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जानलेवा लापरवाही से नित नए रेकार्ड बनाता ओमीक्रान

जानलेवा लापरवाही से नित नए रेकार्ड बनाता ओमीक्रान

लगता है दैत्यावतार कोरोना अपने ही रिकार्ड तोड़ते हुए नित नए रिकार्ड बनाता जा रहा है। यह इसलिए कि कोरोना संक्रमण के तीसरी लहर के आंकड़े बेहत चिंतनीय और गंभीर इस मायने में हो जाते हैं कि पहली और दूसरी लहर के सारे रेकार्ड तोड़ते हुए तीसरी लहर में संक्रमण का तेजी से फैलाव हो रहा है। इसे इसी से देखा जा सकता है कि केवल और केवल दस दिन में ही पहली और दूसरी लहर का रेकार्ड टूट गया है। दूसरी और हमारे देश की बात तो दूर सभ्यतम, शिक्षित और विकसित देश इंग्लैण्ड से कोरोना प्रोटोकाल पालना के प्राप्त ताजातरीन लोगों की मानसिकता के आंकड़े और भी ज्यादा डऱाने वाले हो जाते हैं। एक सर्वें में जानकारी में आया है कि इंग्लैण्ड में अधिकांश लोग मास्क के उपयोग को लेकर गंभीर नहीं है। पहली बात तो हर समय मास्क लगाते नहीं तो दूसरी और मास्क को दस दस दिन तक नहीं बदलते। बिना धोए ही एक ही मास्क का लगातार उपयोग किस तरह से कोरोना संक्रमण फैलाने में सहायक होता है यह आम आदमी भी आसानी से समझता है पर लापरवाही तो लापरवही ही रहेगी। मजे की बात यह है कि यह कोई इंग्लैण्ड की ही बात नहीं है अपितु दुनिया के ज्यादातर देशों के नागरिकों की यही मानसिकता कमोबेस देखी जा सकती है। ऐसे में कोरोना को नित नए अवतार लेकर आने से रोकने की कल्पना भी करना बेकार बात होगी। विशेषज्ञ पहले ही कह चुके हैं कि वो दिन दूर नहीें हैं जब इंग्लैण्ड में ही कोरोना की तीसरी लहर के चलते एक दिन में चार लाख तक केस आने लगेंगे। लगभग यह स्थिति सभी देशों की है। भले ही ओमीक्रान केा इतना गंभीर नहीं बताया जा रहा हो, पर जिस तेजी से ओमीक्रान संक्रमित करता है और डेल्टा से भी सात गुणा अधिक तेजी से संक्रमण फैलाता है वह अपने आप में गंभीर और चिंतनीय है। विचारणीय यह है कि कोरोना संक्रमण की रफ्तार पहली और दूसरी लहर से भी कई गुणी तेजी से नितनए रेकार्ड स्थापित कर रही है।

यदि हमारे देश की ही बात करें तो देश में कोरोना संक्रमण की पहली लहर के दौरान संक्रमण का एक लाख प्रतिदिन का आंकड़ा छूने में 119 दिन लगे थे वहीं ऑक्सीजन की मारामारी से रोंगटे खड़ी कर देने वाली दूसरी लहर को भी लाख प्रतिदिन का आंकड़ा छूने में 64 दिन का समय लगा, पर कोरोना की तीसरी लहर ने तो सारे रेकार्ड तोड़ते हुए केवल और केवल दस दिनों में ही लाख का आंकड़ा छू लिया है। देश में प्रतिदिन लाख के आंकडे को छूते हुए संक्रमण के समाचार प्रतिदिन आ रहे हैं। 6 दिसंबर, 21 को देश में 6358 संकमित आए थे वह संख्या बढ़कर 6 जनवरी, 22 को एक लाख 17 हजार को पार कर गई है। देश में प्रतिदिन एक लाख से अधिक संक्रमित आने लगे हैं। यह सब तो तब है जब एक साल से कुछ कम समय में ही देश में 150 करोड़ से अधिक वैक्सीनेशन हो चुके हैं। देश में 16 जनवरी 21 को पहला कोरोना टीका लगा था वहीं 7 जनवरी, 22 को देश में 150 करोउ़ वैक्सीनेशन हो चुके हैं। देश को इस बात का गर्व होना चाहिए कि एक साल की अवधि में ही देश में 150 करोड़ टीकाकरण का आंकड़ा छू लिया। इसके लिए केन्द्र व राज्य सरकार के साथ ही मेडिकल फ्रंट रनर्स की जितनी सराहना की जाए वो कम है।


एक बात साफ हो जानी चाहिए कि कोरोना की नित नए वेरिंयंट और तीसरी लहर कोई अनायास नहीं आई है। कोरोना के नए वेरियंट और तीसरी लहर की पहले से ही लगातार जानकारी दी जाती रही है। ओमीक्रान को लेकर भी कोई नई बात नही है। भले ही लाख कहा जा रहा हो कि यह कम खतरनाक या जानलेवा नहीं है पर इससे इसकी गंभीरता को कम नहीं आंका जाना चाहिए। भले ही यह कोरोना की दूसरी लहर के दौरान जिस तरह से आक्सीजन की तेजी से कमी के कारण जानलेवा बन रहा था वैसा असर नहीं दिखा रहा हो पर इसकी गंभीरता को नकारना किसी नासमझी से कम नहीं है। याद कीजिए जब यह कहा जा रहा था कि अधिक गर्मी, अधिक सर्दी या अन्य स्थिति में कोरोना का विनाश हो जाएगा पर हालात यह है कि कोरोना हर परिस्थिति के अनुसार अपने को ढ़ाल रहा है। इस सबके बावजूद हमें केवल और केवल मात्र कोरोना प्रोटोकाल के प्रति गंभीर होना है। पर यही तो हम नहीं करना चाहते। लाख चेतावनी व मारामारी के बावजूद इंग्लैण्ड के ताजातरीन सर्वे ने साफ कर दिया है कि लोग मास्क को लेकर ही गंभीर नहीं है। तो दूसरी और योरोपीय देशों व अमेरिका आदि में सरकार की सख्ती के खिलाफ लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। हमारे सामने विकल्प सीमित है। या तो सबकुछ बंद कर लॉकडाउन लगा दिया जाए या फिर हम स्वयं सतर्क होकर प्रोटोकाल की पालना करे। सुझाए अनुसार मास्क लगाने, दो गज की दूरी, सेनेटाइज करने और साफ सफाई पर ध्यान देने की जरुरत है। यह सामान्य बातें आदत में डालने की आवश्यकता है। हो क्या रहा है बाजार में, सार्वजनिक स्थानों, वाहनों आदि में या तो मास्क लगाते ही नहीं, लगाते हैं तो गले में लटका लेते हैं, या फिर नाक के नीचे रख लेते हैं, टोकने पर ठीक करते हैं तो फिर मास्क की साफ सफाई की बात तो दूर की कोड़ी हो जाती है। आखिर हमें यह समझना होगा कि अभी कुछ सालों तक हमें कोरोना के साये में ही जीना है। ऐसे में कोरोना प्रोटोकाल खासतौर से मास्क के उपयोग और उसके रखरखाव के प्रति गंभीर होना ही होगा नहीं तो जिस तेजी से तीसरी लहर फैल का आने वाले दिनों की भयावहता दर्शा रही है उसे नकारा नहीं जा सकता और यह भी नहीं कहा जा सकता कि यह कोरोना का अंतिम दैत्यावतार है। आज लगने लगा है कि रक्तासुर कपोल कल्पना होगी पर सामने है कि किस तरह से रक्त की एक बूंद से नया असुर तैयार हो जाता था वैसे ही कोरोना एक से दूसरे को, दूसरे से दस लोगों को और दस से हजारों को संक्रमित कर रहा है। अभी भी समय है कि हमें ओमीक्रान को गंभीरता से लेना चाहिए और कोरोना प्रोटोकाल की प्रति आगे आकर स्वयं पालना करने और दूसरों को पालना करने के लिए बाध्य करना ही होगा। हमें सभी भ्रांतियों से दूर रह कर मास्क के सही उपयोग के प्रति गंभीर होना ही होगा। अन्यथा सरकार पर व्यवस्था को लेकर आरोप लगाने से कुछ हासिल नहीं होने वाला है। हमें सरकार की भी सीमाओं को समझना होगा।

 

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा

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