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स्वादिष्ट और शाकाहरी खाना ढ़ोकला, फाफड़ा और खांडवा का मजा लो

स्वादिष्ट और शाकाहरी खाना ढ़ोकला, फाफड़ा और खांडवा का मजा लो

जब से मैगी पर प्रतिबंध लगा है तब से बच्चे उदास हो गये हैं, क्योंकि दो मिनट में बनने वाली मैगी को वे कभी भी भूख लगने पर अपने आप बनाकर भी खा सकते थे। लेकिन अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि बच्चों, बूढ़ों और जवानों की प्यारी मैगी को बनाने वालों ने लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ किया। जिसकी वजह से आज सभी ने मैगी को अपने खाने से नजरअंदाज कर दिया है। सेहत की बात करे तो हेल्दी खाना ही खाना चाहिये लेकिन सवाल है कि हेल्दी खाना किसे कहते है? ऐसा खाना जिसमें विटामिन, प्रोटीन, मिनरल, कार्बोहाइड्रेट और फेट्स की मात्रा संतुलित हो।

कुकिंग एक्सपट्र्स का मानना है कि गुजराती थाली में ऊपर बतायी गई सभी चीजे मौजूद होती है। शेफ विकास खन्ना ने भी अपने एक इन्टरव्यू में बताया था कि उन्हें गुजराती खाना बहुत पसंद है क्योंकि गुजराती थाली में बैलेंस डाइट यानि खट्टा, मीठा, कड़वा, खारा, तीखा सारे रस पाये जाते हैं। भारतीय मूल की सुनीता विलियम्स जिन्होंने दो बार स्पेस की सैर करके सर्वाधिक समय अंतरिक्ष में बिताने का रिकॉर्ड बनाया है और साथ ही सबसे अधिक समय तक स्पेस वॉक करने का भी रिकॉर्ड कायम किया है वे भारतीय होने के साथ-साथ गुजराती है इसका सभी गुजरातियों को गर्व है। स्पेस की सैर करने के बाद जब वे धरती पर लौटी और भारत से मुलाकात की तब दिल्ली के गुजरात भवन में वे स्पेशल गुजराती खाना खाने के लिए आती थी। उनसे मुलाकात हुई तो उनसे पूछा की गुजराती खाना ही क्यों? तब एक वैज्ञानिक की हैसियत से उन्होंने बताया कि गुजराती थाली में सभी प्रकार के रसों का मिश्रण होता है जो मानव शरीर की रचना को तंदूरूस्त रखने के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है।

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गुजराती थाली में सामान्य रुप से चार प्रकार के घटक होते हैं – अनाज (कठोल – मूंग, मोठ, राजमा, चने), दाल, दो सब्जी, संभर (जो पत्ता गोभी, गाजर, कच्चा पपीता, गाजर या शिमला मिर्च के अंदर हल्का नमक, हल्दी और हींग डालकर कच्चा-पक्का बनाया जाता है) चावल, PAGE 32-35चपाती, फरसान के साथ अचार, चटनी, पापड़, सलाद, गुड और छाछ। इसीलिए इसे संतुलित आहार कहा जाता है। साथ ही इसमें प्रचुर मात्रा में अदरक, लहसुन व हरी मिर्च का उपयोग भी किया जाता है। खाने में चीनी की जगह गुड़ का प्रयोग किया जाता है जिससे सही मात्रा में गुजरात एक ऐसा प्रदेश है जहां का खाना पूरे भारत में प्रसिद्ध है। यहां के खाने की खास बात ये है कि इसमें सभी स्वाद एक साथ मिल जाते हैं। गुजरात में बेसन का प्रयोग भी खूब किया जाता है। जबकि अन्य राज्यों में बेसन का प्रयोग केवल पकौड़े या कढ़ी बनाने में किया जाता है, लेकिन गुजरातियों की सुबह ही बेसन के खाने से होती है उन्हें नाश्ते में भी बेसन से बने खमण, खांडवी, गांठीया, फाफडा, पापडी, पातरा (अरबी के पत्तो पर बेसन लगाकर बनाया जाता है) चाहिये। मिष्ठान भी वे बेसन से बनाते है यानि ‘मोहनथाल’ जो कृष्ण जी को प्यारा है वह बेसन से ही बनता है। बेसन डायबिटिज को कंट्रोल करता है इसलिए एक तरफ जहां गुजराती लोग अपने खाने में मीठा का इस्तेमाल करते हैं। वहीं उसको काटने के लिए बेसन खाते है। अरहर (तुवर) की दाल में खट्टे व मीठे दोनों स्वाद के साथ करी पत्ता भी डाला जाता है जिससे दाल का स्वाद चौगुणा बढ़ जाता है। कहा जाता है कि दालों में तुवर दाल सबसे अधिक भारी होती है लेकिन गुजराती रोज तुवर दाल खाते हैं, लेकिन उसमें गुड व कोकम डालते हैं जिसकी वजह से पेट में गैस नहीं बनती और न ही खाने में गरिष्ठ ही रह जाती है।

गेहुं से बनी वैरायटी का भी खूब प्रयोग किया जाता है जिससे बच्चों को कार्बोहाइड्रेट की मात्रा खूब मिलती हैं और वे जंक फूड की तरफ कम आकर्षित होते हैं। गुजराती घरों में त्योहारों के मौके पर या किसी के जन्मदिन आदि पर केक न लाकर घर पर ही मीठा बनाने का प्रचलन है गेहुं के आटे से भी अनेक प्रकार के मीठे व्यंजन बनाये जाते हैं जैसे – लाप्सी, फाडा लाप्सी (दलिया से बनाइ जाती है), शीरा, चुरमा लड्डू, सुखडी, ठोर, पुरनपोली (तुवर दाल में गुड डालकर मीठा पेस्ट तैयार किया जाता है फिर इसे आटे की लोई के बीच में रखकर आलू के पराठे की तरह बनाया जाता है इसमें स्वाद के लिए इलायची, जायफल, केसर भी डाला जाता है।) जैसे व्यंजन बनाये जाते हैं।

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दिवाली के दूसरे दिन कृष्ण भगवान के लिए अन्नकूट का प्रसाद तैयार किया जाता है जिसमें उनके लिए 56 प्रकार के व्यंजन शामिल होते हैं। यह सारे व्यंजन महिलाएं घर पर ही बनाती हैं। खाना बनाने में गुजराती महिलाएं बहुत मेहनत करती हैं। खाखरा जो विश्व प्रसिद्ध है उसे बनाने में बहुत वक्त लगता है। लेकिन, अब तो इसे बनाने की मशीने भी आ गई है। सफर में यदि खाखरा और थेपला साथ में हो तो फिर क्या कहने! गुजरातियों का ढोकला, थेपला और खाखरा अब विश्वभर में प्रसिद्ध है और सभी इसे खाना पसंद करते हैं। दही से बना श्रीखंड खाने में स्वादिष्ट होने के साथ-साथ खाना पाचने में भी सहायक होता है।

गुजरात में मूंगफली का भी बहुत प्रयोग किया जाता है। कहा जाता है कि मूंगफली गरीबों के लिए बादाम का काम करती है। खारी सिंग मूंगफली जो जग प्रसिद्ध है । उसे आप मुठ्ठी भर भी खा लेंगे तो दो घंटे तक भूख का एहसान नहीं होगा । मूंगफली के प्रयोग से शरीर को 29 प्रकार के फायदे मिलते हैं। मूंगफली खाने से शरीर को तुरंत ऊर्जा मिलती है और इससे विटामिन्स, खनीज और अन्य पोषक तत्व भी प्राप्त होते हैं। इससे अच्छा कोलेस्ट्रॉल बनता है जो शरीर को नुकसान नहीं पहुंचता है। ये पेट के कैंसर रोग से लडऩे में सहायक होता है साथ ही हृदय रोग, नसों का रोग, अल्जाइमर रोग, और संक्रमण के खिलाफ भी लडऩे में सहायक है। मूंगफली में विटामिन ई और बी भी होने के कारण शारीरिक सुंदरता कायम रहती है। डायबिटिज को भी कंट्रोल करती है, डिप्रेशन में भी यदि आप मुठ्ठी भर मूंगफली खा लेंगे तो तुरंत लाभ मिलेगा। मूंगफली इतनी फायदेमंद है इसका प्रयोग रोज करना चाहिए। गुजराती लोग तुवर दाल और पौहा में भी मूंगफली डालते हैं।


छाछ (बटर मिल्क) पीने से अनेक लाभ


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सामान्य रुप से छाछ न तो फीकी होनी चाहिये न ही खट्टी होनी चाहिए। थोड़ी सी खट्टी छाछ त्रिदोष शामक कहलाती है। दहीं में चौथे भाग जितना पानी डालकर बनाई गई छाछ सबसे अधिक लाभकारी होती है। छाछ वायुदोष को दूर करता है और साथ ही भूख को भी बढ़ाता है । खाये हुए भोजन को पाचने में मदद करता है। छाछ से शरीर में कफ नहीं बनता है और स्फूर्ति आती है। आंत के किसी भी प्रकार के रोग में छाछ का सेवन किया जा सकता है। रोज खाने के बाद छाछ पीने से शक्ति बढ़ती है और बालों से संबंधित रोग भी दूर होते है। छोटी उम्र में होनेवाले सफेद बालों से भी छुटकारा मिलता है। पेट के किसी भी प्रकार के रोग के लिए छाछ रामबाण इलाज है। छाछ में नमक व भुना हुआ जीरा पीसकर डालने से स्वादिष्ट हो जाता है। यदि कब्ज हो तो दिन में दो-तीन बार छाछ पीना चाहिए। छाछ से शरीर को ठंडक मिलती है और आंखों के लिए भी बहुत लाभकारी है। इसलिए रोज खाने के साथ दहीं नहीं लेकिन, छाछ का प्रयोग करना चाहिए।



गुड़ खाने के लाभ


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सामान्य रुप से गुड़ का उपयोग संक्रात में बनाये जानेवाले तिल के लड्डू में किया जाता है। गुड़ को ‘औषधिय चीनी’ भी कहा जाता है, क्योंकि चीनी की जगह गुड़ का प्रयोग अनेक प्रकार से लाभदायक है। गुड़ बनाने में किसी भी प्रकार के केमिकल का उपयोग नहीं किया जाता इसलिए इसमें प्राकृतिक मिनरल की मात्रा भरपूर मौजूद होती है। गुड़ खाने से शरीर की सामान्य रुप से सफाई हो जाती है श्वास नली, फेफड़े, पेट, आंते सभी सरलता से काम करते है और कब्ज की शिकायत भी नहीं होती है। गुड पाचन शक्ति को भी बढ़ाता है। गुड़ से शरीर को लौह तत्व, मैग्नीशियम, फास्फोरस, पोटेशियम व जरुरी मिनरल्स प्राप्त हो जाते हैं। गुड़ मांसपेशियों, नसों व रक्त नलियों को भी राहत पहुंचाने का काम करता है। गुड़ खाने से सिरदर्द व माइग्रेन जैसे दर्द में भी राहत मिलती है। गुड़ से हिमोग्लोबीन का स्तर बढ़ता है। गुड़ खाने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है और शरीर से अनावश्यक टॉक्सीन बाहर आ जाते हैं। गुड़ को अपने रोज के आहार में शामिल करना चाहिए।

वैसे तो सभी राज्यों का खाना स्वादिष्ट होता है, लेकिन केवल गुजराती थाली में थोड़ा-थोड़ा सभी प्रकार के रसों का मिश्रण होता है जो शारीरिक रचना में लाभकारी होता है। खाना बनाना भी एक कला है पंजाबी लोग कहते हैं कि गुजराती सारा दिन किचन में ही बिताते है लेकिन यही उनकी खासियत है कि वे कहीं भी जाते हैं तो गुजराती थाली ही ढूंढते हैं और उन्हें मिल भी जाती है क्योंकि कहा जाता है कि ‘ज्यां ज्यां वसे गुजराती त्यां वसे गुजरात’ जय जय गरवी गुजरात।


अहमदाबाद से संगीता शुक्ला

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