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अद्भुत, मंगलकारी, दिव्य काशी : भारत की सांस्कृतिक राजधानी के वैश्विक पुनरोदय का प्रतीक है काशी विश्वनाथ कोरिडोर

अद्भुत, मंगलकारी, दिव्य काशी : भारत की सांस्कृतिक राजधानी के वैश्विक पुनरोदय का प्रतीक है काशी विश्वनाथ कोरिडोर

काशी की महिमा अपरंपार है। भगवान शिव के अवधूत स्वरूप की क्रीड़ास्थली जहां विश्व के नाथ स्वयं विराजित हैं, वह  काशी पुन: अद्भुत, अकल्पनीय, असाधारण मंगलकारी घड़ी का साक्षी बनने जा रहा है। मां गंगा बाबा का सीधे दर्शन कर नित्य प्रणाम करेंगी, यह युगप्रवर्तक घटना 13 दिसम्बर को हुई। भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी काशी विश्वनाथ कोरिडोर का लोकार्पण करने जा रहे हैं। नरेन्द्र मोदी जी के बनारस को अपना मानने के पूर्व तक किसी ने कल्पना तक नहीं की होगी कि ऐसा असाधारण कार्य भी संभव है। गंगा मैया को बाबा का सीधा दर्शन करते हुए देखने की भारतवासियों की अभिलाषा का पूर्ण होना एक स्वप्न के साकार होने की भांति है।

यह केवल बाबा विश्वनाथ के मंदिर के सौंदर्यीकरण का विषय भर नहीं है, अपितु संस्कृति के उदय और सभ्यता के पुनरोद्भव की अविस्मरणीय घटना भी है। काशी जिसे विश्व के एकमात्र प्राचीन जीवित नगर होने का सौभाग्य व गौरव प्राप्त है, विश्व भर के लिये सनातन संस्कृति की धार्मिक, आध्यात्मिक व सांस्कृतिक राजधानी भी है। यह राजधानी वैभव के परम शिखर पर होनी चाहिए थी, किंतु दुर्भाग्य से स्वतंत्रता पूर्व इस्लामी मुगल आक्रांताओं के भयानक प्रहार और स्वतंत्रता पश्चात भारतीय संस्कृति व सभ्यता की उपेक्षा करने वाली सरकारों की उदासीनता से काशी के गौरव को धूमिल करने का षडयंत्रकारी प्रयास किया जाता रहा। 2014 में नरेन्द्र मोदी ने काशी को अपने कर्मयोग की स्थली बनायी और इसकी महिमा का विश्वव्यापी गुणगान एवं इसके प्राचीन गौरव की पुनसर््थापना का संकल्प लिया और आज वह संकल्प काशी विश्वनाथ कोरिडोर के रूप में साकार हो रही है।

बाबा विश्वनाथ मंदिर परिसर के चारों और निर्मित भित्तियां विश्व कोने-कोने से आने वाले भक्तों को काशी और महादेव के पौराणिक इतिहास की जानकारी देगी। इन भित्तियों पर शिव की महिमा का बखान किया गया है। इन भित्तियों के प्रस्तरों पर उत्कीर्ण श्लोक व उसके भावार्थ पर विशेष प्रकाश प्रक्षेपित होगा, जिससे रात्रि में भी सरलता से पढ़ा जा सके। इन भित्तियों पर यहां की पौराणिकता से संबंधित चित्रों को भी उकेरा गया है। काशी विश्वनाथ धाम के अंदर और बाहर की भित्तियों पर संस्कृति, सभ्यता पर आधारित चित्र उत्कीर्ण किये गए हैं। कोरिडोर में चारों वेद, शिव पुराण और सनातन धर्मग्रंथों में काशी से जुड़ी जानकारियां हैं। भक्तों को धाम की मंदिर मणिमाला में सम्मिलित सभी 27 मंदिरों की जानकारी भी मिलेगी। इसमें प्रत्येक मंदिर पर उसके इतिहास के साथ पौराणिक महत्व का उल्लेख किया गया है। एक विशेष एप के माध्यम के भक्त दृश्य व श्रव्य माध्यम से भी मंदिरों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

काशी विश्वनाथ धाम प्रधानमंत्री मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट है। लोकार्पण के पश्चात चलो काशी मास प्रारंभ होगा। 54,000 वर्ग मीटर में व्याप्त यह कोरिडोर भारत के सांस्कृतिक गौरव को विश्व में गुंजायमान करने का वह केंद्र होगा, जो समस्त विश्व को भारतीय सभ्यता व भारतीय संस्कृति की ओर आकर्षित करने का भाव-स्रोत बनेगा। काशी देव दीपावली की भांति घर-घर अलंकृत की जाएगी। धाम का निर्माण कार्य दो चरणों में हुआ। प्रथम चरण की परियोजना में मंदिर चौक, वाराणसी सिटी गैलरी, म्यूजियम, बहुउद्देशीय सभागार, हॉल, भक्त के लिए सुविधा केंद्र, सार्वजनिक सुविधा, मोक्ष गृह, गोदौलिया गेट, भोगशाला, पुजारियों और सेवादारों के लिए आश्रय, आध्यात्मिक पुस्तक पैलेस और अन्य का निर्माण शामिल है। द्वितीय चरण में मंदिर चौक से विश्वनाथ धाम परिसर के साथ ही गंगा दर्शन किए जा सकेंगे। दूसरे चरण में जलासेन घाट और ललिता घाट से रैंप का निर्माण, एस्केलेटर, सांस्कृतिक केंद्र आदि का निर्माण हो रहा है। काशी विश्वनाथ धाम में बनाए गए तीन प्रवेश द्वारों पर यात्री सुविधा केंद्र तैयार किया गया है। सामान सहित भक्त विश्वनाथ धाम में प्रवेश करेगा और यहां यात्री सुविधा केंद्र में प्रसाधन के साथ ही मोबाइल, बैग सहित अन्य सामान रखा जा सकेगा। यहां से भक्त गंगा घाट और विश्वनाथ मंदिर तक सरलता से पहुंच पाएंगे। काशी विश्वनाथ धाम में सभी प्रदेशों के पर्यटन केंद्र स्थापित होगा, जिससे प्रत्येक प्रदेश के भक्तों को स्थानीय भाषा सहित अन्य पर्यटन का लाभ मिल सके। इसके लिए यात्री सुविधा केंद्र में ही सभी प्रदेशों के लिए स्थान आवंटित किया जाएगा।

काशी भारत की आध्यात्मिक व सांस्कृतिक राजधानी है तो काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का लोकार्पण समारोह भी अखिल भारतीय होना चाहिए और ऐसा ही होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा 13 दिसंबर को काशी विश्वनाथ कोरिडोर का लोकार्पण करने के साथ ही एक मास तक चलने वाला दिव्य काशी भव्य काशी अभियान का श्रीगणेश हो जाएगा, जो 14 जनवरी तक चलेगा। अभियान के अंतर्गत 27,700 शक्ति केंद्रों पर स्थित शिवालयों में पूजा अर्चना की जाएगी। 12 से 14 दिसंबर तक प्रदेश के सभी घरों, हाटों, घाटों व मंदिरों में दीपोत्सव मनाया जाएगा। प्रदेश के सभी 27,700 शक्ति केंद्रों पर स्थित शिवालयों तथा प्रमुख मठ मंदिरों में व्यवस्थित रूप से स्क्रीन लगा कर लोकार्पण समारोह को सीधा प्रसारण किया जाएगा। कार्यक्रमों में दिव्य काशी-भव्य काशी’ का साहित्य भी दिया जाएगा। साथ ही पांच लाख घरों में प्रसाद वितरण भी कराया जाएगा। इस दौरान धर्माचार्यों और साधु-संतों को सम्मानित भी किया जाएगा। सभी प्रमुख मंदिरों, मठों, आश्रमों, धार्मिक स्थलों में स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि सभी गांवों और शहरों में दीपोत्सव के लिए अभियान चलाया जाएगा। 12 से 14 दिसंबर तक काशी में लेजर शो, अग्नि-गंधक क्रीड़ा, के साथ समस्त मंदिर, नगर की दीर्घाएं (गलियां), चौक व अन्य सार्वजनिक स्थान प्रकाश से नहाएंगे। 14 दिसंबर को वाराणसी में भाजपा शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री एवं उप-मुख्यमंत्रियों का सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी शामिल होंगे। सभी मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री 13 से 15 दिसंबर तक वाराणसी में सांस्कृतिक प्रवास भी करेंगे। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की ओर से वाराणसी में ही 17 दिसंबर को महापौरों का सम्मेलन होगा। 23 दिसंबर को काशी में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए महासम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें देशभर के कृषि वैज्ञानिक, उन्नत किसान सहित कृषि विशेषज्ञ भाग लेंगे। महासम्मेलन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संबोधित करेंगे। 12 जनवरी 2022 को स्वामी विवेकानंद के जन्मदिवस पर काशी में युवा सम्मेलन का आयोजन होगा।

ऐसी दिव्यता व भव्यता की ओर काशी भारतीय पर्यटन का प्रवेश द्वार बनेगा और भारतीय संस्कृति के गुणगान का अद्भुत जीवंतता को और विस्तार देगा। काशी का भारतीय पर्यटन में कितना विस्तार व महत्व बढऩे जा रहा है, यह इस बात से समझा जा सकता है कि देश का पहला रोप-वे सार्वजनिक यात्री परिवहन सेवा वाराणसी में बनने जा रही है। वाराणसी विकास प्राधिकरण 410.30 करोड़ की लागत से इसका निर्माण कराने जा रहा है। यह सेवा वाराणसी रेलवे जंक्शन से आरंभ होकर गोदौलिया तक जाएगी। रोप-वे के स्टेशन ऐसे होंगे, जिनमें काशी के ज्ञान, कला, धर्म व संस्कृति की झलक मिलेगी। एक समय में लगभग चार हजार लोग इस रोप-वे पर यात्रा कर पाएंगे। विश्व में यह सेवा अभी तक केवल बोलीविया देश के ला पाज नगर व मेक्सिको देश की राजधानी मेक्सिको सिटी में ही है। वाराणसी विश्व का तीसरा नगर होगा, जहां यह सेवा होगी।

काशी और बाबा विश्वनाथ का धाम मात्र एक स्थान नहीं है, अपितु यह ज्ञान व विज्ञान आधारित लाखों वर्ष प्राचीन संस्कृति की चित्रमय सत्य कथा है। यह जीव को जीवंत करने वाली अदृश्य ऊर्जा का प्राकट्य केंद्र है, भाव है, अनुभव है, धरोहर है। काशी का कण-कण शिवमय अर्थात सत्यं शिवम् सुंदरम् की पवित्रता से सन्नद्ध है, धर्म व आध्यात्म की अलौकिक अनुभूति की पवित्र धरा है।

यह देखना सौभाग्य का विषय है कि यह धरा पुन: अपने उसी जीवंत स्वरूप को व्याप्त करने जा रही है।

काशी की महिमा अपरंपार है। भगवान शिव के अवधूत स्वरूप की क्रीड़ास्थली जहां विश्व के नाथ स्वयं विराजित हैं, वह  काशी पुन: अद्भुत, अकल्पनीय, असाधारण मंगलकारी घड़ी का साक्षी बनने जा रहा है। मां गंगा बाबा का सीधे दर्शन कर नित्य प्रणाम करेंगी, यह युगप्रवर्तक घटना 13 दिसम्बर को हुई। भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी काशी विश्वनाथ कोरिडोर का लोकार्पण करने जा रहे हैं। नरेन्द्र मोदी जी के बनारस को अपना मानने के पूर्व तक किसी ने कल्पना तक नहीं की होगी कि ऐसा असाधारण कार्य भी संभव है। गंगा मैया को बाबा का सीधा दर्शन करते हुए देखने की भारतवासियों की अभिलाषा का पूर्ण होना एक स्वप्न के साकार होने की भांति है।

यह केवल बाबा विश्वनाथ के मंदिर के सौंदर्यीकरण का विषय भर नहीं है, अपितु संस्कृति के उदय और सभ्यता के पुनरोद्भव की अविस्मरणीय घटना भी है। काशी जिसे विश्व के एकमात्र प्राचीन जीवित नगर होने का सौभाग्य व गौरव प्राप्त है, विश्व भर के लिये सनातन संस्कृति की धार्मिक, आध्यात्मिक व सांस्कृतिक राजधानी भी है। यह राजधानी वैभव के परम शिखर पर होनी चाहिए थी, किंतु दुर्भाग्य से स्वतंत्रता पूर्व इस्लामी मुगल आक्रांताओं के भयानक प्रहार और स्वतंत्रता पश्चात भारतीय संस्कृति व सभ्यता की उपेक्षा करने वाली सरकारों की उदासीनता से काशी के गौरव को धूमिल करने का षडयंत्रकारी प्रयास किया जाता रहा। 2014 में नरेन्द्र मोदी ने काशी को अपने कर्मयोग की स्थली बनायी और इसकी महिमा का विश्वव्यापी गुणगान एवं इसके प्राचीन गौरव की पुनसर््थापना का संकल्प लिया और आज वह संकल्प काशी विश्वनाथ कोरिडोर के रूप में साकार हो रही है।

बाबा विश्वनाथ मंदिर परिसर के चारों और निर्मित भित्तियां विश्व कोने-कोने से आने वाले भक्तों को काशी और महादेव के पौराणिक इतिहास की जानकारी देगी। इन भित्तियों पर शिव की महिमा का बखान किया गया है। इन भित्तियों के प्रस्तरों पर उत्कीर्ण श्लोक व उसके भावार्थ पर विशेष प्रकाश प्रक्षेपित होगा, जिससे रात्रि में भी सरलता से पढ़ा जा सके। इन भित्तियों पर यहां की पौराणिकता से संबंधित चित्रों को भी उकेरा गया है। काशी विश्वनाथ धाम के अंदर और बाहर की भित्तियों पर संस्कृति, सभ्यता पर आधारित चित्र उत्कीर्ण किये गए हैं। कोरिडोर में चारों वेद, शिव पुराण और सनातन धर्मग्रंथों में काशी से जुड़ी जानकारियां हैं। भक्तों को धाम की मंदिर मणिमाला में सम्मिलित सभी 27 मंदिरों की जानकारी भी मिलेगी। इसमें प्रत्येक मंदिर पर उसके इतिहास के साथ पौराणिक महत्व का उल्लेख किया गया है। एक विशेष एप के माध्यम के भक्त दृश्य व श्रव्य माध्यम से भी मंदिरों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

काशी विश्वनाथ धाम प्रधानमंत्री मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट है। लोकार्पण के पश्चात चलो काशी मास प्रारंभ होगा। 54,000 वर्ग मीटर में व्याप्त यह कोरिडोर भारत के सांस्कृतिक गौरव को विश्व में गुंजायमान करने का वह केंद्र होगा, जो समस्त विश्व को भारतीय सभ्यता व भारतीय संस्कृति की ओर आकर्षित करने का भाव-स्रोत बनेगा। काशी देव दीपावली की भांति घर-घर अलंकृत की जाएगी। धाम का निर्माण कार्य दो चरणों में हुआ। प्रथम चरण की परियोजना में मंदिर चौक, वाराणसी सिटी गैलरी, म्यूजियम, बहुउद्देशीय सभागार, हॉल, भक्त के लिए सुविधा केंद्र, सार्वजनिक सुविधा, मोक्ष गृह, गोदौलिया गेट, भोगशाला, पुजारियों और सेवादारों के लिए आश्रय, आध्यात्मिक पुस्तक पैलेस और अन्य का निर्माण शामिल है। द्वितीय चरण में मंदिर चौक से विश्वनाथ धाम परिसर के साथ ही गंगा दर्शन किए जा सकेंगे। दूसरे चरण में जलासेन घाट और ललिता घाट से रैंप का निर्माण, एस्केलेटर, सांस्कृतिक केंद्र आदि का निर्माण हो रहा है। काशी विश्वनाथ धाम में बनाए गए तीन प्रवेश द्वारों पर यात्री सुविधा केंद्र तैयार किया गया है। सामान सहित भक्त विश्वनाथ धाम में प्रवेश करेगा और यहां यात्री सुविधा केंद्र में प्रसाधन के साथ ही मोबाइल, बैग सहित अन्य सामान रखा जा सकेगा। यहां से भक्त गंगा घाट और विश्वनाथ मंदिर तक सरलता से पहुंच पाएंगे। काशी विश्वनाथ धाम में सभी प्रदेशों के पर्यटन केंद्र स्थापित होगा, जिससे प्रत्येक प्रदेश के भक्तों को स्थानीय भाषा सहित अन्य पर्यटन का लाभ मिल सके। इसके लिए यात्री सुविधा केंद्र में ही सभी प्रदेशों के लिए स्थान आवंटित किया जाएगा।

काशी भारत की आध्यात्मिक व सांस्कृतिक राजधानी है तो काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का लोकार्पण समारोह भी अखिल भारतीय होना चाहिए और ऐसा ही होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा 13 दिसंबर को काशी विश्वनाथ कोरिडोर का लोकार्पण करने के साथ ही एक मास तक चलने वाला दिव्य काशी भव्य काशी अभियान का श्रीगणेश हो जाएगा, जो 14 जनवरी तक चलेगा। अभियान के अंतर्गत 27,700 शक्ति केंद्रों पर स्थित शिवालयों में पूजा अर्चना की जाएगी। 12 से 14 दिसंबर तक प्रदेश के सभी घरों, हाटों, घाटों व मंदिरों में दीपोत्सव मनाया जाएगा। प्रदेश के सभी 27,700 शक्ति केंद्रों पर स्थित शिवालयों तथा प्रमुख मठ मंदिरों में व्यवस्थित रूप से स्क्रीन लगा कर लोकार्पण समारोह को सीधा प्रसारण किया जाएगा। कार्यक्रमों में दिव्य काशी-भव्य काशी’ का साहित्य भी दिया जाएगा। साथ ही पांच लाख घरों में प्रसाद वितरण भी कराया जाएगा। इस दौरान धर्माचार्यों और साधु-संतों को सम्मानित भी किया जाएगा। सभी प्रमुख मंदिरों, मठों, आश्रमों, धार्मिक स्थलों में स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि सभी गांवों और शहरों में दीपोत्सव के लिए अभियान चलाया जाएगा। 12 से 14 दिसंबर तक काशी में लेजर शो, अग्नि-गंधक क्रीड़ा, के साथ समस्त मंदिर, नगर की दीर्घाएं (गलियां), चौक व अन्य सार्वजनिक स्थान प्रकाश से नहाएंगे। 14 दिसंबर को वाराणसी में भाजपा शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री एवं उप-मुख्यमंत्रियों का सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी शामिल होंगे। सभी मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री 13 से 15 दिसंबर तक वाराणसी में सांस्कृतिक प्रवास भी करेंगे। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की ओर से वाराणसी में ही 17 दिसंबर को महापौरों का सम्मेलन होगा। 23 दिसंबर को काशी में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए महासम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें देशभर के कृषि वैज्ञानिक, उन्नत किसान सहित कृषि विशेषज्ञ भाग लेंगे। महासम्मेलन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संबोधित करेंगे। 12 जनवरी 2022 को स्वामी विवेकानंद के जन्मदिवस पर काशी में युवा सम्मेलन का आयोजन होगा।

ऐसी दिव्यता व भव्यता की ओर काशी भारतीय पर्यटन का प्रवेश द्वार बनेगा और भारतीय संस्कृति के गुणगान का अद्भुत जीवंतता को और विस्तार देगा। काशी का भारतीय पर्यटन में कितना विस्तार व महत्व बढऩे जा रहा है, यह इस बात से समझा जा सकता है कि देश का पहला रोप-वे सार्वजनिक यात्री परिवहन सेवा वाराणसी में बनने जा रही है। वाराणसी विकास प्राधिकरण 410.30 करोड़ की लागत से इसका निर्माण कराने जा रहा है। यह सेवा वाराणसी रेलवे जंक्शन से आरंभ होकर गोदौलिया तक जाएगी। रोप-वे के स्टेशन ऐसे होंगे, जिनमें काशी के ज्ञान, कला, धर्म व संस्कृति की झलक मिलेगी। एक समय में लगभग चार हजार लोग इस रोप-वे पर यात्रा कर पाएंगे। विश्व में यह सेवा अभी तक केवल बोलीविया देश के ला पाज नगर व मेक्सिको देश की राजधानी मेक्सिको सिटी में ही है। वाराणसी विश्व का तीसरा नगर होगा, जहां यह सेवा होगी।

काशी और बाबा विश्वनाथ का धाम मात्र एक स्थान नहीं है, अपितु यह ज्ञान व विज्ञान आधारित लाखों वर्ष प्राचीन संस्कृति की चित्रमय सत्य कथा है। यह जीव को जीवंत करने वाली अदृश्य ऊर्जा का प्राकट्य केंद्र है, भाव है, अनुभव है, धरोहर है। काशी का कण-कण शिवमय अर्थात सत्यं शिवम् सुंदरम् की पवित्रता से सन्नद्ध है, धर्म व आध्यात्म की अलौकिक अनुभूति की पवित्र धरा है।

यह देखना सौभाग्य का विषय है कि यह धरा पुन: अपने उसी जीवंत स्वरूप को व्याप्त करने जा रही है।

हरीशचंद्र श्रीवास्तव

(लेखक स्तंभकार राजनैतिक विश्लेषक हैं)

 

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