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सेरोगेसी का मायाजाल

सेरोगेसी का मायाजाल

सरोगेसी के जरिए प्रियंका चोपड़ा मां बनी हैं। उनके मां बनने के साथ ही सरोगेसी पर एक नई चर्चा आरंभ हो गई है, क्योंकि लेखिका तस्लीमा नसरीन ने इस पर कुछ प्रतिक्रिया दी हैं जिसमें उन्होंने कहा है कि ‘सरोगेसी सिर्फ गरीब महिलाओं द्वारा ही संभव है। अमीर लोग अपने स्वार्थ के लिए समाज में गरीबी का अस्तित्व चाहते हैं। आपको बच्चे पालने और उनकी परवरिश करने का शौक है तो आप बेघर बच्चों को गोद ले लीजिए। बच्चों को आप के गुण तो विरासत में मिलने चाहिए। यह बस एक स्वार्थ और अहंकार है। जो औरत सिर्फ इसी के जरिए रेडीमेड बच्चे प्राप्त करती हैं उनको मां बनने की फीलिंग कैसे आती होगी। क्या उन्हें भी वैसी ही फिलिंग्स आती होगी जैसी गर्भ में बच्चा रखकर फिर उसको जन्म देने वाली मां को आती है। मैं सरोगेसी को तब तक स्वीकार नहीं करूंगी जब तक अमीर महिलाएं सरोगेट मॉम नहीं बन जाती। मैं बुर्का भी नहीं पहनूंगी जब तक पुरुष इसे स्वीकार नहीं करते इसी तरह में वेश्यावृत्ति भी स्वीकार नहीं करूंगी। सरोगेसी, बुर्का और वेश्यावृत्ति सब महिलाओं और गरीबों का शोषण है।’

सरोगेसी का विचार एक अपार संभावनाओं को लेकर हमारे सामने प्रस्तुत हुआ। यह उन पेरेंट्स के लिए वरदान साबित हुआ है जो किसी कारणवश माता-पिता नहीं बन पा रहे हैं वे इसके द्वारा माता-पिता बन सकते हैं। परंतु इसके विपरीत इसका दुरुपयोग होना शुरू हो गया है। जैसा कि हम लोग जानते हैं कि अमीर, शारीरिक रूप से स्वस्थ और हर प्रकार की सुविधा से युक्त लोग आज इसका उपयोग करने लगे हैं जिसने हमारे समाज, संस्कृति और मां बनने के एक महान कार्य को मजाक बना कर रख दिया है। उनके लिए इस भाव, प्रेम और गर्भाधान से लेकर बच्चे को जन्म देने की पीड़ा इन सब का समाज में उन्होंने एक शोषक की तरह गरीब महिलाओं के साथ शोषण की प्रक्रिया को आरंभ कर दिया है। क्योंकि गरीबों के पास कोई विकल्प नहीं है। उन्हें बर्तन मांजकर, झाड़ू मारकर या बच्चे पैदा कर जिस भी प्रकार से आर्थिक लाभ प्राप्त होगा, वे करेंगे। वह बेचारी इसके लिए बाध्य हैं।

परन्तु यह बड़े-बड़े सेलिब्रिटी जो अपने आप को शारीरिक रुप से स्वयं को स्वस्थ बताते हैं, फिटनेस का राग अलापते हैं वह इसका सहारा क्यों ले रहे हैं? कहीं ना कहीं यह बात बिल्कुल सही लगती है कि सिर्फ और सिर्फ बच्चे में अपने गुण देखना और समाज में अपना बच्चा कहलाने के लिए जो उनके अंदर एक अहंकार है जो एक स्वार्थ है उसकी प्रतिपूर्ति कर रहे हैं। प्रियंका चोपड़ा, शिल्पा शेट्टी, करण जोहर, प्रीति जिंटा, सनी लियोन, एकता कपूर और तुषार कपूर जैसे लोग सरोगेसी के जरिए माता-पिता बन रहे हैं और रेडीमेड बच्चा घर ले आते हैं और उसके बाद नैनी के हाथों में परवरिश के लिए रख देते हैं। इस प्रकार वे एक जिम्मेदार माता-पिता बनने का नाटक करते हैं।

इससे यह सवाल उठता है कि इनको बच्चे पालने का इतना ही शौक है जिसमें यह अपना करियर, अपना फिगर खराब नहीं करना चाहते और रेडीमेड बच्चा चाहते हैं तो यह क्यों नहीं अनाथ बच्चों को गोद ले लेते। लेकिन नहीं, क्योंकि इससे इनके अहंकार को चोट लग जाएगी। यह अपने आप को भले ही कितना पढ़ा-लिखा कितना भी स्वतंत्र और कितना ही मॉडर्न क्यों ना कह लें परंतु यह अंदर से बिल्कुल संकीर्ण मानसिकता के लोग हैं। ये बस छोटे-छोटे कपड़े पहनना, आजादी के नाम पर शराब, ड्रग्स, धूम्रपान को बढ़ावा देना और अंग्रेजी बोलने जैसी चीजों से यह अपने आप को मॉडर्न दिखाने की कोशिश करते हैं। इनकी मॉडर्न सोच सिर्फ और सिर्फ अपना स्वार्थ सिद्ध करने तक सीमित है। सबसे घृणास्पद बात तो यह है कि मां जिसे भगवान से भी ऊंचा दर्जा दिया जाता है उसका भी मजाक बना कर रख दिया है क्योंकि इसी प्रकार सरोगेसी का यदि दुरुपयोग होता रहा तो सारे अमीर लोग गरीबों का शोषण कर रेडीमेड बच्चा पैदा करने लगेंगे और यह एक धंधा बन जाएगा जो समाज और संस्कृति को दूषित कर देगा। आने वाले समय में मां का कोई मूल्य नहीं रह जाएगा जो अमीरों का एक प्रोजेक्ट होगा जो गरीब उसे पूरा करेंगे 9 महीने में एक रकम के साथ। वैसा रेडीमेड बच्चा उस मां के लिए और इस देश के लिए कितना जिम्मेदार होगा और उसे इन दोनों से कितना लगाव होगा? क्या हम वैसे बच्चों से भगत सिंह, स्वामी विवेकानंद, सुभाषचंद्र बोस जैसे महान लोगों की कल्पना कर सकते हैं?

शायद नहीं, क्योंकि हमारी भारतीय परंपरा में मां बनना एक बहुत बड़ा कर्तव्य और महान कार्य है जो पूरी श्रद्धा-भाव, प्रेम और दो लोगों के प्रेम की एक नई मजबूत फल के रुप में इस धरती पर अवतरित होता है। यह ना केवल माता पिता बल्कि देश को प्रफुल्लित करता है। जिसके लिए मां पिता और पूरा परिवार उसका ख्याल रखना, अच्छी-अच्छी पुस्तके पढ़कर सुनाना, ज्ञान देना, संस्कार देना, उच्च आदर्श देना वह उनके गर्भाधान से ही आरंभ हो जाती है। इस भारतीय परंपरा के विपरीत इस सरोगेसी का दुरुपयोग किया जा रहा है। इतने पैसे देने के और सारी सुविधाओं के बावजूद कैसे प्रियंका की प्रीमैच्योर बेबी का जन्म हुआ है। जिससे हम समझ ही सकते है कि जिनके लिए बच्चा पैदा करना एक मात्र धंधा है उसका इस बच्चे से कोई भावात्मक लगाव नहीं है वो जल्द से जल्द इससे छुटकारा मिल जाए उतना अच्छा है उपर्युक्त घटना से हम इसे भली भांति समझ सकते हैं। इन सब के बावजूद, आजकल की अमीर महिलाएं और पुरुष इनको बस अपने अहंकार का अपने वंश का नाम देने और अपनी संपत्ति का वारिस अपने अंश को देने के लिए बिना किसी कष्ट के पैसे देकर रेडीमेड बच्चा अपने घर ले आते हैं और अपनी अमीरी का दिखावा करते हैं जिससे अन्य लोग भी आने वाले समय में इससे प्रभावित होंगे। वह भी यही सोचेंगे कि इतना कष्ट और इतना समय एक बच्चे के लिए क्यों व्यर्थ करना।

देश में पैसे वालों की कोई कमी नहीं है तो जितने पैसे वाले हैं वह पैसे देकर रेडीमेड बच्चा की ओर आकर्षित होंगे जो उस बच्चे और इस देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। जब हम एक बार अपने जड़ से अलग हो जाते हैं तो उसे दोबारा जोडऩा काफी मुश्किल होता है और यही अवस्था आने वाले भविष्य में मां बनने जैसी एक नेचुरल प्रोसीजर और एक भावनात्मक लगाव को पूरी तरह खत्म कर देगा और सामान्य से सामान्य औरतें भी सरोगेसी के माध्यम से बच्चा पैदा करने की इच्छा में रहेंगी।

 

प्रेरणा कुमारी

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