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देव-संस्कृति के पुरोधा

देव-संस्कृति  के पुरोधा

 

 

 

 

दीपक कुमार रथ
(editor@udayindia.in)

इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि हिमाचल प्रदेश ने पिछले चार वर्षों में विकास के मोर्चे पर बड़ी प्रगति की है। स्वाभाविक रूप से, यह प्रगति राज्य के लोगों की कड़ी मेहनत के बिना हासिल नहीं की जा सकती है, लेकिन यह भी उतना ही सच है कि सही नेतृत्व के बिना यह नहीं हो सकता। इस पृष्ठभूमि में, यह ठीक ही कहा जा सकता है कि यह हिमाचल का सौभाग्य है कि उसे जयराम ठाकुर के रूप में एक सच्चा मुख्यमंत्री मिला है। जयराम ठाकुर सरकार की कार्यशैली, लोक सेवा की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए, सरल और सौम्य स्वभाव के साथ हिमाचल प्रदेश के लोगों के दिल में उतर गई है। आज कृषि, फार्मा और पर्यटन तीनों क्षेत्रों में हिमाचल विकास के पथ पर उल्लेखनीय कदम उठा रहा है। जयराम ठाकुर सुशासन की संतुलित रणनीति और बदलती खट्टी-मीठी परिस्थितियों में सभी को समायोजित कर सही शो चला रहे हैं। जब उन्होंने मुख्यमंत्री पद की बागडोर संभाली थी तो राजनीतिक पंडितों में चर्चा थी कि वे वरिष्ठ नौकरशाहों और वरिष्ठ नेताओं के रिमोट कंट्रोल में रहेंगे। लेकिन किसी भी स्थिति में, उनकी राजनीतिक दृष्टि सुशासन के लिए प्रशासन की अच्छी पकड़ को परिलक्षित करती है। जयराम ठाकुर न केवल आम आदमी के बीच लोकप्रिय हैं, बल्कि उनके नेतृत्व की गुणवत्ता की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी प्रमुख जेपी नड्डा द्वारा कई बार प्रशंसा की गई है। कोविड काल में सीएम ने खुद स्कूली बच्चों से बात की और उन्हें हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। यहां तक कि जयराम ने व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित किया कि हिमाचल में शत-प्रतिशत टीकाकरण, हर घर में गैस कनेक्शन, हर गांव में पीने के पानी की आपूर्ति हो। देवभूमि को पहली बार ऐसा लोकप्रिय नेता मिला है जो सत्ता में वापसी के लिए पूरी तरह तैयार है।

हिमाचल के लोग ”देवभूमि की संस्कृति” के बारे में बहुत चिंतित हैं। इसलिए, जब जयराम ठाकुर ने हिमाचल में सत्ता संभाली, तो लोगों को इस बात की चिंता थी कि वह देवभूमि की संस्कृति को बचा सके और संरक्षित कर सके। और अपने चार साल से अधिक के कार्यकाल में जयराम ठाकुर राज्य के अंदर और बाहर देवभूमि की संस्कृति को सफलतापूर्वक संरक्षित और सुरक्षित रखने में सफल रहे हैं। वास्तव में वह राज्य को और नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं। उनकी सोच कि की वजह से हिमाचल ने न केवल पर्यटन के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है बल्कि फार्मा क्षेत्र का वैश्विक केंद्र भी बन गया है। इतना ही नहीं, हिमाचल के निकट भविष्य में हवाई संपर्क में सुधार के लिए कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तार और आधुनिकीकरण और मंडी में एक नए हवाई अड्डे के निर्माण जैसी परियोजनाओं को भी शुरू किया गया है। इसके अलावा, सरकार ने पनबिजली के क्षेत्र में अच्छा काम किया है। देशभर में पनबिजली क्षेत्र में 45,000 मेगावाट उत्पादन में से हिमाचल प्रदेश 1100 मेगावाट का योगदान देता है। वास्तव में जयराम ठाकुर की योजना राज्य को पनबिजली क्षेत्र में एक प्रमुख राज्य के रूप में स्थापित करने की है, क्योंकि सरकार का लक्ष्य आने वाले दो वर्षों में 50,000 मेगावाट को पार करना है। किन्तु यहां यह कहना आवश्यक है कि गुजरात में इस साल के अंत तक चुनाव होने हैं। जयराम ठाकुर की असली चुनौती इस चुनाव में पार्टी की जीत हासिल करना होगी, तभी उनके नेतृत्व की परीक्षा होगी। अब देखना होगा कि वह अपने सुशासन, अपनी योजनाओं और अपनी नीतियों के दम पर कितनी बड़ी जीत हासिल कर पाते हैं।

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