ब्रेकिंग न्यूज़ 

किसमें है कितना दम

किसमें है कितना दम

उत्तर प्रदेश विधानसभा 2022 की रणभेरी बज उठी है। भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश  में फिर से सरकार बनाने के लिए चुनावी गीत-

यूपी में फिर भगवा लहराएंगे,

अयोध्या भी सजा दी,

काशी भी सजा दी,

घनश्याम कृपा कर दो,

मथुरा भी सजायेंगे, के साथ पुर्नवापिसी के लिए आक्रामक तेवर के साथ उतर रही है।

मोदी हैं तो मुमकिन है, योगी हैं तो यकीन है का ध्येय वाक्य के साथ यूपी चुनाव जीतने के लिए इस बार बीजेपी ने फॉर्मूला एच.बी.डी. अपनाया है। गौरतलब है कि 1989 के बाद से राज्य में किसी सरकार ने दोबारा जीत दर्ज नहीं की है, ऐसे में यूपी में सत्ता बचाए रखना, बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। इसी चुनौती से निपटने के लिए बीजेपी के थिंक टैंक ने एच.बी.डी. वाला फार्मूला बनाया है। एच का मतलब है हिंदुत्व, हिंदुत्व के ताप से ही पिछले चुनाव में बीजेपी को प्रचंड बहुमत मिला था। इस बार भी हिंदुत्व के उसी करिश्मे पर भारतीय जनता पार्टी सवार होना चाहती है।

बी का मतलब है बेनिफिशियरी। मोदी, योगी सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से जिन लोगों का फायदा मिला है, बीजेपी को लगता है कि ऐसे लोग पार्टी को वोट कर सकते हैं। पीएम आवास योजना में लोगों को घर मिला। किसान सम्मान निधि में गरीब किसानों को 6 हजार रुपये सालाना मिलता है। कोरोना काल में गरीब परिवारों को फ्री में राशन मिलता है। यूपी में तो लोगों को मुफ्त में दाल और तेल भी मिल रहा है। कल्याणकारी योजनाओं से यूपी के 6 करोड़ 33 लाख लोगों को लाभ मिला है। डी का मतलब डेडिकेट बीजेपी के कार्यकर्ता है। क्या यह सब कामयाबी दिला पायेगा इस यक्ष प्रश्न के बीच भाजपा में चल रही अंतर्कलह, मनमानी और एकाधिकार के कारण पुराने कार्यकर्ता निराश और हताश है दूसरे दलों से आये लोगों की कार्य संस्कृति के कारण वे सब अपने को ढगे महसूस कर रहे है। इन सबके बीच भारतीय जनता पार्टी का सबसे मजबूत आधर ब्राह्मण वर्ग की नाराजगी परिस्थितियों को कठिन बना रही है। भाजपा के मुकाबले समाजवादी पार्टी के प्रति जनमत का उत्साह एक बड़ी खतरे का संकेत दे रहा है। चुनाव की घोषणा से कई माह पूर्व भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने बड़ी सावधानी के साथ केन्द्रीय मंत्री परिषद के विस्तार के माध्यम से जाति गणित को साधने का प्रयास किया है। अपने ही सहयोगी ओम प्रकाश राजभर के पार्टी छोड़ जाने के तथा सर्वे रिपोर्ट के आधार पर भारतीय जनता पार्टी सारी शक्ति प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री सहित केन्द्रीय मंत्रियों की फौज उतार कर पूरी करने की कवायद की है यह कवायद कितनी सफल होती है यह तो आने वाला वक्त ही बतायेगा पर इतना तय है कि भारतीय जनता पार्टी की तैयारी अन्य दलों के मुकाबले सबसे भारी है। पन्ना प्रमुख से लेकर सोशल मीडिया तक कमल खिलता दिख रहा है लेकिन राजनैतिक पंडितों का मानना है कि इस बार भाजपा को चुनावी परिणामों में 30 प्रतिशत सीटों का नुकसान होता दिख रहा है। वही दूसरी भाजपा की प्रबल विरोधी समाजवादी पार्टी ने  रालोद के जयंत चौधरी के अलावा छोटी-छोटी अनेक पार्टियों से गठबंधन करके अपनी ताकत में इजाफा किया है इसी ताकत के बल पर अखिलेश यादव 2022 में चुनावी रण जीतने का दावा कर रहे है।

समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम से जब पूछा गया आपका प्रमुख चुनावी मुद्दे क्या हैं?

तो वह कहते है कि भाजपा के झूठ की पोल खुल चुकी है। इस सरकार ने पांच साल कोई काम नहीं किया। केवल सपा के कामों को ही अपना बताने में लगी रही। यह चुनाव किसानों, नौजवानों और महिलाओं के सम्मान का है। इस चुनाव में विकास मुख्य मुद्दे है। सपा ने प्रदेश के घरेलू उपभोक्ताओं को 300 यूनिट बिजली मुफ्त देने की घोषणा की है, साथ ही किसानों को सिंचाई के लिए बिजली फ्री देने का वादा किया है। समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर छात्रों व नौजवानों को फिर से लैपटॉप दिया जाएगा। गरीब परिवारों के बच्चों को विदेश में पढ़ाई के लिए मदद करेंगे। सपा स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी विश्व स्तरीय  इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करेगी। मुफ्त दवाई, मुफ्त पढ़ाई व मुफ्त सिंचाई यह समाजवादियों का पुराना नारा है। चुनावी शतरंज की बाजी पर वह प्रत्येक सीट पर चुन-चुनकर प्यादे तैनात करने के लिए सपा में अनेक दलों से आये लोगों तथा गठबंधन दलों को साधने के चक्कर में अपने भी बेगाने हो रहे है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि जनता तैयार बैठी है। इस बार झूठ बोलने वाले और नाम बदलने वालों को बदल देगी। बाइस में बाइसिकल का नारा दे रहे अखिलेश यादव बड़ी गोलबन्दी के बल पर 2022 में बाजी जीतेंगे हम का दावा कर रहे है। सच तो यह है कि जात-पात के आधार पर बंटी प्रदेश की राजनीति का रंग कुछ इतना बदरंग हो चुका है कि यह कहना बहुत मुश्किल लग रहा है। वैसे हालात जिस ओर इशारा कर रहे हैं उनसे तो यही लगता हैं कि भारतीय जनता पार्टी को मात देना आसान नहीं है। बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती जो 2017 में सपा से 1 प्रतिशत अधिक मत पाकर भी 17 सीटों पर सिमट गई थी। इस बार भी बसपा का रंग फीका होता नजर आ रहा है। बसपा के अधिकतर नेता समाजवादी पार्टी के पाले में चले गए हैं। बसपा को अपने परंपरागत वोटों के साथ जाती इंजीनियरिंग के दम पर किंग मेकर की भूमिका में आने की तैयारी है। कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी  उत्तर प्रदेश प्रभारी बनने के बाद कांग्रेस के पुनर्गठन के लिए जमीनी स्तर पर कार्य किए गए हैं। सड़कों पर सीमित संगठन के बावजूद योगी सरकार से जबरदस्त संघर्ष किया। सोनभद्र, उन्नाव तथा हाथरस के मामले में सरकार को अपनी बात मनवाने में मजबूर करने वाली प्रियंका गांधी ने प्रदेश की आधी आबादी को टारगेट करने तथा कांग्रेस के प्रति जनमत सहेजने की कोशिश के तहत लड़की हूं लड़ सकती हूं अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान के तहत उत्तर प्रदेश में 40 प्रतिशत महिलाओं को विधानसभा चुनाव लड़ाने की तैयारी है। प्रदेश के मतों में 7 प्रतिशत तक सिमटी कांग्रेस ने इस बार किसी दल से गठबंधन ना करके अपना मत प्रतिशत तथा विधायकों की संख्या बढ़ाने के लिए रणनीति तय की है। समाजवादी पार्टी के एकाधिकार बाले मुस्लिम मतों में सेध लगाते एएमआई के उवैसी साफ दिख रहे है उनके जलसों मे जुटती भीड़ सपा के लिए खतरे की घंटी सावित हो सकती हैं। 2022 के चुनावी जंग में किसमें है कितना दम बाजी जीतेंगे हम के परिणाम तो मतदाता ही तय करेंगे। तैयारियों में और कार्यकर्ताओं की समर्पित फौज के कारण पहले पायदान पर भारतीय जनता पार्टी दूसरे पायदान पर समाजवादी पार्टी तीसरे पायदान पर बहुजन समाज पार्टी और चौथे पायदान पर कांग्रेस दिख रही है। मतदाता किसे सत्ता के सिंहासन पर बैठाते हैं आने वाले 10 मार्च के बाद ही पता चलेगा। संगीता राठौर का यह भोजपुरी गीत गांव-गांव में पूर्वाचंल में बज रहा है-

छाने-छाने बदले

तोरो मिजाज रजऊ

नारे बाज रजऊ……

धोकेबाज रजऊ……

 

लखनऊ से सुरेंद्र अग्निहोत्री

Leave a Reply

Your email address will not be published.