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”मैंने जनता के दिल से जुडऩे का काम किया”

”मैंने जनता के दिल से जुडऩे का काम किया”

”हिमाचल प्रदेश पर्यटन के लिए जाना जाता है। यहां का वातावरण, यहां की अच्छी कानून व्यवस्था और प्राकृतिक सौंदर्य के बावजूद भी हिमाचल में पर्यटकों का सुविधाजनक आना मुश्किल था। किन्तु हमारी सरकार ने इस बात पर ध्यान दिया की टूरिस्ट डेस्टिनेशन में पहुंचना,  सरल एवं  सुविधाजनक हो। इसके लिए हमने यह प्रयास किया की हिमाचल प्रदेश में रोड की कंडीशन अच्छी हो और फोर-लेन रोड्स  के साथ हमारे टूरिज्म डेस्टिनेशन हों ताकि पर्यटकों का आना-जाना सरल एवं सुगम हो। इसके लिए मनाली में युद्ध स्तर पर कार्य चल रहा है और कनेक्टिविटी बहुत बेहतर होने वाली है। उसी तरह शिमला में भी कनेक्टिविटी की दृष्टि से कई प्रोजेक्ट चल  रहे हैं और वहां भी 1 साल के अंदर फोर-लेन रोड्स होंगे। इसके अतिरिक्तधर्मशाला के लिए भी फोर-लेन रोड्स की स्वीकृति  करवाई है और  इसका भी काम शुरू हो गया है,” ऐसा कहना है हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का उदय इंडिया के संपादक दीपक कुमार रथ से हुई बातचीत में। प्रस्तुत है उस बातचीत के मुख्य अंश:

आपकी सरकार के करीब सवा चार साल का समय बीत गया है और यह चुनावी साल  है और वोटर चुनाव से पहले आपकी प्रोग्रेस रिपोर्ट्स का आकलन करेंगे। आप उस स्थिति में साधारण जनमानस के सामने कैसे प्रूव  करेंगे की आपने इन सवा चार सालों में वह सब किया जो पिछली सरकार ने नहीं किया?

देखिए, हमारी सरकार का जो सवा चार साल का कार्यकाल पूरा हुआ है और स्वाभाविक रूप से हम अब चुनावी वर्ष में भी हैं, ऐसे में हम अगर इस बात को कहें कि हमने नया क्या किया, हटकर क्या किया, तब मैं यह कहना चाहूंगा की हमारी सरकार ने एक नहीं बल्कि अनेक इनीशिएटिव लिए, जिन पर पूर्ववर्ती सरकारों की नजर ही नहीं गयी। स्वाभाविक रूप से अपनी सरकार चलाने का तौर-तरीका सबका अलग-अलग होता है। लेकिन लोगों की समस्याओं का समाधान हम जल्दी से कैसे कर सके और लोगों की समस्याओं के समाधान के साथ-साथ, प्रदेश के विकास के लिए हमें क्या करना चाहिए, इसके लिए हमने विभिन्न क्षेत्रों को चिन्हित किया और उन पर फोकस देते हुए काम किया। अगर इंसेंटिव की बात कहें तो प्रमुख रूप से जिक्र करूंगा कि हिमाचल प्रदेश पर्यटन के लिए जाना जाता है। यहां का वातावरण, यहां की अच्छी कानून व्यवस्था और प्राकृतिक सौंदर्य के बावजूद भी, हिमाचल में पर्यटकों का सुविधाजनक आना मुश्किल था। किन्तु हमारी सरकार ने इस बात पर ध्यान दिया की टूरिस्ट डेस्टिनेशन तक पहुंचना  सरल एवं  सुविधाजनक हो। इसके लिए हमने यह प्रयास किया की हिमाचल प्रदेश में रोड की कंडीशन अच्छी हो और फोर-लेन रोड्स  के साथ हमारे टूरिज्म डेस्टिनेशन अच्छे से जुड़े हो ताकि टूरिस्टों का आना जाना, सरल एवं सुगम हो। इसके लिए मनाली में युद्ध स्तर पर कार्य चल रहा है और कनेक्टिविटी बहुत बेहतर होने वाली है।

उसी तरह शिमला में भी कनेक्टिविटी की दृष्टि से कई प्रोजेक्ट चल  रहे हैं और वहां भी 1 साल के अंदर फोर-लेन रोड्स होंगे। इसके अतिरिक्त,  धर्मशाला के लिए भी फोर-लेन रोड्स की स्वीकृति  करवाई है और  इसका भी काम शुरू हो गया है। यहां यह कहना आवश्यक है की, हिमाचल एक ऐसा प्रदेश है जहां एयर कनेक्टिविटी अभी तक कम है इसलिए रोड कनेक्टिविटी पर ज्यादा फोकस करना हमारी मजबूरी भी कह सकते हैं और जरुरत भी। इसलिए हमने रोड कनेक्टिविटी पर ज्यादा फोकस किया है और हम आगे बढ़ रहे हैं। दूसरा, हमने आने वाले समय में एयर कनेक्टिविटी इंप्रूव हो, इसके लिए हमने हिमाचल प्रदेश में कांगड़ा एयरपोर्ट का विस्तार और मंडी में  नए एयरपोर्ट बनाने के प्रोजेक्ट शुरू कर दिए है। इसके अलावा, हिमाचल में जो हमारी एस्टाब्लिशड टूरिस्ट डेस्टिनेशन है जैसे शिमला, मनाली, धर्मशाला, डलहौजी और कसौली, इन टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर सैचुरेशन लेवल आ गया है। बढ़ते टूरिस्टों की संख्या की  वजह से हमारे लिए पॉसिबल नहीं हो पाएगा की रोड इंफ्रास्टक्चर को और बढ़ाया जा सके, और इसके साथ-साथ होटलों की संख्या को बढ़ाया जा सके क्योंकि हिमाचल भौगोलिक दृष्टि से एक पहाड़ी राज्य है।  तो उस दृष्टि से और टूरिस्ट डेस्टिनेशन डेवलप करनी  है और इसलिए हमने हिमाचल प्रदेश में  ‘नई राहें नहीं मंजिलें’ के नाम से एक स्कीम शुरू की है और इसमें हम 5-6 जगह नई टूरिस्ट डेस्टिनेशन डेवलप करने की दिशा में काम कर रहें है । इसके अलावा, हमने लोगों की समस्याओं का तुरंत समाधान हो, गांव में बैठे उसका समाधान हो और शहर में उसको सरकारी दफ्तर में बार-बार  ना जाना पड़े, इसके लिए जनमंच कार्यक्रम की शुरुआत की। जनमंच, देशभर में एक अलग तरह का कार्यक्रम है, जिसमे हर महीने के पहले रविवार को हमारा मंत्रिमंडल अलग-अलग जगह जाता है।

12 जिलों में 12 मंत्री अलग-अलग जिलों में जाते हैं। एरिया तय किए हुए होते हैं, वहां के लोगों को पहले सूचित कर दिया जाता है। उनकी समस्याएं क्या है, उनकी शिकायतें क्या है, इन सब चीजों को लेकर वह एक जगह इक_े होते हैं। कुछ ऑनलाइन भेज देते हैं। और वहां पर सारे जिले के अधिकारी मंत्री की उपस्थिति में लोगों की समस्याएं सुनते हैं और उनका समाधान करने की कोशिश करते है। एक बात दिलचस्प यह है कि मौके पर अगर समस्या का समाधान नहीं होता है तो उसके बाद हम वहां के डिप्टी कमिश्नर को जानकारी कंपाइल करने के लिए बोलते हैं। फिर हमने समस्याओं के निवारण के लिए टाइम बाउंड किया और साथ ही लेवल तय किया हुआ है।  उसमें लेवल 1 पर अगर नहीं होता है तो फिर लेवल 2 पर जाएगा, फिर लेवल 3 पर जाएगा। तो इस तरीके से जन  समस्याओं के निवारण के लिए बेहतर तरीके से जनमंच का संचालन हो रहा है ।

आपने टूरिज्म कनेक्टिविटी पर बात की। आप बताएं कि आपके कार्यकाल में टूरिज्म कनेक्टिविटी  के लिए रोड कनेक्टिविटी में कितना किलोमीटर एनएच और कितना किलोमीटर स्टेट हाईवे बनाया?

हिमाचल प्रदेश में अगर रोड कनेक्टिविटी किलोमीटर के हिसाब से देखें, तो हाईएस्ट नंबर ऑफ रोड कनेक्टिविटी हुई, तो वह हमारे कार्यकाल में हुई है। हमारे 4 साल के कार्यकाल में, आज तक के हिमाचल की सभी सरकारों ने जो अपने 5 साल के कार्यकाल में रोड कनेक्टिविटी बनाई है, उसमें हम बहुत आगे हैं। इसके अतिरिक्त हमारे मेजर फोर लेन स्टेट हाईवे पर कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। हिमाचल में सबसे कठिन काम होता है रोड को चौड़ा करना। उस दृष्टि से हमारा ध्येय रोड कनेक्टिविटी को चौड़ा करना है ना कि किलोमीटर बढ़ाना। सड़कों की लेंथ तो उतनी ही होती है जितनी नेशनल हाईवे की, पर हमने रोड को चौड़ा किया, जिससे की आने-जाने में लोगों को समस्या, जाम आदि जूझना न पड़े। मुझे इस बात की खुशी है कि अब वर्तमान में जो टोटल रोड लेंथ है, उसमें 3900 किलोमीटर हिमाचल प्रदेश में है। उस में भी बहुत बड़ा  कंट्रीब्यूशन, 51 प्रतिशत से ज्यादा, पीएमजीएसवाई (प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना) का है। अटल जी ने इस योजना की शुरुआत की थी और पीएमजीएसवाई योजना की शुरुआत होने के पश्चात ग्रामीण क्षेत्रों के अंदर रोड नेटवर्क इस कदर बढ़ा की सड़क कनेक्टिविटी तो बढ़ी  ही इसके अतिरिक्त रोड क्वालिटी में भी काफी सुधार हुआ।

टूरिज्म सेक्टर को विकसित करने के लिए क्या आपने प्राइवेट सेक्टर का भी साथ लिया?

हिमाचल प्रदेश में आज तक के इतिहास में पहली बार  प्राइवेट सेक्टर में इन्वेस्टमेंट लाने के लिए, हमने 2019 में ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट का आयोजन किया, जिसमें 9600 करोड़ के एमओयू साइन हुए थे और उस ग्लोबल इन्वेस्टमेंट मीट के एक महीने बाद ही 500 करोड रुपए की ग्राउंड ब्रेकिंग ग्रोथ देखी। हमारी सरकार के कार्यकाल के चार वर्ष पूरा होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  हिमाचल आए थे और हिमाचल में 28000 करोड़ रूपये के नए प्रोजेक्टों की शुरुआत की। इसमें बहुत सारे प्रोजेक्ट हमारे टूरिज्म सेक्टर से जुड़े हैं। टूरिज्म सेक्टर में प्राइवेट सेक्टर का इन्वेस्टमेंट आए, इसको सुनिश्चित करने के लिए हमने काफी प्रयत्न किए हैं और हम उसमें काफी हद तक सफल भी हुए हैं। अभी भी हमारा फोकस है, प्राइवेट सेक्टर में इन्वेस्टमेंट को आकर्षित करना, और उसमें हम  बेहतर तरीके से काम कर रहे हैं।  यह कहा जा सकता है की इस समय हमारा मेजर फोकस टूरिज्म सेक्टर के साथ-साथ हॉर्टिकल्चर सेक्टर और  एग्रीकल्चर सेक्टर पर है।

 

हाइड्रो पावर जेनरेशन के क्षेत्र में हिमाचल में क्या प्रगति हुई?

हाइड्रो पावर के क्षेत्र में हमने बेहतर काम किया है। हमें इस बात की खुशी है कि जहां पूरे देशभर में हाइड्रो पावर सेक्टर में 45000 मेगावाट की जनरेशन होती है उसमें से 1100 मेगावाट का कंट्रीब्यूशन हिमाचल प्रदेश का है। हिमाचल प्रदेश छोटा प्रदेश है इसके बावजूद, इसका बड़ा कंट्रीब्यूशन है। अभी हाइड्रो पावर क्षेत्र में गवर्नमेंट पीएसयू, चाहे वह एनटीपीसी है या वह एनएचपीसी है,  बहुत बड़े प्रोजेक्ट लेकर काम  कर रहे हैं और आने वाले दो वर्षों में हाइड्रो पावर क्षेत्र में हमारा पावर जनरेशन  का टारगेट 5000 को पार कर जाएगा।

हिमाचल के विकास को बढ़ावा देने वाले मेजर इन्वेस्टर कौन है?

अगर बड़े इन्वेस्टमेंट की बात करें तो सबसे बड़ा इन्वेस्टमेंट फार्मा क्षेत्र का है। फार्मा का सबसे बड़ा हब हिमाचल के बद्दी में है और उसमें अटल जी का बहुत बड़ा कंट्रीब्यूशन रहा है। अटल जी जब प्रधानमंत्री थे, तब उन्होंने हिमाचल को एक पैकेज दिया था और उस पैकेज के कारण बहुत सारी फार्मा इंडस्ट्री हिमाचल के बद्दी में आई और आज भी बहुत बेहतर तरीके से काम कर रही हैं । हिमाचल प्रदेश के दूसरे इंडस्ट्रियल एरिया क्षेत्रों में पहले बहुत ज्यादा काम नहीं हुआ था, किन्तु  अटल जी का एक बहुत बड़ा योगदान था पैकेज के रूप में,  जिसके माध्यम से इन्वेस्टर्स  हिमाचल प्रदेश में आए।

 

क्या हिमाचल प्रदेश के सभी इन्वेस्टर बाहर से आए हैं या हमारे देश के भी कुछ इन्वेस्टर है?

सभी इन्वेस्टर बाहर से आ रहे हैं। हाइड्रो के क्षेत्र में भी, और बात अगर फार्मा की करें, तो बड़े प्रोजेक्ट हैं और उनमें भी सभी इन्वेस्टर बाहर के हैं।

 

इन्वेस्टर को लुभाने के लिए आपने क्या-क्या कदम उठाए?

पहले जब हम बिजनेस के क्षेत्र में 16वें स्थान पर थे, वहीं आज हम सातवें स्थान पर हैं। हमने इन्वेस्टर को लुभाने के लिए  कई बेहतर काम किया है यानी कि  इन्वेस्टर  को पहले  जिस कार्य में काफी पेचीदगी होती थी वह कार्य हमने सिंगल विंडो में कन्वर्ट कर दिया है। दूसरी बात है कि हिमाचल प्रदेश पावर  सरप्लस राज्य हैं। ऐसे में हिमाचल प्रदेश में जो प्रोजेक्ट आते हैं, उन्हें सुविधाजनक तरीके से निरंतर रिलायबल पावर सप्लाई उपलब्ध रहती। तीसरी बात, लॉ एंड ऑर्डर हिमाचल प्रदेश में बहुत बेहतरीन है। चौथी बात, हमारे यहां की जलवायु। यह सभी चीजें है जो कंट्रीब्यूट करती है हिमाचल प्रदेश में  इन्वेस्टर लाने  के लिए।

 

हिमाचल प्रदेश में इंडस्ट्री को डेवलप करने और प्राइमरी एजुकेशन सेक्टर, प्राइमरी हेल्थ सेक्टर को डेवलप करने के लिए भविष्य में आप की क्या योजनाएं है?

हिमाचल प्रदेश में हमने बहुत सारी चीजों को विकसित करने के लिए बहुत सारे इनीशिएटिव लिए हैं।   हिमाचल प्रदेश में एजुकेशन सेक्टर की हम बात करें तो एक्सपेंशन बहुत ज्यादा हो गया है। एक्सपेंशन जो प्लांड  नहीं था– स्कूल खोल दो, कॉलेज खोल दो, बच्चे कितने होंगे, उनके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर क्या होना चाहिए इन सब चीजों के लिए बहुत प्लानिंग नहीं हुई थी  लेकिन हमने तय किया की  बच्चों के मेरिट के हिसाब से कहां कौन सा इंस्टिट्यूट हो,  उसपर फोकस करना चाहिए।  किसको इंफ्रास्ट्रक्चर देना है, किसको स्टाफिंग पर विशेष ध्यान करना चाहिए, इन सारी चीजों को लेकर हमने प्लानिंग के साथ काम किया है। पहले क्या होता था कि स्कूल खोल दिए, कॉलेज खोल दिए लेकिन स्टाफिंग की कमी के कारण वे स्कूल और कॉलेज खाली रहते थे। हमने नई इंस्टिट्यूट खोलने के बजाय उसके इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए काम किया जिसके कारण एजुकेशन की दृष्टि से देखा जाए तो हिमाचल बेहतर राज्यों में से एक है।

 

स्वास्थ्य की बात करें तो  हिमाचल में केद्र सरकार की आयुष्मान योजना को कितने लोगों ने अपनाया है और इसके साथ-साथ राज्य सरकार हेल्थ सेक्टर में क्या इंश्योरेंस दे रही है, कोविड की समस्याओं को देखते हुए?

हेल्थ सेक्टर की अगर बात करें तो पिछले दो वर्षों में इस पर बहुत ज्यादा फोकस दिया गया कोविड के कारण भी और वैसे भी। आयुष्मान भारत के अंतर्गत देशभर में प्रधानमंत्री जी ने बहुत बेहतर शुरुआत की है, जो गरीब लोग है उनके इलाज के लिए 5 लाख का हेल्थ कवर दिया गया। हिमाचल की आबादी 72 लाख है और उसमें से 20 लाख लोग इसके अंतर्गत कवर हुए है ।  जो 52 लाख बचे है उनको कवर देने की जरूरत थी।  हमने अपनी ओर से तय किया की जो बचे हुए लोग हैं उन को कवर करने के लिए राज्य सरकार के तहत अपनी स्कीम बनाएं।  हिमाचल के इतिहास में पहली बार एक नई योजना शुरू की –मुख्यमंत्री हिम केयर योजना–जिसके अंतर्गत हमने हिमाचल प्रदेश के सभी लोगों के लिए 5 लाख रुपए का  हेल्थ कवर इंश्योरेंस स्कीम है, जिसके अंतर्गत 1000 रुपये  जमा कराके रजिस्ट्रेशन करवाना है।  पहले यह योजना 1 वर्ष के लिए होती थी, अब इस योजना का समय बढ़ाकर 3 वर्ष कर दिया है और रजिस्ट्रेशन की फीस के लिए भी अलग-अलग कैटेगरी रखी है।  जो गरीब लोग है या मनरेगा में काम करते हैं वह 1 रुपया प्रतिदिन देकर, यानी कि 365  रुपये  जमा करवा कर रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं, और एक कैटेगरी ऐसी भी है जोकि नि:शुल्क  है। इसमें कोई पैसा नहीं लगता है। ऐसे में यह योजना हिमाचल प्रदेश में सबसे ज्यादा चली है। हिम केयर योजना के अंतर्गत हम 2,25,000 लोगों का इलाज मुफ्त में कर चुके हैं और लगभग 230 करोड़  रुपये  इस योजना पर खर्च हो चुके हैं। इस योजना को 3 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं और यह योजना बहुत बेहतर तरीके से चल रही है। अब हमारा ज्यादा फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर पर और स्टाफिंग पर है। हिमाचल में छ: मेडिकल कॉलेज है और इन मेडिकल कॉलेजों को हिमाचल की सरकार बहुत अच्छे तरीके से चला रही है।  अब एम्स हॉस्पिटल भी राज्य में आ गया है और उसमें ओपीडी शुरू हो चुकी है, जिसका जुलाई के महीने में प्रधानमंत्री जी आकर  उद्घाटन  करेंगे।

 

आम आदमी की सोशल सिक्योरिटी के लिए आपने क्या सोचा है?

सोशल सिक्योरिटी हिमाचल प्रदेश का बड़ा सेक्टर है जिसमें हमने काम किया है। इसके लिए मैं कहना चाहूंगा कि आज तक के इतिहास में सोशल सिक्योरिटी की बात करें तो हमसे  पहले जो सरकार थी वह सोशल सिक्योरिटी पर 400 करोड रुपए खर्च करती थी और लगभग 3 लाख लोग उसमें कवर थे। अभी हमने उसका दायरा बढ़ाया है और अब  1300 करोड रुपए खर्च कर रहे हैं। अब हिमाचल प्रदेश का सोशल सिक्योरिटी पेंशन का दायरा 7 लाख के करीब लोगों को कवर करता है। पिछली सरकार ने क्या किया की 80 वर्ष से ऊपर के लोगों को पेंशन देती थी। अब हिमाचल प्रदेश में आयु सीमा का दायरा हमने घटा दिया है। अब 60 वर्ष की आयु से ऊपर हर व्यक्ति को पेंशन मिलती है। इससे हटकर अगर आप नए इनिशिएटिव की बात करें तो हेल्थ के सेक्टर में एक और इनिशिएटिव लिया है। ऐसे व्यक्ति जो किसी बीमारी के कारण ग्रसित हो गए, ऐसी बीमारी लग गई जिससे व्यक्ति चल नहीं सकता, अपना काम खुद नहीं कर सकता, पढ़ा लिखा है, लेकिन जिंदा है, कुछ और नहीं कर सकता है।  ऐसे लोगों के लिए हमने एक नई योजना की शुरुआत की जिसका नाम रखा मुख्यमंत्री सहारा योजना। मुख्यमंत्री सहारा योजना के अंतर्गत ऐसे लोगों का रजिस्ट्रेशन किया, चाहे उनका  ब्रेन हेमरेज हुआ है, चाहे उनका पैरालिसिस हुआ, चाहे एक्सीडेंट के कारण उनकी  टांगे टूट गई हो, चल नहीं सकता, अपना काम खुद नहीं कर सकता, कैंसर का पेशेंट है, किडनी का पेशेंट है, सबके लिए 3000 रुपए प्रतिमाह मुख्यमंत्री सहारा योजना के अंतर्गत हम उनके खाते में डाल रहे हैं मदद करने के रूप में।  संभवत: इस प्रकार की योजना देशभर में पहली बार किसी सरकार ने सोचा है और लागू किया है।

 

किसानों को बढ़ावा देने के लिए आप हिमाचल में क्या-क्या योजनाएं लाए हैं?

किसानों के लिए हमने  लोगों से पूछा  कि फसल हम ज्यादा कैसे ले सकते हैं और नयी  टेक्नोलॉजी की मदद से हम बेहतर उसमें क्या कर सकते हैं? हमने हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक खेती पर जोर दिया है और उसके लिए राज्यभर में एक लाख से ज्यादा किसानों का रजिस्ट्रेशन हुआ है।  अब हम रसायन मुक्त यानी केमिकल फ्री प्रोडक्ट तैयार कर रहे हैं, यानि सेब, मटर, गोभी आदि प्रोड्यूस केमिकल फ्री होंगे।  यह एक नया इनीशिएटिव होगा।  अब हिमाचल की तर्ज पर अब पूरे देश में प्राकृतिक खेती का नया मॉडल एक्सेप्ट किया गया है और इसको पूरे देश भर में प्रधानमंत्री जी ने चलाने का बंदोबस्त किया है। दूसरी सबसे बड़ी बात जंगली जानवरों के कारण फसल को बहुत क्षति होती थी, अब भी हो रही है और इसके कारण कुछ एक इलाकों में तो किसानों ने फसल लगाना ही छोड़ दिया है। अब फसलों को जानवरों से बचने के लिए सोलर फेंसिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है और उसके लिए सरकार 80 प्रतिशत तक सब्सिडी दे रही है।  हालांकि इसमें बजट बहुत ज्यादा लग रहा है पर इससे किसानों को बहुत बड़ा लाभ हुआ है।  जिन किसानों ने खेती करना छोड़ दिया था, सोलर फेंसिंग योजना की मदद से वह वापस आकर खेती करने लग गए हैं।  हिमाचल प्रदेश की 80 प्रतिशत से ज्यादा आबादी एग्रीकल्चर पर निर्भर करती है।  लैंड होल्डिंग्स यहां पर कम है लेकिन हमारी सरकार ने नए इनिशिएटिव के साथ, बेहतर रिसर्च एवं स्टडी के साथ नयी-नयी तकनीकों को जमीनी स्तर तक पहुंचाया है ताकि प्रोडक्टिविटी बेहतर हो।

 

हिमाचल फाउंडेशन के दिन अपनी नई स्कीमें लागू की पर विरोधी पार्टी ने आपके ऊपर  आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री जी जो स्कीम लागू कर रहे हैं वह सब चुनावी रणनीति है और  इसमें कुछ होने वाला नहीं है।  दूसरी तरफ पंजाब जीतने के बाद आम आदमी पार्टी की नजर हिमाचल प्रदेश पर है। इन सब मुद्दों को आप किस तरह से देखते हैं?

मैं  यह कहना चाहूंगा  कि हमारी सरकार ने पहले दिन से काम शुरू किया है। ऐसा नहीं  है की हम चुनावी वर्ष में ही काम कर रहे हैं। हमारी बहुत सारी योजनाएं हमारे शासन के पहले साल में ही शुरू की गयी थी। ‘जनमंच’ हमारी पहले साल की योजना में से एक है, ‘नई राहें-नई मंजिलें’ टूरिज्म के सेक्टर के लिए हमारे पहले साल का इनिशिएटिव है। मुख्यमंत्री हेल्थ प्लान ’11-00′ पहले साल का इनिशिएटिव है। उसके बाद ग्रहणी सुविधा योजना शुरू की, जो की उज्ज्वला योजना प्रधानमंत्री जी ने पूरे देशभर में चलाई जिसके अंतर्गत हिमाचल प्रदेश को 1,36,000 गैस  चूल्हे उपलब्ध कराये गए, उससे अलग है। हर घर में गैस का चूल्हा हो और हमारी माताओं का स्वास्थ्य ठीक रहे। चूल्हे के धुएं से जो नुकसान होता है उससे बचाया जाए और चूल्हे में जलाने के लिए जो लकड़ी लाई जाती है वह जंगल से काट कर लाई जाती है और पर्यावरण को भी नुकसान होता है।  इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री जी ने उज्जवला योजना की शुरुआत की मगर उज्जवला योजना के अंतर्गत बहुत सारी चीजें कवर नहीं हो पायी।  हमने फिर अपनी योजना बनाई हिमाचल प्रदेश के लिए जिसका नाम रखा ‘मुख्यमंत्री ग्रहणी सुविधा योजना’ और इस ‘मुख्यमंत्री ग्रहणी सुविधा योजना’ के अंतर्गत हमने  ये तय किया कि कोई भी परिवार जो पंचायत में रजिस्टर्ड है उस परिवार को गैस का कनेक्शन देना ही है। एक भी परिवार आज की तारीख में हिमाचल प्रदेश में ऐसा नहीं जिसके पास गैस का चूल्हा नहीं है। आज से दो वर्ष पहले हमने इस कार्य को पूर्ण कर दिया था। गृह मंत्री अमित शाह और नड्डा जी हमारी सरकार के दो वर्ष पूर्ण होने के कार्यक्रम में शिमला आए थे और उस कार्यक्रम में हमने गैस चूल्हा सैचुरेशन की घोषणा की थी। हमने 3,25,000 गैस के चूल्हे परिवारों को उपलब्ध कराये थे।

 

प्रधानमंत्री की स्वच्छ भारत योजना, हर घर नल जल व्यवस्था योजना हिमाचल में कहां तक पहुंची?

जल जीवन के क्षेत्र में हिमाचल पूरे देश में नंबर एक पर है। जल जीवन के मिशन के अंतर्गत हमने हर घर को नल, शुद्ध जल अभियान को चलाया। इसे इस तरह से चलाया की जो भी इनिसिएशन मिलते थे उन सारे आइडियाज को अपनी योजना में समाहित करने के कारण ही हिमाचल देशभर में पहले स्थान पर है । प्रधानमंत्री जी ने भी इसका जिक्र किया की हिमाचल प्रदेश में बहुत बेहतरीन तरीके से काम हुआ है।  स्वच्छता के मामले में हिमाचल प्रदेश पहले से ही बेहतर है। पॉलिथीन बैन तो हमने यहां 2009 में ही लगा दिया था। अगर अब मार्केट में जाएंगे और पॉलिथीन की थैली मांगेगे तो मिलेगी नहीं। इसके अलावा, हिमाचल, सिक्किम के बाद दूसरे स्थान पर है ओपन डिफेकेशन फ्री (खुले में शौच मुक्त) स्टेट होने के मामले में।

 

आप अपनी सरकार के कार्य का कैसे आकलन करेंगे?

हमारी सरकार आने के बाद हमने पहले ही दिन से कहा कि हम बदले की भावना से काम नहीं करेंगे। हिमाचल को अगर देवभूमि कहा जाता है तो उसकी संस्कृति के अनुसार हम राज्य को आगे बढ़ाएंगे। और उसी तरह हमने हिमाचल प्रदेश की संस्कृति के मुताबिक हिमाचल में वर्किंग वातावरण का निर्माण करके राज्य में डेवलपमेंट का मॉडल खड़ा करने का प्रयत्न किया और इसमें  हम सफल भी हुए। आज ग्रामीण क्षेत्रों में लोग हमें सहजता और सरलता से  स्वीकार करते हैं। हमारा भी यही प्रयत्न रहता है कि हम सभी चीजों को और बेहतर करें, और सुधार करें।

 

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत  प्रकाश नड्डा  के साथ मिलकर आने वाले चुनाव को लेकर आपने क्या रणनीति बनाई है?

यह जेपी नड्डा जी का प्रदेश है। स्वाभाविक रूप से चार राज्यों में भाजपा की सरकार थी और फिर उन राज्यों में भाजपा की सरकार बनी। पार्टी के अध्यक्ष होने के नाते यह सम्मान उनको हासिल हुआ। पूरे हिमाचल प्रदेश की ओर से यहां आने पर उनका अभिनंदन किया गया। उनके चार दिन के प्रवास के दौरान मंत्रियों, विधायकों और पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक करके आने वाले समय का रोडमैप तैयार किया गया। अब हम उस रोडमैप पर चलेंगे और हिमाचल प्रदेश में निश्चित रूप से भाजपा की सरकार बनाएंगे।

 

 

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