ब्रेकिंग न्यूज़ 

भोजनम् मधुरम्, अधरम् मधुरम् मधुराधिपते चित्तम् मधुरम्

भोजनम् मधुरम्, अधरम् मधुरम् मधुराधिपते चित्तम् मधुरम्

यह उन मांओं को जगाने की एक कोशिश है, जो मैगी के दो मिनट के फॉमूले की वजह से पारंपरिक खाना बनाने से मुक्त हो गईं हैं और कथित तौर पर बच्चों की थाली में जहर परोस रहीं हैं। बच्चों के साथ-साथ परिवार के सभी सदस्यों को दो मिनट के फॉमूले के चलते मुख्य आहार के रूप में जंक फूड परोसा जा रहा है। ऐसे में मैगी का बंद होना महिलाओं के लिए एक मुसीबत का सबब बन गया है। लेकिन, महिलाओं के लिए ये सचेत होने का वक्त है। शहरी भारतीय रसोई में अस्वास्थ्य खाना अपनी पैठ बनाता जा रहा है जो बच्चों की सेहत पर कुप्रभाव डाल रहा है।

वर्तमान परिवेश में जंक फूड ने भारतीय पारंपरिक खाने के लिए खतरा उत्पन्न कर दिया है। खासतौर पर एकल परिवार और उन परिवारों में जहां पर माता-पिता दोनों ही नौकरीपेशा हैं और पीछे से घर में बच्चे अकेले रह जाते हैं। बच्चों के पास स्कूल से वापस आने के बाद खाने के लिए जंक फूड के सिवाय दूसरा कोई विकल्प नहीं रह जाता। पिछले तीन दशकों से बच्चों को धड़ल्ले से मैगी के लिए प्रोत्साहित किया गया है। क्योंकि, आज की भगदड़ भरी जिंदगी में दो मिनट का फॉमूला कारगर सिद्ध है।

नेस्ले के मैगी नूडल्स के सभी बैचों में सीसा और एमएसजी की अधिक मात्रा पाये जाने के बाद मैगी पर देश व्यापक प्रतिबंध लगा दिया गया है। व्यस्त माताओं द्वारा पारंपरिक भारतीय भोजन से बच्चों को दूर करना उनकी सेहत के लिए एक गंभीर स्थिति उत्पन्न कर रहा है। हजारों सालों से भारत स्वस्थ्यप्रद व्यंजनों का गढ़ रहा है। ऐसे भारतीय व्यंजन जो सेहत के लिए पोषण और ऊर्जा की दृष्टि से भरपूर है। भारतीय भोजन सिर्फ स्वाद का ही खजाना नहीं हैं बल्कि, पोषण तत्वों से भी भरपूर है। भारत में आस्वास्थ्यकारक मैगी की जबरदस्त बिक्री से इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि लोगों के स्वास्थ्य पर कितना नकारात्मक असर पड़ रहा होगा। नेस्ले स्वीस देशों में 1800 करोड़ रूपये से 2000 करोड़ रूपये तक का व्यापक स्तर पर नूडल्स का व्यापार करता है। लेकिन, नेस्ले मैगी पर देश व्यापक प्रतिबंध लगने के बाद नेस्ले को 10,000 करोड़ का नुकसान हुआ है। वर्तमान में शहरी क्षेत्रों में रहने वालें औसतन दम्पति खासतौर पर अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा ऐसे खाद्य पदार्थों को खरीदने पर लगाते हैं जो कि उनके परिवार के लिए पोषणहीन और खतरनाक है। अगर वह ऐसे खाद्य पदार्थों की बजाए ताजे फल और सब्जियों पर व्यय करें तो परिवार की पोषकता को सुनिश्चित कर सकते हैं।

पूरे भारत में बच्चों के स्वास्थ्य पर पडऩे वाले बुरे प्रभाव को लेकर लोगों में जागरूकता की कमी देखी गई है। देश और दुनिया के वैज्ञानिक समुदाय के द्वारा नए खाद्य पादार्थों की बढ़ती प्रवृति के सर्वेक्षण की एक श्रृंखला से ये बात निकल कर सामने आई है कि शहरी क्षेत्रों में खानपान के तरीकों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जो लोगों की सेहत के नजरिए से काफी घातक है। जरूरत से ज्यादा जंक फूड के सेवन से बच्चों में मोटापे की प्रवृति बढ़ रही है। साथ ही बच्चों में आत्म-सम्मान की कमी, कुपोषण, अवसाद जैसी बीमारियों के शिकायत भी देखी जा रही है। पोषण की कमी के कारण बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास भी ठीक से नहीं हो पा रहा है। जिसका सीधा असर बच्चों के अध्ययन और अतिरिक्त पाठयक्रम गतिविधियों में देखने को मिल रहा है। स्वास्थ्य सर्वेक्षण संकेत करते हैं, कि शहरी मांओं ने घर और दफ्तर दोनों में वक्त देने के कारण पारंपरिक खाद्य पदार्थों के पकाने की कला का त्याग कर दिया गया है। जिसकी वजह से स्वास्थ्य संकट उत्पन्न हुआ है। भारतीय पारंपरिक खाने की लंबी फेहरिस्त है जो हर अवसर के मुताबिक अलग-अलग है। शादी-ब्याह के अवसर पर अलग व्यंजन परोसे जाते हैं तो रोजमर्रा की जिंदगी में दूसरे व्यंजन। लेकिन, सभी व्यंजन सेहत की दृष्टि से सुरक्षित हैं।

भारतीय पाक कला के विषय में बहुत से मिथक प्रचलित हैं जैसे कि ये पकाने में काफी थकाऊ होते हैं जिसकी वजह से कामकाजी भारतीये महिलाएं इनसे दूर भागती हैं। जंक फूड के बारे में सबसे अच्छी बात यह है कि ये सिर्फ एक फोन कॉल की दूरी पर होते हैं और कुछ देर में ही अपके दरवाजे तक पहुंच जाते हैं। कुछ सौ रूपये खर्च करके परिवार के लिए जंक फूड मंगवाकर खाना पकाने की मेहनत से बचा जा सकता है।

शहरीकरण के कारण भारतीय स्वाद रसोई से कहीं लुप्त होता जा रहा है। एक ऐसा स्वाद जो पोषण और ऊर्जा से भरपूर है। उदय इंडिया ने भारतीय पाक कला को बहाल करने का प्रयास करते हुए अपने पाठकों के लिए ग्रामीण रसोई में पकने वाले व्यंजनों की विधि बताकर भारतीय पारंपरिक व्यंजनों को बढ़ावा देने की कोशिश की है। इस श्रृखला में अगर बात करें पंजाब की तो यहां का भोजन पोषण से भरपूर है। यहां के खेतों में उगने वाली पीली सरसों का साग अपने पोषण तत्वों के लिए प्रसिद्ध है। अगर एक पंजाबी से उसकी अच्छी यादों के बारे में पूछा जाए तो वह निश्चित रूप से आपनी दादी-मां के हाथ का बना ”सरसों का साग और मक्के की रोटी’’ के साथ मक्खन के बड़े से टुकडे का जिक्र करेगा। ये पंजाब का पारंपरिक भोजन है जो कभी भी पुराना नहीं हो सकता। ये पारंपरिक भोजन पंजाब की हर पीढ़ी की पसंद है।

पंजाब कीसड़क किनारे मिलने वाले किसी भी भोजनालय, ढाबा, रेस्तरां या पांच सितारा होटल के मेनू कार्ड को उठा कर देखेंगे तो सरसो का साग, मक्के की रोटी और पालक पनीर उनके विशेष पकवानों की सूची में शामिल होंगे।


सरसों का साग


saag

सामग्री

1 किलो-ताजे सरसों के पत्ते (सरसो साग)

2 प्याज, 2 टमाटर, 10 लहसुन की कली, अदरक, 4 हरी मिर्च, बेसन, नमक स्वादनुसार, हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, धनिया के दाने, सरसों के दाने।

बनाने की विधि

  • सरसों के पत्तों को धुलकर काट लें, उसके बाद प्रेशर कुकर में एक कप पानी के साथ इन्हें डालकर 30 मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं।
  • प्रेशर कुकर को खोलकर उसमें 2 बड़े चम्मच बेसन को डाले और अच्छे से मिक्स करें फिर इन्हें हल्के हाथों से कुचल लें उसके बाद 30 मिनट के लिए फिर हल्की आंच पर पकने के लिए रख दें। बीच-बीच में इसे चलाते रहें।
  • दूसरे बर्तन में सरसों के तेल को गर्म करें, फिर इसमें सरसों के दाने और लहसुन का छौंक लगाएं।
  • इसमें कुतरी हुई हरी मिर्च, कुचले हुए धनिए के दाने और प्याज डाल कर हल्का भूने। उसके बाद कुतरे हुए टमाटर और अदरक डाल कर पकाएं।
  • अब इसमें एक चम्मच लाल मिर्च पाउडर और हल्दी पाउडर डालें।
  • इस मिश्रण में सरसों के पत्तों को जिन्हें प्रेशर कुकर में उबाला है मिक्स कर दें और ताजे धनिए के पत्तों से सजाएं
  • इसे मक्के की रोटी और घर पर बने मक्खन के साथ गर्मागर्म परोसे।

इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्व

सरसों के पत्ते पोषण से भरपूर होते हैं। इसमें भरपूर मात्रा में आयरन, विटामिन शामिल होते हैं। इसमें विटामिन के, ए, सी, ई, बी6, बी1, बी3 और फोलेट पाया जाता है। साथ ही इसमें खनिज पदार्थ, कैल्शियम, मैग्नीशियम, कॉपर, प्रोटीन, फाइबर प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।



पालक पनीर


Palak Paneer copy

सामग्री

पालक -1 किलो, पनीर- 400ग्राम, तेल- 4 टेबल स्पून, हींग-1 पिंच, जीरा-आधा छोटी चम्मच, हल्दी पाउडर , प्याज- 2, लहसुन- 4 जवा, टमाटर- 3, हरी मिर्च-2, अदरक, मलाई- 2 स्पून, नमक – स्वादानुसार, गरम मसाला।

बनाने की विधि

  • पालक के पत्तों को अच्छी तरह धो कर एक बर्तन में डालिये, चौथाई कप पानी डाल कर ढक कर उबालने रख दीजिये, 5-6 मिनिट में पालक उबल जाती है। गैस बन्द कर दें और पालक को ठंडा होने दीजिये।
  • पनीर के चौकोर टुकड़े काट लीजिये। प्याज और लहसुन का पेस्ट बना लीजिये, टमाटर, हरी मिर्च और अदरक को भी अलग से मिक्सी से बारीक पीस लीजिये।
  • कढ़ाई में तेल डाल कर गरम कीजिये। गरम तेल में हींग और जीरा डाल दीजिये। जीरा भुनने के बाद, प्याज और लहसुन का पेस्ट डालिए, गुलाबी होने तक भूनिए फिर टमाटर का पेस्ट और हल्दी भी मिला दीजिये। मलाई डालिये और मसाले तब तक भूनिये जब तक मसाले के ऊपर तेल न तैरने लगे।
  • उबाले गये पालक को ठंडा होने के बाद मिक्सी से बारीक पीस लीजिये, पालक के पेस्ट को भुने हुये मसाले में मिला दीजिये। तरी को अपने अनुसार आपको जितनी गाढ़ी या पतली रखनी है उतना पानी डालें और नमक डाल दीजिये, उबाल आने के बाद पनीर के टुकड़े डाल दीजिये। 2-3 मिनिट ढककर, धीमी आग पर पकाइए। पालक पनीर की सब्जी तैयार है। पालक पनीर की सब्जी में गरम मसाला मिला दीजिये।
  • एक छोटी चम्मच मलाई डाल कर गरमा-गरम रोटी या चावल के साथ परोसिये।

इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्व

पालक में आयरन, विटामिन और आवश्यक पोषक तत्वों की प्रचुर मात्रा प्राप्त होती है। पनीर ऊर्जा और कैल्शियम का अच्छा स्रोत है। इसमें विटामिन के, सी, ई, बी6, बी1, बी3, मैग्नीशियम, प्रोटीन और फाइबर की प्रचुर मात्रा मौजूद होती है।


चंडीगढ़ से प्रिया यादव

Аудит СЕО компании: seo консультанткупить украина

Leave a Reply

Your email address will not be published.