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मोदी की काशी या काशी का मोदी

मोदी की काशी या काशी का मोदी

2014 में जब नरेंद्र मोदी ने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभाला, तो यह हमारे देश को एक नया भारत बनाने का समय था। मोदी के कुछ विरोधियों ने चिल्लाया कि अब भारत हर जगह सांप्रदायिक हिंसा की ओर अग्रसर होगा और उन्होंने लगातार केंद्र सरकार के खिलाफ साजिश करने की पूरी कोशिश की। लेकिन चीजें तेजी से बदलीं, स्थितियां बदलीं और मोदी के कुशल नेतृत्व में एक समग्र सकारात्मक माहौल स्थापित हुआ। सुशासन के सिद्धांत ने नागरिकों के बीच जड़ें जमा लीं, जिसके परिणामस्वरूप बंगाल, ओडिशा और तमिलनाडु में क्षेत्रीय दलों की कुछ जीत को छोडक़र विभिन्न राज्यों में भाजपा की जीत हुई। अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनकर तैयार हो रहा है। कश्मीर में धारा 370 को खत्म कर दिया गया है। बुनियादी ढांचे के विकास, सामाजिक मूल्यों को फिर से परिभाषित करने और हमारे प्रतिष्ठित गलियारों पर विशेष ध्यान देने के क्षेत्र में विकास की पहल की एक श्रृंखला ने मोदी को ग्रामीण और शहरी भारत दोनों के बीच अधिक लोकप्रिय बना दिया। काशी में हमारे प्रधानमंत्री द्वारा हाल ही में मारा  गया मास्टरस्ट्रोक प्रशंसा के योग्य है। मुझे लगता है कि यह पहली बार है जब भारत के प्रधानमंत्री ने भारत की आध्यात्मिक आत्मा को विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया, जो काशी विश्वनाथ है। भव्य मंदिर ने अपने नए परिसर का पुनर्निर्माण पा कर पना खोया हुआ गौरव पुन: प्राप्त किया। भव्य पुराने शिव धाम में आने वाले लाखों भक्तों के लिए मां गंगा और बाबा विश्वनाथ के बीच एक स्वच्छ गलियारा समय की मांग थी। इतना ही नहीं, मोदी गंगा मां की सफाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए भी बधाई के पात्र हैं। उन्होंने स्वयं काशी में गंगा में डुबकी लगाई और फिर बाबा विश्वनाथ की पूजा की। अगर आपने यह देखा की मोदी हिंदू धर्म में पूजा करने की परंपराओं का पालन कर रहे थे, तो एक प्रतिष्ठित विरासत स्थल को विकसित करने में उनके समर्पण, प्रतिबद्धता के लिए उन्हें सलाम करना चाहिए। हालांकि वह गुजरात से हैं, लेकिन उन्होंने वाराणसी से चुनाव लडऩे का फैसला किया। अब, आप यह देख सकते  है कि काशी को आध्यात्मिक पर्यटन की अग्रिम पंक्ति में लाना उनकी दूरदृष्टि थी। अब, लाखों संत और भक्त मां गंगा में डुबकी लगा सकते हैं और काशी विश्वनाथ में पूजा कर सकते हैं। मां गंगा पर अति आधुनिक क्रूज यह दिखाता है कि कैसे एक सरकार भारत की आध्यात्मिक आत्माओं के केंद्रों को विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

देखा जाये तो यह हमारे प्रसिद्ध एवं प्रतिष्ठित गलियारों के मूल्यों को बदलने और इन्हें व्यावसायिक शहरों  की तरह विकसित करने की हमारे आक्रमणकारियों की एक सुनियोजित साजिश थी। अब यदि कोई केदारनाथ और बद्रीनाथ के पहाड़ों पर लंबे राजमार्गों को देखता है, यदि कोई विभिन्न आध्यात्मिक केंद्रों में प्रदान की जाने वाली आधुनिक सुविधाओं को देखता है, तो यह निश्चित है कि मोदी के पास हमारे सदियों पुराने खोये हुए वैभव को बहाल करने की दोहरी दृष्टि है, और साथ ही, आत्मनिर्भर, आधुनिक भारत के लिए बुनियादी ढांचे का विकास करने के लिए भी। किसी भी देश के बुनियादी विकास को हर क्षेत्र में बदलने में सालों लग जाते हैं। अब मोदी के आलोचक भी खामोश हैं, यह देखते हुए  की  कैसे मोदी ने भारत के  स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत किया, रक्षा क्षेत्र में हथियारों के आयात को कम किया, किसानों को बीमा और अन्य सुविधाएं प्रदान की और नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लायी गयी। अब समय आ गया है कि इस महान राष्ट्र के लोगों को सुशासन को मजबूत करने के लिए मोदी सरकार की कार्यशैली को ध्यान से देखना चाहिए और हमारे खोए हुए गौरव को बहाल करने के लिए प्रधानमंत्री अपनी नई नीतियों के साथ कैसे आगे बढ़ रहे हैं यह देखना चाहिए। काशी निस्संदेह एक बेंचमार्क है और उम्मीद है कि यही कहानी अन्य प्रतिष्ठित विरासत स्थलों पर भी दोहराई जाएगी।

 

Deepak Kumar Rath

दीपक कुमार रथ

(editor@udayindia.in)

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