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विकास की नयी प्रयोगशाला

विकास की  नयी प्रयोगशाला

गठन के समय हिमाचल प्रदेश में विभिन्न सुविधाओं का अभाव था। यहां की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और संसाधनों की कमी के कारण प्रदेश को विकास की राह पर आगे ले जाना एक बड़ी चुनौती थी। पेयजल, बिजली, सड़क तथा शैक्षणिक व स्वास्थ्य संस्थानों जैसी मूलभूत सुविधाएं नाम मात्र थीं। लेकिन प्रदेश के मेहनती और ईमानदार लोगों ने इन चुनौतियों का सामना करते हुए हिमाचल को एक खुशहाल राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रदेश के गठन के बाद हिमाचल प्रदेश ने विकास की राह पर तेजी से अपने कदम आगे बढ़ाए और आज यह राज्य देश के अन्य बड़े राज्यों के लिए भी विकास का मॉडल बना है।

प्रदेशवासियों के आशीर्वाद और सहयोग से वर्तमान राज्य सरकार ने 27 दिसम्बर 2022 को सत्ता की बागडोर संभालते ही दृढ़ संकल्प लिया कि एक नई सोच और मजबूत इरादों के साथ प्रदेश और यहां के लोगों की बेहतरी के लिए काम करेंगे। राज्य सरकार ने भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र को अपने नीतिगत दस्तावेज के रूप में अपनाकर लोगों से किए सभी वायदों को ही पूरा नहीं किया, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कई नई योजनाएं और कार्यक्रम आरंभ कर जन कल्याण की दिशा में कार्य भी किया है।

राज्य सरकार ने राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से कार्य करने के बजाय केवल प्रदेशवासियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और प्रदेश के तीव्र एवं संतुलित विकास पर ध्यान केंद्रित किया है। कोरोना महामारी के कारण हिमाचल को भी संकट के दौर से गुजरना पड़ा लेकिन लोगों के सहयोग से राज्य सरकार ने इस स्थिति पर नियंत्रण पाया और विकट परिस्थितियों में भी विकास की गति को धीमा नहीं पडऩे दिया। प्रदेश सरकार संवदेनशील, पारदर्शी और जवाबदेह शासन सुनिश्चित बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।

बुजुर्ग हमारा अभिमान हैं और उनका सम्मान करना हमारा दायित्व है। राज्य सरकार ने बुजुर्गों को पेश आने वाली परेशानियों को नजदीकी से अनुभव किया और उन्हें दूर करने का संकल्प लिया ताकि वे सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर सकें। प्रदेश की भाजपा सरकार ने अपनी पहली ही मंत्रिमंडल की बैठक में बिना किसी आय सीमा वृद्धावस्था पेंशन प्राप्त करने की आयु 80 वर्ष से घटाकर  60 वर्ष कर दिया गया है। इस फैसले से इस साल लगभग एक लाख और लोगों को पेंशन का लाभ मिलेगा। वर्तमान राज्य सरकार के कार्यकाल में 2 लाख 21 हजार लोगों को पेंशन स्वीकृत की गई है। वर्ष 2017 में जब भाजपा सरकार सत्ता में आई, उस समय सामाजिक सुरक्षा पेंशन पर करीब 436 करोड़ रुपये खर्च किए जाते थे जबकि आज 1300 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा रहे हैं।

सरकार ने पाया कि लोगों को अपने विभिन्न सरकारी कार्य करवाने के लिए कई बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं जिससे धन और समय दोनों जाया होते हैं। प्रदेशवासियों को इन परेशानियों से मुक्त करने और घर-द्वार के नजदीक ही उनकी शिकायतों का निवारण सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश सरकार ने जनमंच की अनूठी पहल की। यह प्रसन्नता का विषय है कि यह कार्यक्रम बहुत लोकप्रिय साबित हुआ है। अब तक 256 स्थानों पर आयोजित कुल 26 जनमंचों में प्राप्त 55 हजार 249 समस्याओं में से अधिकांश का निपटारा किया जा चुका है।

इसी पहल में एक और कदम आगे बढ़ाते हुए हमने मुख्यमंत्री सेवा संकल्प हेल्पलाइन-1100 शुरू की जिसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति घर बैठे ही अपनी शिकायत ऑनलाइन दर्ज करवाकर एक निश्चित समय की अवधि में उसका समाधान पा सकता है। इस हेल्पलाइन के माध्यम से 19 मई 2022 तक 3,82,457 प्राप्त हुई हैं जिनमें से 3,66,627 का निपटारा किया जा चुका है।

रसोई के चूल्हे के लिए लकडिय़ां इक_ा करने में समय की बर्बादी और धुएं से उनके स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान से महिलाओं को छुटकारा दिलाने में केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना कारगर साबित हुई है। इस योजना का लाभ उठाने से वंचित रहे प्रदेश के और पात्र परिवारों के लिए हमारी सरकार ने मुख्यमंत्री गृहिणी सुविधा योजना आरम्भ की। इस योजना के अंतर्गत प्रदेश के 3 लाख 31 हजार परिवारों तथा प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत 1 लाख 37 हजार परिवारों को नि:शुल्क गैस कनेक्शन सहित तीन सिलेंडर नि:शुल्क उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। इस वित्त वर्ष से इन दोनों योजनाओं के अंतर्गत लाभार्थियों को एक और अतिरिक्त नि:शुल्क सिलेंडर प्रदान करने का निर्णय लिया है।

प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री शगुन योजना शुरू की है जिसके अंतर्गत बी.पी.एल. परिवारों की बेटियों की शादी के लिए 31 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। कुल 4,437 बेटियों को 13.76 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। बेसहारा महिलाओं और लड़कियों के विवाह के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करने में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना बहुत लाभदायक साबित हुई है। कुल 6,730 बेटियों को 29.57 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है।

राज्य सरकार ने हिमकेयर योजना शुरू की है जिसके अंतर्गत एक परिवार के पांच सदस्यों को एक साल में 5 लाख रुपये तक के नि:शुल्क इलाज की सुविधा दी जा रही है। अभी तक लगभग 5 लाख 97 हजार परिवार पंजीकृत किए जा चुके हैं तथा 2 लाख 84 हजार लोगों के मुफ्त ईलाज के लिए 266.59 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इस योजना के अंतर्गत नए परिवारों का पंजीकरण अब पूरे साल होता रहेगा। प्रदेश में लागू की जा रही केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत 4 लाख 31 हजार परिवार पंजीकृत हैं तथा 1 लाख 41 हजार रोगियों के उपचार के लिए 175 करोड़ 57 लाख रुपये खर्च किए गए हैं।

गम्भीर बीमारियों से पीडि़त लोगों को वित्तीय सहायता देने के लिए प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री सहारा योजना शुरू की है जिन्हें उपचार के लिए 3 हजार रुपये की मासिक आर्थिक सहायता दी जा रही है। अभी तक इस योजना से 19 हजार 434 लाभार्थियों को उपचार के लिए 69 करोड़ 61 लाख रुपये प्रदान किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवाई योजना के अंतर्गत प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में 1374 प्रकार की दवाईयां नि:शुल्क उपलब्ध करवाई जा रही हैं। इस योजना पर सरकार 216 करोड़ रुपये से अधिक व्यय कर चुकी है।

मुख्यमंत्री चिकित्सा कोष के माध्यम से गंभीर रोगों से ग्रस्त गरीब लोगों को प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ पीजीआई चंडीगढ़, एम्स दिल्ली और चंडीगढ़  में सैक्टर 32 स्थित सरकारी अस्पताल में मुफ्त इलाज की सुविधा प्रदान की जा रही है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार से प्रदेश को बिलासुपर में एम्स और ऊना में पीजीआई के सेटेलाइट सेंटर और तीन मेडिकल कॉलेजों की सौगात मिली है। भारत सरकार ने प्रदेश के लिए एक मेडिकल डिवाइस पार्क स्वीकृत किया है जिसका कार्य इस वर्ष नालागढ़ में आरंभ हो जाएगा। इस पार्क से प्रदेश में 5 हजार करोड़ रुपये का निवेश होगा और 10 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा।

प्रदेश सरकार युवाओं को रोजगार प्रदान के लिए अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध करवाने का प्रयास कर रही है। इस दिशा में मुख्यमंत्री स्वावलम्बन योजना बहुत प्रभावशाली साबित हुई है। इसके अंतर्गत युवाओं को व्यापारिक गतिविधियां आरंभ करने के लिए एक करोड़ रुपये तक की मशीनरी व संयंत्र में निवेश करने पर 25 प्रतिशत उपदान दिया जा रहा है। इस साल से महिलाओं को मिलने वाले उपदान को 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 35 प्रतिशत तथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं दिव्यांगों के लिए 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 प्रतिशत किया है। इस योजना के अंतर्गत लगभग 624 करोड़ रुपये के निवेश की 3 हजार 758 इकाईंयां स्थापित की गईं हैं जिनमें लगभग 10 हजार से अधिक युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं।

प्रदेश के आर्थिक विकास में निवेश के महत्व को ध्यान में रखते हुए वर्तमान राज्य सरकार ने निवेश आकर्षित करने के लिए ठोस पहल की है। नवम्बर, 2019 में प्रदेश में पहली बार धर्मशाला में ग्लोबल इन्वेस्टर्ज मीट का आयोजन किया गया जिसमें 96 हजार 721 करोड़ रुपये निवेश वाली 703 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। इसके एक महीने बाद ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शिमला में आयोजित पहले ग्राउंड ब्रेकिंग समारोह में 13 हजार 656 करोड़ रुपये लागत की 240 परियोजनाओं का शिलान्यास किया।

प्रदेश सरकार का चार वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के अवसर पर 27 दिसम्बर, 2021 को मंडी में आयोजित दूसरे ग्राउंड ब्रेकिंग समारोह के दौरान प्रधानमंत्री ने 28 हजार 197 करोड़ रुपये लागत की 287 निवेश परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास किए। प्रदेश में अब तक लगभग 50 हजार करोड़ रुपये के निवेश वाली औद्योगिक परियोजनाओं को धरातल पर उतारा जा चुका है। यह बहुत प्रसन्नता का विषय है कि व्यापार में सुगमता में प्रदेश की रैंकिंग 16वें स्थान से 7वें स्थान पर पहुंच गई है।

राज्य सरकार ने किसानों व बागवानों की आमदनी बनाने, बेहतर सिंचाई एवं विपणन सुविधाएं उपलब्ध करवाने तथा जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा के लिए कई नई और प्रभावी योजनाएं आरम्भ की हैं। प्रदेश सरकार की प्राकृतिक खेती-खुशहाल किसान योजना कृषि क्षेत्र को एक नया आयाम देने में कारगर साबित हुई है। प्रदेश के एक लाख 71 हजार से अधिक किसान इस प्रणाली को अपना चुके हैं। मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना के अंतर्गत राज्य सरकार व्यक्तिगत और सामूहिक तौर पर खेतों की सोलर बाड़बंदी के लिए उपदान की सुविधा प्रदान कर रही है।

प्रदेश में एकीकृत बागवानी मिशन के कार्यान्वयन से बागवानी विकास के लिए उपकरण, जल भण्डारण टैंक और फूलों की संरक्षित खेती आदि के लिए उपदान दिया जा रहा है। इस मिशन के अंतर्गत 135 करोड़ 54 लाख रुपये व्यय कर 16 हजार 850 किसानों को लाभान्वित किया गया है। प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों में बागवानी विकास के लिए एच.पी. शिवा योजना कार्यान्वित की जा रही है।

प्रदेश सरकार ने बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत प्रदान करते हुए 125 यूनिट तक बिजली मुफ्त करने का फैसला लिया है। प्रदेश सरकार के इस फैसले से लगभग 11 लाख घरेलू बिजली उपभोक्ता लाभान्वित होंगे। किसानों के लिए बिजली की दर 30 पैसे प्रति यूनिट की गई है।

मुख्यमंत्री रोशनी योजना के अन्तर्गत गरीब लोगों को 12 हजार 837 पात्र परिवारों को मुफ्त बिजली कनेक्शन दिए जा चुके हैं। इस वित्तीय वर्ष में 5 हजार अतिरिक्त पात्र परिवारों को बिजली कनेक्शन दिए जाएंगे।

हमने ग्रामीण क्षेत्रों के बी.पी.एल परिवारों को पक्का मकान बनाने के लिए मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 6 हजार 356 लाभार्थियों को 1 लाख 50 हजार रुपये प्रति परिवार की की दर से आर्थिक सहायता प्रदान की है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत पिछले चार वर्षों में लगभग 7100 आवास स्वीकृत किए गए हैं तथा प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी के अंतर्गत 7 हजार 404 घरों का निर्माण किया गया है।

हिमाचल के सभी लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। केंद्र सरकार द्वारा संचालित जल जीवन मिशन के अंतर्गत अब तक 8 लाख 42 हजार नल कनेक्शन दिए जा चुके हैं जबकि जल जीवन मिशन से पहले केवल 7 लाख 63 हजार कनेक्शन दिए गए हैं। प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में नि:शुल्क पानी की आपूर्ति करने का भी निर्णय लिया है।

प्रदेश सरकार ने अपने कार्यकाल में 3 हजार 527 किलोमीटर मोटर योग्य सड़कों, 268 किलोमीटर जीप योग्य सड़कों तथा 268 पुलों का निर्माण किया है। केंद्र सरकार ने प्रदेश के लिए 13 विश्वस्तरीय रोपवे और कई राष्ट्रीय उच्च मार्ग स्वीकृत किए हैं।

प्रदेश में पर्यटन क्षेत्र को प्रोत्साहन देने के लिए राज्य सरकार ने नई राहें-नई मंजिलें योजना के तहत 200 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इसके अंतर्गत कांगड़ा जिले के बीड़-बिलिंग को पैरा-ग्लाइडिंग, शिमला जिले की चांशल घाटी को स्कीईंग, मंडी जिले के जंजैहली को ईको-पर्यटन गंतव्यों के रूप में विकसित किया जा रहा है। मंडी जिले के लारजी व तत्तापानी तथा कांगड़ा जिले के पौंग जलाशय को जल क्रीड़ा गंतव्यों के रूप में विकसित किया जा रहा है।

प्रदेश ने शिक्षा के क्षेत्र में बहुत प्रगति की है। प्रदेश सरकार आर्थिक रूप से कमजोर मेधावी विद्यार्थियों को 12वीं तथा स्नातक के उपरांत मेडिकल, इंजीनियरिंग और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रशिक्षण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। 10वीं कक्षा में सर्वाधिक अंक प्राप्त कर 11वीं कक्षा में पढ़ रहे 100 मेधावी विद्यार्थियों को व्यावसायिक या तकनीकी कोर्स में प्रशिक्षण के लिए एक लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जा रही है।

इस वर्ष प्रदेश में 5 बड़े गौ अभयारण्यों और गौ-सदनों की स्थापना की जाएगी तथा हिमाचली पहाड़ी गाय के संरक्षण के लिए एक उत्कृष्ट फार्म स्थापित किया जाएगा। प्रदेश सरकार ने निजी गौ-सदनों में आश्रित गौवंश के लिए दिए जाने वाले अनुदान को 500 रुपये से बढ़ाकर 700 रुपये प्रतिमाह करने का भी निर्णय लिया है।

प्रदेश सरकार का इस वर्ष का बजट सभी वर्गों के लिए हितकारी साबित होगा। अकुशल दिहाड़ीदारों की न्यूनतम दिहाड़ी में 50 रुपये की बढ़ोतरी के साथ न्यूनतम दिहाड़ी 350 रुपये प्रतिदिन की गई है। वर्तमान सरकार के कार्यकाल में उनकी दिहाड़ी में 140 रुपये की वृद्धि की गई है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में 1700 रुपये, आशा वर्कर के मानदेय में 1825 रुपये और एस.एम.सी. अध्यापकों के मानदेय में 1000 रुपये की वृद्धि की गई है। इसी तरह विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मियों के मानदेय में भी 900 रुपये प्रतिमाह की वृद्धि की गई है।

प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों और पैंशनरों को को संशोधित वेतनमान स्वीकृत कर वेतन वृद्धि का लाभ दिया गया है। वर्ष 2018 से 2022 तक राज्य सरकार के कर्मचारियों और पेंशनधरकों को 7 हजार 801 करोड़ रुपये के वित्तीय लाभ दिए जा चुके हैं।

प्रदेश में हुए अभूतपूर्व विकास में केंद्र सरकार का भरपूर सहयोग हमें लगातार मिल रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हिमाचल प्रदेश के प्रति विशेष लगाव रहा है और उनके नेतृत्व में प्रदेश को हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाएं मिली हैं। सामरिक दृष्टि ये महत्वपूर्ण अटल टनल रोहतांग का निर्माण और रेलवे विस्तार केंद्र सरकार की सहायता से ही संभव हो पाया है। देश और प्रदेश की डबल इंजन सरकारों के आपसी तालमेल के कारण ही प्रदेश में अनेक विकास योजनाओं पर कार्य चल रहा है।

प्रदेश सरकार ने हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर और स्वावलम्बी बनाने के लिए गंभीर प्रयास किए हैं। लोगों के पूर्ण सहयोग और सरकार के प्रयासों से हिमाचल प्रदेश आने वाले समय में विकास के शिखर पर पहुंचे

विजयराज सुराना

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