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बिहार में शराबबंदी की फजीहत

बिहार में शराबबंदी की फजीहत

30नवम्बर को विधानसभा परिसर में शराब की खाली बोतल मिलने के बाद दरभंगा समाहरणालय के परिसर में शुक्रवार को भी शराब की दर्जनों बोतलें मिली। मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री, अधिकारी, मातहत  आये दिन उस जगह पर बैठक करते हैं। उसी के सामने शराब की बोतलें मिलना बिहार में पूर्ण रूप से शराबबंदी के दावो पर सवाल उठाता है। इसी मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने सामने है। भाजपा और जदयु जहां राष्ट्रीय जनता दल के साजिश बता रहे हैं। वहीं तेजस्वी यादव शराबबंदी को एक सिंडीकेट के जरिए शराब की तस्करी करने का आरोप लगा रहे हैं। जबकि शराब माफियाओं के तार पड़ोसी देश नेपाल और पूर्वोत्तर राज्यों से जुडे हुए हैं। वहीं कभी ग्रामीण क्षेत्रों में शराब के खिलाफ नक्सलियों के आंदोलन अब कुंद पड़ गई है। जहां निर्वाध रूप से इसके निर्माण बिहार और झारखंड से सटे इलाके में हो रहे हैं।

बिहार में पिछले कुछ दिनों से शराबबंदी कानून को लेकर घमासान मचा हुआ है। सडक़ से सदन तक शराबबंदी के चर्चा हो रही है। विधानसभा के चालू सत्र के दौरान परिसर में शराब की खाली बोतलें मिलने से जोरदार हंगामा हुआ। जबकि चार दिन पहले ही राज्यकर्मियों को शराबबंदी को लेकर शपथ दिलाई गयी थी। इसपर नीतीश कुमार ने गहरी नाराजगी जाहिर की। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि यह बर्दाश्त से बाहर है और इसकी जांच होगी। इसके बाद राज्य के मुख्य सचिव से लेकर डीजीपी तक इन दिनों शराब की बोतलें ढूंढऩे में लगे हैं। ऐसे में सवाल उठता कि इतनी बड़ी सख्ती के बाद भी बिहार में धड़ल्ले से शराब बिक रही है। नीतीश सरकार ने 5 अप्रैल 2016 से महिलाओं की मांग पर पूरे राज्य में शराब की बिक्री, सेवन और निर्माण पर रोक लगाई हुई है

शराब को लेकर सरकार ने कड़ा कानून बनाया है। लेकिन इसकी हकिकत उल्टा है। प्रदेश की हालत यह है कि प्रतिदिन शराब जब्त और तस्कर गिरफ्तार किये जाते हैं। तस्कर भी स्मार्ट हो गये हैं। वो पुलिस से बचने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाते हुए तस्करी में लिप्त हैं।

बिहार में एक तरफ सीएम नीतीश कुमार अपने मंत्रियों और अधिकारियों को शराब नहीं पीने की शपथ दिलवा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर सरकारी भवनों में लगातार शराब की बोतलें बरामद हो रही है।

इतने  सालों बाद भी इस पर नकेल नहीं कसा जा सका है। बिहार में पिछले छह सालों से पूर्ण शराबबंदी है। मगर इसकी हकीकत बयां करने के लिए अक्सर लोग कहते बिहार में भगवान की तरह शराब है। जो कहीं दिखता नहीं पर मिलता हर जगह है। राज्य सरकार की कथित सख्ती के बाबजूद बंदी लागू होने के दिन से ही शराबबंदी का माखौल बना हुआ है। केवल एक बदलाव वह है कि शराबखोरी के लिए अब यहां के लोगों को ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। इसके एवज में होम डिलीवरी की सेवा उपलब्ध है। जाहिर है कि पैसों वाले के लिए शौक पूरा करना कोई मुश्किल नहीं है। वहीं शराब के नाम पर नकली और मिलावटी जहरीली शराब की धड़ल्ले से बिक्री हो रही है।

बिहार में 2016 से पूर्ण शराबबंदी कानून लागू है। इसके बाबजूद इस वर्ष रौशनी पर्व दीपावली और छठ के मौके पर जहरीली शराब पीने से 70 लोगों की जान चली गयी है। कुल मिलाकर शराबबंदी की तरीख से अभी तक 200 लोगों की मौत जहरीली शराब पीने से हुई है। इस घटना के बाद डीजीपी एस के सिंघल ने शराब के व्यापार कर रहे लोगों पर कारवाई करने तथा इंटेलिजेंस मशीनरी को आगे आने की बात कही है। वहीं जिस क्षेत्र में शराब पकड़ा गया वहां के चौकीदार से थानेदार तक नौकरी जाने का खतरा बना रहेगा।

पांच वर्ष पूर्व 21 जनवरी 2017 को शराबबंदी के मुद्दे पर बिहार में 2 करोड़ से ज्यादा लोगों ने मानव श्रृंखला बना डाला थी। जिसकी लम्बाई 11 हजार किलोमीटर मानव श्रृंखला थी। आम लोगों के आलावा मुख्यमंत्री नीतिश कुमार उस समय सत्ता में शामिल रहे राजद सुप्रीमों लालू प्रसाद यादव से लेकर तमाम बड़े मंत्री और अधिकारी इस मानव श्रृंखला में शामिल होकर वल्र्ड रिकॉर्ड बनाया था। उस समय सत्ता से दूर रहे भाजपा सहित सभी दल इस मानव श्रृंखला में भाग लिया था। मक्शद नशा मुक्त बिहार बनाने को लेकर लोगों को जागरूक करना था। 11292 किलोमीटर से ज्यादा लम्बी यह मानव श्रृंखला विश्व की सबसे लम्बी मानव श्रृंखला थी। जिसे गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। छह साल पहले बिहार में शराब बिक्री पर रोक लगा दी गई है। लेकिन फिर भी शराब पीने के मामले में बिहार काफी आगे है। और यहां के लोग महाराष्ट्र जैसे राज्यों से भी काफी ज्यादा लोग शराब पी रहे हैं। ऐसे में सवाल उठते हैं कि आखिर शराबबंदी के बाद प्रदेश के लोग इतनी मात्रा में शराब कैसे पी रहे हैं। सर्वे में यह पता चला है कि ग्रामीण क्षेत्रों में 15.8 प्रतिशत और शहरी इलाकों में 14 प्रतिशत लोग शराब पीते हैं। यानी ड्राई स्टेट बिहार में शराब की पहुंच ग्रामीण इलाकों तक भी आसानी से हो रही है। जिस वजह से यहां के लोग शराब का सेवन कर रहे हैं। वहीं महिलाओं की बात करे तो दोनों प्रदेश  बिहार और महाराष्ट्र एक समान 0.4 फीसदी जनसंख्या एल्कोहल गटक रही है।

इधर भारतीय मादक पेय कंपनियों के परिसंघ ने बिहार सरकार से शराबबंदी को खोलने का आग्रह किया है। सीआइएवीसी ने पत्र लिखकर कहा है कि बिहार शराब की भारी कीमत चुका रहा है। राज्य में अवैध और नकली शराब बिक रही है। इस अवैध धंधे में शामिल अपराध गिरोह का उभार हुआ है और राज्य सरकार को भारी राजस्व का नुकसान हुआ है। बिहार का विकास और प्रगति प्रभावित हुईं है। क्योंकि राज्य का वैध शराब व्यापार बंद होने से राजस्व का नुकसान हो रहा है। जो प्रति वर्ष लगभग 10,000 करोड़ है। हालांकि इस पत्र के बाद 16 नवम्बर को हुए विशेष बैठक में नीतीश कुमार इसको खारिज करते हुए शराबबंदी पर और कड़ाई करने का आदेश दिया है।

बिहार में शराबबंदी को पूरी तरह लागू करने की राह में तमाम अड़चने है। लेकिन सरकार इन अड़चनों से घबरा कर सरकार अपने फैसले वापस लेने के मूड में बिलकुल भी नहीं है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद स्पष्ट कर दिया है। अप्रैल 2016 से अक्टूबर 2021 तक शराबबंदी से संबंधित 3 लाख मामले दर्ज हुए हैं। शराबबंदी के तहत अभी तक 470 लोगों की सजा हुई है। 206 सरकारी कर्मी बरखास्त किये गये हैं। वहीं इस कानून के तहत 3 लाख 39 हजार 401 अभियुक्तों की गिरफ्तारी पूरे बिहार में हुई है। जबकि  पुलिस बल की कारवाई में पूरे राज्य में 51.7 लाख लीटर देशी शराब और 94.9 लाख लीटर विदेशी शराब जब्त किया है। बिहार के सीमावर्ती और नेपाल के इलाके में 5401 शराब कारोबारी को गिरफ्तार किया गया है। शराब से जुड़े 37 हजार 484 गाडिय़ां जब्त की गई है। करीब 700 पुलिसकर्मियों पर कारवाई भी हुई है। इतना हीं नहीं आबकारी विभाग द्वारा असम, पंजाब और हरियाणा जाकर बड़े कारोबारीयों को गिरफ्तार किया है।

27 नवम्बर को बिहार पुलिस ने बड़ी कारवाई करते हुए पश्चिम बंगाल के बड़े शराब माफिया मुशर्दी आलम को पूर्णिया से गिरफ्तार किया गया है। वह उत्तरी दिनाजपुर का रहने वाला है। मुशर्दी आलम पश्चिम बंगाल से बिहार शराब भेजने वाले सिंडीकेट का सबसे बड़ा तस्कर है। बिहार पुलिस उसके पीछे दो साल से लगी थी। वह पश्चिम बंगाल से बिहार के कई जिलों में अंग्रेजी शराब के साथ नकली शराब और स्पिरिट की भी तस्करी करता था। पुलिस के अनुसार पूर्णिया, अररिया, सुपौल, किशनगंज, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, सारण, बांका, वैशाली एंव मोतिहारी में इसके खिलाफ मामला दर्ज है। इसने पुलिस के सामने स्वीकार किया है कि नेपाल, अरूणाचल प्रदेश से उतर प्रदेश तक नेटवर्क पूर्वोत्तर के राज्यों से बिहार में तस्करी की जा रही है। इसमें बिहार सहित दूसरे राज्यों के तस्कर शामिल हैं। इसका खुलासा चार वर्ष पहले भी हो चुका है। जब शराब के सबसे बड़े  माफिया अरूण सिंह को 36 लाख रूपये कैश मशीन के साथ मशरख से गिरफ्तार किया था। वह हरियाणा से भारी मात्रा में विदेशी शराब का बिहार के जिलों में सप्लाई करवाता था। इस तरह विदेशी शराब बिहार में धड़ल्ले से नेपाल, पश्चिम बंगाल, झारखंड, उतर प्रदेश आदि जगहों से सप्लाई हो रहें हैं। वहीं देसी शराब ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी चुलाये जा रहे हैं। बेखौफ शराब माफिया द्वारा आये दिन छापेमारी करने गये पुलिस बलों और उत्पाद विभाग के दल पर हमला करने की सूचना मिलती रही है। जबकि 2016 से महिलाओं से मारपीट और घरेलू हिंसा में कमी आई है। इस संबंध में लभरा के मालती देवी बताती है कि शराबबंदी के पहले उसके पति मारपीट करते थे लेकिन अब ऐसा नहीं है। वहीं शांति नगर के रूपा देवी बताती है कि पहले उनके मर्द नशे के कारण घर में पैसा नहीं देते थे। जिसके कारण उन्हें महिना में बीस दिन भूखा सोना पड़ता था।

 

पटना से अनिल मिश्र

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