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दवा के रूप में उपवास

दवा के रूप में उपवास

आयुर्वेद और कई शास्त्रों में उपवास को कई रोगों के उपाय के रूप में सुझाया गया है। पुराने अस्थमा, पेंडिसाइटिस, आईबीएस, कब्ज, बवासीर, जोड़ों के दर्द, गठिया आदि के लिए उपवास कारीगर इलाज है। महात्मा गांधी को भारत में प्रकृति उपचार के संस्थापक शिक्षकों में से एक कहा जा सकता है क्योंकि न केवल बीमारियों के लिए बल्कि आत्म शुद्धि और आध्यात्मिक जागृति के लिए भी अक्सर उपवास का अभ्यास किया जाता था।

उपवास का विज्ञान

उपवास के दौरान भोजन के पाचन में जो ऊर्जा खर्च होती है वह विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करती है। इस प्रकार पाचन तंत्र, रक्त परिसंचरण, श्वास प्रक्रिया और तंत्रिका तंत्र के अधिकांश अंगों को आराम मिलता है। ऑटोलाइसिस – उपवास के दौरान लीवर में शुगर, आंतों, छाती, नितंबों, पैरों, पोषक तत्वों, रक्त में खनिजों, शरीर की कोशिकाओं और ग्रंथियों आदि में जमा ऊर्जा की अतिरिक्त मात्रा का सेवन हमारे शरीर द्वारा किया जाता है। इस प्रकार विषाक्त पदार्थों के निष्कासन और उन्मूलन की प्रक्रिया स्वाभाविक है और कई बीमारियों को ठीक करता है। मवाद कोशिकाएं और कीटोन (वसा कोशिकाएं) मूत्र के माध्यम से बाहर निकल जाती हैं, जिससे शरीर का चयापचय सामान्य हो जाता है। उपवास मुक्त कणों को नियंत्रित करता है और मारता है, जो कोशिकाओं को जंग खा जाता है और कैंसर, मधुमेह और कई गंभीर बीमारियों का मुख्य कारण है।

यदि रोटी बनाने के काम आने वाले आटे, आलू या चावल को बहुत देर तक उबाला जाय तो उसकी चिकनी लेई से बन जाती है, जिसको जिल्दसाज या कागज को जोडऩे के काम लाया जाता है। यह बहुत जल्दी खट्टी हो जाती है और उसमें कीटाणु पैदा हो जाते हैं। यह चिकनी चीज आंतो की दीवारों पर चिपक जाती है और रक्त की नलिकाएं में रुकावट हो जाती है और रक्त दूषित भी हो जाता है। पर यदि अंजीर, खुजूर, किशमिश आदि को उबाला जाय तो यह भी लेई सी बन जाती है पर इसमें सडऩ नहीं उत्पन्न होती और रक्त  इसे तुरंत इस्तेमाल कर लेता है। उपवास में हम रोटी और इस प्रकार का खाना इसीलिए नहीं खाते ताकि पाचन शक्ति की ऊर्जा शरीर से टॉक्सिन्स को निकाल सके  और शरीर हल्का और स्वच्छ हो सके।

उपवास के विभिन्न रूप

जल उपवास

पानी पर उपवास में दिन में 8 से 12 गिलास हल्का गर्म पानी पीना  होता है। शहद के साथ नीबू का रस मिला सकते हैं। इस उपवास में व्यक्ति को पूर्ण  विश्राम करना होता है। तभी यह सफल होता है। काम करने से अतिरिक्त ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जिसके लिए भोजन खाना अनिवार्य हो जाता है, अत: उपवास के दौरान पूर्ण विश्राम आवश्यक है।

फल रसाउपवास — फलों के रस पर उपवास  सभी के लिए उपयुक्त है और पूरे दिन में 5 से 6 गिलास मौसमी ताजे फल जैसे सेब/अनानास/अंगूर/हरा नारियल पानी/संतरा/मौसमी आदि पीना है। (फलों का मिश्रण नहीं करना चाहिए। एक बार में एक फल लें।)  यह उपवास डायबिटीज और काम करती गृहणियां भी कर सकती है, पर यथा सम्भव बीच-बीच में विश्राम भी करते हुए।

रसा उपवास  सब्जियों का –  मौसमी और ताजी सब्जियों के जूस जैसे पालक/लौकी/चुकंदर/गाजर/ऐशगॉर जूस आदि का उपवास  कोई भी कर सकता है। (मिक्स  मौसम अनुसार सब्जियां इस्तेमाल किये जा सकते हैं)।  यह भी दिन में 5 से 6 गिलास जूस लेना होता है।

प्राकृतिक भोजन पर उपवास :  इस उपवास में व्यक्ति  केवल फल, सब्जियां, मेवा  आदि प्राकृतिक पदार्थ ही खाता है। कोई भी कार्बोहाइड्रेट/या पका हुआ भोजन नहीं खाना होता। पर इस उपवास से रोगों को ठीक करने में थोड़ा अधिक समय लगता है।

दुग्ध  कल्प  या मठ्ठा कल्प : इस उपवास में व्यक्ति केवल दूध या मठ्ठा (300 एमएल)  दिन में 6 से 7 बार पीता है। इसका उद्देश्य केवल वजन बढ़ाना है। यह उपवास तभी करना चाहिए जब व्यक्ति में कोई और रोग न हो और उसका पाचन क्रिया ठीक हो। अक्सर दुग्ध कल्प करने से पहले व्यक्ति को 5 दिन का जल उपवास करना चाहिए ताकि उसका उदर साफ हो सके।

उपवास की अवधि और आवृत्ति

पुरानी बीमारी के लिए 5 से 7 दिन का उपवास करें। इससे पहले 2 या 3 दिन के उपवास से शुरुआत करने के लिए स्वयं को प्रशिक्षित करें। फिर एक हफ्ते के बाद इसे बढ़ाकर 5 से 7 दिन कर दें। उपवास आवृत्ति  गंभीरता के आधार पर  निश्चित किया जाता है। साधारण  स्वस्थ्य व्यक्ति सप्ताह में 1 से 3 दिन उपवास कर सकता है या  महीने में एक बार भी कर सकता है।

उपवास के बारे में कुछ भ्रांतियां   

आम व्यक्ति यह सोचता है की मधुमेह के रोगी उपवास नहीं कर सकते। यह मिथ्या है मधुमेह के रोगी कोई भी रास उपवास कर सकते हैं, प्राकृतिक फल और सब्जयों से शुगर लेवल नहीं बढ़ता। गृहणियां या कामकाजी महिलाएं  भी  रस उपवास कर सकती हैं। कुछ डरते हैं कि खाली पेट रहने से गैस  पैदा होती है। यह भी मिथ्या है। हल्का गर्म जल का सेवन करने से गैस नहीं बनती।

सावधानियां

उपवास केवल पहले 2 या  3 दिनों के लिए मुश्किल है, उसके बाद भूख नहीं लगती है क्योंकि शरीर के अंगो से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालना शुरू कर देता है, और निष्कासन प्रणाली सक्रिय हो जाती है,  जबकि पाचन तंत्र आराम करता है। कब्ज हो तो एनीमा लें।

भोजन से 30 मिनट पहले और भोजन के एक घंटे बाद पानी पियें और भोजन करते समय कभी भी पानी न पियें। दिन में रोजाना 10-12 गिलास गर्म पानी पिएं।

ठंडे पानी से नहाने को प्राथमिकता दें। सर्दियों में आप गर्म पानी से शुरुआत कर सकते हैं लेकिन आखिरी बार हमेशा ठंडे पानी से ही नहाएं। ठंडा पानी शरीर की कोशिकाओं से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है।

उपवास के दौरान पूर्ण आराम करना  आवश्यक है, नहीं तो उपवास सफल न हो सकेगा। शारीरिक और मानसिक कार्यों से पूर्ण विश्राम लेने से भाग्योदय होगा। अगर आप ऑफिस में काम करते हैं तो आपको छुट्टी लेनी ही पड़ेगी।

उपवास किसी प्राकृतिक उपचारक के मार्गदर्शन में करें।

उपवास के बाद क्या खाएं

दो-तीन दिनों के लिए हल्का भोजन जैसे दलिया, खिचड़ी आदि लें, क्योंकि उपवास के तुरंत बाद पाचन तंत्र को लोड नहीं देना चाहिए।

 

योगी रमेश

(लेखक प्राकृतिक चिकित्सा सलाहकार, हैं)

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