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परीक्षा के तनाव के शमन के लिए आत्मविश्वास जरूरी

परीक्षा के तनाव के शमन के लिए आत्मविश्वास जरूरी

परीक्षा का भय विद्यार्थी जीवन की सबसे कॉमन घटना में शुमार होता है। परीक्षा के इस भय की तीव्रता कभी- कभी इतनी अधिक होती है कि यह स्ट्रेस और डिप्रेशन का भी रूप ले लेता है। सच पूछिए तो विद्यार्थी जीवन के लिए यह स्थिति बहुत ही खतरनाक है। यह परीक्षा में उनके परफॉरमेंस के साथ-साथ करिअर और जीवन को भी अहम रूप से प्रभावित करता है। अप्रैल और मई महीनों में सीबीएसई की दसवीं और बारहवीं कक्षाओं की परीक्षाओं के लिए तैयारी जोरों पर है और स्टूडेंट्स विभिन्न प्रकार की चिंताओं और तनावों से गुजर रहे हैं। सच पूछिए तो परीक्षा के तनाव का प्रत्यक्ष संबंध मनोविज्ञान से है। तनाव कमजोर मन और आत्मविश्वास से उत्पन्न होता है। यही कारण है कि यदि स्टूडेंट्स अपने मन को मजबूत कर ले और अपने कॉन्फिडेन्स लेवल को हमेशा ऊंचा रखे तो परीक्षा के तनाव को बखूबी नियंत्रित किया जा सकता है।

आत्मविश्वास के साथ अध्ययन करना सीखें 

आत्मविश्वास का अर्थ खुद की काबिलियत में विश्वास होता है। जब हमें अपने ही टैलेंट में विश्वास नहीं होता है और खुद को कमजोर और अयोग्य समझने लगते हैं तो स्वाभाविक रूप से डर और तनाव उत्पन्न हो जाता है। आत्मविश्वास में कमी के कारण निराशा उत्पन्न होती है और पढ़ाई पर मन केन्द्रित नहीं हो पाता है। हम इस सत्य को झूठला नहीं सकते हैं कि सफलता के लिए कॉन्फिडेंस काफी अहम होता है। जब हमें खुद में भरोसा होता है और हम किसी भी समस्या का सामना करने के लिए खुद को सक्षम मानते हैं तो कठिन चीजें भी आसान लगने लगती हैं। लिहाजा स्टूडेंट्स को अपना कॉन्फिडेंस हर परिस्थिति में ऊंचा करके रखना चाहिए।

जीवन के रूटीन को व्यवस्थित करना है जरूरी

परीक्षा का समय भ्रम और भय का समय होता है। स्टूडेंट्स परीक्षा की अच्छी तैयारी के लिए परेशान रहते हैं और यही कारण है कि वे अपने जीवन के रूटीन के प्रति काफी लापरवाह हो जाते हैं। वे न तो समय पर  सोते और जगते हैं और न ही खाना खाते हैं। दोस्तों के साथ घूमना-फिरना भी बंद कर देते हैं। हालत तो ऐसे भी हो जाते हैं कि वे अपने पेरेंट्स और परिवार वालों से भी बात नहीं करते हैं और खुद को अपने में ही कैद कर लेते हैं। अपनी दिनचर्या के प्रति यह लापरवाही और उदासीनता स्टूडेंट्स के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को काफी नुकसान पहुंचाता है। इसीलिए यह आवश्यक है कि परीक्षा के समय में भी स्टूडेंट्स को अपनी सामान्य दिनचर्या के साथ स्वाभाविक जीवन बिताना चाहिए।

तनाव के कारणों को जानने की कोशिश करें 

परीक्षा से संबंधित तनावों के संदर्भ में विद्यार्थियों के लिए यह जानना जरूरी है कि आखिर उन्हें क्या चीज से डर लगता है। इस प्रकार जब समस्याओं के बारे में पता लग जाता है तो समाधान की राहें भी आसान हो जाती हैं। सच पूछें तो परीक्षा तनाव का मुख्य कारण परीक्षा की तैयारी की कमी होती है। जब हमें यह पता हो जाता है कि हमारे लिए कौन-सा विषय कठिन है और उसी की तैयारी के लिए तनाव में रहते हैं तो उस विषय की इंटेंसिव तैयारी शुरू कर देने से धीरे-धीरे भय और उससे उत्पन्न तनाव का लेवल भी घटता जाता है।

समस्याओं को गुनते नहीं रहें, समाधान ढूंढें  

परीक्षा के समय प्राय: यह देखा जाता है कि विद्यार्थी अपनी परीक्षाओं की तैयारी के डर और तनाव को किसी से बताते नहीं हैं। वे खुद अपनी समस्याओं में उलझे और खोए रहते हैं। ऐसी स्थिति में तनाव और बढ़ता है, समस्या गंभीर होती जाती है। संकट की ऐसी परिस्थति में अपने पेरेंट्स, टीचर्स और फ्रेंड्स से खुल कर बातें करने और उनके साथ समस्याओं को साझा करने से उचित मार्गदर्शन के साथ आवश्यक मोटिवेशन भी मिलता है।

सकारात्मक सोचें और भविष्य की चिंता नहीं करें

जीवन में हम अपनी सोच से ही बनते और बिगड़ते हैं। हमारी सोच हमारा प्रारब्ध तैयार करता है। नकारात्मक सोच से जहां हमारी ऊर्जा और प्रेरणा का क्षय होता है और हम जीवन की राह में आगे नहीं बढ़ पाते हैं वहीं सकारात्मक सोच से जीवन की समस्याओं का समाधान पाया जा सकता है। परीक्षा के समय स्टूडेंट्स को हमेशा निगेटिव थिंकिंग से बच कर रहना चाहिए। इतना ही नहीं खुद को निगेटिव थिंकिंग वाले लोगों और दोस्तों की सोहबत से भी महफूज रखना जरूरी होता है। निगेटिव थिंकिंग से कॉन्फिडेन्स लेवल कम होता जाता है और हमारी प्रतिभा कुंद पड़ जाती है। अच्छी और सकारात्मक सोच से जीवन की मुश्किलें आसान होती जाती हैं और भय कम होता जाता है।

योजना बनाएं और टाइम को मैनेज करना सीखें

जीवन के किसी भी क्षेत्र में अच्छा करने के लिए प्लानिंग और टाइम मैनेजमेंट अहम फ़ैक्टर्स होते हैं। योजना से कठिन कार्य को भी आसान बनाया जा सकता है और टाइम को आसानी से मैनेज किया जा सकता है। इसीलिए इन दोनों को सफलता का रोडमैप कहा जाता है। परीक्षा की तैयारी के लिए उपलब्ध समय के अनुसार टाइम टेबल बना लेने से जीवन में अव्यवस्था नहीं रहती है। इस प्रकार की योजनाबद्ध स्टडी से कठिन विषयों की तैयारी भी अच्छी हो जाती है और परीक्षा का तनाव क्रमश: खत्म होता जाता है।

खुद के मन बहलाव के लिए समय और तरीके ढूंढे

इस दुनिया में हर व्यक्ति का अपना-अपना मूड कन्डिशनर होता है जो निराशा, तनाव और चिंता सरीखे कठिन परिस्थितियों से उबरने में मदद करती है। परेशानी की परिस्थिति में कोई गाने सुनता है, गाने गुनगुनाता है तो कोई अपने दोस्तों के साथ बातें करता है या कोई खेल खेलता है या फिर फिल्में देखता है। कोई डायरी लिखता है तो कोई पेंटिंग बनाता है। कोई वॉकिंग करता है तो कोई शॉपिंग के लिए जाता है। इस प्रकार के साधनों के उपयोग से मन को तनाव से बाहर निकालकर सीरीअस स्टडी के लिए खुद को तैयार करने में काफी मदद मिलती है।

खुद की तुलना किसी और से नहीं करें

इस दुनिया में हर व्यक्ति में विलक्षण प्रतिभा होती है, हर व्यक्ति अद्भुत होता है। यदि आप किसी क्षेत्र विशेष में अच्छा नहीं कर पाते हैं तो उस क्षेत्र के सेलिब्रिटी से खुद की तुलना बंद कर दें। इससे निराशा और हताशा के अतिरिक्त और कुछ भी हासिल नहीं होता है। खुद में उस प्रतिभा की तलाश करें जिसकी बराबरी इस दुनिया में कोई नहीं कर सकता है। जब आपको अपनी विलक्षण प्रतिभा का पता लग जाए तो उसमें शीर्ष पर पहुंचने के लिए कठिन मेहनत और अथक प्रयास करें। ऐसा करने से जीवन तनावमुक्त रहता है और मनचाही सफलता हासिल होने मे संदेह शेष नहीं रह जाता है।

 

श्रीप्रकाश शर्मा
(लेखक प्राचार्य, जवाहर नवोदय विद्यालय, गढ़बनैली, पूर्णिया, हैं)

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