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बॉलीवुड, ड्रग्स और साजिश

बॉलीवुड, ड्रग्स और साजिश

मुंबई क्रूज शिप ड्रग केस में शाहरुख खान के बेटे का गिरफ्तार होना और फिर जमानत पर छूट जाना एक ऐसा वाकया है जो कई सवाल खड़े करता है। नारकोटिक्स कण्ट्रोल ब्यूरो अर्थात एनसीबी पिछले डेढ़ साल से ड्रग रैकेट के खिलाफ कार्रवाइयां कर रही है।  कई पैडलर्स पकड़े गए हैं। तमाम बड़े लोगों से पूछताछ हुई।  कुछ को जेल भी जाना पड़ा।  मगर क्या जमीन पर एनसीबी की कार्रवाइयों का कोई डर दिख रहा है? शायद नहीं। कुछ लोगों के लिए कानून का होना ना होना मायने ही नहीं रखता। मुंबई क्रूज शिप ड्रग केस इसका जीता जागता उदाहरण है जिस पर चिंता करने के साथ ज्यादा से ज्यादा बात होनी चाहिए थी।  शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की ड्रग्स पार्टी मामले में गिरफ्तारी ने सनसनी तो मचा दी लेकिन बॉलीवुड के इस मशहूर स्टारकिड का ड्रग्स केस में पकड़ा जाना लोगों के लिए ज्यादा शॉकिंग नहीं था। आर्यन से पहले सुशांत सिंह सिंह राजपूत की मौत के ड्रग्स एंगल में कई बड़े-बड़े सितारों से ड्रग्स के सेवन और इसके लेनदेन को लेकर पूछताछ की जा चुकी है। वहीं कुछ स्टार्स ड्रग्स लेने के अपराध में सलाखों के पीछे भी सजा काट चुके हैं।

मुंबई में शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की ड्रग्स केस में गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर से बॉलीवुड और ड्रग्स की काली दुनिया के बीच नापाक रिश्ते की चर्चा शुरू हो गई है। ऐसा नहीं है कि ड्रग्स सिर्फ बॉलीवुड की समस्या है और समाज के बाकी वर्गों का ड्रग्स से कोई लेना देना नहीं है। ये समस्या हर जगह है। ये जरूर है कि जब बॉलीवुड से जुड़े लोगों का इसमें नाम आ जाता है तभी इस मुद्दे पर जमकर चर्चा हो जाती है। पिछले साल सुशांत केस के दौरान भी हमने ऐसा ही देखा था। बॉलीवुड में ड्रग्स की समस्या नई नहीं है। संजय दत्त, कंगना रनौत, फरदीन खान, प्रतीक बब्बर जैसे कई फिल्मी सितारे ड्रग्स के चंगुल में फंसने की कहानी दुनिया को बता चुके हैं। हर बार की तरह इस बार भी कुछ दिन तो ये मुद्दा सुर्खियों में रहेगा, लेकिन इसके बाद बात आई-गई हो जाएगी। दरअसल फिल्मी सितारों को अपना आदर्श मानने वाले देश के कई युवा अक्सर नशे के चंगुल में अक्सर फंस जाते हैं। दरअसल शुरू-शुरू में नशे से मोहब्बत शौकिया होती है, लेकिन शौक को मजबूरी बनते और मजबूरी को मौत बनते देर नहीं लगती। नशे की खेती करने वाले ये बात बहुत अच्छी तरह से समझते हैं। वो जानते हैं कि चोट वहीं करनी चाहिए जहां नस कमजोर हो। बेरोजगारी और तनाव से भारत ही नहीं, दुनिया का लगभग हर देश जूझ रहा है। यही नौजवानों की कमजोर नस है। पहले तो उन्हें फर्जी सब्जबाग दिखाओ, पलायन की लत लगाओ और फिर दम मारो दम, मिट जाए गम जैसे झूठ दोहराकर हमेशा के लिए ड्रग्स का शिकार बना लो। और भारत के युवा ऐसे ही बॉलीवुड के भांडो को अपना आदर्श बना नशे के आगोश में अपना भविष्य खराब करने की राह पर निकल पड़ते है। समय आ गया है भारत के युवाओं को इस नशे  की दुनिया की सच्चाई बताने का।

साजिश

कहते हैं की एक लम्हे में बिखर जाता है ताना-बना … और फिर उम्र गुजर जाती है यकजाई (restructuring) में। ठीक यही हाल हुआ है शाहरुख खान के साथ।  सारी उम्र लगी उसे अपनी इज्जत बनाने में और उसके लड़के ने मिनटों में उसे तार तार कर दिया। लेकिन एक समय था जब इसी शाहरुख खान की तूती  बोलती थी मुंबई में। उसके नशे में बदतमीजियां करने के हजारों किस्से ऐसे हैं जिन्हे कोई जानता ही नहीं। अब ऐसे नशेबाज बदमिजाज बॉलीवुड के तथाकथित किंग के बेटे से कोई और क्या अपेक्षा रखेगा। लेकिन हास्यास्पद या यूं कहें साजिशन इस कानून व्यवस्था की समस्या को जिस तरह हिन्दू मुस्लमान रंग देने की कोशिश की गयी उससे तो किसी और ही साजिश की बू आती है। दअरसल शाहरुख खान के नशेड़ी कपूत की गिरफ्तारी के साथ ही कराची में बैठा आतंकी दाऊद और रावलपिंडी में बैठे आई एस आई   के सरगना बुरी तरह तिलमिलाए गए। वो समझ गए कि एनसीबी की कार्रवाई बॉलीवुड में उनके उन गुर्गों के गिरेबान तक पहुंच रही है, जिन गुर्गों के द्वारा वो बॉलीवुड को अपनी उंगलियों पर पिछले 3-4 दशकों से नचाते रहे हैं। एनसीबी अब बॉलीवुड में उनके माफिया राज को बुरी तरह ध्वस्त करती जा रही है। यही कारण है कि उन्होंने भारतीय मीडिया, बॉलीवुड और राजनीति में जमे हुए अपने गुर्गों को एनसीबी और उसके मुखिया के खिलाफ पूरी ताकत से सक्रिय कर दिया है। जरा याद करिए निकट अतीत के इन घटनाक्रमों को।

पिछले वर्ष जस्टिस फॉर सुशांत सिंह राजपूत के जो बिलबोर्ड अमेरिका के हॉलीवुड में लगे थे उनको कुछ ही घंटों में उतरवा दिया गया था। उन बिलबोर्ड को हटवाने में अजीज-उल-हसन अशाई उर्फ टोनी अशाई का नाम सामने आया था जो भारतीय मूल का कश्मीरी है और पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी समूह जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट का सदस्य रह चुका है।

अमेरीका में वो पाकिस्तान की उस खुफिया एजेंसी आईएसआई का एजेंट है जो पिछले 30 सालों से हिन्दूस्तान में आतंकी जिहाद चलवा रही है। भारतीय और अमेरिकी जांच एजेंसियों के दस्तावेजों में उसकी यह पहचान दर्ज है। सर्वाधिक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि शाहरूख खान और उसकी बीबी गौरी खान का बिजनेस पार्टनर भी यही टोनी अशाई है।

आप समझ सकते हैं कि शाहरुख खान जब जब अमेरिका गया तब तब उसके कपड़े उतरवा कर उसकी तलाश क्यों ली गयी.? उसने इस पर हल्ला भी खूब मचाया। लेकिन अमेरिकी प्रशासन पर कोई असर नहीं पड़ा। किसी ने, खासकर सेक्युलरों और लुटियन मीडिया ने उससे कभी यह नहीं पूछा कि लता मंगेशकर अमिताभ बच्चन, धर्मेन्द्र सरीखे दिग्गजों से लेकर अक्षय कुमार और सनी देओल, सोनू निगम तक, दर्जनों भारतीय फिल्मस्टार एक नहीं अनेक बार अमेरिका गए हैं, लेकिन उनके कपड़े उतरवा कर उनकी तलाशी कभी क्यों नहीं ली गयी? आईएसआई का यही एजेंट जो शाहरुख का जिगरी दोस्त और बिजनेस पार्टनर भी है, एनसीबी की कार्रवाई से तिलमिलाया हुआ है। एनसीबी को रोकने के लिए आईएसआई सक्रिय हो गयी है। यही कारण है कि मीडिया, बॉलीवुड और राजनीति का एक विशेष वर्ग एनसीबी के खिलाफ जहर उगलने में जुट गया है। इससे पहले अफजल गुरु, याकूब मेमन, बटला हाऊस के आतंकियों को बचाने के लिए भी दाऊद और आईएसआई ने भारतीय मीडिया, बॉलीवुड और राजनीति में बैठे अपने गुर्गों का इस्तेमाल भारतीय सेना और भारतीय अदालतों पर दबाव बनाने के लिए किस तरह किया था? उस शर्मनाक खतरनाक सच को पूरा देश देख चुका है।

चरस गांजा कोकीन और अन्य सिंथेटिक ड्रग्स के गोरखधंधे में लिप्तता के लिए आर्यन खान को एनसीबी ने सबूतों के साथ रंगेहाथ पकड़ा है। 3 अक्टूबर से वो एनसीबी की और न्यायिक हिरासत में है। फिल्मी सितारे शाहरुख खान का 23 बरस का बेटा जब नशे के कारोबार में संलिप्तता के कारण एनसीबी द्वारा पकड़ा गया तो सिनेमा, सियासत और लुटियन मीडिया के सफेदपोश चेहरों का एक गिरोह उसकी गिरफ्तारी के विरोध में कई दिनों तक मातम करता रहा । यह गिरोह अपने मातम से देश को बरगलाने बहकाने की कोशिश करता ही रहा। इस गिरोह का कहना था  कि 23 बरस का आर्यन खान तो बेचारा बच्चा है, मासूम है। अत: इस गिरोह को आज यह याद दिलाना जरूरी है कि अभी ज्यादा समय नहीं हुआ है। अप्रैल 2018 की बात है। ऑस्ट्रेलिया में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा खेलोत्सव कॉमनवेल्थ गेम्स आयोजित किया जा रहा था। दुनिया की एक तिहाई जनसंख्या वाले 72 देशों के खिलाड़ी अपने कौशल का प्रदर्शन वहां कर रहे थे। इतनी कठोर प्रतिस्पर्धा वाले वैश्विक मंच पर 15-16 वर्षीय वर्षीय मनु भाखर, मेहुली घोष और अनीश भारवाल सरीखे किशोर तथा 21 वर्षीय नीरज चोपड़ा, गौरव सोलंकी, मनीष कौशिक सरीखे 20-21 वर्षीय युवा खिलाडिय़ों ने उस विश्वस्तरीय अंतरराष्ट्रीय खेल मंच कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्णपदक जीतकर अपनी प्रतिभा का प्रचंड शंखनाद किया था। 15 से 21 वर्ष वाले उन किशोरों और युवाओं ने उस कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय खेलों के स्वर्णिम भविष्य की नई उम्मीदों की नींव रखने का काम किया था। इस बार के टोक्यो ओलिम्पिक में उस नींव की स्वर्णिम झलक स्पष्ट दिखी भी है।

शाहरुख खान के कपूत के समर्थन में मातम कर रहे इस गिरोह को यह भी याद दिलाना जरूरी है कि उसी मुंबई में अपने 20-21 बरस के साथियों के साथ मिलकर 21 बरस के अजमल कसाब ने 170 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। 18 बरस की उमर में फूलन देवी ने एक लाइन में खड़ा कर के 20 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। अत: 23 बरस के आर्यन खान को मासूम बच्चा सिद्ध करने में जुटा गिरोह, ऐसा कर के देश की आंखों में धूल झोंक रहा है।

आर्यन खान को बच्चा और मासूम बता रहा सिनेमा, सियासत और लुटियन मीडिया के सफेदपोश चेहरों का यही गिरोह आर्यन खान की गिरफ्तारी पर देश की सरकार पर यह भी आरोप लगा रहा है कि, आर्यन खान क्योंकि सुपरस्टार शाहरुख खान का लड़का है, मुसलमान है। इसलिए उसे परेशान किया जा रहा है। इस गिरोह द्वारा ऐसा पहली बार नहीं किया जा रहा है। यह गिरोह आतंकी अफजल और याकूब समेत हर आतंकी के पक्ष में ऐसा ही राग अलापता है जो सुरक्षाबलों के हाथों या तो मारा जाता है, या पकड़ा जाता है। दिल्ली का बाटला हाऊस एनकाउंटर इसका शर्मनाक उदाहरण है। यही गिरोह यह राग भी अलापता है कि आतंकी या अपराधी का कोई धर्म नहीं होता है। लेकिन नशे में धुत्त सलमान खान फुटपाथ पर सो रहे गरीबों को अपनी कार से रौंदने के बाद जब पकड़ा गया था तो सफेद गोल मुसलमानी टोपी पहनकर उसने यही राग अलापा था कि मैं मुसलमान हूं इसलिए मुझे परेशान किया जा रहा है। देश की साख धाक अस्मिता मान सम्मान स्वाभिमान का सौदा सट्टेबाजों के साथ करते हुए सीबीआई ने जब अजहरुद्दीन को सबूतों के साथ पकड़ा था तो वो भी यही राग अलापने लगा था कि मुसलमान होने की वजह से मुझे परेशान किया जा रहा है। संजय दत्त जब आतंकवादियों से ली गयी एके 47 राइफलों और हथगोलों के साथ गिरफ्तार हुआ, 6 बरस की सजा पाया तो वो भी यही चिल्लाया कि मेरी मां क्योंकि मुसलमान है, इसलिए मुझे फंसाया गया है। नशे के गोरखधंधे में शाहरुख खान के लड़के की गिरफ्तारी के बाद यह गिरोह एक बार फिर सक्रिय हो गया है।

देश बदल रहा है

पासपोर्ट जब्त करने और देश के बाहर जाने पर प्रतिबंध लगाने के बाद हाईकोर्ट ने आखिरकार शाहरुख खान के लड़के को बीते 28 अक्टूबर को जमानत दे दी। अपने बेटे को यह जमानत दिलाने के प्रयास में शाहरुख खान के दांतों तक को पसीना आ गया। इस प्रकरण ने शराबी बवाली बदतमीज शाहरुख को यह आभास भी करा दिया कि इस देश का कानून और एजेंसियां उसके घर की लौंडी बांदी नहीं हैं। इस प्रकरण ने देश के कानून के सामने शाहरुख खान की औकात उसको दिखायी बतायी है। ऐसा पहली बार हुआ है। वरिष्ठ पत्रकार सतीश चंद्र मिश्रा कहते है ‘याद करिए, यही शाहरुख खान इस देश के कानून को अपने जूते की नोंक पर रख कर किस तरह खुलेआम गुंडई करता था।

न्यायालय से जमानत मिलने में लगे 26 दिन तथा पासपोर्ट जब्त और देश से बाहर जाने पर हाईकोर्ट द्वारा लगाए गए प्रतिबंध ने यह साफ कर दिया है कि उसका लड़का फिलहाल अभी तक निर्दोष कतई नहीं है। उसके लड़के को मुसलमान होने के कारण भी गिरफ्तार नहीं किया गया था। जैसा कि हुड़दंग देश का सेक्युलर माफिया कर रहा है। उसके लड़के की करतूत ही ऐसी थी जिसके कारण एनसीबी द्वारा उसे गिरफ्तार किया जाना जरूरी था। लेकिन अतीत में कई उदाहरण ऐसे हैं जिनके आधार पर यह जरूर कहा जा सकता है कि सेक्युलर कांग्रेसी राज में शाहरुख खान को देश के कानून की धज्जियां उड़ाने की खुली छूट केवल मुसलमान होने के कारण मिली हुई थी।

ऐसे तीन प्रकरणों का उल्लेख यहां कर रहा हूं।

इस शाहरुख खान ने मुंबई की एक चर्चित पत्रिका के वरिष्ठ पत्रकार कीथ डिसूजा के दफ्तर में घुसकर उसके साथ गाली-गलौज की थी। इससे भी उसका दिल नहीं भरा था तो दूसरे दिन वो पत्रकार के घर पहुंच गया था। उसके बूढ़े माता पिता के सामने जबरदस्त गाली गलौज करते हुए उस पत्रकार की धुनाई कर दी थी। पत्रकार ने पुलिस में रिपोर्ट लिखायी थी। गिरफ्तार कर के थाने लाने के बाद पुलिस ने थोड़ी देर में शाहरुख को थाने से ही छोड़ दिया था। इसके बाद वो केस  फाइलों के आगे कभी बढ़ ही नहीं सका। आगे कोई कार्रवाई कभी हुई ही नहीं। केंद्र और महाराष्ट्र में सरकार कांग्रेस की ही थी। शाहरुख और उसके सेक्युलर दलाल आज देश को समझाएं कि यह क्यों नहीं माना जाए कि शाहरुख को यह छूट इसलिए मिली थी क्योंकि वो मुसलमान है।

इसी शाहरुख खान ने मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में दारू पीकर भयंकर गालीगलौज करते हुए सुरक्षाकर्मियों पर हमला कर दिया था। करोड़ों लोगों ने उस नंगई को टीवी पर लाइव देखा था। मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन ने शाहरुख खान के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट भी दर्ज करायी थी। लेकिन मुंबई पुलिस ने कोई कार्रवाई करने के बजाए शाहरुख खान को क्लीन चिट दे दी थी। हालांकि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने 5 साल के लिए शाहरुख खान पर प्रतिबंध लगा दिया था। केन्द्र और महाराष्ट्र में कांग्रेस की सरकार थी। शाहरुख और उसके सेक्युलर दलाल आज देश को समझाएं कि यह क्यों नहीं माना जाए कि शाहरुख को यह छूट इसलिए मिली थी क्योंकि वो मुसलमान है।

इसी शाहरुख खान ने दारू पीकर एक पार्टी में फिल्म निर्माता निर्देशक फराह खान के पति शिरीष कुंद्रा को एक पार्टी में सार्वजनिक रूप से जमकर कूट दिया था। पुलिस ने कोई कार्रवाई करने के बजाए चुप्पी साध ली थी। फराह खान को अपने पति और भाई के साथ शाहरुख खान के घर जाकर समझौता करना पड़ा था। केन्द्र और महाराष्ट्र में कांग्रेस की सरकार थी। शाहरुख और उसके सेक्युलर दलाल आज देश को समझाएं कि यह क्यों नहीं माना जाए कि शाहरुख को यह छूट इसलिए मिली थी क्योंकि वो मुसलमान है।

पिछले 7 वर्षों में देश में यही बड़ा परिवर्तन हुआ है। कुकर्मों के बाद देश के कानून को ठेंगा दिखाने, उसकी धज्जियां उड़ाने के लिए… हाय मैं मुसलमान… हाय मैं मुसलमान… चिल्लाने का हथकंडा अब काम नहीं करता। हाय मैं मुसलमान… हाय मैं मुसलमान… चिल्लाने के हथकंडे अब कानून के डंडे पर भारी नहीं पड़ते।’

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री यानी बॉलीवुड इन दिनों बेहद मुश्किल वक्त से गुजर रहा है और इसमें काम करने वाले कई प्रमुख चेहरों पर फैंस की उंगलियां उठ रही हैं। सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद जिस तरह बॉलीवुड माफियाओं की बात सामने आई और फिर सीबीआई जांच में ड्रग्स एंगल सामने आने के बाद जिस तरह से हर दिन फिल्म इंडस्ट्री के कई फेमस सेलेब्स पर ड्रग्स की खरीद फरोख्त और सेवन के आरोप लगते जा रहे हैं, उससे सोशल मीडिया पर हंगामा मचा हुआ है और लोग इन स्टार्स से सवाल पूछ रहे हैं कि बड़े पर्दे पर नशामुक्ति और डिप्रेशन को लेकर ज्ञान देने वालीं इन मोहतरमाओं की दुनिया तो खुद ही ड्रग्स और गांजे के साये से घिरी हुई हैं, ये क्या दूसरों के लिए आदर्श साबित होंगी? एनसीबी की हनक के बावजूद प्रतिबंधित दवाओं का रैकेट निर्बाध चल रहा है। और यह इसलिए निर्बाध है क्योंकि ज्यादातर सफेदपोश लोग इसमें शामिल नजर आ रहे हैं। अबतक तो हाई प्रोफाइल नाम ही सामने आए हैं।  आम लोगों के लिए ड्रग कंज्यूम करना वैसे भी आसान बात नहीं। राशन-सब्जी-तेल की कीमत से परेशान जनता की हैसियत ही नहीं है, जिनकी हैसियत है वो कर रहे हैं।

 

नीलाभ कृष्ण

 

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