ब्रेकिंग न्यूज़ 

राष्ट्रवाद की चिंगारी: मोदी युग की सोच

राष्ट्रवाद की चिंगारी: मोदी युग की सोच

पाकिस्तान में कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा  तथाकथित ‘कश्मीर दिवस’ के साथ एकजुटता व्यक्त करने की हालिया घटना ने भारत में काम करने वाली कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों के संदिग्ध चरित्र को उजागर कर दिया है।

05 फरवरी को, इन बहुराष्ट्रीय कंपनियों के कई पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल ने हमारे शत्रु पड़ोसी पाकिस्तान के एकतरफा कश्मीर कार्ड के लिए अपनी एकजुटता और समर्थन दिखाते हुए इन्फोग्राफिक्स प्रकाशित किए। कम से कम 11 अंतरराष्ट्रीय कंपनियों (एमएनसी) ने कश्मीर के खिलाफ प्रचार सामग्री पोस्ट की। इनमें ऑटो प्रमुख हुंडई, किआ, सुजुकी, इसुजु और टोयोटा से लेकर केएफसी, डोमिनोज के अलावा बॉश और ओसाका जैसी कई अन्य कंपनियां शामिल हैं। उनके संदेशों का लहजा एक जैसा था और यहां तक कि सभी इन्फोग्राफिक्स के टेक्स्ट भी एक-दूसरे से मिलते-जुलते थे और इस सिद्धांत को बल देते थे कि यह सब ड्रामा पाकिस्तान आईएसपीआर द्वारा रचा गया था।

पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ बहुराष्ट्रीय कंपनियों के सोशल मीडिया अकाउंट का इस्तेमाल किया। बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने भी पाकिस्तान के निर्देशों का पालन किया। यह इनफार्मेशन एंड इकनोमिक वारफेयर के अलावा और कुछ नहीं है।

इस षडयंत्र के खिलाफ राष्ट्रवादी भारतीयों की प्रतिक्रिया  तेज और तीखी थी। भारत में 6 फरवरी की सुबह तक यह पूरे सोशल मीडिया पर छा गया था। 3 लाख से ज्यादा ट्वीट्स के साथ टिवटर पर #BoycottHyundai टॉप पर ट्रेंड कर रहा था। भारतीय लोग बढ़-चढ़ कर ट्वीट कर रहे थे। लोगों ने इस दोहरेपन की कड़े व स्पष्ट शब्दों में निंदा की और उन्होंने इसकी तुलना देशद्रोह से की। इसके फलस्वरूप फरवरी 06 को घंटों के भीतर, भारत भर में हुंडई और किआ डीलरशिप को हजारों बुकिंग रद्द करने के अनुरोध प्राप्त हुए। लोगों  ने इन बहुराष्ट्रीय कंपनियों से कभी न खरीदने का इरादा पोस्ट किया और इसके बजाय लोगों से घरेलू दिग्गज टाटा एंड महिंद्रा से खरीदारी करने का आग्रह किया। नाराज नागरिकों ने अपना गुस्सा व्यक्त करने के लिए सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया।

कुछ ही समय में हुंडई इंडिया को एक बयान जारी करने के लिए मजबूर होना पड़ा लेकिन वे माफी जारी करने से चूक गए। इसके बजाय, उन्होंने भारतीयों की प्रतिक्रिया से आहत होने पर अपनी पीड़ा व्यक्त की। हुंडई मोटर इंडिया के बयान में कहा गया है कि ‘हुंडई मोटर इंडिया को अवांछित सोशल मीडिया पोस्ट’ से जोडऩा देश के लिए कंपनी की ‘अद्वितीय प्रतिबद्धता’ का ‘अपमान’ था।

उनके इस बयान से उनकी धूर्तता और अहंकार की बू आ रही थी। इसने राष्ट्रवादी भारतीयों को और नाराज कर दिया और बड़े पैमाने पर आक्रोश और प्रतिक्रिया का कारण बना। लोगों ने बताया कि @HundaiPakistan की आलोचना नहीं करते हुए @Hyundai_Global की भारतीय शाखा यह भी नहीं कह रही है कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। यह भारत के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के बारे में बहुत कुछ बोलता है। क्या यह #BoycottHyundai का आह्वान नहीं करता है? लोगों ने मांग की कि ऑटोमेकर की मूल कंपनी को ‘भारत विरोधी बयानबाजी पर अपने वैश्विक रुख’ की व्याख्या करनी चाहिए। उन्होंने हुंडई को भी फटकार लगाई कि उन्हें अपने ‘मीठे  शब्दों’ से बेवकूफ बनाने के बजाय, स्पष्ट रूप से माफी मांगनी चाहिए।

जब पूर्ण बहिष्कार का आह्वान जोर से हुआ, तो हुंडई को नेटिजन्स द्वारा पाकिस्तान जाने के लिए कहा गया, जहां उसने भारत में बिकने वाली 5 लाख कारों  की तुलना में 5 हजार से अधिक इकाइयां बेचीं। नेटिजेंस ने यह भी मांग की कि हुंडई डीलर्स और भारत सरकार अपना रुख स्पष्ट करें। डॉ. जयशंकर के नेतृत्व में विदेश मंत्रालय ने तेजी से कार्रवाई की। सियोल में भारतीय दूतावास ने दक्षिण कोरिया में हुंडई और किआ मोटर्स की पैरेंट कंपनी से स्पष्टीकरण की मांग की। डॉ. जयशंकर ने ट्वीट कर कोरिया गणराज्य के विदेश मंत्री से एक कॉल प्राप्त होने की जानकारी दी।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बताया कि भारतीय विदेश मंत्रालय  ने 7 फरवरी को कोरिया गणराज्य के राजदूत को तलब किया। एक बयान में, उन्होंने कहा, ‘हमने तथाकथित कश्मीर एकजुटता दिवस पर एक सोशल मीडिया पोस्ट देखा है, जिसे हुंडई पाकिस्तान द्वारा बनाया गया था। रविवार, 6 फरवरी 2022 को इस सोशल मीडिया पोस्ट के तुरंत बाद, सियोल में हमारे राजदूत ने हुंडई मुख्यालय से संपर्क किया और स्पष्टीकरण मांगा। आपत्तिजनक पोस्ट को बाद में हटा दिया गया।’

‘कोरिया गणराज्य के राजदूत को विदेश मंत्रालय द्वारा 7 फरवरी 2022 को तलब किया गया था। हुंडई पाकिस्तान द्वारा अस्वीकार्य सोशल मीडिया पोस्ट पर सरकार की कड़ी नाराजगी से उन्हें अवगत कराया गया। इस बात पर प्रकाश डाला गया कि यह मामला भारत की क्षेत्रीय अखंडता से संबंधित है जिस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता है, ‘उन्होंने आगे कहा।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी हुंडई से इस मामले में उचित कार्रवाई करने को कहा है। इसने बताया कि विदेश मंत्री एस जयशंकर को कोरिया गणराज्य के विदेश मंत्री चुंग यूई-योंग का फोन आया था जिसमें उन्होंने अन्य द्विपक्षीय मामलों पर चर्चा करने के अलावा इस मुद्दे पर भारत की नाराजगी से योंग  को अवगत कराया। योंग ने घटना पर खेद जताया।

एफएडीए–फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन–की ओर से भी साहसिक कदम उठाया गया। उन्होंने कड़े शब्दों में बयान जारी किया और ऑटो निर्माताओं से स्पष्टीकरण की मांग की।  एफएडीए के अध्यक्ष विंकेश गुलाटी ने  एफएडीए की मांगों पर ट्वीट किया।

विदेश मंत्रालय और एफएडीए  की त्वरित कार्रवाइयों ने हुंडई मोटर्स इंडिया को घुटनों पर ला दिया और विवाद के 48 घंटे बाद इसने एक और बयान जारी किया। पैरेंट कंपनी हुंडई मोटर ने बयान जारी कर कहा कि वह ‘किसी भी विशिष्ट क्षेत्र में राजनीतिक या धार्मिक मुद्दों’ पर टिप्पणी नहीं करती है’, और यह कि भारतीयों के लिए किए गए किसी भी अपराध के लिए ‘गहरा खेद’ है। यह कदम पाकिस्तान में एक हुंडई डीलर से दूरी बनाने का एक कदम है, जिसने कश्मीर के साथ एकजुटता की पेशकश करते हुए एक ट्वीट साझा किया था।

हुंडई के बाद, अपमानजनक कृत्य के अन्य अपराधियों ने भी बिना शर्त माफी मांगी। जापानी वाहन निर्माता सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन ने 08 फरवरी को कश्मीर में अलगाववादियों का समर्थन करने वाले अपने पाकिस्तानी डीलरों और व्यापारिक सहयोगियों के अनधिकृत सोशल मीडिया पोस्ट के कारण भारत में ‘भावनाओं को आहत’ करने के लिए खेद व्यक्त किया। इससे पहले, पाकिस्तान में अपने आधिकारिक पोस्ट द्वारा कश्मीर पर एक इंस्टाग्राम पोस्ट पर प्रतिक्रिया का सामना करने के बाद, 07 फरवरी को, केएफसी ने माफी मांगी और इसी तरह, पिज्जा हट ने भी एक बयान जारी किया जिसमें कहा गया था कि ‘यह सोशल मीडिया में प्रसारित पोस्ट की सामग्री की निंदा, समर्थन या सहमति नहीं करता है’।

भारत सरकार के लिए भारत में काम करने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए दिशानिर्देश जारी करने का समय आ गया है। पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के सोशल मीडिया अकाउंट्स को कश्मीर के खिलाफ एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है, जो इनफार्मेशन वारफेयर से कम नहीं है। सरकार को इसका संज्ञान लेना चाहिए और भारत में ऐसी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के आचरण के खिलाफ सख्त नियम जारी करने चाहिए।

सरकार को यह एक नीति के रूप में घोषित करना चाहिए कि कोई भी बहुराष्ट्रीय कंपनी जो अपने व्यवसाय के अलावा अन्य मुद्दों में संलग्न होगी, उनके लाइसेंस को रद्द करने के अलावा उनके दुस्साहस के लिए भारी जुर्माना भी लगेगा। भारत सरकार द्वारा इस तरह की कड़ी कार्रवाई आतंकवादी समर्थकों को हतोत्साहित करेगी।

 

श्याम जाजू

(लेखक निवर्तमान राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, भाजपा, हैं)

Leave a Reply

Your email address will not be published.