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मधुमेह

मधुमेह

चिकित्सकों के अनुसार मधुमेह अग्न्याशय नामक ग्रंथि के शरीर में पाचन द्वारा उत्पादित शुगर को अवशोषित करने के लिए आवश्यक इंसुलिन का उत्पादन करने में विफलता के कारण होता है। नतीजतन, शुगर अवशोषित नहीं होती है और रक्त में बढ़ जाती है। शुगर जो रक्त में अतिरिक्त इकठ्ठी हो जाती है वह रक्त को छारीय बनाती है और पाचन शक्ति को कमजोर कर देती है।

शरीर द्वारा उत्पादित इंसुलिन रक्त के माध्यम से शरीर की कोशिकाओं में उत्पादित ग्लूकोज के परिवहन में मदद करता है। हालांकि जब शरीर कम इंसुलिन का उत्पादन करता है, तो शरीर की कोशिकाओं द्वारा अवशोषित ग्लूकोज कम हो जाता है और शरीर को पर्याप्त शारीरिक ऊर्जा नहीं मिलती है। यह स्थिति उस व्यक्ति के समान है जो समुद्र के पास खड़ा है, लेकिन प्यासा है क्योंकि वह खारा समुद्र का पानी नहीं पी सकता है। जबकि रक्त में शर्करा तो बढ़ती रहती है, लेकिन शरीर की कोशिकाओं को ग्लूकोज नहीं मिल पाता है।

योग, व्यायाम, साइकिल चलाना, तैराकी, जॉगिंग, खेल मांसपेशियों को अधिक इंसुलिन रिसेप्टर्स बनाने में मदद करते हैं ताकि ग्लूकोज शरीर की कोशिकाओं द्वारा अवशोषित हो जाए। व्यायाम और कसरत के अभाव में, इंसुलिन रिसेप्टर्स निष्क्रिय होते है और ग्लूकोज के परिवहन को निष्क्रिय करते हैं।

इसके अलावा प्राकृतिक भोजन जैसे  अंकुरित अनाज, मौसमी फल, मौसम के अनुसार सब्जियां और दालें (भाप से  तैयार की हुई), ताजी सब्जियों का सलाद और सब्जियों का जूस आदि क्षारीय पदार्थ लेने से शीघ्र बीमारी से छुटकारा मिलता है।

मधुमेह के लिए निम्नलिखित उपचार करना लाभदायक होता है –

1  प्राकृतिक आहार

2  उपवास  चिकित्सा

3  प्राकृतिक उपचार

4  योग, शुद्धि क्रियाएं और प्राणायाम

5  जल चिकित्सा

(1) प्राकृतिक आहार

मधुमेह के रोगियों के लिए निम्नलिखित आहार व्यवस्था विशेष उपयोगी पायी गयी है-

  • प्राकृतिक भोजन जैसे  अंकुरित अनाज,  मौसमी फल, मौसमी सब्जियां और दालें (भाप से  तैयार की हुई), ताजी  सब्जियों का सलाद और सब्जियों का जूस आदि से शीघ्र बीमारी से छुटकारा मिलता है।
  • प्रात: उठ कर 2 से 3 गिलास गर्म पानी पिएं साथ में निम्बू और शहद का इस्तेमाल करें।
  • नाश्ते से पूर्व करेले, शलगम, अथवा पालक, टमाटर, लौकी, आदि सब्जियों के रस का सेवन करें।
  • भोजन – गेहूं, जौ, कुलथी, ज्वार, ग्वार, सोयाबीन, चना रागी आदि को समान मात्रा में पीसे आटे की रोटी, उबली सब्जी, सलाद, अंकुरित अनाज (चना, मूंग, मेथी, मोठ, गेहूं इत्यादि) और दही लें। सब्जियां ज्यादा खाएं और रोटी कम।
  • इसके अलावा मौसम के अनुसार फल का जूस, नारियल पानी आदि लें।
  • रात का भोजन न करें और उसके बदले सलाद, सब्जियों का ताजा जूस या फल का जूस लें।
  • रात्रि को सोने से एक घंटा पूर्व एक गिलास दूध लें। दूध में कच्ची हल्दी का थोड़ा सा रस मिलाएं।

निषेध – चाय, चीनी, कॉफी, मिर्च, गर्म मसाले, तले-भुने आहार, बिस्कुट, ब्रेड, साफ्ट ड्रिंक कन्फेक्शनरी एवं सिंथेटिक आहार इत्यादि।

(2) उपवास चिकित्सा

प्रकृति की गोद में मनुष्य को छोडक़र अन्य विकसित प्राणी, पशु-पक्षी आदि बीमार होने पर खाना छोड़ देते हैं। उपवास शरीर की खरबों कोशिकाओं को पुनर्जीवन, पुनरूत्थान करके स्वस्थ अवस्था में लाता है, उपवास स्वास्थ का विज्ञान है। ज्यादा से ज्यादा छारीय प्राकृतिक खाना खाने से और उपवास से शुगर लेवल कम किया जा सकता हैं। उपवास से रक्त में शुगर कम हो जाती है और फिर खान-पान को सुधार कर शुगर की बीमारी से छुटकारा मिल जाता है।

मधुमेह रोगियों को पूर्ण उपवास न कराकर आंशिक उपवास रसाहार करना चाहिए। अग्नि पर बिना पकाए जैविक आहार पर मधुमेह के रोगी को कुछ दिनों तक रखने से रक्त तथा मूत्र शर्करा निर्मूल हो जाती है। मौसम के अनुसार खीरा, लौकी, टमाटर, पालक, लेटूस, चुकन्दर, नीबू, आंवला, गाजर शलगम, करेला को एक-दूसरे में मिलाकर या अलग-अलग रस पर उपवास कराया जाता है। जब भी कमजोरी, ठण्डा पसीना, जुबान जडख़डऩे के हाइपोग्लाइसिमिक लक्षण परिलक्षित हों, 15 मुनक्का मुंह में डालकर चबा-चबाकर, चूस-चूसकर खायें।

(3) प्राकृतिक उपचार

मधुमेह के रोगियों को प्रात:काल मिट्टी की पट्टी आधे घण्टे तक लेने के बाद पेट व रीढ़ के गरम-ठण्डा सेक के बाद मालिश करें। गीली चादर लपेट, वाष्प स्नान, गरम-ठण्डा कटि स्नान, रोग एवं रोगी के अनुसार बदल बदल कर उपचार दिया जाता हैं।

  • रोजाना प्रात: 8:30 बजे से पहले धूप का आधा घंटा सेवन करें, सेवन से पहले एक गिलास जल पिएं और सिर ढक लें।
  • प्रतिदिन 4-5 किलोमीटर टहलना, मधुमेह के रोगियों के लिए उपयोगी होता है।
  • खुली हवा में सोना, खेलना तथा दौडऩा तथा टहलना मधुमेह के रोगियों के लिए उत्तम उपचार हैं।
  • हल्का गर्म जल 8 से 10 गिलास पिएं।

(4) योग और ध्यान            

मधुमेह के लिए योग चिकित्सा –  दैनिक सूर्य नमस्कार, जानुशिरासन, अर्धमत्स्येन्द्रासन, धनुरासन, चक्रासन, शलभासन, भजंगासन, नौकासन, पवन मुक्त आसन, कटी चक्र पादहस्त आसन उत्तानपाद आसन, सर्वांगसन, हलासन, कर्णपीड़ासन, पश्चिमोतासन तथा मत्स्यासन प्रतिदिन उपर्युक्त वैज्ञानिक क्रम में करें। सर्वोतन/मत्स्य आसन/धनूर आसन/मंडुक आसन/नाडी चलन/स्कंध चलन/बाल मचलन भी लाभदायक है।

(5) जल चिकित्सा

  • जल नेति – सप्ताह में 3 बार
  • कुंजल/वमन – सप्ताह में 2 बार
  • शंखप्रशालन – 30 दिनों में एक बार
  • प्राणायाम – कपाल भाति/अनुलोम- विलोम/अग्निसार (कुल 10 से 15 मिनट)
  • यदि कब्ज हो तो सप्ताह में 2 से 3 दिन गर्म पानी के साथ एनीमा करें।
  • चीनी की जगह गुड़ का प्रयोग करें, जहां आवश्यकता हो।
  • सफेद नमक के बजाय सेंधा या काला नमक इस्तेमाल करें।
  • रात को जल में भीगी हुई 25 ग्राम मेथी के दाने प्रात: खाली पेट जल के साथ लें। मेथी शुगर लेवल कम करती है।

 

रमेश कुमार

 

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