ब्रेकिंग न्यूज़ 

पिछड़े अति पिछड़े भाजपा के साथ : भगोड़े विधान भवन नहीं लौटेंगे

पिछड़े अति पिछड़े भाजपा के साथ : भगोड़े विधान भवन नहीं लौटेंगे

कुछ मंत्री, कुछ विधायक चुनाव घोषणा  होते ही भाजपा को छोड़ कर गये। अब सपा का दागदार दामन थाम लिया। भाजपा के ये भगोड़े नेता हर चुनाव में मक्खन मलाई खाकर पार्टी बदल लेते हैं। इस बार उनका कहना है कि वे पिछड़ों के लिये पार्टी छोडक़र जा रहे हैं यानि पांच साल ये लोग पिछड़ों के अहित से जुड़े रहे। यह बात उनकी अपनी जाति बिरादरी के लेागों के गले ही नहीं उतर रही तो अन्य समाज के लोगों के गले कैसे उतरेगी।

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी के नेतृत्व में सबसे अधिक चौक चौबन्द कानून व्यवस्था रही है। केन्द्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा विकास के कामों की झड़ी लग गयी। इसके अलावा गरीबों को आर्थिक मदद किसानों का कर्जा माफी, बिजली उत्पादन और आपूर्ति में सुधार शौचालय और घरों का गरीबों के लिये निर्माण आदि। हम अभी केवल पिछड़ों की बात पर चर्चा करेंगे।

ये सच नहीं क्या कि भाजपा ने पहिला नियमित प्रधानमंत्री पिछड़ों में से बनाया और दूसरी बार भी उन्हें ही बनाया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछड़ों के लिये बहुत से काम किये जबकि पिछली सरकारों ने उनकी सुधि ही नहीं ली।

पिछड़ा (ओबीसी) आयोग को संविधानिक दर्जा

पिछड़ा आयोग नाम भर के लिये था। पिछली सरकारों ने उसे शक्ति विहीन रखा। यहां तक कि उसे एस.सी., एस.टी. आयोग की तरह कोई भी संवैधानिक शक्ति नहीं दी थी। मोदी जी ने इस आयोग को संविधान में संशोधन कर संवैधानिक दर्जा दिया। संविधान में अतिरिक्त दर्जा 338बी जोडक़र पिछड़ा आयोग को कोर्ट की शक्तियां प्रदान की। अब आयोग किसी को भी बुलाने के लिये सम्मन जारी कर सकता है इत्यादि।

अति पिछड़ों के लिये भी कमीशन

अति पिछड़ों की भलाई और सुरक्षा शिक्षा आदि के लिये किस तरह अलग से उसकी व्यवस्था हो सकती है इसके लिये न्यायमूर्ति जी रोहनी कमीशन नियुक्त किया जो अति पिछड़ों की स्थिति सुधारने और उनके सामाजिक स्तर सुधारने के लिये सरकार को सुझाव देगी। कमीशन की नियुक्ति ही अपने आप में प्रमाण है कि भाजपा सरकार को अति पिछड़ों की कितनी चिंता है। उनके लिये अलग से कोई व्यवस्था किये जाने पर भी विचार हो रहा है। पिछड़ों की राजनीति करने वालों ने अति पिछड़ों के साथ घोर अन्याय किया।

मेडिकल डेन्टल पाठ्यक्रम में पिछड़ों को आरक्षण

पहली बार मेडिकल कॉलेज और डेन्टल कॉलेजों में स्नातक और परास्नातक स्तर पर आरक्षण की व्यवस्था मोदी सरकार ने लागू की है। आज तक उनके लिये इन पाठ्यक्रमों में कोई आरक्षण नहीं था अब सरकार ने 27 प्रतिशत आरक्षण उनके लिये कर दिया जिससे पिछड़े समाज का युवा वर्ग आज भाजपा के साथ है।

यही नहीं इसके साथ साथ 10 प्रतिशत आरक्षण गरीबों के लिये भी किया गया है। गरीबों की शिक्षा के लिये एैसा कदम आजादी के 70 साल बाद उठाया गया है यही तो सपना था गांधी का। यही तो वो आखरी आदमी है जिसके आंसू पोंछने का काम करनें के लिये मोदी जी की प्रशंसा सर्वत्र हो रही है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में पिछड़ों के नाम पर आयी सरकारों ने केवल अपनी जाति का भला किया। कौन नहीं जानता कि अपने रिश्तेदारों को, अपनी जाति वालों को, राजनैतिक पद, सरकार में नौकरियां और पोस्टिंग छांट-छांट कर दी गयी। जिस समाजवादी पार्टी में भगोड़े मंत्री पहुंच रहे हैं इसमें विधायक मंत्री अध्यक्ष ब्लॉक प्रमुख और एम.एल.सी. सभी स्थानों पर अखिलेश यादव अपने रिश्तेदारों को भरने में लगे रहे। बचे हुये स्थानों पर जिलों कस्बों ब्लॉक आदि में अपनी जाति के लोगों को रखा गया। यानि अब स्वामी प्रसाद मौर्या, दारा सिंह चौहान और धर्मपाल सैनी उस पार्टी में गये हैं जहां ये अपनी जाति तक का भला नहीं कर सकते, न कर पायेंगे। ऊपर से अखिलेश के चाचा, राजनीति के पारखी शिवपाल सिंह अपनी पार्टी से प्रत्याशी लड़ायेंगे। ये लोग केवल अपनी निजी और केवल निजी स्वार्थ के लिये गये हैं। इतना उनके क्षेत्रवासी जाति बन्धु भी समझ रहे हैं। हमेशा समाजवादी के राज में ही दंगे होते हैं। राजनैतिक संरक्षण प्राप्त नेता अपना किरदार निभाते हैं जब दंगे होंगे तो इन भगोड़े नेताओं के रिश्तेदार और जाति के लोंगो को भी नहीं बख्सा जायेगा।

कैराना का दंगा गवाह है कि जब जाटों की बेटी भी की शिकायत पर 2 मुस्लिम युवकों पर जिलाधिकारी और पुलिस कप्तान ने केस पंजीकृत किया था तो प्रभारी मंत्री आजम खां ने उन्हे डांटा था और जिद पकड़ कर रातों-रात दोनों का ट्रांसफर करके ही माने थे। ये  सब बातें अब प्रदेश के लोग जानते हैं। आजम खां जेल में हैं बाकी सपा समर्थक गुंडों की एक फौज या तो जेल में है या प्रदेश छोड़ कर भाग गयी है। ऐसे में पहली बार सपा के बिना गुंडो माफिया के चुनाव प्रबंधित करना पड़ेगा। आजम खां के जेल जाने के बाद हजारों मुस्लिम गरीब भी मुखर हुये है जिन्होंने अपनी आप बीती टीवी पर सुनाई है। रामपुर में सैकड़ों एकड़ भूमि पर अवैधानिक कब्जे को खाली कराया गया है। दूसरी ओर आवास, शौचालय, गैस, सडक़ निर्माण आदि सभी काम बिना जाति धर्म को देख कर उत्तर प्रदेश में हुआ है, ऐसा सभी ने टीवी पर मुस्लिम महिलाओं को कहते सुना है। तीन तलाक से मुस्लिम महिलाओं को राहत और चैन की सांस मिली है। कहने का मतलब ये है कि जिस एम. वाई. (मुस्लिम यादव) फैक्टर के चक्कर में ये नेता गये है ये इस चुनाव में काम करने वाला नहीं है। ऊपर से सपा को औवेसी की मार भी भारी पड़ेगी। इन पूर्व मंत्रियों, विधायकों ने सोचा होगा कि भाजपा में इनके कार्य का कार्ड अच्छा नहीं रहा तो लोगों को जाति का कार्ड खिला कर चुनाव लड़ा जाये। जिस सपा के भरोसे ये गये हैं वो पार्टी स्वयं ही अपने कार्यकलापों का भार सहन नहीं कर पा रही है। अति पिछड़ों के लिये अलग से व्यवस्था के लिये किये जाने के प्रधानमंत्री के प्रयासों की सराहना सब जगह हो रही है। खुद अति पिछड़े मंत्री दारा सिंह चौहान ये कई बार कह चुके हैं। आज भले ही उनकी भाषा बदल गयी हो। यदि चौहान अपनी मूल पार्टी बसपा में जाते तो शायद बेहतर चुनाव लड़ते।

आज भाजपा के पास मोदी योगी का चेहरा है। प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह और उप- मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य पिछड़ों के भारी भरकम नेता हैं। स्वामी प्रसाद के अपने वोट कटवानें में केशव प्रसाद मौर्य सक्षम है। कुर्मी, लोधी तो भाजपा के साथ पहले ही हैं। कुशवाहा और छोटी छोटी जातियां भी है। ऐसे में ये सभी सपा में गये नेता लखनऊ विधान भवन मे नहीं लौट सकेंगे।

 

डॉ. विजय खैरा

Leave a Reply

Your email address will not be published.