ब्रेकिंग न्यूज़ 

आतंकियों पर दया नहीं

आतंकियों पर दया नहीं

हाल ही में हुए आतंकी हमलों के बाद जम्मू-कश्मीर में निर्दोष लोगों की, विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदाय की मौतों की बढ़ती संख्या चिंता का विषय है, खासकर जब कश्मीर घाटी में हिंसक घटनाओं की संख्या पांच वर्षों में सबसे कम थी। ये हमले प्रमाण है कि दुश्मन देश नहीं चाहता कि भारत में शांति स्थापित रहे, आम-जनता अमन चैन से रहे, लोग गन कल्चर से दूर रहें। सवाल उठता है कि इस प्रकार के आतंकवाद से कैसे निपटा जाए। कार बम, ट्रक बम, मानव बम  और अब टारगेट किलिंग –इन हिंसक एवं अशांत करने वाले षडयंत्रों को कौन मदद दे रहा है? राष्ट्र की सीमा पर इन आतंकवादी घटनाओं को कौन प्रश्रय दे रहा है? एक हाथ में समझौता और दूसरे हाथ में आतंकवाद-यह कैसे संभव है? जैसे ही प्रांत में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के शुरुआत की आहट हुई, वैसे ही अब टारगेट किलिंग का षडयंत्र सामने आया है। पाकिस्तान नहीं चाहता कि जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक सरकार बने। धारा 370 और 35ए के निरस्त होने के बाद पाकिस्तान का भारत में घुसपैठ कराना या आतंकवादी हमला करना अब आसान नहीं रहा। इसलिए टारगेट किलिंग का नया तरीका उसने इस्तेमाल किया है। पिछले छब्बीस महीनों में जिस तरह कश्मीरी अवाम ने अपनी सोच को अभिव्यक्ति दी है, उसके संदेश साफ हैं। अब कश्मीरी लोग भी चाहते हैं कि वहां अमन-चैन हो। जब अमन-चैन होगा तो जाहिर है कि भारत से लेकर दुनियाभर के सैलानी वहां आएंगे। इससे पर्यटक केंद्रित राज्य की अर्थव्यवस्था पटरी पर आ सकेगी।

इस पृष्ठभूमि में यह बताना आवश्यक हैं कि केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में आर्थिक विकास के बढ़ावे के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। और सरकार के इन निर्णयों ने इस क्षेत्र के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सरकार ने जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक का अनुदान आवंटित किया। इसके अतिरिक्त, राज्य में निवेश हेतु निवेशकों को आकर्षित करने के लिए ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट का आयोजन किया गया। विकास की राह में आने वाले रोड़ों को हटाने के लिए कई सारे रिफॉर्म लाये गए। इस परिस्थिति में इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि घोर आपत्तिजनक अनुच्छेद 370 और 35ए को खत्म करने का कारण वे प्रावधान थे जो समानता और धर्मनिरपेक्षता के मूल सिद्धांतों के विपरीत थे। इसके अलावा इस्लामिक स्टेट, तालिबान और पाकिस्तान के गठजोड़ से लडऩे के लिए भी इन अनुच्छेदों को खत्म करने की आवश्यकता थी। इसलिए सरकार ने इन अनुच्छेदों पर किसी भी प्रकार की दोबारा चर्चा होने के सम्बंध में पूर्ण विराम लगाते हुए तथा जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक, ढांचागत, कृषि और शैक्षिक विकास के लिए अवसर का दरवाजा खोलकर एक अच्छा निर्णय लिया है। दरअसल कश्मीर घाटी में गैर मुस्लिमों पर बढ़े हमले सिर्फ कश्मीर घाटी को प्रभावित करने की ही कोशिश  नहीं है, बल्कि इस्लामी आतंकवाद की बरसों पुरानी मंशा का भी प्रतीक है। वे दक्षिण एशिया में इस्लामी कट्टरता को बढ़ावा देने की कोशिश में लगी हैं। इसलिए चुनौती और भी ज्यादा बढ़ जाती है। जिसका मुकाबला सिर्फ सुरक्षा बलों के जरिए ही नहीं किया जा सकता, बल्कि इस्लामी आतंकवाद और मजहबी कट्टरता के खिलाफ लोगों को भी जागरूक करना होगा।

 

Deepak Kumar Rath

दीपक कुमार रथ

(editor@udayindia.in)

Leave a Reply

Your email address will not be published.