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गोवा : पूछती है हर लहर, फिर कब आओगे…?

गोवा : पूछती है हर लहर, फिर कब आओगे…?

गोवा का नाम आते ही पर्यटकों के मन में हरियाली से भरपूर एवं समुद्र तट से सुशोभित एक सुन्दर सी जगह की तस्वीर घूम जाती हैं। सरल प्रकृति के लोग, हरी-भरी धरती, लहरों से घिरे समुद्री किनारे, चहल-पहल, जीवन जीने की अलग ही अदा और हर ओर बिखरा सौन्दर्य-यही हैं गोवा की पहचान। बंबई से गोवा  विमान द्वारा एक घंटे में पहुंचा जा सकता है। गोवा का हवाई अड्डा ‘डाबोलिम’ हैं जो मूल रूप से सेना के काम में आने वाला अड्डा हैं। गोवा की राजधानी ‘पणजी’ यहां से उन्नीस किलोमीटर दूर हैं। गोवा की रेल-परिवहन व्यवस्था को लें तो यहां का प्रमुख रेल्वे स्टेशन वास्कोडिगामा या मारगाओं हैं। सडक़ परिवहन की दृष्टि से गोवा राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 4 ए 17 से जुड़ा हैं। मुंबई से सडक़  मार्ग द्वारा गोवा की दूरी 594 किलोमीटर हैं। गोवा में जल-परिवहन भी उपलब्ध हैं। दमानिया शिपिंग कंपनी द्वारा तेज चलने वाली नौका (कैटामेरीन) आरंभ की गई हैं, जो गोवा लगभग (बंबई से) सात घंटे में पहुंचा देती हैं।

पर्यटको का स्वर्ग हैं गोवा

गोवा पर लगभग 450 वर्षो तक पुर्तगालियों का शासन रहा। देश के आजाद होने के 16 वर्ष बाद तक यह पुर्तगाल का उपनिवेश रहा, इसीलिए यहां हर ओर पुर्तगाली राजधानी पुराने गोवा में हैं जो नई राजधानी ‘पणजी’ से 9 किलोमीटर पूर्व में हैं। 1961 में गोवा पुर्तगाली शासन से मुक्त हो अपने स्वतंत्र अस्तित्व में आया। इसके बाद कुछ ही दशक में गोवा ने पर्यटक के क्षेत्र में इतनी ख्याति अर्जित कर ली कि यह देश के पर्यटन-मानचित्र में ऊंचा स्थान रखने लगा। गोवा आए बिना पर्यटक अपनी यात्रा को अधूरी सी समझते हैं।

अनोखे सौंदर्य से भरपूर है गोवा

गोवा एक भरे-पूरे क्षेत्र का नाम है। यह 3600 वर्ग किलोमीटर में फैला हैं। इसमें पोंड़ा, मापुसा, वास्कोडिगामा, मारगाओ जैसे प्रमुख नगर हैं। इसके दो सिरे जहां महाराष्ट्र और कर्नाटक से घिरे हैं, वहीं गोवा का पश्चिमी सिरा अरब सागर को छूता हैं। उत्तर से दक्षिण तक इस विशाल सिरे की लंबाई 105 किलोमीटर है, इसीलिए सागर तट के अनोखे सौंदर्य से भरपूर गोवा में हरियाली भी बहुत अधिक हैं। यहां ताड़, काजू, आम, कटहल, नारियल आदि के पेड़ बहुतायत में हैं। इसके अलावा फूलों की खेती भी यहां खूब होती हैं। फसलों में धान का स्थान प्रमुख हैं।

पर्यटक खो जाता प्रकृति की गोद में

यहां के समुद्री तटों में कलंगूट, कोलावा, दोना पाउला, वागाटोर, अंजुना आदि बीच अत्यंत आकर्षक हैं। हर सागर-तट पर मीलों बिछी सफेद और लहरदार बालू तथा अरब सागर की उमड़ती लहरें मनुष्य की सारी परेशानियां भुला देती हैं। हर सागर तट के आसपास नारियल और ताड़ वृक्षों के झुरमुट मन मोह लेते हैं। इसीलिए यहां आने वाला हर एक पर्यटक अपने आप को भूलकर प्रकृति की गोद में खो जाता हैं। हर समय सैलानियों के झुण्ड के झुण्ड यहां सागर की सागर लहरों से अठखेलियां करते मिलते हैं। इन सभी सागर तटों पर जब सूर्यास्त एवं सूर्योदय होता हैं तो इन तटों पर चारों ओर स्वर्णिम लालिमा फैल जाती हैं। तब यहां का दृश्य अत्यंत मनमोहक होता हैं। गोवा में पर्यटक की दृष्टि से हर सागर तट पर मीठे पानी के स्नानघर भी बने है, ताकि सागर के नमकीन पानी का आंनद लेने के बाद पर्यटक अपने शरीर पर खारे पानी की चिपचिपाहट को दूर कर सकें। लगभग हर तट पर रेस्तरां और होटल हैं। इनमें पर्यटकों की सुख-सुविधा  और  खान-पान का हर साजो-सामान  उपलब्ध हैं।

गोवा  के नजारे

सागर तटों  (बीच) के अलावा  यहां झीलें, झरने नदियां, बाग-बगीचे भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। यहां के ‘दूध-सागर फॉल्स’ नामक झरने अत्यंत रमणीय और प्रसिद्ध हैं। इन्हें देखकर ऐसा लगता हैं मानो पहाड़ से दूध का झरना बह रहा हैं।

गोवा में साहसिक खेलों का आनंद

सभी तटों और रमणीय झरनों आदि के लिए गोवा में जल-परिवहन भी उपलब्ध हैं। मोटर बोट और नौकाएं दोना पाउला से मारगाओ और जुुआरी तथा मांडवी नदियों के अनेक स्थानों पर उपलब्ध रहती हैं। चांदनी रात में तथा सूर्योस्त के बाद भी इनसे घूमने का आनंद वाजिब दरों पर लिया जा सकता हैं। साहसिक खेलों में रुचि रखने वाले पर्यटक होवरक्राफ्ट और वाटर बाइक का आनंद भी ले सकते हैं।

प्राकृतिक छटा से भरपूर है पणजी

गोवा की राजधानी ‘पणजी’ एक मनोरम स्थान हैं। यह नगर उत्तरी गोवा में मांडवी नदी के किनारे पर बसा हैं। पणजी प्राकृतिक छटा से भरपूर हैं। यहां किसी भी ओर निकल जाइए, आपको हर ओर मकानों में कुछ विशेषताएं दिखाई देगी। हर मकान की छत यहां ढलवां है, जिसका लाल रंग का होना  पुर्तगाली प्रभाव  को दिखाता है। हर घर के बाहर छोटे ही सही, मगर सुन्दर बगीचे मिलेंगे। उनमें फूलों से भरी आकर्षक बेलें आधिकांशत: लगी होती हैं। छोटी, बल खाती सडक़ें, हरियाली, खुली-खुली घुटन रहित वातावरण यहां की उपलब्धि हैं।

गोवा में झलकती हैं पुर्तगाली सभ्यता

चूंकि गोवा में पुर्तगाली सभ्यता और ईसाई धर्म का प्रभाव है, अत: यहां की सामाजिक जिंदगी में खुलापन झलकता हैं। महिलाएं यहां रंग-बिरंगी पाश्चात्य पोशाकों में दिखाई देती हैं। पुरुषों की वेशभूषा पर भी पाश्चात्य प्रभाव हैं। खाना-पीना, गाना बजाना यहां की आम जिंदगी में शामिल हैं। हर समय उल्लासमय जीवन और काम में भी एक ऐसी अल्हड़ता, जो जिंदगी के खुशनुमा पक्ष को उजागर करती है, वह गोवा में झलकती हैं। क्रिसमस और नववर्ष के मौकों जर गोवा में जो माहौल बनता है, उसे देखने अनेकानेक पर्यटक वहां जाते हैं। हर ओर तब उमंग व उल्लास छा जाता हैं। पटाखों, प्रकाश व नृत्य-संगीत का ऐसे माहौल रहता हैं कि लोग मानो अपनी सुध-बुध भूल जाते हैं।

गोवा में हैं सोलहवीं शताब्दी के चर्च

गोवा में अनेक गिरजाघर, मंदिर, मस्जिद हैं, वैसे यहां सबसे ज्यादा गिरजाघर हैं। पणजी से लगभग दस किलोमीटर दूर पुराने गोवा में विश्व प्रसिद्ध चर्च हैं। सबसे अधिक प्रसिद्ध चर्च हैं ‘‘बॉम जीसस चर्च’’। इस चर्च में चांदी के ताबूत में फ्रांसिस जेवियर के शव को सुरक्षित रखा गया हैं। इसे हर दस साल में दर्शनों के लिए निकाला जाता हैं। इस अवसर पर सारे संसार से ईसाई समुदाय के अलावा भी लाखों लोग गोवा में आते हैं। इसके  अलावा ‘सी कैथेड्रल’ चर्च भी प्रसिद्ध हैं। यहां की चांदी-सोने की नक्काशी और सुनहरी घंटी विश्व भर में चर्चित हैं।

मंदिरों का नगर है गोवा

एक समय गोवा में हिन्दू धर्म भी फल-फूल रहा था, इसका प्रमाण 400 वर्ष पुराने ‘श्री मंगेश मंदिर’ में मिलता हैं। पणजी से 23 किलोमीटर दूर पोंडा में स्थित यह मंदिर गोवा का सबसे पुराना मंदिर हैं। इसकी कलात्मकता और वास्तुकला दर्शनीय है। भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर चारों ओर हरी-भरी पहाडिय़ों से घिरा हैं। इसके अलावा परनेम में स्थित ‘श्री भगवती मंदिर’ भी दर्शनीय हैं। यहां मां भगवती की आठ भुजाओं वाली प्रतिमा देखने योग्य हैं। द्वार पर काले पत्थर के बने विशालकाय सजीव से हाथियों की प्रतिमाओं को देखकर लगता हैं कि ये अभी चिंघाड़ उठेंगे। यह मंदिर भी सैंकड़ों वर्ष प्राचीन एवं अनेकानेक लोगों की आस्था का केन्द्र हैं।

गोवा में है कई दर्शनीय स्थल

गोवा के अन्य दर्शनीय स्थलों में अगोडा के किला, मेयर झील, केसरवाल प्रपात, भगवान महावीर वन्य जीवन अभयारण्य, सालिम अली पक्षी अभयारण्य तथा गोवा का संग्रहालय प्रमुख हैं।

नवम्बर से फरवरी तक मौसम अधिक सुहाना

गोवा का औसत तापमान 20 डिग्री सेंटीग्रेड से 33 डिग्री सेंटीग्रेड के बीच रहता हैं। इसीलिए यहां हर मौसम में आया जा सकता हैं। पूरा गोवा घूमने लिए गोवा पर्यटन विकास निगम (जी.टी.डी.सी.) ने समुचित व्यवस्था कर रखी हैं। नवम्बर से फरवरी तक मौसम अधिक सुहाना होने के कारण सैलानियों की आवक ज्यादा रहती हैं।

खरीददारी के लिए मोलभाव करना आवश्यक

गोवा में खरीददारी के लिए हस्तकला की वस्तुएं, बेंत की बनी चीजें, आभूषण आदि मिलते हैं। गोवा में पोंडा में प्रसाधन सामग्री और परफ्यूम बनाने के प्रसिद्ध कारखाने हैं।

पणजी, वास्कोडिगामा, मारगाओं में यहां के बड़े बाजार हैं। यहां दुकानदारों से मोलभाव कर सामान की उचित कीमत तय की जा सकती हैं।

गोवा के भोजन की सुगंध है निराली

गोवा के भोजन की सुगंध लोगों को आकृष्ट करती हैं। यहां आमिष भोजन के अलावा दक्षिण भारतीय, पंजाबी, महाराष्ट्रियन भोजन भी आसानी से उपलब्ध हो जाता हैं।

नारियल पानी, काजू, नीरा आदि की तो यहां भरमार हैं। शाकाहारी भोजन पसंद करने वालों के लिए भी कई रेस्तरां और होटल हैं।

गोवा निवासी पर्यटकों को सम्मान देते हैं

गोवा निवासी प्राय: सरल स्वभाव के और मित्रतापूर्ण व्यवहार करने वाले होते हैं। आगंतुक को ये पूरा सम्मान देते हैं। यहां के सौन्दर्य से अभिभूत व्यक्ति अपनी चिंताओं को तो जैसे भूल ही जाता हैं।

 

 

डॉ. विभा खरे

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