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स्वच्छता में नम्बर वन इन्दौर

स्वच्छता में नम्बर वन इन्दौर

21 नवंबर की सुबह इन्दौरवासियों के लिए कुछ ज्यादा ही इतराई, इठलाई हुई, शोख, गुलाबी और हसीन थी। इस दिन की बीती हुई रात को लोगों ने एक तरह से रतजगा किया था। इंतजार था तो बस रोज आने वाले मेहमान का जो इस सुबह एक तोहफा देने आने वाला था। यह मेहमान यानी शहर के सभी दैनिक। हॉकर्स ने जैसे ही आंगन या बॉलकनी में अखबार फेंके, पाठकों की नजरें निहाल हो उठीं। अखबार के लिए घरों में छीना झपटी मच गई। लोगों के चेहरों पर फिर से हाल में गुजरी हुई दीपावली झिलमिला गई। लगा जैसे लगभग बत्तीस लाख वाली आबादी ने कोई छोटा मोटा महायुद्ध जीत लिया हो। बधाइयों के लिए लगभग सभी मोबाइल उठाए गए लेकिन एक ही कैसेट सुनाई पड़ी —सभी  लाइने अभी व्यस्त है …! राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सम्मान स्वीकार करने वाले प्रदेश के काबीना मंत्री भूपेन्द्र सिंह के साथ गए अन्य वरिष्ठ जनों को एक निराली अदा में शाबाशी दी। उन्होंने कहा नम्बर वन तो कोई भी आ सकता है लेकिन इन्दौर ने लगातार पांचवी बार अव्वल रहकर जो कीर्तिमान अर्जित किया है वह  अद्भुत है। इन्दौर को फाइव स्टार सिटी और सफाई मित्र का रूपए 12 करोड़ का  अवार्ड भी मिला।

यूं तो स्वच्छता को जीवन का मूल मंत्र बनाने का श्रेय राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को दिया जाता है लेकिन जब पीएम नरेंद्र मोदी 2019 में लगातार दूसरी बार सत्ता में आए तो स्वच्छता और साफ-सफाई को उन्होंने अपनी योजनाओं में पहली प्राथमिकता दी। सही है कि इन्दौर इससे पहले ही स्वच्छता में नम्बर वन पर आने का करिश्मा दिखा चुका था। यह एक इतिहास था, जिसकी प्रस्तावना इन्दौर की तत्कालीन महापौर श्रीमती मालिनी गौड़ ने लिखी थी। श्रीमती गौड़ फिल्वक्त इन्दौर से ही भाजपा की विधायक हैं। जब पहली बार में ही इन्दौर को सफलता मिल गई तो सरकार, स्थानीय प्रशासन, सामाजिक संगठनों, सफाई मित्रों, बुद्धजीवियों और आम नागरिकों को एक साथ लिया गया। उनके सुसंगठित प्रयासों से कूड़े-कचरे और गंदगी के निस्तारण के लिए अति आधुनिक सोच उसी पर आधारित निस्तारण प्लांट लगाए गए। परिणाम यह हुआ कि नम्बर वन का यह सफरनामा चलता रहा। इस बीच वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ की मुखयई में कांग्रेस की सरकार ने लगभग सोलह महीने राज्य सरकार सम्हाली। कोविड 19 के दौरान तो इन्दौर एकाधिबार हॉट-स्पॉट भी बना, लेकिन इन्दौर को अपनी कामयाबी का दस्तावेज लिखने में कोई अवरोध नहीं आया। कोई काम बिना गण के सहयोग के तंत्र पूरा नहीं कर सकता।

आज इन्दौर पर यही व्याख्या लागू होती है। बीते पांच सालों में स्वच्छता और साफ-सफाई इन्दौर का धर्म, ईमान, जमीर, व्रत, हवन-संस्कार और संस्कृति बन गया है। अब कृपया इन्दौर को स्वाद के मामले में देश का दिल जैसा कि एक बार जग प्रसिद्ध शेफ संजीव कपूर ने कहा था, न मानें बल्कि यह कहें, तो भी ज्यादती नहीं होगी कि इस महानगर को स्वच्छता और साफ-सफाई का मिनिया (एक प्रकार की मनो व्याधि) तो नहीं हो गया है। किवदंतियों के अनुसार हजारों वर्ष पहले बसे इस कभी की इंद्रपुरी के आलम आज यह हैं कि सुबह होते ही प्रत्येक रेहड़ी, पोहे, जलेबी, समोसे, नाश्ते, खोमचे, फल, सब्जी आदि विक्रय करने वाले अपनी दुकानें बाद में सजाते हैं पहले डस्टबिन तय जगह पर रखते हैं। यदि छिलके वगैरह आपने सडक़ पर फेंक दिए हों, तो पहले वे आपसे खुद उठाकर फेंकने का अनुरोध करेंगे और यदि आपने शानपती दिखाई, तो मामला बिगड़ जाने के पूरे आसार रहते हैं। दुनिया में ऐसा दूजा देश अभी तक तो जापान ही है, जहां 125 साल तक लोग आसानी से जी जाते हैं और सीनियर सुपर सिटीजन होकर जिंदगी के आखिरी लम्हे तक उसका भरपूर लुत्फ उठाते हैं।

इस पंच को लगाने के लिए पांच नवाचार अपनाए गए। पहला है फोर आर गार्डन। इस नवाचार के अंतर्गत अनुपयोगी वस्तुओं से नई कलाकृतियां एवं झूले फोर आर गार्डन में लगाए गए, साथ ही बेकलेन में भी सुंदरीकरण किया गया। चौराहे दर चौराहे बेकार वस्तुओं की कलाकृतियों को सजाया गया। जीरो वेस्ट वॉर्ड। यह दूसरा न्यारा प्रयोग था। इसके तहत कुल पांच वॉर्ड को चिन्हित करके गीले कचरे की होम कम्पोजिंग की गई। कभी इन्हीं वार्डो से रोजाना लगभग दस टन कचरा ट्रेचिंग ग्राउंड ले जाया जाता था। तीसरे नवाचार बायो सीएनजी प्लांट के अंतर्गत गीले-कचरे से सीएनजी खाद के अलावा बायो सीएनजी गैस भी बनाई जाने लगी। शहर में इस गैस के पम्प स्थापित किए गए हैं और सिटी बस तक इसी से चलने लगी हैं। नाला टेपिंग नवाचार के अंतर्गत सरस्वती और कान्ह नदियों में नाला टेपिंग की गई यानी गंदे पानी को उक्त नदियों में मिलने से रोका गया। अब सीवरेज प्लांट से शुद्ध किया गया पानी दोनों नदियों में छोड़ा जाता है। अंत में जो नवाचार लाया गया, उसे कार्बन क्रेडिट नाम दिया गया। कार्बन क्रेडिट बेचकर पैसा कमाने वाला यह देश का पहला निकाय बन गया।

अलावा इसके पांच नए मंत्रों को भी लागू किया गया। गीला और सूखा कचरा अलग करना। इसके तहत गीले और सूखे कचरे को  घर-घर से अलग करके नियमित एकत्र किया जाने लगा। गीले कचरे से सीएनजी गैस बनाई गई। सूखे कचरे का दूसरा उपयोग किया गया। भवन निर्माण और उसे तोडऩे से जमा मलबे को उपयोग में लाकर अन्य निमार्ण वस्तुएं बनाई गईं। कोविड 19 कचरे के लिए पीले रंग का अलग डस्टबिन लगाया गया है। रियूज्ड वस्तुओं के अंतर्गत घरों में काम आ चुकी चीजों  को नया रंग रूप देकर उन्हें सुंदरीकरण के काम में लाया गया। इन्दौर की अलग शख्सियत बनाने वाला एक अलहदा प्रयोग यह किया गया, उक्त पैरों में जिस सीवरेज के पानी को स्वच्छ करने का जिक्र किया गया है, उसका उपयोग खेतों समेत बगीचों में करके बंजर जमीन को खिला दिया गया। अन्य महानगरों की तरह ही इस महानगर में भी कूड़े-कचरे प्लास्टिक की थैलियों के पहाड़ जैसे ढ़ेरों का कायाकल्प करके बदले में वहां झकास हरियाली के बगीचे है। आर्दश रोड से साकेत नगर तक जो स्वस्थ और परम्मरागत ढंग से सजावट की गई वह एक नए हुनर का कमाल है।

इन्दौर उन कुछेक शहरों में से एक है, जहां का प्रिंट मीडिया राजनीति से परे सामाजिक हितों के बारे में नींद में भी जागता रहता है।

अन्य कई छोटे-बड़े शहरों में सीवरेज की सफाई के दौरान घुटन और पर्याप्त सुरक्षा साधनों के मामले में लापरवाही के चलते मौते तक हो जाने की खबरें आती रहती हैं, लेकिन इन्दौर में कानपुर (यूपी) की देखा-देखी रोबोट के इस्तेमाल से यह काम किया जाता है। ये रोबोट हैदराबाद में बनते हैं जिससे अब कोई दुर्घटना नही होती। नगर निगम के पास इस समय 12 मलबा गाडिय़ां, 12 प्रेशर गाडिय़ां एवं पांच रोबोट मशीनें हैं। सफाई कर्मचारियों को 10 से 15 लाख तक का ऋण  भी दिया जाता है। ऐसे 30 सफाई मित्रों को तो कर्ज मिल भी चुके हैं। महानगर में 2,00,000 जल मल निकासी चेम्बर हैं और इस काम के लिए 770 कर्मचारी हैं, जो औसतन 440 चेम्म्बरों की रोज सफाई करते हैं। पुरानी सभी कच्ची गड्ढे वाली और टूटे हुए फुटपाथ स्वच्छता अभियान से उगाई राशि से दुरुस्त कर दिए गए हैं।

कचरा कलेक्शन के मामले में और सुधार हो, तो इस निकाय को ढाई करोड़ रुपए की प्रति माह आय अतिरिक्त हो सकती है। नियमों के उल्लंघन करने वालों के नाम, स्थान और राशि के चालान के फोटो तक  मीडिया में जारी कर दिए जाते है। शहर के अव्यवस्थित होर्डिंग्स हटाकर यूनिपोल लगाए गए हैं। प्रति माह करीब तीन करोड़ रुपए इस मद में मिल जाते हैं। जलूद इन्दौर का एक और जल आपूर्ति केन्द्र है। वहां 500 करोड़ रुपए लगाकर ग्रीन मसाला प्लांट की योजना चालू की गई है। 400 एकड़ जमीन पर फैले इस प्लांट की राशि ग्रीन मसाला बांड से जुटाई जाएगी।

इन्दौर कुल 85 वॉर्डों में आबाद है। रेखांकित करने और ले देकर मीडिया की लू उतारने को अभिशप्त लोगों के लिए यह खबर हरदम काम की रहेगी कि यहां के प्रिंट मीडिया ने स्वच्छ इन्दौर के तहत पहले मिशन इन्दौर, फिर मुस्कान इन्दौर और अंत में मुमकिन है मुहिम चलाई। सभी वॉर्डों में स्वच्छता प्रहरी नियुक्त किए गए हैं। इस बार पंच मारने का श्रेय निगम आयुक्त श्रीमती प्रतिभा पाल, कलेक्टर मनीष सिंह, भाजपा सांसद शंकर लालवानी को विशेष रूप से जाता है।

 

इन्दौर से नवीन जैन

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