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अमृत काल का ऐतिहासिक बजट

अमृत काल का ऐतिहासिक बजट

भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट 2022-23 सही मायने में एक संतुलित और सर्वस्पर्शी बजट है। इसमें जहां एक तरफ पंडित दीनदयाल उपाध्याय के सपनों के अनुरूप कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति का ध्यान रखा गया है, वहीं दूसरी तरफ देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ देश को तेजी से तरक्की व विकास के रास्ते पर अग्रसर करने हेतु बहुत सारे महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। मोहन दास पाई  कहते हैं – ‘इस बात में कोई शक नहीं कि यह बजट (2022-23) विकास को सही मायनों में गति देने वाला बजट है।’ हालांकि वे यह भी दोहराते हैं कि इसमें माध्यम वर्ग के लिए थोड़े और प्रावधान किए गए होते तो बेहतर होता।

बजट में जन-सामान्य के लिए काफी सारी चीजें है। ‘हर घर-स्वच्छ जल योजना’के तहत 48 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जिससे 9 करोड़ परिवारों को उनके घर के अंदर नल से स्वच्छ जल उपलब्ध हो सकेगा। ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’के तहत 48 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान कर 80 लाख गरीब परिवारों को मकान उपलब्ध कराने का संकल्प व्यक्त किया गया है। ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ मोदी सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है जिसका लक्ष्य हर वंचित परिवार को पक्का छत्त उपलब्ध कराना है। बिजनस टुडे टीवी के प्रबंध-संपादक श्री सिद्धार्थ जराबी के शब्दों में – ‘जनसामान्य हेतु स्वच्छ जल और घर पर किया गया प्रावधान ‘क्वालिटी एक्स्पेंडीचर’ है। इसका जनसामन्य के जीवन-स्तर पर व्यापक एवं दूरगामी प्रभाव पड़ेगा।’

किसानों के लिए भी बजट काफी उत्साहजनक है। किसानों से एमएसपी पर रेकार्ड खरीददारी की बात कही गई है और ‘केन-बेतवा परियोजना’ जैसे कृषिहित की परियोजना को पूरा करने के लिए विशेष प्रावधान किया गया है जिससे बुंदेलखंड की तस्वीर बादल जाएगी। इस क्षेत्र के सिंचाई और पेयजल दोनों समस्याओं का समाधान हो जाएगा। इस बजट में प्राकृतिक खेती और खेती में ड्रोन तकनीकी को बढ़ावा देने की बात कही गई है। प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए 2500 किलोमीटर लम्बा और 10 किलोमीटर चौड़ा नेचुरल फार्मिंग कारिडोर विकसित करने की परिकल्पना की गई है। प्राकृतिक खेती के साथ-साथ ‘किसान सम्मान निधि’ के तहत बजट में 68 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है जिसका लाभ 11 करोड़ किसानों को प्राप्त होगा। किसानों के लिए फूड और फर्टिलाइजर सेक्टर की सब्सिडी की राशि में भारी भरकम वृद्धि की गई है, इसे बढ़ाकर 79 हजार करोड़ से बढ़ाकर 1 लाख 50 हजार करोड़ करदिया गया है।

इस बजट में कृषि में तकनीक के प्रयोग पर विशेष बल दिया गया है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के अनुसार, – ‘पिछले बजट में हमने किसान रेल और किसान उड़ान की सुविधा सुनिश्चित की थी, वर्तमान बजट में ड्रोन तकनीकी को किसान का साथी बनाने के लिए प्रावधान कर रहे हैं।’ ड्रोन तकनीकी के प्रयोग से खेती की लागत में कमी आएगी। इसके कारण कीटनाशक का प्रयोग करना, फसल की निगरानी करना, जमीन का रिकार्ड रखना और उत्पाद का रियल-टाइम डेटा हासिल करना आसान हो जाएगा।

बजट में कर्मचारीयों का भी ध्यान रखा गया है। उन्हें एनपीएस तहत सौगात प्रदान की गई है। एनपीएस में नियोक्ता के योगदान को बढ़ाकर 10 प्रतिशत से 14 प्रतिशत कर दिया गया है। ज्ञात हो कि केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों को पहले से ही 14 प्रतिशत की टैक्स डिडक्शन लिमिट का लाभ प्राप्त हो रहा था। केंद्र द्वारा यह महत्वपूर्ण कदम केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों के मध्य एनपीएस कटौती के मामले में समानता लाने के उद्देश्य से उठाया गया है। इससे कर्मचरियों की सोशल सिक्योरिटी में वृद्धि होगी। हालांकि निजी क्षेत्र में नियोक्ता कटौती का दर अभी भी 10 प्रतिशत बना रहेगा।

बजट में डिजिटल यूनिवर्सिटी की स्थापना के साथ साथ स्कूली शिक्षा को सुदृढ़ करने हेतु कक्षा 1 से लेकर 12 तक क्षेत्रीय भाषाओं में पूरक शिक्षा देने हेतु टीवी चैनलों की संख्या 12 से बढ़ाकर 200 करने की बात की गई है। अब राज्यों को उनके कृषि विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम संशोधित करने हेतु केंद्र सरकार प्रोत्साहन राशि भी देगी ताकि जीरो बजट और प्राकृतिक खेती के साथ खेती के आधुनिक आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके।

इस बजट की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि भले ही यह एक वर्ष के आय-व्यय का विवरण है किंतु सरकार की निगाहें भविष्य में भारत को एक विकसित भव्य राष्ट्र के रूप में स्थापित करने पर टिकी हुई हैं, यह बजट इसी दिशा में उठाया गया एक कदम है। इसीलिए वित्त मंत्री ने इसे अमृत काल का बजट कहते हुए इसे फ्यूचरिस्टिक बजट की संज्ञा दी है। अमृत काल, इस वर्ष आजादी के अमृत वर्ष 2022 से प्रारम्भ हो कर अगले 25 वर्षों तक चलेगा। इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कैपिटल एक्स्पेंडिचर में भारी-भरकम वृद्धि।

पूंजीगत व्यय में 35.4 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि की गई है। पूंजीगत व्यय वह होता है जो देश में बुनियादी सुविधाओं पर खर्च किया जाता है। कैपिटल एक्स्पेंडिचर में ऐतिहासिक वृद्धि से देश के भावी विकास और उसके रफ्तार को बल मिलेगा। स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह-संयोजक और दिल्ली विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर डॉक्टर अश्वनी महाजन के अनुसार, – ‘वर्तमान बजट में 7 लाख 50 हजार करोड़ रुपए की राशि का प्रावधान पूंजीगत व्यय के लिए किया गया है जो वर्तमान बजट का 19 प्रतिशत है।’ वे आगे यह दुहराते हैं, -‘पिछले 30 वर्षों में पूंजीगत व्यय के लिए किया गया यह सबसे बड़ा प्रावधान है।’ बिजनस टुडे टीवी के प्रबंध-सम्पादक श्री सिद्धार्थ जराबी भी इसे वर्तमान बजट की बड़ी उपलब्धि मानते है। वे मानते हैं कि इसका भारतीय अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

तकनीकी प्रधान इस युग में तकनीक के विकास पर विशेष जोर दिया गया है। मुद्रा के नए रूपों पर ध्यान देते हुए भारत अब अपनी डिजिटल करेंसी देने की ओर बढ़ चुका है। जल्दी ही हम 5जी की नीलामी भी करेंगे, इसका भी इस बजट में उल्लेख है।

बहुत लोग यह उम्मीद कर रहे थे कि कई राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं तो परंपरा के अनुसार सरकार इस वर्ष चुनावी बजट ही देगी। दुर्भाग्य यह है कि चुनावी बजट का अभिप्राय भारत में सरकार के लिए त्वरित लाभ देने वाला लोकलुभावन बजट होकर रह गया है। समझा जाता है कि ऐसे समय में कोई दूरदर्शिता पूर्ण कदम उठाने या दीर्घकालिक लाभ पहुंचाने की बात सोचने के बजाय केवल वोटों की फसल काटने पर ध्यान केंद्रित किया जाए। लेकिन केंद्र सरकार ने ऐसे सस्ते किस्म के फैसलों के बजाय दूरदर्शिता का परिचय देते हुए एक सर्वस्पर्शी बजट दिया है। एक ऐसा बजट जिसने जन और देश की आवश्यकताओं को टुकड़े-टुकड़े में बांटने की जगह समग्रता में समझा है और देश की अभी तक अनछुई रह गई कई समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस और व्यापक कदम उठाए हैं।

देश कोरोना महामारी के दो-दो भयंकर दौर से गुजारा है और वर्तमान में कोरोना के तीसरे दौर ओमिक्रॉन के संक्रमण से गुजर रहा है किंतु आश्चर्य यह है कि अर्थव्यवस्था के सूचकांकों को देखने पर कही से नहीं लगता कि देश इस कारण से अन्य राष्ट्रों के तुलना में विकास की दौड़ में पिछड़ा है। आईएमएफ के अनुसार भारत की जीडीपी 9 प्रतिशत है जो विश्व में सर्वाधिक है। आईएमएफ के अनुसार भारत दुनिया का सबसे तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था है। मोदी सरकार के पूर्व भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 270 बिलियन डालर था जो की वर्तमान में 233 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 635 बिलियन डॉलर हो गया है। निर्यात में ऐतिहासिक वृद्धि हुई है। विदेशी प्रत्यक्ष निवेश भी अपने उच्चतम स्तर पर है जो कि यह प्रदर्शित करता है कि विदेशी निवेशक भी भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास के संभावनाओं पर अपनी मुहर लगा रहे हैं।

घरेलू मोर्चे की बात करें तो जीएसटी संग्रह पिछले दिसंबर में 133 हजार करोड़ और जनवरी में 140 हजार करोड़ रहा है। सामान्यतया 100 हजार करोड़ का जीएसटी कलेक्शन संतोषजनक माना जाता है। यह भारी भरकम जीएसटी प्राप्तियां दिखती हैं कि  भारतीय अर्थव्यवस्था में व्यापार और उद्योग जगत तेजी से उठाव की ओर अग्रसर है। इनकम टैक्स कलेक्शन में 60 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है जिससे पता चलता है व्यक्ति व संस्थाओं की आय में  वृद्धि हुई है।

यह मोदी सरकार की दूरदर्शी आर्थिक नीतियों का परिणाम है कि परिस्थितिजन्य चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था में इतने सकारात्मक लक्षण दृष्टिगोचर हो रहे हैं। संक्षेप में कहा जा सकता है कि यह बजट, अमृतकाल का ऐतिहासिक बजट है।

 

अरविंद सिंह

(लेखक ‘मंथन’पत्रिका के प्रबंध-सम्पादक हैं। कांटेक्ट : फेसबुक/टविटर : arvindvnsingh)

 

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