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ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में ऊंची छलांग

ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में ऊंची छलांग

सीओटू (co2) उत्सर्जन को कम करना और ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों में इनोवेशन को बढ़ावा देना ही जलवायु परिवर्तन से निपटने का एकमात्र तरीका है।

‘हमने सुना है कि लोग हमारे ग्रह को नाजुक कहते हैं लेकिन, यह नाजुक ग्रह नहीं है, नाजुक हम हैं। ग्रह और प्रकृति के प्रति हमारी प्रतिबद्धताएं भी नाजुक रही हैं’। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस वर्ष द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टेरी) वल्र्ड सस्टेनेबल डेवलपमेंट समिट (डब्ल्यूएसडीएस) के 21वें संस्करण में अपने उद्घाटन भाषण के दौरान इस तरह के कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। उनका भाषण जलवायु परिर्वतन के खतरों के खिलाफ लड़ रहे सभी स्थानीय एवं वैश्विक नेताओं के लिए वेक-अपकॉल है।

वर्ष 2022 में हम ऐतिहासिक पेरिस समझौते के सातवें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं जिस पर लगभग 200 देशों ने हस्ताक्षर किए थे। इन देशों ने कार्बन-डाईऑक्साइड के उत्सर्जन को सीमित करने की दिशा में काम करने के लिए सहमति दी थी ताकि तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक ना बढ़े। इस समझौते के तहत भारत ने 2022 में अपनी रिन्यूएबल (नवीकरणीय) क्षमता को 175 गीगावॉट तक बढ़ाने का लक्ष्य तय किया था।

यदि हम बिजली पैदा करने के तरीकों में बदलाव नहीं करेंगे तब तक किसी भी प्रकार से जलवायु की रक्षा नहीं की जा सकती है क्योंकि अधिकांश प्रदूषण बिजली संयंत्रों से जीवाश्म ईंधन जलाने के कारण पैदा होता है। दूसरी तरफ, बिजली की पहुंच यानि एक्सेस कई विकास कारकों जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, खाद्य सुरक्षा, गरीबी कम करना इत्यादि से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है। इसलिए अगर हम बारिकी से देखे तो कारगर समाधान वहीं है जो कार्बन-रहित टेक्नोलॉजी को बढ़ावा दें और ग्रीन एनर्जी की तरह आर्थिक रूप से प्रतिस्पर्धी हों।

प्रधानमंत्री मोदी ने टेरी (ञ्जश्वक्रढ्ढ) के सम्मेलन में कहा ‘गरीबों तक समान ऊर्जा पहुंच हमारी पर्यावरण नीति की आधारशिला रही है’

पीएम ने ये भी कहा कि पीएम-कुसुम योजना के जरिए सरकार ने किसानों तक अक्षय ऊर्जा पहुंचाई है। नरेंद्र मोदी ने कहा ‘हम किसानों को सौर पैनल स्थापित करने, इसका उपयोग करने और ग्रिड को सरप्लस बिजली बेचने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। स्टैंड अलोन सोलर पंप के साथ-साथ मौजूदा पंपों को सोलराइज करने के प्रयासों को बढ़ाया जा रहा है’।

सनराइज सेक्टर

केंद्रीय बजट 2022-23 ने भी जलवायु कार्रवाई को प्राथमिकता दी और एनर्जीट्रांजिशन, क्लाइमेट एक्शन और इलेक्ट्रिफिकेशन को एक सनराइज सेक्टर के रूप में वर्गीकृत किया। यह इस बात की ओर इशारा करता है कि हालांकि हमारे पास अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए एक थोड़ा ही समय बाकी है लेकिन एक अवसर अभी भी शेष है।

बजट पेश करते हुए, केंद्रीय वित्त मंत्री ने मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए कई अहम ऐलान किए जिसमें प्रोडक्शन लिंक्ड इन्सेंटिव से संबंधित प्रस्ताव भी शामिल है। इसके तहत 280 गीगावॉट की इन्स्टॉल्ड सोलर कैपेसिटी हासिल करने को लेकर घरेलू मैन्युफैक्चरर्स को बढ़ावा देने के लिए मौजूदा 45,00 करोड़ रुपए की राशि बढ़ाकर 19,500 करोड़ रुपए का अतिरिक्त आवंटन किया गया है जिससे अधिक एफिशियंसी वाले मॉड्यूल के प्रोडक्शन में मदद मिलेगी। इससे सोलर पावर डेवलपर्स को ताकत मिलेगी क्योंकि यह सेक्टर अधिकतर आयात पर निर्भर था।

अपने बजट भाषण में श्रीमती निर्मला सीतारमण ने यह भी कहा कि अगले पांच साल में इसके जरिए 60 लाख नए रोजगार के सृजन की संभावना हैं जिससे 30 लाख करोड़ रुपये का एडिशनल प्रोडक्शन होगा।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारण ने अपने बजट भाषण में कहा, ‘280 गीगावॉट की इन्स्टॉल्ड सोलर कैपेसिटी हासिल करने के लिए 19,500 करोड़ रुपए का अतिरिक्त आवंटन किया गया है जिसके तहत यह प्राथमिकता रहेगी कि एफिशियंसी वाले मॉड्यूल का प्रोडक्शन हो जिसमें पूरी तरह से इंटीग्रेडेटयूनिट्स को सोलर पीवी मॉड्लस में बदला जा सके’।

अप्रैल 2021 में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सौर पीवी (फोटो-वोल्टाइक) मॉड्यूल की डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी को बढ़ावा देने के लिए ₹ 4,500 करोड़ की पीएलआई योजना को मंजूरी दी। इस योजना का उद्देश्य इंटीग्रेटेड सौर पीवी मॉड्यूल की 10,000 मेगावॉट निर्माण क्षमता को बढ़ाना था जिसमें वर्तमान में 17,200 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष निवेश होगा। 24,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त आवंटन से पीएलआई योजना के तहत उल्लिखित निवेश की मात्रा और डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी में और बढ़ोतरी होगी।

क्लाइमेट एक्शन की ओर बढ़ता गुजरात

पर्यावरण की रक्षा के लिए पहल करने में गुजरात हमेशा एक कदम आगे रहा है। 2009 में, यह पूरे एशिया में जलवायु परिवर्तन की दिशा में अलग विभाग स्थापित करने वाला पहला राज्य बना था। तभी से गुजरात ने जलवायु परिवर्तन की दिशा में गुजरात ने बहुत काम किया है और ये बात राज्य में मौजूद सौर और पवन ऊर्जा की क्षमता से स्पष्ट है।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने ‘बिल्डिंग ए क्लाइमेट रिजिलिएंट गुजरात’ कार्यक्रम में कहा ”पवन ऊर्जा क्षेत्र में, गुजरात 22 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ देश में दूसरे स्थान पर है। सौर ऊर्जा में, गुजरात 13 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ तीसरे स्थान पर है’’।

 

उदय इंडिया ब्यूरो

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