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राजमा चावल खाना हो तो जम्मू जाना

राजमा चावल खाना हो तो जम्मू जाना

विश्व प्रसिद्ध कश्मीरी व्यंजन भारत के प्राचीन व्यंजनों में से एक है। ऋग्वेद में कश्मीरियों का उल्लेख मांसाहारी के रूप में किया गया है। प्राचीन कश्मीरी महाकाव्य नीलमत पुराण में लिखा है कि कश्मीरी बड़ी तादाद में मांस भक्षी थे। न्यूट्रिशनिस्ट आरती गुप्ता के मुताबिक कश्मीरी भोजन प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट से लवरेज होता है। हर कश्मीरी का मुख्य अहार चावल है। चावल के साथ रेशेदार सब्जियां, मांस, मछली या चिकन परोसना यहां का मुख्य आहार है। कश्मीरी खाने में मांस और सब्जियों का बेजोड़ स्वाद मिलता है जिसमें मटन और शलजम, चिकन और पालक, मछली और कमल ककड़ी का कॉबिनेशन भी बड़ा गजब का है। कश्मीरी लोग खाना पकाते वक्त दही का इस्तेमाल करते हैं जो कि खाने के स्वाद को कई गुणा बड़ा देता है।

सेहत और स्वाद को ध्यान में रखते हुए यहां के खाने में मुख्य रूप से जड़ी-बूटियों को मसालों के रूप में प्रयोग किया जाता है जिसमें दालचीनी, इलायची और लौंग, हींग, सोंठ, सौंफ का बड़ी मात्रा में प्रयोग किया जाता है। ये मसाले कश्मीर की ठंड में लोगों को गर्मी प्रदान करते हैं और सेहत को दुरूस्त रखते हैं। अदरक का स्वाद तीखा होने के बाद भी कुछ खास तरह के व्यंजनों में इसका बहुतायत प्रयोग किया जाता है। केसर की खुशबू और रंग का बेजोड़ नमूना तो कश्मीरी खाने में मिलता ही है, साथ ही कश्मीर केसर का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक भी है। कश्मीरी खाने में केसर और सौंफ का प्रयोग बहुत किया जाता है। केसर में एंटी ऑक्सीडेंट पाया जाता है जो रोग प्रतिरोधक होता है, साथ ही केसर पाचन की दृष्टि से भी काफी फायदेमंद है। कश्मीरी लाल मिर्च देखने में भले ही सुर्ख लाल और तीखी मालूम होती है लेकिन इसके तीखे गुणों के बावजूद इसका कश्मीरी खाने में खूब प्रयोग किया जाता है। कश्मीरी व्यंजनों की तरी बनाते वक्त उसमें खास तौर पर सूखेमेवों का इस्तेमाल किया जाता है।

हलांकि यहां के कुछ शाकाहारी भोजन भी काफी लजीज हैं जिनका नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है। जैसे पालक नाडुर (पालक के साथ कमल ककड़ी की सब्जी), चोख बैंगन (लाल अंगूर की ग्रेवी में छोटे बैंगन की सब्जी, अल यखीं (दही में पकाई गई लौकी) और सबसे ज्यादा प्रसिद्ध हाख (कश्मीरी पालक की पत्तियां) ये कश्मीर की हरी सब्जियों में से एक है जो डल झील में उगती है। इसे सौंफ के साथ पकाया जाता है। हाख के पत्ते देखने में पालक की तरह होते हैं।


डोगरा व्यंजन


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जम्मू का जिक्र अकसर ‘बैष्णों देवी’ की तीर्थयात्रा और ‘गेट वे ऑफ कश्मीर’ के संदर्भ में किया जाता है। जम्मू मुख्य रूप से अपने राजमा चावल के लिए प्रसिद्ध है। मूलरूप से डोगरा व्यंजन बहुत ही साधारण और सरल होते हैं। ये मुख्य रूप से गेहूं, मक्का, बाजरा, चावल और कुछ दूसरे अनाज के साथ बनाया जाता है। हिमाचली व्यंजन और डोगरा व्यंजन लगभग एक जैसे ही होते हैं। जम्मू क्षेत्र में खट्टे और मीठे आंवले की रेसिपी बहुत खास है। यहां पर सभी त्योहारों के अवसर पर कद्दू जरूर बनता है। जम्मू में स्ट्रीट फूड के रूप में कलारी कुलचा बहुत प्रसिद्ध है।



कश्मीरी चाय


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कश्मीरी लोग चाय के बड़े शौकीन होते हैं। यहां पर दो तरह की चाय खास तौर पर मिलती हैं कह्वा (ये चाय की हरी पत्तियों, इलायची और बादाम को मिलाकर बनती है) और दूसरी नून चाय (बादाम और नमक के साथ बनने वाली गुलाबी रंग की चाय) इनके मुख्य गुण ये हैं कि कैलोरी न के बराबर होती है। चाय का खूशनुमा रंग उसमें पडऩे वाले सोडा और उसके खास तरीके से बनाने के कारण आता है। शादी-ब्याह के मौकों पर, त्योहारों और धार्मिक स्थानों पर कह्वा का बनाना एक प्रथा है। (इसकी उत्पत्ति 14वीं सदी की अरबी कॉफी से हुई थी) ये एक हरे रंग का पेय है जो कि केसर, मसाले, बादाम और अखरोट के साथ मिलकर बनता है। कश्मीर में 20 से ज्यादा किस्मों के कह्वा तैयार किए जाते हैं।


 जम्मू से प्रकृति गुप्ता

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