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मतदाता जागरूकता के लिए अनूठा प्रयास

मतदाता जागरूकता के लिए अनूठा प्रयास

निर्वाचन आयोग के गंभीर प्रयासों के बावजूद 2014 के चुनावों में मतों का प्रतिशत 60-70 प्रतिशत तक ही रहा। चाहे कितनी भी कोशिश कर लें, लोग मतदान के दिन अपने मताधिकार का प्रयोग करने की बजाये उस दिन को एक छुट्टी के रूप में बिताना पसंद करते हैं। जिसकी वजह से एक संपूर्णरूपेण प्रतिनिधि सरकार का गठन नहीं हो पाता। ऐसे ही मतदाताओं के बीच जागरूकता लाने के लिए भारतीय मतदाता संगठन निरंतर प्रयासरत है। भारतीय मतदाता संगठन, जिसका गठन 14 जनवरी 2015 को हुआ था, के प्रमुख रिखब चन्द्र जैन और कन्वेनर दीपक रथ लगातार अपने प्रयासों से मतदाताओं को जागरूक करने की कोशिश कर रहे हैं। दिल्ली चुनावों से पूर्व भारतीय मतदाता संगठन ने मतदाता मित्र की जो अवधारणा विकसित की, उस का अनुकरण चुनावों के दौरान भाजपा ने पन्ना प्रमुख के रूप में किया।

DSC_0022अब जबकि दिल्ली में चुनाव संपन्न हो चुके हैं, केंद्र में भी एक मजबूत सरकार का गठन हो चुका है, तब भारतीय मतदाता संगठन ने लोगों के बीच उनके मताधिकार की महत्ता और इससे जुड़े उनके अधिकारों एवं कर्तव्यों के बारे में जागरूक करने के लिए हाल ही में दिल्ली के कॉस्टीटूशन क्लब में एक संगोष्ठी का आयोजन किया। संगोष्ठी का विषय ‘भारत में लोकतान्त्रिक मूल्यों का विकास’था। इस अवसर पर संगठन प्रमुख रिखब चन्द जैन, कन्वेनर दीपक रथ के अलावा कई गणमान्य व्यक्तियों जिसमे प्रमुख रूप से जगदीश उपासने (पूर्व इंडिया टुडे एग्जीक्यूटिव एडिटर) पारसनाथ (एडिटर दिल्ली प्रेस) और विजय मारू (मैनेजिंग एडिटर रांची एक्सप्रेस) ने संगोष्ठी को संबोधित किया। संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए रिखब चन्द जैन ने कहा ”भारतीय संविधान काफी परिपक्व है और इसमें बदलाव की जगह इसके पालन की जरुरत है। दुनिया के सभी देश इस बात को लेकर हैरान होते हैं कि इतने बड़े देश में चुनाव इतनी निष्पक्षता से कैसे संभव हो पाता है।’’ रिखब चन्द जैन ने इस बात पर जोर दिया की वोट देना ना सिर्फ व्यक्ति का कत्र्तव्य है। बल्कि, अधिकार भी है। उन्होंने आगे कहा कि प्रत्येक नागरिक को अपने मत देने के अधिकार को समझना चाहिए। मत को समझदारी और सही सोच से, सदुपयोग करने का तरीका जानना चाहिए। जो अपने मताधिकार का उपयोग करने नहीं जा रहे उन्हें जगाने की कोशिश करनी होगी। उनको उनकी गलती का अहसास कराना होगा। उन्होंने ई-वोटिंग की व्यवस्था पर भी जोर दिया, ताकि कहीं से भी वोटिंग संभव हो सके। सभा को संबोधित करते हुए राधेश्यामजी ने प्रजातंत्र के मूल्यों को विकसित करने की जरुरतों पर प्रकाश डाला। सेतियाजी ने भारतीय मतदाता संगठन द्वारा मतदाताओं को जागरूक करने के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि चुनाव दूर हैं, फिर भी यही वह समय है जब सोये हुए लोगों को जगाना होगा, उन्हें प्रेरित करना होगा। परेश नाथजी ने जागरूक होने के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा की ई-वोटिंग की व्यवस्था का चौथा नहीं पहला स्तंभ है। भारतीय मतदाता संगठन के कन्वेनर दीपक रथ ने अपने संबोधन में भारत में लोकतांत्रिक मूल्यों के विकास की गाथा दोहराई। उन्होंने बताया कि कैसे इन 65 सालों में भारत अपने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने और निरंतर इन मूल्यों को विकसित करने में प्रयासरत रहा। उन्होंने बताया की कैसे हमारे देश ने तमाम मुश्किलों को झेलते हुए भी अपने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की है, जो कि भारतीय स्वतंत्र संग्राम के दौरान विकसित हुए थे। उन्होंने राजनीति के बढ़ते अपराधीकरण पर चिंता जताते हुए लोगों से अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने की भी अपील की।

DSC_0033इसमे दो राय नहीं है कि लोकतंत्र वास्तव में अधिकाधिक मतदान से ही मजबूत और समृद्ध होता है। क्या हम स्कूली शिक्षा के जरिए बच्चों में मतदान के महत्व का संस्कार नहीं डाल सकते, ताकि वे वयस्क होने पर खुद ही अपने मताधिकार के प्रति जागरूक रहें। वैसे भी हमारे यहां चुनाव-दर-चुनाव मतदान प्रतिशत में बढ़ोतरी हो रही है, जिसके पीछे लोगों में बढ़ रही जागरूकता और निर्वाचन आयोग तथा कुछ सामाजिक संगठनों की अहम भूमिका है। हालांकि संपन्न और खाए-अघाए तबके में ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है जो दिन-रात राजनीति और राजनेताओं को बुरा-भला कहते रहते हैं, लेकिन मतदान के दिन छुट्टी मनाते हुए मतदान केंद्र तक जाने के बजाय घर पर ही मौज-मस्ती करते हैं या सैर-सपाटे पर निकल जाते हैं। कई लोग ऐसे भी होते हैं जो जायज वजहों से चाहते हुए भी मतदान नहीं कर पाते हैं और कई बार व्यवस्था की कमियां इसके लिए जिम्मेदार होती हैं।

इस संगोष्ठी में मौजूद करीब 250 सदस्यों ने निम्नलिखित प्रस्ताव स्वीकृत किये :-

पंचायत से संसद तक प्रत्येक चुनाव में वोटिंग प्रतिशत 95 फीसदी तक हो। ई- वोटिंग की सुविधा प्रत्येक नागरिक को मिले। प्रत्याशियों की सही-सही जानकारी लोगों तक पहुंचे और इसके लिए चुनाव आयोग, राजनैतिक दाल और सरकार से आवश्यक सहकर एवं सहभागिता अपेक्षित है।

इस कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन ललित गर्ग ने किया।

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नीलाभ कृष्ण

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