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स्वर्ग बना नर्क

स्वर्ग बना नर्क

कश्मीर घाटी में हालात खराब होते जा रहे हैं।  सेना के भारी पडऩे पर अब आतंकियों ने ऐसे लोगों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है जो सॉफ्ट टारगेट हैं जिन्हें  पुलिस या सेना सुरक्षा नहीं दे सकती। ऐसे लोगों में घाटी में रह रहे हिंदू, कश्मीरी पंडित और बाहर से आए लोग शामिल हैं। इस महीने आतंकी ११ आम नागरिकों की हत्या कर चुके हैं, जिनमें से ७ गैर-मुस्लिम हैं।  इसके बाद घाटी के लोगों में डर बैठ गया है और पलायन के लिए मजबूर हैं। इन हालातों ने घाटी में एक बार फिर ९० के दशक की याद दिला दी है। तब गैर मुस्लिमों खासकर कश्मीरी पंडितों को रातों-रात घाटी से निकलना पड़ गया था। कश्मीर में जो हो रहा है उसे लेकर पूरा देश गुस्से में है और वो स्वभाविक है। सोचिए जरा..गोलगप्पे वाला, घर बनाने में लगे मजदूर, स्कूल टीचर..जिनसे मिलकर कश्मीरीयत शब्द बनता है। कायर आतंकी अब इन सॉफ्ट टारगेट को निशाना बना रहे। ऐसा नहीं कि जम्मू-कश्मीर में सब बदल गया है लेकिन संपूर्ण बदलाव की निष्ठा जमीन पर दिख रही है। लोग यकीन करें या नहीं लेकिन इसी वजह से आतंकवादी गुस्से में हैं, पाकिस्तान में बैठे उनके हैंडलर आगबबूला हैं। क्योंकि उनका प्लान फेल हो रहा है। कश्मीर के लोग उनका प्लान फेल कर रहे हैं। कश्मीर की अवाम भी भारत के अन्य लोगों की तरह ही आतंकवादियों की इस कायराना हरकत से दुखी है, गुस्से में है क्योंकि वो भी अब विकास के रास्ते पर पूरे हिन्दुस्तान से कंप्टीशन चाहती है। वो भी २४ घंटे बिजली, शानदार सड़कें, हर घर जल से नल, सबको वैक्सीन, सबको रोजगार चाहती है। उसे ये खून-खराबा नहीं चाहिए। लेकिन सवाल उठता है फिर ऐसा हो क्यों रहा? जवाब है..चंद मुट्ठी भर लोगों की हताशा। मुट्ठी भर लोगों की निराशा।

सामरिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण राज्य जम्मू-कश्मीर में एकबार फिर से इस तरह के बन रहे बेहद चिंताजनक हालात देश की एकता, अखंडता व धर्मनिरपेक्षता के लिए किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं हैं। बीते  ७ अक्टूबर को भी आतंकियों ने श्रीनगर में दो शिक्षक सपिंदर कौर और दीपक चंद की गोली मारकर हत्या कर दी थी, श्रीनगर शहर का गवर्नमेंट ब्वॉयज सेकेंडरी स्कूल, ईदगाह के सहन इलाके में एक बड़े भूभाग पर बना हुआ है, यह हायर सेकेंडरी स्कूल तीन मंजिला बड़ी इमारत में है, इस के विशाल परिसर में एक बड़ा खेल का मैदान भी बना हुआ है, उसमें घुसकर आतंकियों ने सुबह ११ बजे पहचान पत्र देखकर के हिन्दू और सिख शिक्षकों की पहचान करके हत्या कर दी थी, गनीमत यह रही कि उस समय स्कूल में छात्र नहीं थे, सपिंदर कौर स्कूल की प्रिंसिपल थी जबकि दीपक चंद टीचर थे। इसी तरह  ५ अक्टूबर की शाम कुछ अज्ञात हमलावरों ने श्रीनगर के इकबाल पार्क इलाके में श्रीनगर के जानेमाने लोकप्रिय फार्मासिस्ट तथा कश्मीरी पंडित माखन लाल बिंदरू की उनकी ही फ़ार्मेसी की दुकान ‘बिंद्रू हेल्थ जोन’ पर गोली मार कर हत्या कर दी थी। उसके कुछ मिनट बाद ही बिहार के एक चाट विक्रेता वीरेंद्र पासवान की भी हत्या कर दी थी। इस एक हफ्ते में सात आम नागरिकों की हत्या से कश्मीर को दहलाने की बड़ी आतंकी साजिश स्पष्ट नजर आती है। इस वर्ष की शुरुआत में कश्मीर पंडित राकेश की दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में हत्या कर दी गई थी, वह पंचायत प्रमुख चुने गए थे, वर्ष २०२० में एक और कश्मीरी पंडित की त्राल में हत्या की गई थी, जो स्थानीय निकाय में प्रतिनिधि थे, बौखलाए आतंकियों के द्वारा आम नागरिकों की हत्याओं का सिलसिला निरंतर जारी है। जाहिर है  कश्मीर इन निर्दोष नागरिकों के लिए स्वर्ग नहीं नर्क साबित हो रहा है। दीपक के एक रिश्तेदार ने न्यूज एजेंसी से कहा भी था, ‘कश्मीर हमारे लिए स्वर्ग नहीं, नरक है।  घाटी में १९९० जैसे हालात हो रहे हैं। उस समय हिंदुओं खासकर कश्मीरी पंडितों को घाटी छोडऩे के लिए मजबूर किया गया, आज भी यही हालात हैं।’

गौरतलब है की ५ अगस्त २०१९ को जम्मू-कश्मीर राज्य से अनुच्छेद ३७० हटा कर के राज्य का विशेष दर्जा समाप्त किए जाने के बाद से मुस्तैदी के चलते जाबांज सुरक्षा बलों पर आतंकी हमले की घटनाओं में तो भारी कमी आई है, लेकिन आतंकियों के पाकिस्तान में बैठे आकाओं को राज्य में अपने मंसूबों पर पानी फिरता दिखते ही उसने आम नागरिकों पर आतंकी हमले करवाने शुरू कर दिये हैं। राज्य में आतंकियों के द्वारा पहले यह सिलसिला गैर-कश्मीरी मजदूरों की हत्या करके शुरू किया गया था, जो सिलसिला धीरे-धीरे भाजपा नेताओं, सरपंचों से होते हुए अब कश्मीरी पंडितों हिन्दू व सिखों की चुनचुन कर हत्या करने तक पहुंच चुका है, सुरक्षा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील राज्य में यह स्थिति उचित नहीं है।

कश्मीर को एक बार फिर १९९० के दौर में वापस पहुंचाने की साजिश लगातार हो रही है।  एक तरफ सिखों और कश्मीरी पंडितों की टारगेट किलिंग हो रही है। तो दूसरी तरफ आतंकी घरों में छिपकर टेरर प्लानिंग कर रहे हैं। लेकिन इसमें भी कोई शक नहीं की दोनों ही मोर्चे पर घाटी में आतंकियों को करारा जवाब मिल रहा है। कश्मीर में हमलों के इस बदले ट्रेंड को सुरक्षा बलों ने भी जल्दी भांप लिया और एक्शन तेज कर दिया है। नई रणनीति के तहत आतंकियों की जल्दी पहचान कर कार्रवाई की जा रही है। पिछले एक हफ्ते में ही  ९ टॉप आतंकियों का सफाया हो चुका है। सुरक्षाबल तय कर चुकें हैं की एक-एक आतंकी को चुन-चुनकर मारेंगे, कोई बख्शा नहीं जाएगा, क्योंकि ये कश्मीर की नहीं पूरे हिंदुस्तान की मांग है।  पूरा देश पूंछ सेक्टर में पांच जवानों की शहादत का बदला मांग रहा है।  ये नए इरादों वाला भारत है जिसमें पुरानी साजिशें नहीं चलेगी।

हालांकि जम्मू-कश्मीर में देश के दुश्मन आतकंवादियों के द्वारा गैर मुस्लिम लोगों को चिंहित करके उनकी हत्या करने का इतिहास बहुत पुराना रहा है, लेकिन हाल के वर्षों इस तरह की घटनाओं में काफी कमी आ गयी थी, आज के समय में देश के कर्ताधर्ताओं व हमारी सुरक्षा एजेंसियों को चिंतित करने वाली बात यह है कि फिर से घाटी में गैर मुस्लिम समुदाय के लोगों को चुनचुन कर निशाना बनाया जाने लगा है। हालांकि इस स्थिति ने गैर मुस्लिम समुदाय के परिवारों को अपनी व परिजनों की सुरक्षा को लेकर के एकबार फिर से चिंता में डाल दिया है, राज्य में बहुत सारे ऐसे परिवार हैं जिन्होंने नब्बे के दशक में गैर मुस्लिम समुदाय के लोगों को निशाना बनाने वाली चरमपंथी व आतंकी घटनाओं में जबरदस्त उभार के बावजूद भी अपनी मातृभूमि कश्मीर को नहीं छोडऩे का फ़ैसला किया था और वह कभी भी देश के दुश्मन आतंकियों के आगे झुके नहीं थे, लेकिन हाँ उस समय आतंकवाद से ग्रस्त राज्य की भयावह परिस्थितियों चलते के उनके अपने ही बहुत सारे लोग अपनों के जीवन को सुरक्षित रखने की खातिर अपना भरा पूरा घर बार, सम्पत्ति व कारोबार छोड़कर चले गये थे, जिस पर बाद में स्थानीय बहुसंख्यक मुस्लिम समाज के चंद लोगों ने कब्जा कर लिया था।

अल्पसंख्यकों की हत्या पर ऐजेंसियां हाइपर एक्टिव है। जम्मू-कश्मीर में अबतक ७०० लोगों को हिरासत में लिया गया है। सिर्फ श्रीनगर से ही ७० लोग पकड़े गए हैं। ऑनलाइन मैग्जीन वॉयस ऑफ हिंद चलाने वाले संदिग्धों की तलाश हो रही है। २०२० से ये मैगजीन ऑनलाइन ISIS के दुष्प्रचार को आगे बढ़ा रही थी। एजेंसियों के निशाने पर TRF (द रेजिस्टेंस फॉर्स) से जुड़े संदिग्ध भी हैं। एक तरफ घाटी की शांति, अमन और भाईचारे को तबाह करने वाले सुरक्षाबलों के निशाने पर हैं। सेना और पुलिस कश्मीरी पंडितों और सिखों के साथ है तो दूसरी तरफ मुस्लिम मुख्य धर्म गुरु भी एकजुटता का संदेश दे रहे हैं -ये तय है कि घाटी का माहौल बिगाडऩे के लिए जो साजिश दहशतगर्दों ने रची है वो नाकाम हो रही है। जम्मू-कश्मीर राज्य में पाकिस्तान की आतंकवादी गतिविधियां बेअसर होती रही हैं। अब उसने नयी रणनीति उन गैर कश्मीरियों को निशाना बनाने की बनाई जो इस राज्य के विकास और इसकी अर्थव्यवस्था में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे थे। कश्मीर में विकास की जो गंगा प्रवाहमान हुई है, वह अनवरत गतिमान रहेगी। सच्चाई है कि पिछले दो साल में इस राज्य में नागरिकों के विकास की कई केन्द्रीय परियोजनाएं चालू की गई हैं और उनके अच्छे परिणाम भी आने शुरू हुए हैं।

पर्यटन गतिविधियां तेज हो रही हैं और भारत के विभिन्न राज्यों से इस खूबसूरत राज्य की सैर करने लोग भारी तादाद में आने लगे हैं। कश्मीरी जिस गर्मजोशी के साथ अपने देश के नागरिकों का स्वागत करते हैं और उनकी मेजबानी करते हुए अपनी सहृदयता, आत्मीयता और ईमानदारी की छाप छोड़ते हैं उससे पूरे भारत में जम्मू-कश्मीर की छवि में चार चांद लग रहे हैं और दूसरे राज्यों के लोगों से कश्मीरियों की आत्मीयता एवं सौहार्द बड़े रहा है।

 

नीलाभ कृष्ण

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