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आर्यन के बहाने शाहरूख खान की जिम्मेदारी पर चर्चा

आर्यन के बहाने शाहरूख खान की जिम्मेदारी पर चर्चा

आर्यन खान की गिरफ्तारी को इस अर्थ में भी देखा जा सकता है कि जो कुछ भी होता है, अच्छे के लिए होता है। तेईस वर्षीय आर्यन ड्रग्ज काण्ड में कितने दोषी थे या नहीं थे यह तो अदालत ही तय करेगी, और कोर्ट के अंतिम फैसले से ही हम सब बंधे हुए हैं  लेकिन एक बात तो स्पष्ट नजर आती है। और वह यह कि मीडिया ने उक्त गिरफ्तारी  को लेकर कदाचित इसलिए इतना हो हल्ला मचा रखा है कि आर्यन बॉलीवुड किंग कहे जाने वाले, अरबपति, रसूखदार शाहरूख के पुत्र हैं। एक आंकड़े के अनुसार देश भारत में लगभग चार करोड़ लोग ड्रग्ज की लत के शिकार हो चुके हैं। इनमें से भी 87 फीसद तो 18 से 35 आयु वर्ग के हैं। यह तथ्य बारम्बार दोहराया जा चुका है दुनिया में सबसे अधिक युवाओं की संख्या (18 से 35 वर्ष) भारत में ही है जो 55 से 60 प्रतिशत है। कहा जाता है कि उक्त आंकड़ा से कम तो ऑस्ट्रेलिया की कुल आबादी है।

सही है कि जब बेटे के पांव पिता के जूतों में आने लगें तो उसे डांटा-फटकारा नहीं जाता बल्कि पूरे लोगों धैर्य से काम लेकर उसे समझाया जाता है। आजकल के बच्चे तो ज्यादा से ज्यादा जज्बाती होने लगे हैं। मनोवैज्ञानिक इसे बच्चों का बिगडऩा या हाथ से निकल जाना नहीं कहते लेकिन इतना पक्का है कि बच्चे वही करते हैं जो उनके माता-पिता करते हैं। बोल चाल की भाषा में इसी को तो संस्कार कहते हैं। भाषा बाद में आती है। लगता है विशेषकर शाहरूख खान इसी मुद्दे पर गच्चा खा बैठे। अभी का तो नहीं मालूम पर कुछ साल पहले सुना था कि शाहरूख खान चैन स्मोकर (लगातार सिगरेट पीने वाले) हैं। सुना यहां तक जाता था कि सिगरेट के मार्फत शरीर में जो निकोटीन नामक जहर अंदर जाता है, उसे निकलवाने के लिए वे अक्सर विदेश जाते रहे हैं। ऐसा भी होता पाया गया है कि अवाज के बल पर भी जादू दिखाने वाले लगातार सिगरेट पीते हैं।

अब कहा जा रहा है कि शाहरुख ने एक समाचार चैनल को मजाक-मजाक में कह दिया था कि मैं चाहूंगा कि मेरा बेटा जवानी में वो सब उल्टे सीधे काम करे, जो अपनी उम्र में मैं नहीं कर पाया। यानी सिग्नल सालों पहले मिल चुका था। रिया चक्रवर्ती के मामले में भी इसी तरह का मीडियाई हंगामा होकर रह गया था। दरअसल जिस समाज को हम कथित रूप से परिपक्व समाज कहते हैं उनमें बॉलीवुड वर्ग ऐसा है जो मानकर चलता है कि चूंकि हम भगवान माने जाने लगे हैं तो भगवान कब से खता करने लगा? भारत की कानून व्यवस्था के बारे में कहा जाता है कि इसमें अक्सर फंसने का तो एक रास्ता होता है लेकिन बाहर आने के सौ रास्ते। आर्यन शाहरुख खान का केस लड़ रहे सतीश मांनशीनदे देश के टॉप क्रिमिनल लॉयर हैं।

कहा जाता है कि करीब दस सालों तक वे स्व. राम जेठमलानी के जूनियर रहे। सलमान खान को उन्होंने ही जमानत दिलवाई, संजय दत्त को भी बाहर लाने में उनकी वकालत काफी काम आई। हालांकि कि कहा तो यह भी जाता है संजय दत्त को छुड़वाने में शिवसेना के संस्थापक स्व. बाल ठाकरे और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तथा पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुप्रीम कोर्ट के एक अन्य दिग्गज वकील कपिल सिब्बल का अनुभव भी बहुत काम आया। यह तथ्य सभी को तक नहीं फैला होगा कि जब संजय दत्त विभिन्न आरोपों में मुंबई  पुलिस द्वारा धर लिए गए थे तब खासकर युवतियों ने उन्हें रिहा कर देने के पुलिस को फोन की झड़ी लगा दी थी। राखी सावंत भी उनकी क्लाइंट है। कहा जाता है कि वे एक पेशी की फीस दस लाख रुपए वसूलते हैं और कुल सम्पत्ति 569 करोड़ की बताई जाती है।

बेशक शाहरुख ने बॉलीवुड में एक मतर्बा और मुकाम हासिल करने लिए खूब पापड़ बेले। शुरू में उनकी डॉयलॉग डिलीवरी और दुबलापन खूब आड़े आया। इस बीच एक हिंदू युवती गौरी भी उनसे विवाह करने के बावजूद रूठ कर नई दिल्ली से मुंबई चली गई। कहते हैं उसे ढूंढते वक्त शाहरूख बस पागल नहीं हुए। फिर उन्होंने तीन पद्धतियों से गौरी से पुन: विवाह रचाया। आज वे समाज एक सफल मोटिवेशनल स्पीकर के रूप में स्थापित हो चुके हैं। भले वे बड़े परदे से कुछ सालों से गायब हों लेकिन उनकी विज्ञापनों की ब्रांड वेल्यू 550 से 600 करोड़ बताई जा रही हैं। जानकारों की मानें तो इस खाते में बॉलीवुड किंग को जोरदार झटका लग सकता है। कारण यह है कि वे अन्य उत्पादों के साथ प्रसिद्ध स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटीज के भी विज्ञापन टीवी की विभिन्न चैनल्स पर करते हैं। ये विज्ञापनदाता यदि अपने हाथ अब खींचने लगें तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए, क्योंकि  बात तो वही हो जाएगी कि पर उपदेश कुशल  बहुतेरे। बताया जाता है कि आर्यन अपने दोनों अन्य गिरफ्तार साथियों के साथ मुंबई के प्रसिद्ध स्व. धीरूभाई स्कूल में पढ़ते थे। लोग सवाल कर रहे हैं कि इस मामले में पहला दायित्व तो शाहरुख खान का बनता था। इस अभिनेता से व्यक्तिगत रूप से सहानुभूति रखना अलग बात है लेकिन उन्हें आर्यन के रोजमर्रा के आचरण उसके संगी-साथियों और सम्पर्कों पर तीसरी नजर नहीं रखनी चाहिए थी। बड़े और रसूखदार लोग तो सुना है इस तरह के नाजुक प्रसंगों को पैदा ही नहीं होते लेकिन लगता है शाहरुख को अपना पुत्र मोह ले बैठा।

बहुत कम लोगों को ज्ञात होगा कि कुछ महीनों पहले मुंबई में एक क्राइम रिपोर्टर ने नारकोटिक्स विभाग के एक सीनियर ऑफिसर से ड्रग्ज के अवैध कारोबार के बारे में कहा कि आपके पास इतना बड़ा अमला है? आपके इतने पक्के सूत्र हैं। तो फिर ड्रग्ज यह जहरीला कारोबार निरंतर पनपता क्यों जा रहा है? उस आला अफसर ने गहरे अफसोस के साथ कहा कि यदि हम कानून के अनुसार चलें तो सबसे पहले मेलों ठेलों, चौपालों पर छापे मारने पड़ें। उक्त अधिकारी ने उस पत्रकार से यह भी कहा कि आप तो शायद जानते ही होंगे कि उक्त अवसरों पर कौन से नशे कब किए जाते हैं। भारत में ड्रग्ज का कारोबार पंजाब और गुजरात में सबसे ज्यादा होता है। मतलब ड्रग्ज के नशेड़ी इन्हीं दो प्रदेशों में पाए जाते हैं। दोनों ही सूबों की पर कैपिटा इनकम देश में सबसे ज्यादा है और दोनों ही प्रदेशों की सरहदें पाकिस्तान से लगी हैं।

यह तथ्य किससे छिपा है मूलत: अफगानिस्तान ऊर्फ तालिबान में दुनिया भर की 80 से 90 फीसद अफीम की सिर्फ खेती ही नहीं होती, बल्कि विभिन्न ड्रग्ज में उन्हें परिष्कृत तक कर दिया जाता है ताकि इस देश की लाचार पड़ी अर्थव्यवस्था में 40 प्रतिशत तक जान फूंकी जा सके। सूत्र कहते हैं कि मुंह मांगे पैसे दे दो तो पाकिस्तान और गुजरात में ड्रग्ज की तस्करी के गुर्गे सेवा के लिए तैयार ही बैठे रहते हैं। पंजाब में तो महिलाएं भी ड्रग्ज की नशेड़ी होती जा रही हैं।

इस चुनौती से निपटने के  लिए  पंजाब के पूर्व  मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एक अनोखी योजना बनाई थी, जिसका नाम था इच वन टीच वन यानी प्रत्येक सरकारी कर्मचारी राज्य सरकार के खर्च पर ड्रग्ज एक नशेड़ी को गोद लेगा और उसे समझा बुझाकर समाज की मुख्यधारा में लौटाने का हर संभव प्रयास करेगा। अंत में शाहरुख खान की इस अनोखी चुनौती की चर्चा। शाहरुख खान को ध्यान रखना चाहिए था कि आर्यन क्रूज पर सवार होकर गोवा तो जा रहा है, लेकिन वहां जाकर पार्टी में करेगा क्या? चलिए वे चूक गए पर अन्य माता-पिता को तो सतर्क रहने का संदेश और सबक मिल ही गया।

नवीन जैन

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