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शिवत्व से भाजपा को अमरत्व दिलाने की राह पर मोदी

शिवत्व से भाजपा को अमरत्व दिलाने की राह पर मोदी

शिवत्व से भाजपा को अमरत्व दिलाने की राह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नयी सदी में नया अनुष्ठान करने में विगत कई वर्षो से लगे हुए हैं। राजनैतिक पण्डितों का ध्यान भले ही इस अनुष्ठान पर नहीं गया है लेकिन सोमनाथ से विश्वनाथ तक की यात्रा के अनेक राजनैतिक पड़ाव समय-समय पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के क्रियाकलापों में देखने को मिले हैं। इन कदमों में निहित स्वर को समझना आसान नहीं है। वर्ष 2014 में दिल्ली दरबार के लिए दस्तक देने के पूर्व नरेन्द्र मोदी ने गहन चिन्तन मनन के बाद भविष्य की राजनीति की सफलता के लिए रणनीति बनाई। रणनीति के तहत जब लोकसभा चुनाव लडऩे के लिए नरेन्द्र मोदी वाराणसी पहुंचे तो उन्होंने अपने उदगार को कुछ इस तरह व्यक्त किये थे : मुझे मां गंगा ने बुलाया है। यह कथन ध्वनित कर रहा था कि उनका वाराणसी से चुनाव लडऩा महज संयोग नहीं अपितु एक अनुष्ठान का हिस्सा है जिसमें शिवत्व की अविरल धारा से धनीभूत होकर पूरे भारत में भारतीय जनता पार्टी की स्वीकारिता को सर्वोच्च स्थान दिलाना था। काशी को क्यिूटो ही नहीं केदार नाथ, बद्रीनाथ सहित देश के सभी बारह ज्योर्तिलिंगों के विकास और उन स्थानों के आसपास के क्षेत्रों में भाजपा के भगवा ध्वज को फहराने की परिकल्पना को साकार करने का प्रथम सोपान है।

काशी में बाबा विश्वनाथ के कॉरीडोर का शुभारम्भ करते समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक शिव भक्त का बाना धारण कर पवित्र गंगा में डुबकी लगा कर गंगा जल को ताम्रकलश में भरा तो यह दृश्य देखकर उत्तर से दक्षिण तक पूरब से पश्चिम तक सारे भारतवासी झूम उठे नृत्य कर, बम-बम-भोले शंकर का उद्घोष कर सारे वातावरण को शिवमय बनाने में एकजुट हो गये। राजनैतिक विशलेषक और भाजपा के प्रवक्ता हरिश्चन्द्र श्रीवास्तव कहते है आदि देवता शिव का महत्व भारतीय संस्कृति में गहराई से जुड़ा है। हजारों वर्षो की गुलामी के बाद भी शिवत्व ने ही भारत को एक सूत्र में जोड़े रखा लेकिन आजादी के बाद की सरकारों की उपेक्षा के चलते सोमनाथ के अलावा अन्य ज्योर्तिलिंगों के प्रति ध्यान नहीं दिया गया इसलिए इन स्थानों को सुगम और सरलता से भक्तों के लिऐ मार्ग प्रशस्त कर नरेन्द्र मोदी ने भागीरथी प्रयास किया है। इस प्रयास के बाद कुछ लोग काबा के चूमने वाले पत्थर को भी शिवत्व का रुप बताने में भी सोशल मीडिया पर लग गये है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने राजनैतिक निहतार्थ को साधने और अपनी अध्यात्मिक प्यास को साथ-साथ लेकर चल रहे हैं। काशी में कॉरीडोर के शुभारम्भ पर अपने लक्ष्य को साधते हुऐ अपने विरोधियों पर हमला कुछ इस तरह बोला प्रधानमंत्री ने कहा कि आक्रमणकारियों ने इस शहर पर हमला किया, इसे ध्वस्त करने की कोशिश की। यह शहर औरंगजेब के अत्याचारों और उसके आतंक के इतिहास का साक्षी है। जिसने तलवार से सभ्यता को बदलने की कोशिश की, जिसने संस्कृति को कट्टरता से कुचलने की कोशिश की। लेकिन इस देश की मिट्टी बाकी दुनिया से अलग है। अगर औरंगजेब है, तो प्रधानमंत्री ने कहा, शिवाजी भी हैं। प्रधानमंत्री  मोदी ने कहा, अगर कोई सालार मसूद इधर बढ़ता है तो राजा सुहेलदेव जैसे वीर योद्धा उसे भारत की एकता की ताकत का एहसास करा देते हैं और ब्रिटिश काल में भी, हेस्टिंग्स का क्या हश्र काशी के लोगों ने किया था, ये तो काशी के लोग जानते ही हैं।

प्रधानमंत्री ने काशी की महिमा और महत्व का वर्णन किया। उन्होंने टिप्पणी की कि काशी केवल शब्दों की बात नहीं है, यह संवेदनाओं की सृष्टि है। काशी वह है – जहां जागृति ही जीवन है; काशी वह है – जहां मृत्यु भी मंगल है। काशी वह है – जहां सत्य ही संस्कार है; काशी वह है जहां प्रेम ही परम्परा है। उन्होंने कहा कि वाराणसी वह शहर है जहां से जगद्गुरु शंकराचार्य को डोम राजा की पवित्रता से प्रेरणा मिली और उन्होंने देश को एकता के सूत्र में बांधने का संकल्प लिया। यह वह स्थान है जहां गोस्वामी तुलसीदास ने भगवान शंकर से प्रेरणा लेकर रामचरितमानस जैसी अलौकिक रचना की। प्रतिकूलता को अनुकूलता में परिवर्तित कर अपने लक्ष्य को अद्भुत अविस्मरणीय, अकल्पनयी कॉशी विश्वनाथ धाम को दुनियां में नई पहचान दे दी। 400 से अधिक मकानों को बिना मुकदमों के आपसी सहमति से छोडऩे के लिए प्रेरित कर राष्ट्रपिता गांधी जी तंग गलियों से दर्शन करने विश्वनाथ धाम जाते समय व्यक्त की थी। संकल्प से सिद्धि तक नव्य और भव्य शिवधामों का जीर्णोधार के पहले चरण में सोमनाथ, केदारनाथ, बद्रीनाथ के बाद बाबा विश्वनाथ तक पूर्ण हुआ है इसी चरण में विदेश में होने के बाद भी पशुपति नाथ के प्रति अपनी श्रद्धा और भक्ति का इजहार बीते वर्षो में नरेन्द्र मोदी नेपाल के शिवधाम में पूजा-अर्चना कर व्यक्त कर चुके शिव के 12 ज्योर्तिलिंगों में 11वें केदारनाथ धाम के प्रति मोदी का पहले से ही लगाव है।

कहा जाता हैं कि गुजरात के मुख्यमंत्री बनने से पहले मोदी ने हिमालय के इस क्षेत्र गरुड़चट्टी की एक गुफा में रहकर साधना की। आम चुनाव के आखिरी चरण के मतदान के दिन पीएम मोदी बद्रीनाथ पहुंच जाते है। शिवधाम में चुनावी परिणाम के पूर्व बद्रीनाथ में आराधना करते है। सभी का ध्यान लोकसभा चुनाव के परिणामों की चिन्ता रातों की नींद गायब कर रही थी उन क्षणों में देवाधिदेव महादेव की भक्ति ध्यान-साधना, जप-तप और अनुष्ठान ही पहले से अधिक स्पष्ट बहुमत का द्योतक बना। तभी तो विधान परिषद  में समाजवादी पार्टी के विधान परिषद शतरूद्र प्रकाश ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं योगी आदित्यनाथ सरकार को काशी के नियोजित तरीके से अकल्पनीय विश्वधाम/मंदिर परिसर को विशाल तथा सुन्दर बनाने हेतु बधाई दी।

‘विश्वनाथ धाम एक भव्य भवन भर नहीं है, ये प्रतीक है हमारे भारत की सनातन संस्कृति का ये प्रतीक है हमारी आध्यात्मिक आत्मा का ये प्रतीक है भारत की प्राचीनता का, परम्पराओं का भारत की ऊर्जा का, गतिशीलता का। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राजनीति हो या कूटनीति इनमें तो वे मास्टर स्ट्रोक खेलने में माहिर है ही, लेकिन भगवान शिव के प्रति उनका अगाध प्रेम भी कही छुपा मोदी के 2014 चुनाव प्रचार और उसके बाद प्रधानमंत्री बनने तक के सफर पर यदि नजर दौड़ाएं तो यह साफ जाहिर होता है कि मोदी शिव कि वाराणसी (काशी) से लोकसभा  चुनाव लडऩा भी उनकी इसी भक्ति साधना का प्रमाण हैं। अब अगली कड़ी में शेष शिव तीर्थो के प्रति दृष्टि भारतीय जनता पार्टी के रंगनाथ जो भक्ति और शक्ति के लिए जाने जाते है तैयार दिख रहे है। नरेन्द्र मोदी के लिए रंगनाथ शब्द महाराष्ट्र के काग्रेस प्रेमीयुवा ने गढा है। उसका मानना है कि रंगनाथ के शब्दो का जादू भारतवासियों के सिर चढकर बोल रहा है। जब तक काग्रेस नरेन्द्र मोदी से बड़ा रंगनाथ नहीं खोज पाती है तब तक मोदी से मुकाबला करना ना मुमकिन है तो वही दूसरी ओर भाजपा ने विश्वास दिया है कि मोदी है तो मुमकिन है शब्द सफलता का बायस बन गया है। भाजपा को दक्षिण भारत का राजनैतिक दुर्ग जीतने के लिए शिवत्व  की राह सभी कंटको को आसान करती नजर आने लगी है।

सुरेंद्र अग्निहोत्री

 

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