेहरा घोषित करने का दवाब बनाया है। उनका मानना है कि वसुन्धरा राजे के मुकाबले और कोई कद्दावर एवं लोकप्रिय नेता प्रदेश में नहीं है। इधर, वसुंधरा समर्थकों के प्रदेश भाजपा के समानांतर संगठन ने पार्टी की चिंताएं और अधिक बढ़ाई है।

लोगों की नाराजगी दूर करने का प्रयास

प्रदेश भाजपा के सामने किसानों, बेरोजगारों और मध्यम वर्गी परिवारों के एक बड़े वोट बैंक की नाराजगी को दूर करना भी सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। किसान जहां केंद्रीय कृषि कानूनों के विरोध में केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ आंदोलन चलाये हुए हैं, तो वहीं आमजन बेकाबू महंगाई से परेशान है। वहीं बेरोजगारी का मुद्दा भी युवाओं के बीच नाराजगी बड़ा रहा है। इन सभी ‘चिंताओं’ से पार पाने पर भी मंथन करना पार्टी के लिए जरूरी हो गया है।

बीटीपी का बढ़ता प्रभाव और आप की सम्भावित एंट्री भी चिंता का विषय

उदयपुर संभाग के जनजाति क्षेत्रों में भारतीय ट्राईबल पार्टी (बीटीपी) का प्रभाव बढ़ रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में  भी उसकी दो सीटों पर विजय हुई थी। उससे कांग्रेस के साथ भाजपा भी चिंतित है, क्योंकि पिछले चुनाव में भाजपा के गढ़ में बीटीपी ने सेंध लगाने का काम किया था। यही कारण है कि इस बार के  चुनाव में बीटीपी का प्रभाव को कम करने पहले से ही मजबूती से काम शुरू करने और आदिवासी क्षेत्रों में बीजेपी का जनाधार बढ़ाने पर पार्टी फोकस करना चाहती है। इसी प्रकार आम आदमी पार्टी के प्रदेश में आगमन की सम्भावनाओं और हाल ही आप संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के जयपुर के निकट ध्यान शिविर में शिरकत और इससे पहले प्रदेश के कतिपय नेताओं से मुलाकातें बढ़ाने से भी भाजपा नेताओं की नीन्द उड़ी हुई है।

हालांकि राजस्थान विधानसभा का चुनाव होने में (नवम्बर-दिसम्बर 2023) में अभी दो वर्ष का समय बाकी है। लेकिन प्रदेश में  सत्ता के लिए संघर्ष अभी से शुरू हो गया है। प्रदेश के मुख्य प्रतिपक्ष दल भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने आगामी चुनाव और विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिए मोर्चा खोल दिया है। चिन्तन शिविर में 2023 के विधानसभा चुनावों का ब्लू प्रिंट तैयार कर लिया गया है।

राजसमंद से नीति गोपेंद्र भट्ट

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