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गुजरात की अस्मिता को सशक्त बनाने में सदा तत्पर हूं

गुजरात की अस्मिता को सशक्त बनाने में सदा तत्पर हूं

”यदि आप गुजरात की सफलता का बारीकी से विश्लेषण करेंगे और विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने की इसकी क्षमता के पीछे के कारकों के बारे में सोचेंगे, तो आप पाएंगे कि पिछले एक दशक में गुजरात के तकनीकी कौशल, उद्योग के अनुकूल नीतियां, पारदर्शी प्रशासनिक प्रणाली और विकास के प्रति प्रतिबद्धता जैसे कारकों ने सबसे अहम भूमिका निभाई है। ये वे कारक हैं, जिन्होंने गुजरात को निवेशकों का सबसे पसंदीदा राज्य बनाया है। हम कारोबारी माहौल को आसान बनाने के लिए अपनी नीतियों और प्रबंधन को लगातार अपग्रेड कर रहे हैं। हमारी सिंगल-विंडोसिस्टम की पहल ने 800,000 से अधिक एप्लिकेशन को प्रोसेस किया है और यह इंडस्ट्री संबंधी अप्रूवल एवं क्लीयरेंस के लिए वन-स्टॉप समाधान बन गया है,’’ यह कहना हैं गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल का दीपक कुमार रथ के साथ हुई विशेष बातचीत में। प्रस्तुत है प्रमुख अंश :-


आपकी
सरकार ने गुजरात के विकास के लिए कौन-कौन सी पहलें की हैं?

गुजरात एक बिजनेस-फ्रेंड्ली राज्य है। निवेशक इस वातावरण का पूरा लाभ उठा सकें; इसके लिए मेरी सरकार अपना पूरा ध्यान इस दिशा में केंद्रित कर रही है। हमारी कुछ नीतियां पहले से ही अच्छा परिणाम दे रही हैं, लेकिन उसके अलावा भी हमने समय की मांग को ध्यान में रखते हुए कुछ नई नीतियां भी बनाई हैं। उदाहरण के लिए, फरवरी में हमने एक नई आईटी नीति शुरू की, जो गुजरात को इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। हमें विश्वास है कि इस पॉलिसी से गुजरात जल्द ही आईटी के उभरते क्षेत्र में टॉप-5 प्रदर्शन करने वाले राज्यों में अपनी जगह बनाएगा। नई आईटी पॉलिसी के माध्यम से हमने अगले पांच वर्षों में आईटी निर्यात को आठ गुना बढ़ाकर 25,000 करोड़ रुपए करने का लक्ष्य रखा है।

इसी महीने हमने नई बायो टेक्नोलॉजी पॉलिसी भी लॉन्च की है। इसके पीछे हमारा यही उद्देश्य है कि अप्लाइड साइंस के क्षेत्र में गुजरात प्रतिस्पर्धी बने और विभिन्न एनजीओ, वैज्ञानिक संस्थानों और उद्योगों के साथ भीगादारी करके अधिक से अधिक लाभ प्राप्त करे। हम 500 से अधिक बायोटेक उद्योगों की सहायता करने और 1.20 लाख रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए लगभग 2000 करोड़ रुपए का निवेश करेंगे।

इसके अलावा, हम सोलर रूफटॉप इंस्टॉलेशन, इलेक्ट्रिक व्हीकल, प्राकृतिक खेती जैसी पहलों को बढ़ावा देकर निरंतर विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं। हमारा दृष्टिकोण है कि हम स्टेट-ऑफ-द-आर्ट टेक्नोलॉजी के माध्यम से गुजरात को लचीला बनाकर भविष्य के लिए तैयार करें।

वाइब्रेंट गुजरात इस साल स्थगित हो गया। राज्य सरकार ने ग्लोबल और घरेलू उद्योगों के साथ कितने समझौतों पर हस्ताक्षर किए?

वाइब्रेंट गुजरात समिट के स्थगन से पहले उद्योग जगत के नेता इसे लेकर बेहद उत्साहित थे, लेकिन हमने समय और स्थिति की गंभीरता को समझते हुए इसे स्थगित करने का निर्णय लिया, क्योंकि इस फैसले से कई लोग प्रभावित होने वाले थे।

हालांकि हमने वाइब्रेंट गुजरात के मुख्य सम्मेलन से पहले 60,000 करोड़ रुपए से अधिक के 100 समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे। इनमें से अधिकतर समझौते अक्षय ऊर्जा, हाइड्रोजन, सिंथेटिक रसायन, ट्रेनिंग और रिसर्च जैसे क्षेत्रों में थे।

गुजरात को दुनियाभर में देश का सबसे पसंदीदा निवेश गंतव्य बनने में किन कारकों ने प्रमुख भूमिका निभाई है?

यदि आप गुजरात की सफलता का बारीकी से विश्लेषण करेंगे और विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के इसकी क्षमता के पीछे के कारकों के बारे में सोचेंगे, तो आप पाएंगे कि पिछले एक दशक में गुजरात के तकनीकी कौशल, उद्योग के अनुकूल नीतियां, पारदर्शी प्रशासनिक प्रणाली और विकास के प्रति प्रतिबद्धता जैसे कारकों ने सबसे अहम भूमिका निभाई है।

ये वे कारक हैं, जिन्होंने गुजरात को निवेशकों का सबसे पसंदीदा राज्य बनाया है। हम कारोबारी माहौल को आसान बनाने के लिए अपनी नीतियों और प्रबंधन को लगातार अपग्रेड कर रहे हैं। हमारी सिंगल-विंडोसिस्टम की पहल ने 800,000 से अधिक एप्लिकेशन को प्रोसेस किया है और यह इंडस्ट्री संबंधी अप्रूवल एवं क्लीयरेंस के लिए वन-स्टॉप समाधान बन गया है।

अपनी सरकार को सुशासन की संतुलित रणनीति और अच्छी-बुरी परिस्थितियों में चलाने के लिए आपका क्या मंत्र रहा है?

मेरा मंत्र व्यवस्था को सरल रखना और जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना है। मुख्यमंत्री होने के नाते मेरी प्राथमिकता अपनी जनता के लिए काम करना और सुशासन के माध्यम से उन्हें सशक्त बनाना है। मेरा मानना है कि सरकार को कतार में खड़े अंतिम नागरिक तक पहुंचना चाहिए और मेरे नेतृत्व में गुजरात सरकार यही काम कर रही है। मेरा पूरा प्रशासन जनता की सेवा के लिए अथक प्रयास करने को सदैव तत्पर है।

गुजरात ने राज्य में रूफ टॉप सोलर इंस्टॉलेशन को प्रोत्साहित करते हुए कई नीतिगत बदलाव लाए हैं। कृपया इसके पीछे की कहानी बताएं।

माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन पर चलते हुए गुजरात वर्ष 2070 तक नेटजीरो का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। हमने जलवायु परिवर्तन की समस्या से निपटने के लिए इस बार बजट में 910 करोड़ की राशि आवंटित की है। हम गुजरात को ग्रीन एनर्जी का हब बनाएंगे और अपने अक्षय ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाएंगे। गुजरात में वर्ष 2009 में जलवायु परिवर्तन विभाग स्थापित किया गया। ये केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरे एशिया का पहला ऐसा विभाग था। अभी तक हमारे पास 8,900 मेगावॉट पवन ऊर्जा और 6,200 मेगावॉट सौर ऊर्जा की इंस्टॉल्स कैपेसिटी है और हम इन क्षेत्रों में देश में क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं।

हमने केंद्र सरकार के वर्ष 2022 तक 175 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा क्षमता स्थापित करने के लक्ष्य को साझा किया है, जिसमें से 100 गीगावॉट सौर ऊर्जा का योगदान हमारी ओर से किया जा रहा है। हमारी सौर नीति बहुत प्रगतिशील है। नई सोलर पॉलिसी के अंतर्गत कई प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं; जैसे राज्य में सौर परियोजना स्थापित करने के लिए किसी भी क्षमता सीमा को निरस्त किया गया है। इससे उपभोक्ताओं को संयंत्र स्थापित करने के लिए अपनी छतों और परिसरों को पट्टे पर लेने की अनुमति मिलती है। नई नीति के अनुसार सरकार सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्यमो और आवासीय उपभोक्ताओं से अधिशेष ऊर्जा की खरीद भी कर सकेगी। इस नीति के तहत राज्य के बिजली उपभोक्ता अपनी अतिरिक्त सौर ऊर्जा को 2.25 रुपये/यूनिट के हिसाब से बेच भी सकेंगे। साथ ही, सूर्य ऊर्जा रूफटॉप योजना रूफटॉप सिस्टम के आवासीय उपयोगकर्ताओं को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करती है। ऐसी दूरदर्शी और सहायक नीतियों के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन के लिए बजट में आवंटन के कारण ही गुजरात सोलर रूफ टॉप्स लगाने में देश का नंबर एक राज्य बन गया है।

गुजरात अपने हर घर तक सुरक्षित एवं शुद्ध पेयजल पहुंचाने में काफी आगे है। आपकी सरकार के लिए यह मिशन इतना महत्व क्यों रखता है?

केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन की शुरुआत की और राज्यों के साथ भागीदारी की, ताकि गांव के हर घर और सार्वजनिक संस्थानों जैसे स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र, स्वास्थ्य केंद्र, ग्राम पंचायत भवन में नल के माध्यम से पीने का शुद्ध पानी पहुंचाया जा सके। हालांकि इस मिशन को वर्ष 2024 तक पूरा किया था, लेकिन मुझे यह कहते हुए गर्व हो रहा है कि गुजरात इसी साल के अंत तक यह लक्ष्य पूरा कर लेगा। इसके लिए हमने आदिवासी और पर्वतीय क्षेत्रों के हर घर में पानी पहुंचाने के लिए लिफ्ट सिंचाई तकनीक का इस्तेमाल किया, जहां तक पहुंचना हमारे लिए एक चुनौती थी।

मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि बोटाद, आणंद, गांधीनगर, मेहसाणा, पोरबंदर, वडोदरा, पाटण, गीर सोमनाथ, डांग, मोरबी और जूनागढ जैसे कुछ जिलों ने पाइप से पानी के कनेक्शन का 100 प्रतिशत कवरेज हासिल कर लिया है।

इस पहल से लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा और साथ ही उनके रहन-सहन विशेषकर महिलाओं और बच्चों के जीवन को सरल बनाने में मदद मिलेगी।

आप अपने ‘आत्मनिर्भर गुजरात’ अभियान में कृषि विकास को कैसे शामिल कर रहे हैं?

गुजरात राज्य का एक बड़ा हिस्सा प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कृषि पर निर्भर करता है, जो इस क्षेत्र को ‘आत्मनिर्भर गुजरात’ के विजन की नींव बनाता है। मेरा मानना है कि हमें ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों को मजबूत करने के लिए इनोवेशन्स को अपनाने की जरूरत है। बढ़ती आबादी का पेट भरने के लिए महंगे उर्वरक और रसायन खरीदने के बोझ के कारण हमारे किसान बहुत परेशान रहे हैं और हम नहीं चाहते कि किसान आगे भी ऐसी ही स्थिति का सामना करें। इसलिए हम प्राकृतिक खेती में बदलाव लाने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं। हम गाय आधारित प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं, जहां किसी भी तरह के हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। हमारी टीम के अनुसार एक गाय वाला किसान भी गाय के गोबर और मूत्र का उपयोग करके लगभग 20-30 एकड़ जमीन पर खेती कर सकता है।

ये प्रथाएं न केवल लागत को कम करने में मदद करती हैं, बल्कि मिट्टी की उर्वरता में भी सुधार करती हैं। हम सभी आज-कल खाद्य पदार्थों को उगाने के लिए उपयोग किए जाने वाले रसायनों के प्रतिकूल प्रभावों के बारे में जानते हैं और यही कारण है कि हम ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग में वृद्धि देख रहे हैं। केमिकल-फ्री खाद्य खाने के लिए लोग ज्यादा पैसे देने को भी तैयार हैं, जिससे किसानों को अपने प्राकृतिक रूप से उगाए उत्पादों का अच्छा मूल्य प्राप्त करने में मदद मिलती है।

अधिक से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती की दिशा में प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार ने पिछले कुछ महीनों में कई योजनाओं लागू की हैं। हम प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को देसी गाय के रख-रखाव के लिए 10,800 रुपए की वार्षिक सहायता प्रदान कर रहे हैं। अब तक 2 लाख किसानों को लगभग 200 करोड़ रुपए की सहायता राशि बांटी जा चुकी है। इसके अलावा यह योजना ‘जीवामृत’ नामक प्राकृतिक कीटनाशक तैयार करने के लिए एक कृषि किट (1,300 रुपये प्रति किट) खरीदने के लिए भी सहायता प्रदान करती है। प्राकृतिक कृषि किट के लिए 40,000 से अधिक किसानों को लगभग 5 करोड़ रुपए की सब्सिडी दी गई है।

गुजरात के डांग जिले को 100 प्रतिशत  रासायनिक मुक्त कृषि क्षेत्र घोषित किया जा चुका है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने इस पहल का समर्थन किया है और उन्होंने व्यक्तिगत रूप से राज्य के किसानों को वर्चुअल कॉन्फ्रेंस के माध्यम से प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है।

डिफेंस एक्सपो का अगला एडिशन गुजरात में आयोजित होने जा रहा है। इस तरह के प्रतिष्ठित आयोजन के बारे में आपके विचार?

डिफेंस एक्सपो के 12वें संस्करण की मेजबानी करना हमारे लिए बड़े सम्मान की बात है। इस बार की थीम ‘इंडिया : द इमर्जिंग डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब’ है, जो माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन से जुड़ा हुआ है। इस आयोजन के माध्यम से भारत को रक्षा क्षेत्र में अपनी मैन्युफैक्चरिंग और रक्षा उपकरणों का सप्लायर बनने की ताकत दिखाने का अवसर मिलेगा। गुजरात सरकार ने भी रक्षा निर्माण और ऑफसेट में मौजूद अवसरों का लाभ उठाने के लिए एमएसएमई सेक्टर को सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया है। ऐसे कई मध्यम एवं लघु उद्योग हैं, जिन्होंने गुजरात में अपनी यूनिट स्थापित की हैं, जो भारत के कुछ स्ट्रैटिजिक एयरोस्पेस और डिफेंस प्रोग्राम के लिए जरूरी पार्ट्स की सप्लाई करते हैं।

 


दीपक कुमार रथ

(editor@udayindia.in)

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