ब्रेकिंग न्यूज़ 

संतुलित आम बजट लाएगा जन-जन में खुशहाली!

संतुलित आम बजट लाएगा जन-जन में खुशहाली!

भारत में बजट को लेकर एक परिपाटी ही बन गई थी। चुनावी वर्ष में सरकारें जनता को बजट में सौगातों की बरसात करती रही हैं। इसी वजह से ही माना जा रहा था कि पांच राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा में जारी चुनावी अभियान के चलते आम बजट में सौगातों की बहार होगी। इस उम्मीद की वजह यह भी रही कि इन पांच में चार राज्यों में उस भाजपा की ही सरकार है, जो केंद्र की सत्ता पर काबिज है। सिर्फ पंजाब ही ऐसा राज्य है, जहां भारतीय जनता पार्टी की सरकार नहीं है। लेकिन आम बजट में ना तो सौगातों की बरसात हुई, ना ही अर्थव्यवस्था की मुश्क कसने की कोशिश हुई। इन अर्थों में कहा जा सकता है कि नरेंद्र मोदी की सरकार की सोच कुछ अलहदा है।

31 जनवरी को बजट पेश के किए जाने के बाद सरकार विपक्ष के निशाने पर थी। लेकिन आधुनिक आर्थिक नजरिए से यह बजट कैसा है, इसे समझने के लिए अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज की रिपोर्ट को देखना चाहिए।  मूडीज ने साफ कहा है कि केंद्र सरकार ने जिस तरह का बजट पेश किया है और जिस तरह अपनी राजस्व बढ़ोत्तरी का अनुमान रखा है, वह बेहद संतित है। दरअसल सरकार ने अपने बजट अनुमान में सरकार ने वित्त वर्ष 2021-22 के संशोधित बजट अनुमान में राजस्व प्राप्तियों में सिर्फ 27.2 फीसद की बढ़ोत्तरी उम्मीद की है। मूडीज को लगता है कि इससे आगे फायदा हो सकता है। मूडीज के मुताबिक, मोदी सरकार ने साल 2022-23 के के लिए जो बजट प्रस्तुत किया है, उसमें पूंजीगत व्यय पर ध्यान दिया गया है। इससे भारत में आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में सहयोगी तो होगा ही, लेकिन लंबी अवधि के दौरान राजकोषीय मजबूती मिलने की आशंका भी है। कुल मिलाकर मूडीज की राय में बजट संतुलित है। मूडीज को लगता है कि भारत की जीडीपी में इससे जहां बढ़ोत्तरी होगी, वहीं राजकोष भी मजबूत होगा।

गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2021-22 में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद के 6.9 प्रतिशत के बराबर रहने का अनुमान है। पहले इसके 6.8 फीसद रहने का अनुमान था। इसी तरह बजट में वित्त वर्ष 2022-23 में राजकोषीय घाटा जीडीपी के 6.4 प्रतिशत के बराबर रहने का अनुमान लगाया गया है। मूडीज ने इसी संदर्भ में अपनी प्रतिक्रिया दी है।

यह तो हुई बजट के गंभीर पक्ष की बात। अब आते हैं, बजट की सामान्य बातों पर। इन दिनों विधानसभा चुनावों में प्रधानमंत्री आवास योजना की बड़ी चर्चा है। सरकार इसे अपनी उपलब्धि के तौर पर दिखाती रही है। आम बजट प्रस्तुत करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक बार फिर इस पर जोर दिया। इस बार इस मद में सरकार ने 48 हजार करोड़ रूपए आवंटित किया है। इसके तहत 80 लाख नए मकान बनाए जाने हैं। मोदी सरकार की योजना है कि साल 2025 तक हर परिवार को छत मुहैया कराया जाए। जानकारों का मानना है कि उस दिशा में यह आवंटन बहुत कारगर होगा।

हाल के दिनों में क्रिप्टो करेंसी को लेकर बात बहुत आगे बढ़ गई है। कुछ लोग तो इसके जरिए करोड़ों कमा रहे हैं। हालांकि सरकार की योजना रही है कि इस करेंसी को मान्यता नहीं देगी। लेकिन अब इस पर भी कर लगाया जा राहा है। इस पर होने वाली आय पर तीस फीसद का भारी-भरकम कर लगाया गया है। कुछ राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इसके जरिए यह करेंसी मान्यता पा लेगी। लेकिन सरकार का कहना है कि इसके लिए जो एनएफटी के तहत जो ऑनलाइन ट्रांजेक्शन होगा, उस पर निगरानी होगी और उस पर टैक्स लगेगा। इसके साथ ही इसके जरिए होने वाली आय में वर्चुअल डिजिटल एसेट्स पर हुए घाटे को माफ नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही वर्चुअल डिजिटल एसेट्स के लेन-देन पर एक फीसद की दर से टीडीएस भी लगेगा।

प्रधानमंत्री बनते ही नरेंद्र मोदी ने डिजिटलाइजेशन पर जोर दिया था। लेकिन इस दिशा में सरकार ने एक और क्रांतिकारी फैसला लिया है। वह फैसला है, डिजिटल करेंसी लाने का। इसके तहत रिजर्व बैंक जल्द ही डिजिटल मुद्रा लाने जा रहा है। प्रधानमंत्री ने बाद में कहा भी उसका नकदीकरण भी किया जा सकेगा। इसे ‘डिजिटल रुपी’ यानी डिजिटल रुपया कहा जाएगा। डिजिटलीकरण की दिशा में बजट में सरकार ने एक और महत्वपूर्ण प्रावधान किया है। देश में शिक्षा देने के लिए एक डिजिटल यूनिवर्सिटी के गठन का प्रस्ताव रखा गया है। इसका प्रस्ताव रखते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि इसका निर्माण हब एवं स्पोक मॉडल के आधार पर किया जाएगा।

हर बजट में मध्य वर्ग को आयकर में छूट की उम्मीद रहती है। इस बार पांच राज्यों में विधानसभा के चुनाव भी हो रहे हैं, लिहाजा माना जा रहा था कि इस बार आयकर दायरे में छूट मिलेगी। लेकिन आयकर देने वाले करदाताओं को ना तो कोई राहत दी गई, ना ही निजी आयकर की दरों में कोई रियायत दी गई। इसके साथ ही आयकर स्लैब में भी कोई बदलाव किया गया। हालांकि सरकार ने राष्ट्रीय पेंशन योजना पर अब तक मिलने वाली कर छूट की सीमा को दस फीसद से बढ़ाकर चौदह फीसद कर दिया है।

आम बजट में उन सहकारी समितियों पर लगने वाले बारह फीसद के सरचार्ज को घटाकर सात प्रतिशत कर दिया गया है, जिनकी आमदनी एक से 10 करोड़ रुपये के बीच है। इसके साथ ही सरकार ने कैपिटल गुड्स पर मिली आयात छूट की हटाकर उस पर साढ़े सात फीसद की दर से सीमा शुल्क वसूलने का फैसला किया है।

इस बजट में आत्मनिर्भर भारत और मेड इन इंडिया को भी बढ़ावा देने की कोशिश की गई है। इसकी शुरूआत रक्षा क्षेत्र से की गई है। अब इस क्षेत्र में होने वाली खरीद का 68 फीसदी हिस्सा भारतीय कंपनियों के लिए सुरक्षित रहेगा।

प्रधानमंत्री ई विद्या के ‘वन क्लास वन – चैनल’ प्रोग्राम को 12 से बढ़ाकर 200 – चैनलों तक किया जा रहा है। इसके जरिए राज्य पहली कक्षा से लेकर 12वीं तक की पढ़ाई के लिए क्षेत्रीय भाषाओं में पूरक शिक्षा दे सकेंगे। इसके साथ ही बजट में प्रावधान किया गया है कि राज्यों को कृषि विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम संशोधित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके जरिए प्राकृतिक, जीरो-बजट और जैविक खेती के साथ ही मौजूदा दौर की खेती की जरूरतों को पूरा करने की भी कोशिश की जाएगी। साथ ही अनुसूचित जाति-जनजाति के किसानों को एग्रो-फॉरेस्ट्री के लिए मदद देने की भी तैयारी की गई है। खेती और पर्यावरण के बीच संतुलन के साथ ही पारंपरिक भारतीय खेती और आधुनिक भारत की खाद्य जरूरतों के बीच इसे संतुलित करने वाला प्रावधान माना जा रहा है।

वित्त मंत्री का मानना है कि यह बजट सिर्फ एक या दो साल का रोडमैप तैयार नहीं कर रहा है, बल्कि इसमें 25 साल का खाका है। क्योंकि इस से देश के विकास को प्रोत्साहन मिलेगा। इसकी वजह से ज्यादा से ज्यादा नौकरियां पैदा होंगी। बजट के जरिए बेरोजगारी घटाने पर भी जोर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इस बजट के जरिए 30 लाख अतिरिक्त नौकरियां पैदा होंगी। मोदी सरकार की एक बड़ी उपलब्धि 25 हजार किलोमीटर का हाईवे बनाना है। इसके लिए अलग से बीस हजार करोड़ रूपए का प्रावधान गया है। इसके अलावा समावेशी विकास को प्राथमिकता सूची में रखा गया है। पारंपरिक ऊर्जा की बजाय गैर पारंपरिक ऊर्जा की ओर बढ़ावा दिया जा रहा है।

बजट में रेल के आधुनिकीकरण पर भी जोर दिया गया है। इसके साथ ही गतिशक्ति योजना की भी घोषणा की गई है। इसके तहत अगले तीन साल में 100 वंदे भारत रेलगाडिय़ां चलाने की योजना है। इसके साथ ही 100 नए कार्गो टर्मिनल बनाने का भी लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही स्थानीय कारोबार को बढ़ावा देने के लिए ‘एक स्टेशन, एक उत्पाद’ की सोच को बढ़ावा देने की भी तैयारी है। बजट में स्वास्थ्य ढांचा को भी विकसित करने पर जोर है। इसके साथ ही देश के पूर्वोत्तर हिस्सों के विकास के लिए इस बजट में 1500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि मौजूदा आम बजट बेहद संतुलित है। कोरोना की मार झेलती अर्थव्यवस्था के बावजूद बहुत सौगात नहीं देना जहां बहुत साहसिक है। माना जा रहा है कि बजट में अर्थव्यवस्था को गति देने के दीर्घकालिक उपाय किए गए हैं, जिनके जरिए जहां आम लोगों की जिंदगी में खुशहाली आने की उम्मीद है, वहीं रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।

 

उमेश चतुर्वेदी

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

Leave a Reply

Your email address will not be published.