ब्रेकिंग न्यूज़ 

ओमिक्रॉन वायरस का सामना करने के लिए आज देश बेहतर तरीके से तैयार है’’ — डॉ. विनय अग्रवाल

ओमिक्रॉन वायरस का सामना करने के लिए आज देश बेहतर तरीके से तैयार है’’ — डॉ. विनय अग्रवाल

सच में, हमारे अस्पतालों ने पहली और दूसरी लहर को संभाला। अब तीसरी लहर है। जब पहली लहर आई तो हम तैयार नहीं थे- हमारे पास  पीपीई किट आदि नहीं थे। हमें नहीं पता था कि क्या करना है। अच्छी बात यह थी कि सरकार पूरी स्थिति को सीधे संभाल रही थी और निजी क्षेत्र को दूर रखा गया था। संयोग से, मामलों की संख्या भी कम थी। देश भर में लगाए गए प्रतिबंध बहुत अधिक थे। पहली लहर में होने वाली मौतें दूसरी लहर की तुलना में बहुत कम थीं। जब दूसरी लहर आई तो हमारे पास सुरक्षात्मक किट थे, लेकिन हम लापरवाह हो गए थे राज्यों और केंद्र के बीच विवाद थे। राज्यों और केंद्र के बीच इस विवाद में व्यवस्थाओं का अभाव रहा,’’ यह कहना है डॉ. विनय अग्रवाल, चेयरमैन, पुष्पांजलि क्रॉसले हॉस्पीटल, का अशोक कुमार से हुई बातचीत में। बातचीत के प्रमुख अंश:-

 

ओमीक्रॉन दिन-ब-दिन बढ़ रहा है। क्या आपको लगता है कि अस्पताल तीसरी लहर का सामना करने के लिए तैयार हैं?

हमें ओमीक्रॉन को समझने की जरूरत है। अभी तक, ओमीक्रॉन इतना घातक नहीं है, हालांकि यह अधिक संक्रामक और तेजी से फैल रहा है, लेकिन आईसीयू में प्रवेश ज्यादा नहीं हैं। एक बात और है, कोविड-19 जैसी बीमारियों में या कोविड के किसी भी वैरिएंट में, यह कहना मुश्किल है कि हम उसके लिए पूरी तरह से तैयार हैं, लेकिन मैं यह जरूर कह सकता हूं कि हम आज इस बीमारी से निपटने के लिए बेहतर तैयार हैं। यहां, मैं हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करना चाहता हूं, जो इस लड़ाई को फ्रंट से लड़ रहे हैं। कोविड-19 की दूसरी लहर की तुलना में अब ऑक्सीजन की आपूर्ति काफी बेहतर है और अस्पतालों में  बिस्तर आज पर्याप्त मात्रा में तैयार हैं। हमारे देश में अब तक 150 करोड़ से अधिक लोगों का टीकाकरण हो चुका है। इससे भी ज्यादा, जनता अब सतर्क है। इस पृष्ठभूमि में हम कह सकते हैं कि हम इस ओमीक्रॉन वायरस का सामना करने के लिए आज देश बेहतर तरीके से तैयार हैं।

आपने कोविड रोगियों को संभालने में काफी व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया है। क्या आप हमें तीसरी लहर के लिए अपनी व्यवस्थाओं के बारे में बताएंगे?

सच में, हमारे अस्पतालों ने पहली और दूसरी लहर को संभाला। अब तीसरी लहर है। जब पहली लहर आई तो हम तैयार नहीं थे- हमारे पास  पीपीई किट आदि नहीं थे। हमें नहीं पता था कि क्या करना है। अच्छी बात यह थी कि सरकार पूरी स्थिति को सीधे संभाल रही थी और निजी क्षेत्र को दूर रखा गया था। संयोग से, मामलों की संख्या भी कम थी। देश भर में लगाए गए प्रतिबंध बहुत अधिक थे। पहली लहर में होने वाली मौतें दूसरी लहर की तुलना में बहुत कम थीं। जब दूसरी लहर आई तो हमारे पास सुरक्षात्मक किट थे, लेकिन हम लापरवाह हो गए थे राज्यों और केंद्र के बीच विवाद थे। राज्यों और केंद्र के बीच इस विवाद में व्यवस्थाओं का अभाव रहा। साथ ही चुनावी रैलियां भी हुईं; बाजार खुल गए; मंदिरों को खोल दिया गया। और दूसरी लहर बहुत घातक थी। कोई नहीं जानता था कि क्या हो रहा है। दरअसल, अप्रैल से मई के बीच के चार हफ्ते बेहद खतरनाक रहे। ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं थी। बल्कि मैं कहूंगा कि ऑक्सीजन का वितरण सही नहीं था। दिल्ली का ही उदाहरण लें- न तो वह इसका उत्पादन कर रही थी और न ही उसके पास रखने की उचित व्यवस्था थी। इसी दौरान दहशत के चलते लोगों ने इसे स्टोर करना शुरू कर दिया। यहां तक कि कुछ अस्पतालों ने इसे स्टोर करना शुरू कर दिया। दूसरी लहर के ठीक बाद सरकार ने बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान शुरू किया। अब आप देख सकते हैं कि 150 करोड़ से अधिक लोगों का टीकाकरण किया जा चुका है। अब 15 से 18 साल के बच्चों का टीकाकरण भी शुरू हो गया है। साथ ही तीसरी बूस्टर डोज भी शुरू हो गयी है। इसलिए मुझे लगता है कि हमारे अस्पताल अब बीमारी की तीव्रता को देखते हुए आज तैयार हैं। तीसरी लहर में मामले ज्यादा हैं लेकिन लक्षण अभी तक माइल्ड हैं।

दूसरी लहर में ऑक्सीजन का भारी संकट था। क्या आपका अस्पताल नए वैरिएंट के लिए स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी सुविधाएं और दवाएं उपलब्ध कराने के लिए तैयार है?

जैसा कि मैंने आपको बताया कि पूरा देश ऑक्सीजन की कमी का सामना कर रहा था, खासकर उत्तरी राज्य, क्योंकि केंद्र और राज्यों के बीच कोई समन्वय नहीं था। और तो और, राज्यों और राज्यों के बीच कोई समन्वय नहीं था। आक्सीजन टैंकरों को राज्यों की सीमा पर रोक दिया जाता था, ताकि किसी खास  राज्य में आपूर्ति न हो सके। अब सरकार ने इसे सुव्यवस्थित करने के लिए हर संभव प्रयास किए हैं। अब उत्पादन पर्याप्त है और भंडारण की सुविधा भी पर्याप्त है। ये सुविधाएं हालांकि ऑप्टीमल स्तर पर नहीं हो सकतीं, लेकिन बेहतर तरीके हैं। इसलिए मुझे लगता है कि हम बेहतर तरीके से तैयार हैं और घबराने की कोई बात नहीं है।

15 से ऊपर और 18 साल से कम उम्र के बच्चों को टीके अब शुरू हो गए हैं। क्या आपको नहीं लगता कि तीसरी लहर शुरू हो गई है और सभी बच्चों को इतनी जल्दी कवर नहीं किया जा सकता है। आप  क्या सोचते हो?

मूल रूप से, दूसरी लहर में और उससे पहले, बहुत से लोगों को टीका लगाया गया था लेकिन वे फिर भी संक्रमित हो गए। दरअसल, यह एक कम्युनिटी स्प्रेड की तरह है, जो पहले से मौजूद है। और इसके साथ ही हार्ड कम्युनिटी आती है। इसके अलावा, हम अभी भी 18 साल से ऊपर की पूरी आबादी को दो खुराक के साथ कवर करने में सक्षम नहीं हैं, और हमने 18 साल से कम उम्र के बच्चों का टीकाकरण शुरू कर दिया है, जिसका मतलब है कि न तो हम उन्हें कवर कर रहे हैं और न ही बच्चों को। गौरतलब है कि युवा आबादी में रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है और इसीलिए उनके टीकाकरण में देरी हुई। और मुझे विश्वास है कि अगले दो-तीन महीनों में 18 साल से काम उम्र के बच्चे भी कवर्ड हो जायेंगे।

तीसरी लहर का सामना करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार से आप क्या उम्मीद करते हैं?

केंद्र और राज्यों दोनों को मेरा सुझाव है कि जब मृत्यु दर, बीमारी आदि की बात हो तो अपने राजनीतिक मतभेदों को भूल जाइए। मुद्दे का राजनीतिकरण न करें। स्थिति का राजनीतिक लाभ न लें।

संक्रमण से बचने के लिए आम जनता को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए और अगर किसी का कोविड पॉजिटिव परीक्षण होता है तो उसे क्या करना चाहिए?

उचित कोविड व्यवहार का पालन करें- हाथ की सफाई, प्रॉपर मास्किंग और सामाजिक दूरी।

 

अशोक कुमार

Leave a Reply

Your email address will not be published.