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राजनीतिक चरित्र खो रही कांग्रेस

राजनीतिक चरित्र खो रही कांग्रेस

प्रिय पाठकों, फिर से महामारी का दौर शुरू हो गया है और सभी बीमारी से बचने के लिए विशेष दिशानिर्देशों का पालन करने के लिए मजबूर हैं। वीकेंड कफर्यू, नाइट कफर्यू और ऑड ईवन फॉर्मूला फिर से वापस आ गया है। कोरोना का नया वैरिएंट अर्थव्यवस्था को सता रहा है और मध्यम वर्ग के लोग और गरीब लोग कड़ाके की ठंड में महामारी के प्रकोप का सामना कर रहे हैं। महामारी के प्रभाव को कम करने के लिए सभी सार्वजनिक स्थानों पर आत्म-सतर्क रहना अब हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। दूसरी लहर की तरह इस बार भी हमारा देश पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव का सामना कर रहा है। पश्चिम बंगाल में, हम पहले ही चुनावों से उत्पन्न गंभीर परिस्थितियों को देख चुके है। राजनीतिक रैली में भारी भीड़ को इस  बार सीमित करना चाहिए और इसके लिए चुनाव आयोग को सख्त नियम बनाने चाहिए।

आइए अब नजर डालते हैं पांच राज्यों के चुनावी परिदृश्य पर। इन सबके बीच उत्तर प्रदेश सबसे महत्वपूर्ण राज्य है जहां मतदान होने जा रहा है। केंद्र की सत्ता यूपी से गुजरती है और अब नेताओं ने दलितों, पिछड़ों, यादवों, कुर्मियों, ब्राह्मणों और ठाकुरों के नाम पर कीचड़ उछालना शुरू कर दिया है। पांच साल पहले बसपा छोडक़र भाजपा में शामिल हुए पिछले वर्ग के नेता, पांच साल सत्ता में रहने के बाद फिर से अपना असली रंग दिखा रहे हैं। लेकिन लोग अब अच्छी तरह से शिक्षित हैं और आम मतदाता सब कुछ जानता है। दलित या पिछड़ी जाति के लोग मीडिया में देख रहे हैं कि कैसे ये मौर्य अपने परिवार और रिश्तेदारों को टिकट दिलाने के लिए गंदी राजनीति कर रहे हैं। वे अच्छी तरह जानते हैं कि जनता के बीच उनकी विश्वसनीयता लगभग समाप्त हो चुकी है, इसलिए वे अब दलित मसीहा के नाम पर घडिय़ाली आंसू बहा रहे हैं। स्वयंभू नेता अच्छी तरह से जानते हैं कि भाजपा उम्मीदवार चुनने के लिए वैज्ञानिक तरीके अपना रही है। भाजपा में, इस बात की बहुत कम संभावना है कि पार्टी कमजोर उम्मीदवारों को मैदान में उतारेगी और अन्य पार्टियों की तुलना में, यहां उम्मीदवारों की चयन प्रक्रिया अलग है, और चुनावी रणनीति भी अलग है। चुनाव प्रचार के दौरान सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि लोग विकास के मुद्दे की गिनती नहीं करते हैं। विश्व स्तरीय सडक़ें, काशी कॉरिडोर का विकास, अयोध्या में भव्य राम मंदिर, मां गंगा की सफाई और जल परिवहन भाजपा सरकार द्वारा पिछले पांच वर्षों में उठाए गए बड़े कदम हैं। खासकर किसानों को सस्ती दर पर लगातार बिजली आपूर्ति मिलने से किसानों को बड़ी राहत मिल रही है। युवा और गतिशील मंत्री श्रीकांत शर्मा की बदौलत यूपी में बिजली के क्षेत्र में कई विकास कार्य हुए हैं। उल्लेखनीय है कि यूपी ने पिछले पांच वर्षों में 01 करोड़ 41 लाख नए बिजली कनेक्शन दिए हैं और राज्य भाजपा शासन में सपा शासन के दौरान बिजली उत्पादन को 16 हजार मेगावाट से बढ़ाकर 25 हजार मेगावाट कर दिया  है। और किसानों को पिछली सरकार की तुलना में पचास प्रतिशत कम शुल्क पर बिजली मिल रही है। राज्य में कानून-व्यवस्था की विफलता के लिए समाजवादी पार्टी का एक ब्रांड नाम है। एक समय में सबसे ताकतवर कांग्रेस थी जिसके पास अब कोई नेतृत्व नहीं है और पार्टी के लिए चुनाव लडऩे के लिए उम्मीदवारों को ढूढऩा मुश्किल है। प्रियंका गांधी सिर्फ नारी शक्ति का कार्ड खेल रही हैं, जिसका राज्य में शायद ही कोई असर हो। कांग्रेस पार्टी के तथाकथित नेता राहुल गांधी अपनी विदेश यात्रा के बाद यूपी चुनाव के बारे में अनजान हैं। कांग्रेस पार्टी में पहले से ही उंगली उठाई जा रही हैं क्योंकि पंजाब सरकार पर पीएम की यात्रा के दौरान सुरक्षा चूक के लिए जिम्मेदार होने का आरोप लगाया जा रहा है। हमारे प्रधानमंत्री की सुरक्षा के साथ जो कुछ भी हुआ, उसके लिए एक निर्वाचित सीएम ने प्रियंका गांधी वाड्रा को सूचना दी। अब यह साबित हो गया है कि कांग्रेस पार्टी सत्ता के बिना नहीं रह सकती। ऐसे में पार्टी में हताशा खुली है और अब वह नरेंद्र मोदी को सत्ता की राजनीति से खत्म करने के लिए मोदी विरोधी ताकतों की मदद से तमाम हथकंडे अपना रही है। अरविंद केजरीवाल कांग्रेस पार्टी के पतन का फायदा उठा रहे हैं और पंजाब और उत्तराखंड में पैठ बना रहे हैं। उत्तराखंड और मणिपुर दोनों में, भाजपा के पास अपर हैंड है। पंजाब में अकाली दल एक स्पेंट फॉर्स है, जिसका वोट बैंक आम आदमी पार्टी को खिसक रहा है, और वहां कांग्रेस का भी यही हाल है।

 

Deepak Kumar Rath

दीपक कुमार रथ

(editor@udayindia.in)

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