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धन-धान्य का कारक रूद्राक्ष

धन-धान्य का कारक रूद्राक्ष

रूद्राक्ष एक ऐसा फल है जिसका धर्मिक ग्रंथों मे अत्यधिक महत्व बताया गया है। ये धार्मिक दृष्टि से जितना महत्वपूर्ण हैं उतना शायद ही कोई दूसरा फल महत्वपूर्ण होगा। पौराणिक कथाओं में उल्लेख है कि सती के देह त्याग पर शिव जी को बहुत दु:ख हुआ और उनकी आंख से आंसू जहां-जहां गिरे वहां पर रुद्राक्ष के वृक्ष उत्पन्न हो गए, इसलिए मान्यता है कि रुद्राक्ष धारण करने वालों के सभी कष्ट भगवान शिव हर लेते हैं। भोग और मोक्ष की इच्छा रखने वाले लोगों को रूद्राक्ष अवश्य धारण करना चाहिए। आंवले के फल के बराबर का रुद्राक्ष श्रेष्ठ बताया गया है, बेर के फल के बराबर के रूद्राक्ष को मध्यम श्रेणी में रखा गया है, चने के बराबर के रूद्राक्ष को निम्नकोटि में रखा गया है। बेर के फल के बराबर का रुद्राक्ष छोटा होने पर भी मृत्युलोक में उत्तम फल देने वाला तथा सुख सौभाग्य की वृद्धि करने वाला होता है। जो रुद्राक्ष आंवले के फल के बराबर होता है, वह समस्त अरिष्टों का विनाश करने वाला होता है। चने के समान बहुत छोटा रूद्राक्ष सम्पूर्ण मनोरथों और फलों की सिद्धि करने वाला होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार जिस घर में रुद्राक्ष की नियमित पूजा होती है वहां अन्न, वस्त्र, धन-धान्य की कभी कमी नहीं रहती। ऐसे घर में लक्ष्मी का सदैव वास रहता है। माना जाता है कि रुद्राक्ष को हमेशा धारण करने वाला और इसकी पूजा करने वाला अंत काल में शरीर को त्यागकर शिवलोक में स्थान प्राप्त करता है। रुद्राक्ष के वैज्ञानिक परीक्षण से प्रमाणित होता है, कि यह रक्तचाप संतुलित रखने में बहुत ही कारगर होता है यानी बल्ड प्रेशर संबंधी परेशानियों में रुद्राक्ष धारण करना बहुत ही फायदेमंद होता है। रुद्राक्ष बौद्घिक क्षमता और स्मरण शक्ति को बेहतर बनाने में भी कारगर माना जाता है। आज के समय में अक्सर लोग तनाव और चिंता में डूबे रहते हैं, जिससे कई तरह की बीमारियों से लोग पीडि़त हो जाते हैं। रुद्राक्ष धारण करने से चिंता और तनाव संबंधी परेशानियों में कमी आती है, उत्साह और ऊर्जा में वृद्घि होती है। रूद्राक्ष अनेक प्रकार के बताये गए हैं और सभी रूद्राक्ष की अपनी अलग-अलग महिमा है।

एक मुखी रुद्राक्ष – एक मुखी रुद्राक्ष साक्षात शिव का स्वरूप माना जाता है। वह भोग और मोक्ष रूपी फल प्रदान करता है। जहां रुद्राक्ष की पूजा होती है, वहां से लक्ष्मी दूर नहीं जाती। व्यक्ति के सभी कष्ट नष्ट हो जाते हैं और लोगों की सम्पूर्ण कामनाएं पूर्ण होती हैं।

दो मुखी रूद्राक्ष- दो मुखी रुद्राक्ष देवेश्वर कहा गया है। यह सम्पूर्ण कामनाओं और फलों को देने वाला माना जाता है।

तीन मुखी रूद्राक्ष- तीन मुखी रुद्राक्ष इसके प्रभाव से सारी विद्यायें प्रतिष्ठित हो जाती हैं।

चार मुखी रूद्राक्ष- चार मुखी रुद्राक्ष साक्षात ब्रह्मा का रूप है। इसके दर्शन और स्पर्श करने से शीघ्र ही धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष इन चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है।

पांच मुखी रूद्राक्ष- पांच मुंखी रुद्राक्ष साक्षात कालाग्नि रुद्ररूप है। सबको मुक्ति देनेवाला तथा सम्पूर्ण मनोवांछित फल प्रदान करने वाला है। पंचमुखी रुद्राक्ष समस्त पापों को दूर करता है।

छ: मुखी रूद्राक्ष- छ: मुखी रुद्राक्ष कार्तिकेय का स्वरूप है। यदि इसे धारण किया जाए तो धारण करने वाला मनुष्य ब्रह्महत्या आदि पापों से मुक्त हो जाता है, इसमें संशय नहीं है।

सात मुखी रूद्राक्ष- सात मुख वाला रुद्राक्ष अनंतस्वरूपों और अनंत नामों से प्रसिद्ध है। इसको धारण करने से दरिद्र भी ऐश्वर्यशाली हो जाता है।

आठ मुखी रूद्राक्ष- यह रुद्राक्ष अष्टमूर्ति भैरव रूप है, इसको धारण करने से मनुष्य पुर्णायु होता है और मृत्यु के पश्चात शिवलोक पाता है।

नौ मुखी रूद्राक्ष- यह भैरव तथा कपिल मुनि का प्रतीक माना गया है। नौ रूप धारण करने वाली महेश्वरी दुर्गा इसकी अधिष्ठात्री देवी मानी गयी हैं। जो मनुष्य नवमुख रुद्राक्ष को धारण करता है, वह निश्चय ही शिव समान सर्वेश्वर हो जाता है इसमें संशय नहीं है।

दस मुखी रूद्राक्ष- दस मुख वाला रुद्राक्ष साक्षात विष्णु स्वरूप है। इसको धारण करने से मनुष्य की सम्पूर्ण कामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।

ग्यारह मुखी रूद्राक्ष- ग्यारह मुख वाला रुद्राक्ष रूद्र स्वरूप है। इसको धारण करने से मनुष्य सर्वत्र विजयी होता है।

बारह मुखी रूद्राक्ष- इसे केश प्रदेश में धारण करना चाहिए। इसके धारण करने से मानो मस्तिष्क पर बारहों आदित्य विराजमान हो जाते हैं।

तेरह मुखी रूद्राक्ष- यह रुद्राक्ष विश्वेदेवों का स्वरूप है। इसको धारण करके मनुष्य सम्पूर्ण अभीष्टों को प्राप्त करता है साथ ही सौभाग्य और मंगल लाभ भी प्राप्त करता है।

चौदह मुखी रूद्राक्ष- चौदाह मुखी रुद्राक्ष परम शिवरूप है। इसे भक्तिपूर्वक मस्तक पर धारण करने से समस्त पापों का नाश हो जाता है।

रुद्राक्ष के चौदह भेद बताये गये हैं। रुद्राक्ष की माला धारण करने वाले पुरुष को देखकर भूत, प्रेत, पिशाच, डंकिनी, शंकिनी आदि सभी तरह की अनिष्टकारी शक्तियां दूर भाग जाती हैं। रुद्राक्ष-मालाधारी पुरुष को देखकर शिव समेत सभी देवी-देवता प्रसन्न होते हैं।

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