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निर्यात के क्षेत्र में भारत की नई उपलब्धि

निर्यात के क्षेत्र में भारत की नई उपलब्धि

दुनिया के सभी देश अपने यहां निर्मित होने वाली वस्तुओं तथा अपने यहां उपयोग से अधिक पाए जाने वाले खाद्यान्नों का निर्यात करते हैं और जिन चीजों की उनके यहां कमी होती है, उन्हें दूसरे देशों से आयात करते हैं। यह आयात और निर्यात बड़े कारोबारियों द्वारा किया जाता है। आयात और निर्यात की ये चेन ही विश्व के विभिन्न देशों के बीच व्यापारिक संबंध स्थापित करती है और ये व्यापारिक संबंध ही विभिन्न देशों के बीच की दोस्ती को मजबूत करते हैं। भारत भी बहुत सी वस्तुओं का आयात करता है और बहुत सी वस्तुओं को अपने यहां से निर्यात भी करता है। हाल ही में भारत के निर्यात में बड़ा उछाल देखने को मिला है। दरअसल भारत ने इस वित्त वर्ष के दौरान 31 मार्च तक 400 बिलियन अमेरिकी डॉलर के अपने माल निर्यात का लक्ष्य रखा था, जो उसने 9 दिन पूर्व ही पूरा कर लिया है। निर्यात के क्षेत्र में यह भारत की एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि अप्रैल-मार्च 2022 के दौरान निर्यात 37 प्रतिशत बढक़र 400 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया है, जो 2020-21 के दौरान 292 बिलियन अमेरिकी डॉलर था। यह उपलब्धि ‘आत्मनिर्भर भारत’ की यात्रा में निश्चित ही एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी और गर्व की बात तो यह है कि ये उपलब्धि कोविड महामारी की आपदा के चलते और रूस-यूक्रेन जंग के महासंकट के बीच हासिल हुई है। इस महान उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों, बुनकरों, एमएसएमई, निर्माताओं, निर्यातकों को बधाई दी है। प्रमुख निर्यातक सामानों में पेट्रोलियम उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक सामान, इंजीनियरिंग सामान, चमड़ा, कॉफी, प्लास्टिक, मांस और डेयरी उत्पाद, समुद्री उत्पाद और तंबाकू आदि हैं।

असल में किसी भी देश के विकास का पैमाना उस देश की अर्थव्यवस्था होती है और किसी देश का निर्यात जितना अधिक होता है, उसकी अर्थव्यवस्था का विकास भी उतना ही अधिक होता है। इसीलिए बहुत से देश मजबूत निर्यात के बल पर ही अपने विकास को गति दे पाए हैं और यही सोच भारत के लिए भी सही साबित हो रही है कि अगर हम निर्यात को गति देंगे, तो इससे हमारे देश में विभिन्न वस्तुओं के निर्माण में भी तेजी आएगी, जिससे देश के व्यापार में वृद्धि होगी, विभिन्न उद्योग धंधे स्थापित होंगे, रोजगार बढ़ेगा, लोगों को नौकरी मिलेगी और देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। इससे देश आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में भी आगे बढ़ेगा। इसीलिए निर्यात की जब भी बात की जाती है तो उसके आंकड़ों पर सबकी खास नजर रहती है। रूस-यूक्रेन युद्ध के संकट के समय पूरे विश्व की स्थितियां बदल रही हैं। रूस पर कई प्रतिबंध लगने से तथा रूस के पश्चिमी देशों से संबंध खराब होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़े बदलाव आ रहे हैं। इन परिस्थितियों में भारत अनेक चुनौतियों का सामना करते हुए, अपने दृढ़ संकल्प, लगन, क्षमता और प्रतिभा के साथ अनेक बाधाओं को पार करता हुआ आगे बढ़ रहा है। निर्यात में आए इस भारी उछाल के पीछे सरकार की कुशल रणनीति काम कर रही है। आंकड़ों पर ध्यान दें तो पता चलता है कि भारत ने रोजाना एक बिलियन डॉलर से ज्यादा का सामान दूसरे देशों में भेजा है। वहीं महीने की बात करें तो ये आंकड़ा औसतन 33 अरब डॉलर का है।

इंजीनियरिंग वस्तुओं का निर्यात 2021-22 के दौरान पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत बढ़ा है। महामारी के दौरान, कृषि क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज  हुई है, जिसमें भारत की भूमिका खाद्य पदार्थों/अनिवार्य कृषि उत्पादों के एक प्रमुख वैश्विक आपूर्तिकर्ता देश के रूप में उभरकर सामने आई है। कृषि उत्पादों में अन्य वस्तुओं के अतिरिक्त, चावल (बासमती तथा गैर बासमती दोनों), समुद्री उत्पादों, गेहूं, मसालों तथा चीनी जैसी वस्तुओं में 2021-22 के दौरान निर्यात में सर्वाधिक उछाल आया है।

निर्यात के क्षेत्र में मिली इस बड़ी उपलब्धि के पीछे सरकारी प्रयास सराहनीय हैं। असल में राज्य और जिला दोनों स्तर पर उत्पादों और वस्तुओं को शामिल किया गया था और कैसे उनके निर्यात को बढ़ाया जाए, इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया। सरकार इस बात पर भी नजर बनाए हुए थी कि निर्यातकों की क्या समस्याएं हैं और उन्हें कैसे दूर किया जाए? इसके अलावा विभिन्न उद्योगों, निर्यात को बढ़ाने वाले काउंसिल व वित्त धारकों से भी सरकार नजदीकी तौर पर जुड़ी रही। सरकार उद्योगों तथा निर्यातकों को उनके निर्यात निष्पादन में बढ़ावा देने के लिए, एक अनुकूल वातावरण तथा बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने का पुरजोर प्रयास कर रही है। लक्ष्य के अनुरूप नीतियों तथा योजनाओं को उनके लाभ के लिए लागू तथा कार्यान्वित किया जा रहा है। महामारी के बीच भी रोडटेप तथा आरओएससीटीएल को सुगमता से लागू कर देना, निर्यातकों के कल्याण के प्रति सरकार के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। ब्याज समकरण स्कीम को निर्यातकों तक विस्तारित कर दिया गया है और इससे बड़ी संख्या में एमएसएमई निर्यातकों को लाभ मिलने की संभावना है। विनिर्माण के 13 प्रमुख क्षेत्रों के लिए वित्त वर्ष 2021-22 से आरंभ होने वाली पीएलआई स्कीमों की घोषणा कर दी गई है। उचित वित्त पोषण, बीमा, ऋण प्रावधान उपलब्ध कराकर निर्यात को बढ़ावा देने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है। इस तरह विविध हितधारकों की सहायता से जिला स्तर से लेकर विदेशी बाजारों तक एक मजबूत बैकवर्ड फॉरवर्ड लिंकेज की स्थापना की जा रही है। सभी हितधारकों अर्थात जिला इकाई, राज्य एवं केंद्रीय सरकार, मंत्रालयों, ईपीसी, एमएसएमई निर्यातक समुदायों तथा विदेश स्थित हमारे मिशनों के बीच प्रभावी तथा कुशल समन्वय पर जोर दिया गया है, जिससे निर्यात लक्ष्यों को पूरा करने के लिए, संबंधित विभागों के बीच सूचनाओं का निर्बाध प्रवाह सुनिश्चित किया जा सके।

 

 

रंजना मिश्रा

 

 

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