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महाभारत के चक्रव्यूह में वसुंधरा

महाभारत के चक्रव्यूह में वसुंधरा

यह विचित्र संयोग ही तो है, कि फटाफट क्रिकेट को ग्लैमर के साथ आर्थिक बुलंदियों पर पहुंचाने वाले आई.पी.एल. के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी की ‘मदद’ को लेकर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की भूमिका पर केन्द्र एवं राज्य में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी में मचे ‘महाभारत’ तथा मीडिया ट्रायल सहित प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस की राजनीतिक सक्रियता के इस ज्वार में महाभारत कालीन घटनाक्रम का इतिहास भी दोहराया गया। पश्चिमी राजस्थान का नागौर जिला वह ऐतिहासिक परिक्षेत्र है जिसे कभी अहिछत्रपुर के नाम से जाना जाता था। महाभारत काल में गुरू द्रोणाचार्य को राजकुमारों को धनुष विद्या की शिक्षा देने के लिए दान दिया गया था। संयोगवश विशेष अंदाज में क्रिकेट का नया इतिहास रचने वाले ललित मोदी ने इसी परिक्षेत्र से अपने नये सफर की शुरूआत की।

मुख्यमंत्री के रूप में वसुंधरा राजे के प्रथम शासन काल में वर्ष 2003-04 के दौरान नागौर जिले में ललित कुमार मान के नाम से जमीन खरीदी गई। इसी आधार पर ललित मोदी पहले नागौर जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष बने और पांच माह की अवधि में वह राजस्थान क्रिकेट संघ के अध्यक्ष पद पर बड़ी शान से विराजमान हो गए। बस यहीं से ललित मोदी ने आईपीएल के आयोजनों की धमक से जो जलवा दिखाया उसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वसुंधरा राजे की राह पर ललित मोदी द्वारा जयपुर के पांच सितारा होटल से समानान्तर सरकार चलाने के आरोप को दोहराते हुए इसे विधानसभा का चुनावी मुद्दा बना दिया। उधर राजस्थान और केन्द्र में सत्ता परिवर्तन के परिदृश्य में ललित मोदी का भारत से कथित भगोड़े के रूप में लंदन में नया अध्याय इसमें जुड़ गया। अब तक क्रिकेट में राजनीति का चलन था, लेकिन अब राजनीति में क्रिकेट खेली जा रही है। वर्तमान माहौल में ऐसा लगता है कि ललित मोदी खुद गेंद उछालकर बल्लेबाजी भी कर रहे है और राजनेता फील्डिंग करने को मजबूर है। इस खेल में अभी अम्पायर की भूमिका तय होनी है।

PM Modi launches AMRUTप्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर 21 जून को अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस समारोह की गूंज से सप्ताह भर पहले विदेश मंत्री सुषमा स्वराज द्वारा ललित मोदी की मदद संबंधी आरोप का गुब्बारा मीडिया के जरिये फूटा तो सरकार सहित भाजपा संगठन सकते में आ गया। मोदी की कैंसर पीडि़त पत्नी की चिकित्सा हेतु मानवीय दृष्टिकोण से मदद के सुषमा के ट्वीट से आरोपों की धार कुछ कम हुई। इस बीच मददगार वसुंधरा राजे का नाम जुडऩे से राजनीतिक भूचाल आ गया और सुषमा-वसुंधरा के त्यागपत्र की विपक्ष की मांग ने जोर पकड़ लिया। अब इस राजनीतिक महाभारत में जहां केन्द्र सरकार, पार्टी संगठन भाजपा तथा संघ परिवार खुलकर सुषमा की हिमायत पर आ गया वही वसुंधरा के मामले में पहले दूरी बनाये रखी गई। अलबत्ता राजस्थान में भाजपा संगठन तथा वसुंधरा समर्थक विधायकों ने वसुंधरा के साथ अपनी एकजुटता दर्शानें में तत्परता बरती।

ललित मोदी के आव्रजन प्रार्थना पत्र के समर्थन में वसुंधरा के विटनेस स्टेटमेंट तथा उनके सासंद पुत्र दुष्यंत सिंह की कम्पनी के शेयर ललित मोदी की कम्पनी द्वारा खरीदे जाने संबंधी दस्तावेजों की हकीकत को लेकर मीडिया में तूफान मचा और राजस्थान में कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन के जरिये वसुंधरा के त्यागपत्र के लिए दबाव बनाया। भाजपा हाईकमान तथा सरकार ने बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक गणित के हिसाब से वसुंधरा को क्लीनचिट देकर फिलहाल इस प्रकरण को ठंडा करने की कोशिश की है। लेकिन, ललित मोदी ने लंदन से एक के बाद एक नये खुलासों से भारत की सियासत तथा राजनेताओं को चक्करघिन्नी बनने पर मजबूर कर दिया है। मोदी की ट्वीट से उनकी रातों की नींद तथा दिन का चैन भी हराम हो गया है। यही नहीं मोदी ने ट्वीट रूपी छक्कों से बचाव की अपेक्षा अपने को आक्रामक मोड़ पर ला खड़ा किया है। दलों के नेता मंत्री अफसर सभी इससे हक्के- बक्के है और ललित मोदी सोशल मीडिया प्रेमियों के नए हीरो बन रहे है।

ललित मोदी, सुषमा, वसुंधरा प्रकरण की गूंज अब संसद के मानसून सत्र में होनी निश्चित है। भाजपा के साथ कांग्रेस सहित अन्य राजनीतिक दलों के नेता भी ‘ललितगेट’ के शिकार बने है। देखना यह है कि कौन सा राजनीतिक दल और उनके नेता इस राजनीतिक महाभारत में किस भूमिका का अभिनय करने को बाध्य होते है। क्या अपने राजनीतिक अस्तित्व की सुरक्षा की खातिर एक दूसरे को आरोपों के कठघरें में खड़े करने वाले राजनेता कौरव-पाण्डव की एकजुटता वाली कहावत को चरितार्थ करने को मजबूर होते है। इधर राजस्थान में अभी विधानसभा का सत्र शुरू होने में तीन से चार माह का समय है तब तक राजनीति की धारा का रूख क्या होगा अभी कहना मुश्किल है। अलबत्ता राजस्थान में अगस्त माह में नगर निगम अजमेर सहित स्थानीय निकायों के चुनाव के दूसरे चरण में यह प्रकरण अहम मुद्दा बनने वाला है। निकाय चुनाव की तैयारी के लिए जुटी कांग्रेस ने यह मुद्दा उठते ही तुरंत लपका और उदयपुर में 17 जून को प्रदेश कांग्रेस पदाधिकारियों एवं कार्यकारिणी की बैठक को बीच में छोड़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट ने प्रदेश प्रभारी और एआईसीसी महासचिव गुरूदास कामत के साथ दिल्ली जाकर प्रेस कांफ्रेस में वसुंधरा राजे के इस्तीफे की मांग की। वसुंधरा के सांसद पुत्र दुष्यंत सिंह की कम्पनी के शेयर प्रकरण का मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस ने वसुंधरा की बर्खास्तगी की मांग को लेकर राजस्थान में आंदोलन का ऐलान किया। यह दूसरी बात है कि राजधानी जयपुर में कांग्रेस नेताओं की आपसी गुटबाजी के चलते विरोध प्रदर्शन राजनीतिक प्रभाव छोडऩे में विफल रहा। युवा कांग्रेस के कार्यक्रम में हिस्सा लेने आये कार्यकताओं की मदद से इसकी औपचारिकता निभाई गई। पायलट ने इस बारे में नेताओं को चेताया।

उधर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी और वसुंधरा के सिपहसालार चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र राठौड़ ने कमान संभाली और वसुंधरा राजे के बचाव में कोई कसर नहीं रखी। परनामी का कहना था कि सार्वजनिक हुए विवादास्पद ड्राफ्ट स्टेटमेंट पर वसुंधरा के हस्ताक्षर के बावजूद उसका कोई कानूनी आधार नहीं था। वसुंधरा द्वारा इसकी गोपनीयता बनाये रखने के सवाल पर राठौड़ एंव परनामी का तर्क था कि तब देश में राजनीतिक माहौल ठीक नहीं था। देश में आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति चल रही थी। कांग्रेसनीत यूपीए सरकार टू जी एवं कॉमन वैल्थ घोटालों से घिरी हुई थी। देश की राजनीतिक स्थिति अन्तर्राष्ट्रीय मीडिया में न उछले, इसलिए दस्तावेज को गोपनीय रखने की बात कही गई थी। वहीं कांग्रेस बदले की कार्यवाही भी कर सकती थी। लेकिन, इस ड्राफ्ट से किसी को फायदा नहीं हुआ ऐसे में इस दस्तावेज की अहमियत ही नहीं रही।

lalit-modiसांसद दुष्यंत सिंह की कंपनी के शेयर प्रकरण के पलटवार भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र और प्रदेश कांग्रेस महासचिव वैभव गहलोत की कथित कंपनी के शेयर संबंधी मुद्दा उठाया। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पहले की तरह लगाए गए इस आरोप का खंडन करते हुए दुष्यंत सिंह की कम्पनी सहित वैभव प्रकरण की उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से जांच कराने की मांग दोहरा दी। वही आसन्न राजनैतिक संकट के दो-तीन दिनों मे छ: दर्जन से भी अधिक विधायकों तथा मंत्रियों ने वसुंधरा के नेतृत्व में विश्वास जताकर पार्टी हाईकमान को भी संदेश देने का प्रयास किया। इस बीच राजस्थान भाजपा के पूर्व संगठन महामंत्री और राज्यसभा सदस्य रहे ओम  माथुर को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनोनीत किया गया। जयपुर पहुंचे माथुर को बधाई देने वालों का तांता लग गया। वसुंधरा समर्थक कई मंत्रियों और विधायकों ने भी माथुर से भेंट की। वहीं मीडिया ने राज्य में नेतृत्व परिवर्तन का मुद्दा उछाला जिसमें मुख्यमंत्री पद पर माथुर की दावेदारी जताई गई।

इस राजनीतिक महाभारत के चलते वसुंधरा जहां मीडिया से रूबरू होने से कतराती रहीं। वहीं उन्हें नवंबर में होने वाले रिसर्जेट राजस्थान के लिए लंदन की प्रस्तावित यात्रा भी रद्द करनी पड़ी। इस ऊहापोह की इसी स्थिति में वसुंधरा ने दिल्ली में नीति आयोग के एक उपसमूह की बैठक में हिस्सा लिया। मीडिया की खबरों के अनुसार एयरपोर्ट से बैठक स्थल और जयपुर वापसी के इस नाटकीय घटनाक्रम में वसुंधरा मीडिया से नजरे बचाने में सफल रही। इस यात्रा में हमेशा कार में आगे बैठने वाली वसुंधरा पीछे वाली सीट पर बैठी। बहरहाल राजस्थान में अधिकाधिक निवेश के लिए ‘रिसर्जेट’ राजस्थान के महत्वाकांक्षी आयोजन को सफल बनाने में जुटी वसुंधरा को अब कई पापड़ बेलने होंगे, वही अजमेर नगर निगम, सहित अन्य निकाय चुनावों में भाजपा की सफलता के लिए कमर कसनी होगी। अब देखना यही है कि वह इस राजनीतिक चक्रव्यूह को भेदने में कहां तक सफल होती है।

जयपुर से गुलाब बत्रा

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