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2022 बजट : साहसिक कदम

2022 बजट : साहसिक कदम

पांच राज्यों– उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर–में होने वाले चुनावों की मौजूदा पृष्ठभूमि में, कई राजनीतिक-सह-अर्थशास्त्र पंडितों की भविष्यवाणी थी कि बजट -2022 लोकलुभावन होगा। वित्त मंत्री (एफएम) निर्मला सीतारमन ने संसद के पटल पर निवेश बजट पेश करके तथाकथित विशेषज्ञों को चौंका दिया। एफएम के पास लंबे समय में भारतीय अर्थव्यवस्था को विकसित करने का एक स्पष्ट दृष्टिकोण है।

सबसे बड़ा आश्चर्य बजट से एक दिन पहले पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण (ईएस) से आया है।  ईएस  ने खुलासा किया है कि भारत ने अपने सकल घरेलू उत्पाद में 9.2 प्रतिशत की दर से वृद्धि दर्ज की है। यह बिल्कुल अप्रत्याशित था कि भारतीय अर्थव्यवस्था इस गति से बढ़ेगी। दुनिया के किसी भी देश ने महामारी के समय में इतनी अधिक वृद्धि दर दर्ज नहीं की है। इसके अलावा, यह उम्मीद की जाती है कि वित्तीय वर्ष 2022-2023 में भी अर्थव्यवस्था इतनी उच्च दर के साथ बढ़ती रहेगी। 2022-2023 के लिए अनुमानित जीडीपी विकास दर 8.4 प्रतिशत है।

यह एक सामान्य फैशन है कि समाचार चैनल और मीडिया बजट अपेक्षाओं के बारे में प्रचार करते हैं। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया बजट को लेकर लंबी चर्चा के सत्र रखता है। प्रत्यक्ष करों में राहत चर्चा के साथ-साथ अपेक्षाएं भी एक सामान्य विषय है। लेकिन वित्त मंत्री ने प्रत्यक्ष करों में कोई राहत या कर छूट नहीं देकर प्रत्यक्ष करदाताओं का सामना करने का साहस किया। इसके पीछे तार्किक कारण यह है कि आयकर दाताओं की संख्या बहुत कम है। भारत में करदाताओं की संख्या कथित तौर पर 1.46 करोड़ है, जैसा कि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने एक ट्वीट में पुष्टि की है। यह एक छोटी संख्या है जब आप 135 करोड़ की कुल जनसंख्या को परिप्रेक्ष्य में लेते हैं (भारत की कुल जनसंख्या का सिर्फ 1 प्रतिशत से अधिक)। यह काफी अवास्तविक आंकड़ा प्रतीत होता है लेकिन यह एक सच्चाई है। यह भारतीय नागरिकों की कर भुगतान की जिम्मेदारी के प्रति अनिच्छा को दर्शाता है। दूसरे शब्दों में, केवल वेतनभोगी वर्ग के लोग ही प्रत्यक्ष कर का भुगतान कर रहे हैं और वह भी तब जब उनकी आय का पता लगाया जा सकता है। इसलिए, एफएम आयकर स्लैब और दरों में कोई छूट नहीं देने में अडिग दिखीं।

भारतीय अर्थव्यवस्था को गति देने के लिहाज से बजट 2022 एक बेहतरीन दस्तावेज है। बजट भारतीय कंपनियों को उनकी कर देनदारियों में बड़ी राहत देने की बात करता है। सरकार ने कॉर्पोरेट टैक्स को 18 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत कर दिया है, और सरचार्ज को 17 प्रतिशत से घटाकर 12 प्रतिशत कर दिया गया है। इस साहसी कदम ने स्टॉक एक्सचेंज के सूचकांकों को गति प्रदान की। बजट के दिन सेंसेक्स 848 अंक और निफ्टी 237 अंक ऊपर चढ़ा। संसद में बजट पेश किए जाने के बाद से भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों पर लगातार सकारात्मक हलचल है। यह बजट भारत में भावी और महत्वाकांक्षी बहुराष्ट्रीय निगमों (एमएनसी) के आवास के लिए नए विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) स्थापित करने के लिए नियमों का एक नया सेट लाने की बात करता है। वर्तमान बजट निश्चित रूप से एक अर्थव्यवस्था बूस्टर है।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने रक्षा बजट को रिकॉर्ड स्तर रु. 5.25 लाख करोड़ तक बढ़ाया। यह आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष 2021-2022 के खर्च से करीब 10 फीसदी ज्यादा है। इस बजट का दिलचस्प हिस्सा यह है कि रक्षा क्षेत्र के लिए पूंजीगत व्यय बजट का 68 प्रतिशत घरेलू खरीद के लिए आरक्षित किया जाएगा। यह स्थिति निश्चित रूप से भारत में रक्षा निर्माण इकाइयों में पूंजी निवेश को बढ़ाने वाली है। अंतत: यह रक्षा हथियारों और गोला-बारूद के उत्पादन और वितरण के मामले में एक आत्मनिर्भर देश बनाने के मामले में गेम चेंजर साबित होने वाला है। भारत ने व्यवस्थित तरीके से रक्षा वस्तुओं को विदेशों में निर्यात करने का दीर्घकालिक लक्ष्य निर्धारित किया है।

केंद्रीय बजट 2022 कई मायनों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 लागू करने की बात करता है। बजट में शिक्षा क्षेत्र की कुछ झलकियां हैं (द्ब) आईटीआई द्वारा ड्रोन संचालन प्रशिक्षण, (द्बद्ब) 2 लाख आंगनबाडय़िों का उन्नयन, (द्बद्बद्ब) 75 वर्चुअल विश्वविद्यालयों की स्थापना, (द्ब1) शिक्षा को सपोर्ट करने के लिए डीटीएच सेवाएं शुरू करना, (1) हर स्कूल में टीवी स्थापित करना, (1द्ब) कक्षा 1 से 12 तक क्षेत्रीय भाषा में शिक्षा देना, (1द्बद्ब) छात्रों के लिए ई-विद्या चैनल लॉन्च करना, (1द्बद्बद्ब) देश के हर गांव में इंटरनेट की सुविधा सुनिश्चित करना, और (द्ब3) 5जी इंटरनेट सेवा इसी साल से शुरू करना। ये बजट प्रावधान एनईपी 2020 के कार्यान्वयन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते है। सरकार सभी को भौतिक और मिश्रित मोड में शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए दृढ़ संकल्पित है। यह बजट आने वाले दिनों में निश्चित रूप से भारत में शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच के मामले में  बदलाव लाने वाला है। सरकार आगामी वित्त वर्ष में शिक्षा पर 104,278 करोड़ रुपये खर्च करेगी। पिछले साल शिक्षा पर वास्तविक खर्च 88,002 करोड़ रुपये था।

यह बजट एक तरह से अभूतपूर्व है कि यह पहली बार है जब किसी केंद्र सरकार ने पूरे देश से न्यूनतम समर्थन मूल्य के रूप में किसानों से खाद्यान्न की खरीद के लिए 2.70 लाख करोड़  रुपये का प्रावधान किया है। कृषि और ग्रामीण उद्यमों के लिए स्टार्ट-अप को वित्तपोषित करने, बैंक खातों और डाकघर खातों को जोडऩे, कृषि वानिकी को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता के लिए एक नया नाबार्ड फंड प्रस्तावित है। उत्तर-पूर्वी राज्यों में वैज्ञानिक जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए 45,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। इसके अलावा, ग्रामीण बुनियादी ढांचे और बाजारों से कनेक्टिविटी बढ़ाने से किसानों को बाजार तक बेहतर पहुंच बनाने में मदद मिलेगी, जिससे वे अपने अवसरों को बढ़ा सकेंगे और अपनी उपज पर बेहतर कीमत हासिल कर सकेंगे। यह बजट जैविक खेती की बात करता है। किसानों को डिजिटल सेवा उपलब्ध कराई जाएगी। रसायन-मुक्त कृषि क्षेत्र को गंगा  के किनारे से पांच किलोमीटर की सीमा के भीतर एक गलियारे के रूप में विकसित किया जाएगा। नए कृषि विश्वविद्यालय स्थापित करने का भी प्रावधान किया गया है। निस्संदेह यह अब तक का सबसे ज्यादा किसान हितैषी बजट है।

भारत में क्रिप्टो मुद्राओं के अवैध लेनदेन पर केंद्र सरकार की अपनी चिंताएं हैं। क्रिप्टो लेनदेन को वैध बनाने की मांग लंबे समय से लंबित थी। वित्त विधेयक 2022-23 में परिभाषित ‘केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा’ और वीडीए (वर्चुअल डिजिटल एसेट्स) पर एक अपडेट सहित – एफएम निर्मला सीतारमन ने महत्वपूर्ण क्रिप्टो मुद्रा संबंधी घोषणाएं कीं। भारतीय रिजर्व बैंक ब्लॉक-चेन प्रौद्योगिकी पर निर्मित ‘डिजिटल रुपया’ या ‘केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा’ जारी करेगा। बजट ने वीडीए पर कर लगाने के लिए एक योजना पेश की, जिसमें क्रिप्टो करेंसी, अपूरणीय टोकन, क्रिप्टोग्राफिक माध्यमों से उत्पन्न सूचना/कोड और सरकार द्वारा पहचानी गई कोई भी अन्य डिजिटल संपत्ति शामिल है। इसने वीडीए के हस्तांतरण से अर्जित आय पर 30 प्रतिशत कर और सोर्स ऑन पेमेंट  पर 1 प्रतिशत कर कटौती का प्रस्ताव रखा है। वीडीए के उपहार के प्राप्तकर्ताओं पर भी कर लगाया जाएगा। बजट ने यह भी स्पष्ट किया कि वीडीए के हस्तांतरण से होने वाले नुकसान की भरपाई अन्य आय से नहीं की जा सकती है। यह कदम सरकार को अपरंपरागत स्रोतों से अधिक राजस्व प्राप्त करने में मदद करने वाला है।

यह बजट एक तरह से अनूठा है क्योंकि इसने वर्ष 2005 से, अपनी स्थापना के बाद से, पहली बार मनरेगा के लिए कोई प्रावधान नहीं किया है। सरकार ने अपने फंड को अधिक उत्पादक और भविष्य की परियोजनाओं को आवंटित किया है, जैसे कि नदियों को जोडऩे वाली परियोजनाओं के लिए – रु 65,000 करोड़, नवीकरणीय ऊर्जा – रु 19,500 करोड़, प्रधानमंत्री आवास योजना – रु 48,000, राजमार्ग विस्तार परियोजना – रु 20,000 करोड़, जल जीवन मिशन – रु 60,000 करोड़, केन-बेतवा प्रोजेक्ट – रु 1400 करोड़, इंफ्रास्ट्रक्चर – रु 20,000 करोड़, एमएसएमई – रु 6,000 करोड़, इत्यादि। एक अनुमान के अनुसार, यह बजट  80,00,000 नए रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए रु 7,50,000 करोड़ का निवेश करने जा रहा है।

दरअसल, सरकार ने लोकलुभावन बजट पेश नहीं कर साहसिक कदम उठाया है। यह बजट आर्थिक विकास की बात करता है। भारतीय नागरिकों को मुफ्त-वैक्सीन और मुफ्त खाद्यान्न सहायता पर भारी खर्च के बावजूद, सरकार अपने राजकोषीय घाटे को केवल 6.9 प्रतिशत (प्रस्तावित आंकड़ा 6.8 प्रतिशत) बनाए रखने में सक्षम रही। इसके अलावा, केंद्र सरकार ने अगले वित्तीय वर्ष में राजकोषीय घाटे को 6.4 प्रतिशत पर रखने का प्रस्ताव किया है। यह बजट वित्त मंत्रालय द्वारा वित्तीय इंजीनियरिंग का अच्छा नमूना है।

 

डॉ. आलोक चक्रवाल

(लेखक गुरू घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर, छत्तीसगढ़, उप-कुलपति हैं)

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