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हिन्दुस्तानी एकेडमी, प्रयागराज का 95वां स्थापना दिवस गाँधी सभागार में धूमधाम से मनाया गया

हिन्दुस्तानी एकेडमी, प्रयागराज का 95वां स्थापना दिवस गाँधी सभागार में धूमधाम से मनाया गया

हिन्दुस्तानी एकेडमी, प्रयागराज का 95वां स्थापना दिवस गाँधी सभागार में धूमधाम से मनाया गया। स्थापना दिवस के अवसर पर माँ वीणापाणि की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ ही विद्वत सम्मान समारोह में प्रबुद्ध साहित्यिक मनीषियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व कैबिनेट मंत्री नरेन्द्र कुमार सिंह गौर ने की।इस अवसर पर एकेडमी अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह ने बताया कि, प्रयागराज के वयोवृद्ध साहित्यकार, कवि और प्रखर पत्रकार रहे पंडित डॉ राजकुमार शर्मा को सम्मानित किया गया। आपको बताते चलें कि, डॉ शर्मा, छायावाद युग के चार प्रमुख स्तम्भों में एक रहीं महादेवी वर्मा के साथ भी कार्य कर चुके हैं।एकेडमी अध्यक्ष श्री सिंह ने आगे बताया कि, डॉ राजकुमार शर्मा ने साहित्य के क्षेत्र में अपनी अद्वितीय प्रतिभा का लोहा मनवाया है। ‘रावण की निगाहें’, ‘देवता नहीं हूँ मैं’, ‘मुक्तक शतक’ तथा ‘निराला के स्मरणीय संस्मरण’ उनकी उल्लेखनीय पुस्तकें हैं, जिनमें इनके लेखन की बानगी देखी जा सकती है।उन्होंने बेबाकी से कहा कि, ‘एक कुशल लेखक होने के साथ ही राजकुमार जी एक बेहद संवेदनशील सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी जाने जाते हैं।’ हिन्दुस्तानी एकेडमी शताब्दी पूर्ण करने की ओर अग्रसर डॉ राजकुमार शर्मा को सम्मानित कर गौरांवित हो रही है।विदित हो कि, डॉ राजकुमार शर्मा ने पद्मश्री कन्हैया लाल मिश्र, प्रभाकर चाचा एवं पिता आचार्य जगदीश चंद्र मिश्र के सान्निध्य में रहकर लेखन एवं पत्रकारिता की बारीकियों को समझा। आज भी 89 वर्ष की आयु में वे लेखन में सक्रिय हैं। वर्तमान समय में, वे स्वजीवन पर आधारित एक पुस्तक पर जुटे हुए हैं।

इन मनीषियों का हुआ सम्मान
इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्य, कला,संस्कृति की मासिक पत्रिका नूतन कहानियां के संपादक सुरेन्द्र अग्निहोत्री, पूर्व कुलपति प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी, साहित्यकार ब्रजदेव पांडेय, आईपीएस प्रताप गोपेन्द्र, वरिष्ठ कवि फतेह बहादुर सिंह, कथाकार प्रो. बाबू राम त्रिपाठी, आलोचक प्रो. मंगला प्रसाद सिंह, वरिष्ठ साहित्यकार रामसनेही लाल शर्मा ‘यायावर’ एवं आचार्य बीएचयू प्रो. श्रद्धा सिहं को भी प्रतीक चिन्ह एवं शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया।
पूर्व कैबिनेट मंत्री नरेन्द्र कुमार सिंह गौर ने कहा कि हिन्दुस्तानी एकेडेमी हिन्दी, उर्दू, अवधी बुन्देली ब्रजभाषा के विकास एवं संरक्षण के लिये निरन्तर प्रयासरत है। एक मानक संस्था हैं।‘हिन्दुस्तानी एकेडेमी’ की स्थापना महान् विभूतियों ने की थीं। इस पवित्र स्थल से पन्त, महादेवी, अकबर इलाहाबादी, निराला जैसे विद्वान् जुड़े रहे।’हिन्दुस्तानी एकेडेमी उत्तर प्रदेश की प्राचीनतम संस्थाओं में से एक है। आज से 95 वर्ष पहले 29 मार्च 1927 ई. को हिन्दुस्तानी एकेडेमी अपने जिन उद्देश्यों को लेकर स्थापित हुई उनका संवर्धन एवं विकास आज भी एकेडेमी की प्राथमिकताओं में है। एकेडमी के संस्थापकों ने जो स्वप्न देखे उनको पूर्ण करने का दायित्व ही हमारा शिवसंकल्प है।

कार्यक्रम का संचालन डाॅ. विनम्र सेन सिंह ने किया।
इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार स्नेह मधुर सहित नगर के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

 

 

रितिका अग्निहोत्री

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